बॉलीवुड की मशहूर निर्माता एकता कपूर ने एक पडकास्ट में बॉलीवुड हिंदू फोबिया से ग्रसित है। ऐसी बात कही है। जिसके बाद से बॉलीवुड के कई सारे सेलिब्रिटीज इस मुद्दे पर लेकर बात करने के लिए सामने आ रहे हैं और हमारे साथ बात करने के लिए मशहूर एक्टर मुकेश खन्ना जी हैं। सर बॉलीवुड हिंदूफोबिया से ग्रसित है। पहनावे को लेकर माथे पर तिलक अगर देखते हैं तो उसको लेकर अलग तरीके से रिएक्ट करते हैं। ऐसा एक पडकास्ट में एकता कपूर ने कहा है। कैसे देखते हैं सर इस कमेंट को?
अभी मैं उनकी बातों को क्या कहूं? वो बहुत बहुत ही एडवांस्ड थिंकिंग कि प्रोड्यूसर भी हैं और अपने आप को कंटेंट क्रिएटर भी बोलती हैं। अपने आप को क्रिएटर बोलती हैं। क्रिएट किया है। मैं मानता हूं उनके उनके उनके हिस्से में बहुत कुछ है। शास्त्री कभी बहू से शुरुआत लेकर महाभारत तक को भी हिला कर रख दिया था और और उनकी जिंदगी भी बहुत मैं मैंने उनको जाना भी है क्योंकि मेरे से दो तीन जगह टकराई थी वो पर ये सब ये ये सेंटेंस समझ नहीं आया कि हिंदू फोबिया से हमारी बॉलीवुड ग्रसित है। मैं तो चाहूंगा कि हमारी बॉलीवुड हिंदू धर्म से ग्रसित हो।
फोबिया क्या होता है? हम हिंदू हैं। गर्व एक ही शख्स थे जो बोला करते थे गर्व से कहो हम हिंदू हैं। वो बालासाब ठाकरे थे। आज हिंदू होकर हिंदू धर्म से डरने वाले और इनका क्या आर्गुममेंट है? मैंने थोड़ा सा आपसे पूछने के पहले जानने की कोशिश की और इनको लगा कि हमारे यहां पर लोग जो है वो आई थिंक इन्होंने कुछ टीका की बात की है। कुछ ड्रेस पहनती थी तो लोग बोलते थे कि मंदिर से आए हो। कोई बोलती थी कि अच्छा ये अब मैं पहली बात बताऊंगा कि सबसे बड़ी बात है कि दिमाग से ये फोबिया निकाल दीजिए हिंदू हिंदू हैं और आप भी हिंदू हैं। आप हिंदू धर्म का मजाक मत उड़ाइए। मैं इनको नहीं बोल रहा हूं। जिन्होंने आदि पुरुष बनाने की कोशिश की थी और जो अभी भी हिंदू धर्म से छेड़ छेड़छाड़ करके कैरेक्टरों को चेंज करके महाभारत में भी चेंज करने की कोशिश करते हैं। मैं उनसे उनके खिलाफ में बहुत बोल चुका हूं और बोलूंगा।
आप हिंदू होकर भी आप अपने धर्म के धार्मिक से खिलवाड़ करते हो जो किसी और धर्म में करके बताइए आप नहीं कर पाएंगे। ये हिंदू एक सॉफ्ट टारगेट है जिसको आप यूज़ करते हो तो वो पक्ष अलग है। पर यहां इनका ये कहना है कि अगर कोई उनको बोलता है कि आपने टीका लगाया है आप साहब मैं तो ये कहूंगा कि आप आप अगर सचमुच धार्मिक है तो वो टीका आपका आपका लोगों को मजाक का विषय नहीं लगेगा। आप देखो सिर्फ गेरुआ वस्त्र पहनकर कोई हिंदू या कोई साधु नहीं बन जाता। मुझे याद है एक बार मैं बहुत जगह पर फंस गया था। एक बहुत बड़े संत सम्मेलन में बैठा हुआ था। 