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नीला ड्रम केस: मुस्कान की बेटियो को लेकर सौरभ के भाई ने खोला बड़ा राज़, मचा को;ह;राम

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आखिरकार सौरव हत्याकांड में कोर्ट ने फैसला दे दिया है और दोनों को आरोपियों को जो दोषी थे उनको मृत्युदंड मिला है। हमारे साथ सौरभ के भाई बबलू है उनका क्या कहना है इस पूरे मामले पर उनसे भी पूछेंगे। बबलू भाई कोर्ट का फैसला आ गया है और मृत्युदंड दिया है दोनों को। क्या कहना है इसमें? क्या कहे हमारे को जो है इंसाफ मिला है। हम इस फैसले से संतुष्ट है। पर पूरी तरह से संतुष्ट जभी होंगे जब इन्हें फांसी हो जाएगी। क्या चाहत थी जब आप आए थे आपकी हमें मैंने जब भी आपसे बात किया आपने कहा कि आपकी माता की और आपका कहना था कि इनको मृत्युदंड मिलना चाहिए जैसे उनका बेटा और आपका भाई गया है ऐसा ही होना चाहिए तो अब तो कोर्ट ने आपके हक में फैसला दिया है आपकी बात सुनी गई है तो संतुष्ट हैं या क्या कहना है हां हम पूरी तरह संतुष्ट है पर जब तक फांसी नहीं होती ना जब तक हमारे को पूरी पूरी तरह संतुष्ट नहीं मिलेगी नहीं मिलेगी अच्छा उसकी बच्चियों का क्या होगा और जो उनको आगे कारवाई इसमें होती है मृत्युदंड मिलता है तो जो बड़ी बेटी है उसका और छोटी बेटी है उसका क्या होगा बड़ी बेटी जो पीू है उसको तो हम लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं कि उसको हमारे को दे दो बिना कोई केस के बिना कोई बिना कोई कानूनी प्रक्रिया के और जो दूसरी है वो साहिल की है क्योंकि साहिल ने अपने जेल बंदियों से बोला था कि तुम चाचा बन गए हो जब जिस दिन मैं बाहर निकलूूंगा तुम्हारे को दावत दूंगा पूरी तरह से मतलब चौड़े खुले में बोल रहा था कि ये मेरी है तो ये दूसरी वाली जो है साहिल के घर वाले को लेनी चाहिए बताया जा रहा है कि जब फैसला सुनाया गया तो दोनों रोने लगे। हालांकि उससे पहले उन लोगों ने कुछ नहीं कहा था। क्यों जब मार रहे थे मेरे भाई को जब नहीं रोना आया उन्हें उनको जब जब भी तो रोना आना चाहिए ना। अब अपनी पे बीतरी है तो अब रोना आ रहा। क्या घर में सौरभ को आज भी याद किया जाता है। माताजी परेशान हो जाती है सौरभ को याद करके। हमारे घर में तो याद किया जाता है। वो भूल भूलने का तो है ही नहीं कुछ। अभी आए दिन उसी का चलता रहता है। हमारे को तो लगता है कि हमारे घर में कभी यहां बैठा है। कभी मम्मी से मम्मी से बोलती है कि मैं ऐसा खाना मांग रहा है। ऐसा लग दिखता है वो। अच्छा जब जजमेंट आया या फैसला आया क्या उससे पहले ये उम्मीद थी कि जज साहब यही फैसला सुनाएंगे? हां हमें उम्मीद थी। हम पूरी उम्मीद यही लेके बैठे हुए थे कि भाई इन दोनों को फांसी हो जाए। हम आपने बार-बार यही कहा कि फांसी हो जाए। लेकिन बीच में ये बात आ रही थी कि उसको शायद बच्चों की वजह से उसको कुछ ऐसा जज साहब कह दे कि भाई हां थोड़ा सा उसको सहूलत मिल जाए। हां वो जो दूसरी वाली थी वो तो इनकी जो प्लानिंग थी प्लानिंग के तहत ही कर रखा था इन्होंने कि बस हमारे को सजा में रियात मिल जाएगी। अच्छा आपका ये कहना है कि जो बच्ची प्रेग्नेंट हुई थी ये बच्ची पैदा हुई थी ये प्लानिंग के तहत हुई। हां ये नवंबर से ही प्लानिंग मना रहे थे। जब मैं इनको लाए थे थाने में। तो मैं वही पांच सात कदम की दूरी पे ही था। जेल सी थी सलाहें लगी हुई थी वहां। मैं वही पांच सात कदम की दूरी पर था जब यह बयान दे रहे थे अपने मैं बाहर ही खड़ा था सब सुन रहा था कि ऐसेसे हम नवंबर से प्लानिंग कर रहे हैं इस तरह से जो है पहले तो इनका विचार था कि इसको बैग में डाल के कहीं मनाली वली व कहीं डंप कर देंगे पर बैगवग फट गया यानी टूट गया क्या हुआ तो उन्होंने उस टाइम प्लान चेंज करा ।

