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2 सैनिकों का बदला लेने के लिए 300 मुस्लिमों के साथ नेतन्याहू ने की ये खौ!नाक हरकत,मचा हड़कंप। !

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इजराइल में 27 अक्टूबर को प्रधानमंत्री चुनाव होने जा रहे हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान के साथ शुरू हुए युद्धों के बाद यह पहला इजराइली राष्ट्रीय चुनाव है। लेकिन वोटिंग से कुछ घंटों पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन याहू ने 300 फिलिस्तीनियों के घरों पर बुलडोजर चलवा दिया। नेतन याहू ने ऐसा क्यों किया? उसकी वजह आपके होश उड़ा देगी।

प्रधानमंत्री बेंजामिन ने नैतन याहू ने वेस्ट बैंक के हेब्रोन इलाके में बड़ा बुलडोजर एक्शन लिया है। आपको बता दें कि यह फिलिस्तीनियों की बस्ती है। नेतन याहू ने इस मुस्लिम बस्ती में फिलिस्तीनियों के 300 घरों को बुलडोजर से डहा दिया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक करीब 1500 लोगों को इस बस्ती से अपना घर छोड़ना पड़ गया है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि यह सब कुछ दो इजरायली सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए किया गया है। सोचिए कुछ घंटों बाद वोटिंग होनी है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि नेतन याहू जीत ही जाएंगे। लेकिन इसके बावजूद नेतन याहू ने अपने दो सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए एक फिलिस्तीनी मोहल्ले को तहसनहस कर दिया। दरअसल वेस्ट बैंक के हेब्रोन में एक इजराइली सैन्य चेक पोस्ट पर फिलिस्तीनी हमलावरों ने दो इजराइली सैनिकों को मार दिया। इजराइली सैनिकों पर यह हमला बेवजह कर दिया गया। इस घटना के बाद नेतन याहू ने हेब्रोन के उस इलाके को तबाह करने की धमकी दे दी जहां से यह दो फिलिस्तीनी हमलावर आए थे। इस मोहल्ले पर एक्शन लेने से पहले पूरे शहर में लॉकडाउन लगा दिया गया। करीब ढाई लाख की आबादी वाले इस इलाके में जगह-जगह पर सैन्य चौकियां बनाकर आवाजाही रोक दी गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली अधिकारियों ने हेब्रोन इलाके में रहने वाले लोगों से हमलावरों की डिटेल्स मांगी थी। इन लोगों से पूछा गया था कि हमलावर हमला करने के बाद कहां छिपे हैं? लेकिन इस मोहल्ले के लोगों ने कोई जानकारी नहीं दी। इन लोगों ने फिलिस्तीनी हमलावरों को छुपाने की कोशिश की। जिसके बाद नेतन याू ने कहा कि अब सब पर एक्शन होगा। चुनावों की तैयारी छोड़ बेंजामिन नेतन याहू इस घटना स्थल पर पहुंच गए ताकि बुलडोजर एक्शन सही से हो पाए। इस इलाके की 300 अवैध इमारतों को डहा दिया गया। सोचिए अगर यह लोग हमलावरों का साथ नहीं देते तो शायद इसी तरह से शांति से रहते। मगर अब इन्हें हमलावरों को बचाने की कीमत चुकानी पड़ गई। आपने देखा होगा कि कश्मीर में भी कई लोग आतंकियों का साथ देते हैं। कश्मीर में आतंकियों के घरों पर तो बुलडोजर एक्शन हुआ है। लेकिन उनके मददगारों पर इस तरह का कोई बड़ा बुलडोजर एक्शन अभी तक शायद नहीं हुआ। कई बार ऐसी खबरें आई हैं कि कश्मीर में बैठे ओवर ग्राउंड वर्कर्स भारतीय सेना की एक-एक मूवमेंट की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाते हैं। भारतीय सेना पर जब पाकिस्तानी आतंकी हमला करते हैं तो उसमें गद्दारों की भी मिलीभगत होती है।

आपको आज भी कश्मीर में ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो आतंकियों को सारी मदद पहुंचाते हैं। खुफिया जानकारी से लेकर खाना पानी, बर्तन, कपड़े सब कुछ। देश से इससे बड़ी गद्दारी क्या हो सकती है? जो लोग देश से गद्दारी करते हैं या देश के खिलाफ काम करते हैं। क्या उन लोगों पर इजराइल जैसा एक्शन लेना चाहिए?

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