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फ्लाईदुबई में मुस्लिम पायलट को कैसे मिली नौकरी?हुआ सबसे बड़ा खुलासा, मचा तह;ल;का

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आखिर कैसे एक ऐसा पायलट जिसे कट्टर पंत के जुर्म में ओमान में पहले ही बैन किया जा चुका था वो दुबई से तेल अभी जाने वाली फ्लाइट के कॉकपीट तक पहुंच गया। और आज हम बात करेंगे इस रिपोर्ट में उस रूह कपा देने वाली घटना की जिसने ग्लोबल एिएशन इंडस्ट्री और खुफिया एजेंसियों के मानो होश उड़ा दिए हैं। दुबई से तेल अभी जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट संख्या एफेड 1073 पर जो कुछ भी हुआ उसने दुनिया को 911 के हमलों की याद दिला दी। तो समझते हैं कि आखिर इस मामले में वॉल स्ट्रीट जनरल और इंटरनेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों की रिपोर्ट में क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दरअसल ये भयानक साजिश रची गई थी 29 साल के ओमानी को पायलट हमम अल हम्मामी की तरफ से।

द वॉल स्ट्रीट जनरल और तमाम खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हममामी ने यह खतरनाक प्लान बनाया था कि वह कैप्टन को रास्ते से हटाकर प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेगा और सीधे इसे इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट याकिसी ऊंची इमारत से टकराकर क्रैश कर देगा। फ्लाई दुबई में कैसे मिली इस ओमानी को पायलट को नौकरी? अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतना बड़ा सुरक्षा जोखिम होने के बावजूद हम्मामी को फ्लाई दुबई जैसी बड़ी एयरलाइन में नौकरी कैसे मिल गई? डीप रिसर्च और मीडिया रिपोर्ट से यह पता चला है कि हम्मामी इससे पहले ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन ओमान एयर में ट्रेनी को पायलट के तौर पर काम कर रहा था। लेकिन साल 2024 के दौरान ओमान की ऑथॉरिटी और एयरलाइन को उसकी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों, कट्टरपंथी इस्लामी वेबसाइटों को खंगालने और चरमपंथी झुकाव का पता चल गया।

सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन जांच में यह सामने आया कि उसने ओमान में अति रूढ़िवादी और कट्टरपंथी विचार [संगीत] अपना लिए थे। जिसके बाद ओमान एयर ने उसे तुरंत फ्लाइंग से बैन कर दिया था और उसकी उड़ान पर रोक भी लगा दी गई थी और इतना ही नहीं उसे डीरेडिकलाइजेशन प्रोग्राम में भेजा गया था और फ्लाइंग ड्यूटी से हटाकर एक डेस्क जॉब पर डाल दिया गया था। हम्मामी इससे पहले ओमान और मोरक्को की एयरलाइन में काम करने में नाकाम रहा था। ठीक इसके बाद इसी साल यानी फरवरी 2026 में उसने फ्लाई दुबई एयरलाइन में बतौर को पायलट जॉइ किया था। यानी वह इस एयरलाइन में केवल 8 महीने से भी कम समय यानी करीब 7 से 8 महीने से नौकरी कर रहा था। यहां सबसे बड़ा लूप होल यह सामने आया कि महामारी के बाद एिएशन सेक्टर में उड़ानों की संख्याबढ़ने पर फ्लाई दुबई ने बेहद तेजी से अपने स्टाफ और पायलटों की भर्ती की थी। तो वहीं आरोप है कि स्टेज रिक्रूटमेंट ड्राइव के चक्कर में एयरलाइन ने ठीक से बैकग्राउंड वेरिफिकेशन नहीं किया और ना ही ओमान की ऑथॉरिटीज या उसकी पिछली एयरलाइन से उसके पास रिकॉर्ड के बारे में कोई पुख्ता क्रॉस चेक किया। जिस ओमान में उसे कट्टरपंथ के चलते बैन किया गया था।

उसी देश के नागरिक को यूएई की एयरलाइन ने बिना उसकी पिछली फाइलों को खंगाले संवेदनशील भारत इजराइल या यूएई इजराइल रूट पर उड़ने की छूट दे दी। घटना वाले दिन जब फ्लाइट हवा में थी तो कोपायलट हमामी ने प्रे करने यानी कि नमाज पढ़ने का बहाना बनाया और अपनी सीट छोड़ी। इसके बाद कॉकपीट में रखे क्रैश एक्स यानी कि कुल्हाड़ी को निकालकर उसने भारतीय मूल के कैप्टन स्मिथ पर पीछे से ताबड़तोड़हमले कर दिए। कैप्टन बुरी तरीके से घायल हो गए। उनका सिर फट गया और ऐसा लगा मानो सब कुछ खत्म होने ही वाला हो। लेकिन इसके बावजूद कैप्टन ने अपनी जान की बाजी लगा दी। उन्होंने अपनी खून से सनी हालत में भी कॉकपिट का दरवाजा दो बार अनलॉक किया। जिससे पैसेंजर्स और अंदर मौजूद अन्य क्रू मेंबर्स को अंदर आने का मौका मिल गया। यात्रियों ने मिलकर उस हमलावर को दबोच लिया जिसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक शहर में सुरक्षित उतारा गया। वहीं माना जा रहा है कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति का पागलपन नहीं है बल्कि यह ग्लोबल एिएशन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस शेयरिंग और एयरलाइन रिक्रूटमेंट पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान छोड़ता है

भू-राजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि अगर यह हमला कामयाब हो जाता तो मध्य पूर्व में एक बहुत बड़ा युद्ध भड़क सकता था। कहीं ना कहीं यह इस बात का सबूत भी है कि कैसे खुफिया एजेंसियों के बीच डाटा शेयरिंग की कमी का फायदा उठाकर स्लीपर सेल या कट्टरपंथी सोच के लोग एयरलाइन के कॉकपीट तक पहुंच गए। लोग यह भी सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कमर्शियल विमानों के पायलटों की मानसिक स्थिति और सोशल मीडिया हिस्ट्री की जांच कागजों तक सीमित रह गई है? क्या एयरलाइंस को अपने पायलटों की भर्ती के नियमों को और ज्यादा सख्त करने की जरूरत आ पड़ी है?

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