फिर वो ड्रम वगैरह लाए काटा और ये भी बताया कि कैसे-कैसे मारा था कैसे दवाई डाली सब सब उस टाइम बताया था नहीं ये ये बात उन्होंने बताई कि बच्चा जो पैदा किया जा रहा है वो भी प्लानिंग के तहत ताकि सजा में कमी हमें बाहर खड़ा है सब बताया था कि हमने YouTube पे सर्च मारा था कि भाई अगर हम पकड़े गए तो हम किस तरह से हमारी सजा कम हो जाएगी। पहले नशा पत्ता हो गया ये हो गया दुनिया भर के उन्होंने ढोंग रचे थे। उसमें से कुछ बच्चे के लिए क्या कहा उन्होंने? बच्चे के लिए भी सर्च मारा होगा उन्होंने कि भाई अब जब पकड़े जाएंगे तो प्रेगनेंसी में आ जाएंगे तो फिर जो है छ साल तक हमें कुछ होने का ही नहीं।

अभी बड़ी बड़ा बड़ी बात कह रहे हैं आप आज ये जो बात कह रहे हैं ये पूरी प्लानिंग इस यहां तक की प्लानिंग भी हो सकती है। हां ये प्लानिंग ही थी पूरी जो पूरे मामले में मैंने वकील साहब से बात करी उनका कहना है कि इन्होंने मर्डर से पहले भी प्लानिंग की और मर्डर के बाद भी प्लानिंग की। मर्डर के बाद तो प्लानिंग वो थी ना कि इनका जो प्लान फेल हो गया जो बैग वाला फिर वो ड्रम वाला सीन आगे जो क्रिएट हुआ है वो ड्रम लेके आना सीमेंट लेके आना वो बाद की प्लानिंग थी। वो बाद की प्लानिंग थी। तो अब क्या कहते हैं मिठाइयां बाटी गई इसको फैसले को देख कर के वहां आज बहुत खुशी भी मनाई गई।

मतलब वहां पर एक हालांकि हत्याकांड हुआ था एक लेकिन खुशी मनाई गई आज इस फैसले पे हां खुशी तो है हमें पर पूरी तरह से खुशी जब मिलेगी जब ये फांसी के फंदे पर लटक जाएंगे जब बिल्कुल संतुष्ट होंगे हां तो बच्चों को नहीं अपनाएंगे बड़ी वाली बेटी को अपनाएंगे बेटी को अपनाएंगे बड़ी वाली और जो आती है जो हमारी है हम शर्त बिना शर्त बिना शर्त के हां बिना शर्त भाई कोई शर्त नहीं हुई कोई कोर्ट कचहरी का कोई और उनके घर वालों को कोई इंटरफेरेंस ना हो। पीओ को हमारे को बिना कुछ कहे दे दिया जाए और दूसरी वाली को जो है साहिल के घर वालों को दिया। ठीक है। आपका क्या नाम है? मेरा नाम संजय है। संजय जी आप क्या लगते हैं सौरभ भाई? बड़े भाई। क्या कहना है इस जजमेंट पे ये जो जजमेंट आया है इस क्या? भाई जजमेंट बहुत अच्छा हुआ है। हमें बहुत सुकून मिला है और सौरभ की आत्मा को शांति मिलेगी इससे। बाकी सौरभ की कमी तो यह चीज पूरी नहीं कर सकती। बस मेरा यही कहना है कि जो फैसला आया है उस पर अमल हो। इनको कहीं भी कोई रियायत ना मिले।

