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नाना पाटेकर की मौ;त के बाद क्यों हुई शरीर की जांच? सच जानकर चौंक जाएंगे।

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नाना पाटेकर की मौत कार्डियक अरेस्ट बताया गया लेकिन फिर भी एमएलसी और इसके बाद हुआ पोस्टमार्टम। 75 साल के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके करोड़ों फैंस को शॉक में डाल दिया है। लेकिन उनकी मौत से जुड़ी एक ऐसी मेडिकल बात भी सामने आई है जिसने इस समय कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब शुरुआती जानकारी में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई तो फिर एमएलसी क्यों?

पोस्टमार्टम क्यों? और आखिर अस्पताल को पुलिस को सूचना देने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या मामला संदिग्ध है? क्या मौत की वजह को लेकर कोई सवाल है? आइए पूरी कहानी शुरू से समझते हैं। नमस्कार आप देख रहे हैं जी न्यूज़ का डिजिटल प्लेटफार्म और मैं हूं आपके साथ कनिष्का मिश्रा। रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर गोवा के डोनापोला स्थित अपने फ्लैट में थे। उनकी तबीयत अचानक से बिगड़ी। उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी की पूरी कोशिश की। करीब 45 मिनट तक सीपीआर और कार्डियक मसाज जैसी कोशिशें भी की गई। [संगीत] लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नाना पाटेकर को अस्पताल में ब्रॉड डेड घोषित किया गया। यानी कि अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई थी। और यहीं से इस मामले में आता है सबसे इंपॉर्टेंट शब्द एमएलसी। एमएलसी यानी कि मेडिकल लीगल केस। मेडिकल लीगल केस इसको घोषित किया गया। यानी कि अगर इसे आसान भाषा में हम समझे तो एमएलसी ऐसा मेडिकल मामला होता है जिसमें इलाज या फिर मौत के साथ-साथ कानूनी जांच की जरूरत भी हो सकती है। यानी डॉक्टर सिर्फ मरीज का इलाज करके मामला खत्म नहीं करते हैं। उन्हें यह भी देखना होता है कि कहीं इस मामले में पुलिस या फिर कानूनी जांच की जरूरत तो नहीं है। एमएलसी कई परिस्थितियों में बनाया भी जा सकता है। जैसे कि आपको बता दें सड़क दुर्घटना हो, अचानक या फिर संदिग्ध मौत हो, मारपीट या फिर हिंसा का मामला हो, गोलियां या फिर हथियार से लगी चोट हो, पोइजनिंग या फिर ड्रग ओवरडोज का मामला हो, सुसाइड या फिर सुसाइड अटेंप्ट का मामला हो और इसके अलावा बर्न इंजरीज और ऐसे सारे मामलों में जिनमें मौत की परिस्थितियां पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होती है।

लेकिन नाना पाटेकर के मामले में यह सबसे अहम बात यहां पर यह है कि उनकी मौत अस्पताल में इलाज के दौरान नहीं हुई थी। उन्हें ब्रॉड डेड लाया गया था। यानी कि जब वो अस्पताल पहुंचे तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। ऐसी स्थिति में डॉक्टर के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है। आखिर मौत की मेडिकल वजह को कानूनी रूप से कैसे इस्टैब्लिश किया जाए?

अगर किसी भी व्यक्ति की मौत अस्पताल के बाहर हो चुकी है तो डॉक्टर हर परिस्थिति में केवल शुरुआती अनुमान के आधार पर नॉर्मल डेथ सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को सूचना दी जाती है और मामला मेडिकल लीगल प्रोसीजर के तहत मान लिया जाता है। इसके बाद आती है सबसे इंपॉर्टेंट बात पोस्टमार्टम क्यों हुआ? तो आपको बता दें कि पोस्टमार्टम का मकसद सिर्फ यह देखना नहीं होता है कि मौत कैसे हुई है। इससे शरीर की जांच करके मौत की संभावित वजह और परिस्थितियों को मेडिकल और कानूनी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाता है। और यही वजह है कि नाना पाटेकर के मामले में भी एमएलसी के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया हुई है। अब आप खुद सोचिए कार्डियक अरेस्ट बताया गया।

एमएलसी दर्ज हुआ। पुलिस को इंफॉर्मेशन दी गई और फिर पोस्टमार्टम हुआ। इन सभी चीजों को देखकर किसी भी फैन के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक होता है कि क्या नाना पाटेकर की मौत संदिग्ध थी। लेकिन आपको हम बता दें यहीं से कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट भी शुरू होता है। एमएलसी का मतलब यह नहीं होता कि किसी भी व्यक्ति की मौत में हत्या या फिर साजिश साबित हो गई है और पोस्टमार्टम होना भी अपने आप में किसी भी अपराध का सबूत नहीं है। नाना पाटेकर के मामले में जो जानकारी शुरुआती आई है उसके मुताबिक उनकी मौत को कार्डियक अरेस्ट से जोड़ा जा रहा है। एमएलसी और पोस्टमार्टम इसलिए भी इंपॉर्टेंट है क्योंकि उनकी मृत्यु अस्पताल पहुंचने से पहले हुई है और उन्हें ब्रॉड डेड लाया गया है। ऐसी स्थिति में मेडिकल और कानूनी प्रक्रिया के तहत मौत की परिस्थितियों को ऑफिशियली डॉक्यूमेंट करना काफी जरूरी हो जाता है।

यानी फिलहाल एमएलसी को लेकर किसी साजिश या फिर निष्कर्ष का निकलना सही नहीं होगा। आखिरी और सबसे जरूरी बात यह है कि पोस्टमार्टम का मतलब शक साबित नहीं होना है बल्कि मौत की वजह को मेडिकल और कानूनी तौर पर स्पष्ट करवाना है। जिस अभिनेता ने अपने दमदार अभिनय से दशकों तक दर्शकों को बांध ही रखा। आज उनकी अचानक मौत ने पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री और उनके फैंस को स्मे में जरूर डाल दिया है। नाना पाटेकर का जाना सिर्फ अभिनेता का जाना नहीं है बल्कि एक ऐसी आवाज का खामोश हो जाना भी है जिसे पर्दे पर आते ही पहचान लिया जाता है। नाना पाटेकर को हमारी तरफ से भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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