एक पिक्चर जो महज 2 करोड़ में बनी पर कुछ ही दिनों में 60 करोड़ से ज्यादा कमा गई। एक पिक्चर जो ऐसे व्यक्ति पर बनी जिन्हें बजरंगबली [संगीत] का रूप कहा गया। इस पिक्चर की सफलता के पीछे यूं तो कई लोग हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा है एक 21 साल की लड़की की जिसने इस पिक्चर को बनाने में बहुत अहम भूमिका निभाई है। इस पिक्चर का नाम है हनुमान अंश और इस लड़की का नाम है अनुप्रिया नागर जो इस पिक्चर की प्रोड्यूसर हैं। तो चलिए आपको बताते हैं अनुप्रिया कौन है? कितनी पढ़ी लिखी हैं और नीम करोरी बाबा के जीवन पर बनी यह पिक्चर इतनी [संगीत] खास क्यों है?
नमस्कार, मैं उत्कर्ष प्रताप सिंह और आप देख रहे हैं टीवी 9 भारतवर्ष। अनुप्रिया मुंबई में पैदा हुई बाद में पढ़ाई के लिए इंग्लैंड [संगीत] चली गई। यूनिवर्सिटी ऑफ़ बैथ में इकोनॉमिक्स पढ़ रही थी। सिर्फ पढ़ाई ही नहीं वो एक आर्टिस्ट भी हैं। 12 साल की उम्र से ही अपनी पेंटिंग्स एग्बिट करने लगी थी। यूनिवर्सिटी में आर्ट, डांस और बिजनेस सोसाइटी में लीडरशिप की पोस्ट भी संभाली। नॉर्मल लड़कियों की तरह फिल्म इंडस्ट्री में आने का कोई पुराना सपना नहीं था। लेकिन आईडिया अचानक आया। यूनिवर्सिटी में इन्वेस्टमेंट और बैंकिंग का एक मॉड्यूल पढ़ते हुए स्टीव जॉब्स के बारे में रिसर्च कर रही थी। उसी दौरान पता चला कि स्टीव जॉब्स मीम करोड़ी बाबा जी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे और भारत उनके आश्रम भी आए थे।
बस अनुप्रिया का दिल इस कहानी में अटक गया। उन्होंने सोचा क्यों ना इन महान संत की कहानी को सिनेमा के जरिए युवाओं और दुनिया तक पहुंचाया जाए। सिर्फ [संगीत] जॉब्स वाले कनेक्शन को दोहराने की बजाय उन्होंने बाबा के पूरे जीवन को समझने की कोशिश करी। एक साल तक टीम के साथ रिसर्च करी। जगह-जगह घूमी। बाबा से जुड़े लोगों से मिली चित्रकूट, वृंदावन सब जगह। अब आपको जरा यह बताते हैं कि यह मूवी बनी कैसे? फिल्म बनाई गई स्वयंभू मीडिया नेटवर्क से बैनर तले। अनुप्रिया के साथ रागिनी एस, नम्रता जी और डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी भी प्रोड्यूसर्स [संगीत] हैं। डायरेक्टर और राइटर भी विशाल चतुर्वेदी ही हैं। कहानी लक्ष्मण दास के बचपन से शुरू होती है और बताती है कैसे वो नीम करोली बाबा बने। यह कोई नॉर्मल बायोग्राफी नहीं है बल्कि एक स्पिरिचुअल [संगीत] स्टोरी है। सबसे मजेदार बात है लीड एक्टर की। शोभिनव सत्य को असली लीड एक्टर के बीमार पड़ने के बाद चांस मिला। वो फिल्म के सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर थे। डायरेक्टर ने उन्हें करीब 5 घंटे तक टेस्ट करा और फिर बाबा की भूमिका दे दी। फिल्म 7 अगस्त को रिलीज [संगीत] हुई। पहले दिन सिर्फ 10 लाख कमाए। पहले हफ्ते में सिर्फ 1 करोड़, दूसरे हफ्ते में सिर्फ 40 लाख।
लग रहा था कि फिल्म डूब जाएगी। फिर तीसरे हफ्ते में चमत्कार हुआ। फिल्म ने 10 करोड़ से ज्यादा कमा डाले। 17वें दिन में एक ही दिन में 2 करोड़ पार। चौथे हफ्ते में तो तूफान आ गया। एक दिन में 6 करोड़, फिर 9 करोड़ और फिर 12 करोड़। ऐसे-ऐसे आंकड़े आए और 27वें दिन तक भारत में नेट कलेक्शन 61 करोड़ और ग्लोबल कलेक्शन 72 करोड़ तक पहुंच गई। यानी छोटी सी फिल्म ने बड़े-बड़े बजट वाली फिल्मों को पीछे छोड़ दिया क्योंकि एक 21 साल की लड़की जो इकोनॉमिक्स पढ़ रही थी अचानक एक आध्यात्मिक फिल्म बनाकर बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर गई। ना कोई बड़ा नाम, ना बड़ा बजट, सिर्फ लगन, रिसर्च और सही कहानी। [संगीत] अनुप्रिया साबित कर रही हैं कि उम्र या बैकग्राउंड कोई मायने नहीं रखता। अगर दिल में कुछ करने की आग हो तो चमत्कार हो सकता है।