किसी भी कोर्ट में आगे जाकर के कहीं भी अपील करते हैं। कहीं भी इनको रियायत नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि ये बहुत ही जघन्य हत्याकांड था। और दूसरा मेरा यही कहना है कि सौरभ की हत्या के बाद से मुस्कान की परिवार वालों ने उसकी बड़ी बच्ची को एक तरीके से किडनैप भी कर रखा है। कहीं सामने नहीं आने दिया, कहीं मिलने नहीं दिया, कुछ नहीं होने दिया। ठीक है? उसके पीछे उनकी क्या इंटेंशन है? वह तो वही जानते हैं। हमारा तो कहना खाली इतना है कि वो अब उनमें थोड़ा सा भी लिहाज थोड़ी सी भी शर्म बची है। तो उस बच्ची को अब हमें सौंप दें। बिना शर्त के बिना किसी इंटरफेरेंस के और हम उस बच्ची को लेंगे। उसकी परवरिश करेंगे और इन लोगों का कोई भी साया नहीं पड़ने देंगे इन पे। क्योंकि वो जिस तरीके से अपनी बच्ची को हमारी बच्ची को पाल रहे हैं ना उस तरीके से तो अब ब्रिंगिंग उसी तरीके से होगी जैसे इन्होंने मुस्कान को पाला था। ठीक है?

और हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे के साथ में ऐसा हो। तो मैं ये कहना चाहता हूं समाज से मेरी रिक्वेस्ट है कि बिना किसी कोर्ट कचहरी के अब हमारे को वो बच्ची हमें दिला दी जाए। खुश हैं आप उससे? हां सुकून है हमारा। खुश हैं। मतलब कुछ पहला पहला पहला रिलीफ तो मिल गया। एक रिलीफ मिल गया। अब उसका बच्चा हमारे पास आ जाएगा तो दूसरा रिलीफ हो जाएगा क्योंकि उसी बच्चे की वजह से ही सौरभ की डेथ हुई है। उसी की ममता में वो आया था यहां पर। उसी का बर्थडे मनाया था।

उसी की वजह से वो उनके जाके रह रहा था। वरना वो बिल्कुल नहीं रुकता उनके पास में। तो मेरा वही है कि अब उनमें अगर इंसानियत है, उसकी फैमिली में शर्म है, लिहाज है तो उसके बच्चे को वापस कर दे बाई इज्जत। आपका क्या नाम? राजेंद्र कुमार कहना यह है जो फैसला है कोर्ट का वो उससे संतुष्ट है हम भी संतुष्ट है लेकिन क्योंकि विभत्स हत्याकांड था पूरे देश में इसने तबाही मचा दी थी और आज की डेट तक भी नीले ड्रम के नाम से पूरे भारत में चर्चित है तो कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है वो ठीक फैसला सुनाया है और ऐतिहासिक फैसला है और बाकी आगे भी ये जहां अपील करेंगे संतुष्टि हमें भी इनके परिवार वालों को भी तभी होगी जब इन्हें वास्तव में फांसी पे लटका दिया जाए।

तो ये सौरभ के परिवार वाले थे। ये बबलू है। उनके भाई हैं और आपका क्या नाम है? संजय ये भी भाई हैं बबलू सौरभ के। इनका कहना है कि जो फैसला आया है उससे ये संतुष्ट है। लेकिन इन्हें पूरा संतुष्ट जब मिलेगा जब इस फैसले पे अमल हो जाएगा। यानी के जो सजा मिली है वो पूरी हो जाएगी। इनका यह भी कहना है कि आगे और ये अपील करते हैं या रियायत की बात करते हैं तो यह एंड जहां तक यह केस लड़ा जाएगा वहां तक लड़ेंगे और फांसी दिलाकर रहेंगे।

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