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अमिताभ को लेकर मुमताज ने कह दी वो बात जो आज तक किसी के मुंह से नहीं निकली।

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संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक का सफर और अमिताभ बच्चन के बारे में कही गई उनकी दिलचस्प बात। अमिताभ को भला क्या जरूरत थी एक्टर बनने की? अमिताभ तो बहुत अमीर थे पहले से ही। उनका अपना बंगला था। वह बहुत पढ़े-लिखे थे। मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें फिल्मों में आने की क्या जरूरत थी। यह बात कही थी हिंदी सिनेमा की मशहूर और बेहद खूबसूरत अभिनेत्री मुमताज ने।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जो मुमताज अमिताभ बच्चन को संपन्न परिवार से आने वाला इंसान बता रही थी, उनका अपना बचपन संघर्षों से भरा हुआ था। 31 जुलाई 1947 को मुंबई में जन्मी मुमताज का पूरा नाम मुमताज अस्स्करी था। उनकी मां नाज़ और उनकी मौसी नीलो भर फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किया करती थी। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। हालात ऐसे थे कि मुमताज को चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

सिर्फ 7 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों में एक्स्ट्रा कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। एक रोल के लिए उन्हें करीब ₹500 मिलते थे। उसमें से कुछ हिस्सा काम दिलाने वाले व्यक्ति को देना पड़ता था और बाकी पैसे वे अपनी मां को दे देती थी। इतनी छोटी उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। शुरुआती दिनों में मुमताज को हीरोइन के रोल नहीं मिलते थे। उन्हें अक्सर स्टंट और एक्शन फिल्मों में काम करना पड़ता था।

उस दौर में उन्होंने मशहूर पहलवान और अभिनेता दारा सिंह के साथ कई फिल्में की। दिलचस्प बात यह थी कि उनकी यह फिल्में सफल भी होती थी, लेकिन फिर भी बड़े निर्माता उन्हें मुख्य अभिनेत्री के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे थे। फिर आया साल 1969 और फिल्म दो रास्ते। इस फिल्म ने मुमताज की किस्मत बदल दी। उनके अभिनय और चुलबुले अंदाज को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसके बाद मुमताज हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गई। इसके बाद उन्होंने खिलौना, तेरे मेरे सपने, अपना देश, लोफर, आपकी कसम और रोटी जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया।

खासतौर पर राजेश खन्ना के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय हुई। राजेश खन्ना और मुमताज ने साथ में कई सुपरहिट फिल्में दी। उस समय मुमताज सफलता के शिखर पर थी। इसी दौर में उन्होंने एक ऐसे अभिनेता के साथ काम किया जो उस समय संघर्ष कर रहा था लेकिन आगे चलकर सदी का महानायक बना।

ये अभिनेता थे अमिताभ बच्चन साल 1973 में रिलीज हुई बंधे हाथ में मुमताज और अमिताभ बच्चन पहली और आखिरी बार साथ नजर आए। उस समय मुमताज एक बड़ी स्टार थी जबकि अमिताभ अपने करियर को स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि बंधे हाथ के कुछ समय के बाद ही अमिताभ की फिल्म जंजीर रिलीज हुई और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रेडियो नशा को दिए एक इंटरव्यू में मुमताज ने अमिताभ बच्चन को याद करते हुए कहा था कि वे बेहद पढ़े लिखे सुसंस्कृत और क्लासी इंसान थे। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन देश के प्रसिद्ध कवि थे।

मुमताज ने कहा कि उन्हें अमिताभ के साथ काम करके बहुत अच्छा लगा था और वे चाहती थी कि उन्हें उनके साथ और भी फिल्में करने का मौका मिलता। जब मुमताज अपने करियर के शिखर पर थी तब उन्होंने साल 1974 में उद्योगपति मयूर माधवानी से शादी कर ली। शादी के बाद वह लंदन चली गई और धीरे-धीरे फिल्मों से दूर हो गई।

उनके दो बेटियां हुई और उन्होंने अपना अधिकांश समय परिवार को दिया। हालांकि जिंदगी उनके लिए हमेशा आसान नहीं रही। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। लेकिन मुमताज ने हिम्मत नहीं हारी और इस बीमारी को मात देकर एक नई मिसाल कायम की।

आज भी मुमताज को हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत, प्रतिभाशाली और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिना जाता है। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि गरीबी, संघर्ष और मुश्किल हालात किसी इंसान के सपनों को रोक नहीं सकते।

एक छोटी बच्ची जिसने 7 साल की उम्र में परिवार का सहारा बनने के लिए काम शुरू किया था वही आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी स्टार्स में से एक बनी और शायद यही वजह है कि जब मुमताज अमिताभ बच्चन के बारे में बात करती हैं तो उनके शब्दों में सम्मान, अपनापन और उस दौर की अनगिनत यादें साफ झलकती हैं।

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