25 संत मेरे पीछे बैठे थे। चक्रपाणी जी माइक पर थे और मैं पहुंच गया था बड़ौदा में किसी आसाराम बाबू के फंक्शन में बड़ी मुश्किल से मुझे बुला लिया था। मैं पहुंच गया था बोलने को। उन्होंने कमेंट किया कि इस समय इस हॉल में एक काले वस्त्रों में संत बैठे हुए हैं। और मैं इधर कोने में बैठा था। मैंने टर्न करके देखा तो कोई काले में नजर नहीं आया। फिर डिसाइड देखा तो मैं खुद काला सूट पहन के बैठा था। और फिर मैंने उनको देख के स्माइल किया और जब माइक मेरे को मिला तो मैंने कहा देखो मैं चक्रपाणी जी को बता दूं। सिर्फ सिर्फ जोगिया पहनने से कोई संत नहीं हो जाता। तालियां बजी। वो उठे।
उन्होंने खुद ताली बजाई और मेरे पास चल कर आए। ने अपना हार उतार कर मेरे को पहना दिया। सी व्हाट आई मेंट वास हियर दैट कि अगर कोई आपको कहता है कि आपने टीका लगाया है और आपने अगर इस तरह की ड्रेस पहनी है वो आदमी को पूछने का रीज़न ये होगा कि आप हिंदू हिंदू भले मानती है। मैं तो सुना कि अपने सारे के सारे डब्बों को लेकर जाती है सिद्धि विनायक में एव्री रिलीज एव्री रिलीज के पीछे लेकर जाती है। पर उससे आप धार्मिक नहीं बन जाते। टीका लगाने से आप धार्मिक नहीं बन जाते। आप गेस्त्र पहनकर घूमो और और आपके आपका जो चरित्र आपका जो जो चलन आप चाकू छुरी चलाते हो तो आप धार्मिक नहीं है। आप भजन गाते हो तो आप धार्मिक नहीं है। भजन गाकर आप बाद में जाकर सास भी कभी बहू आपस में झगड़ा कर रही है और वो सास सुबह आकर बैठ के 15 मिनट तक वो भजन गा कर आई है। पवित्र हो गई है। घर आके फिर बहू को मारती है या झगड़ा करती है तो फिर आप कहां से धार्मिक है? धार्मिक है कि आप अंदर से धार्मिक होने चाहिए और धार्मिक होने के बहुत सारे बहुत सारे क्रियाकर्म अगर आप अष्टांग योग में जाओ तो यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा धारण ध्यान ध्यान तक जाता है.
समाधि तक तो यम नियम में यह है कि आपको क्या करना नहीं चाहिए यम में और नियम में ये है कि क्या करना चाहिए आपको ये ये चीजें नहीं करनी चाहिए और आपको ये ये चीजें करनी चाहिए आप ये ये चीजें करते हो तो ही तो आप ध्यान में बैठ पाओगे अदरवाइज आप आप ध्यान लगाने बैठो और दिमाग में आए ₹25,000 उसको दिया था। ₹00 का लॉक का मेरा नुकसान हो रहा है। तो आप वो ध्यान में नहीं बैठे। तो अगर एकता जी को किसी ने कह दिया होगा तो उनको यह सोचना चाहिए कि वो आप ही को क्यों कह रहे हैं? किसी और जो सचमुच जो आते हैं कभी-कभी जो जो सचमुच जिन्होंने अपना लिया आध्यात्मिक जीवन वो टीका लगाते उसको तो नहीं पूछते। मंदिर से आए हो। उनका कि आपके आचरण मंदिर का नहीं है और आप मंदिर से होकर आए हो और मंदिर में माफ करना नहीं बोलना चाहिए। पर पर आपका वहां सब प्रोड्यूसरों का मंदिर में जाकर लेट जाना और बोलना हे भगवान मेरी फिल्म को हिट कर देना स्वार्थ है। आपकी फिल्म अच्छी होगी आपकी चलेगी पर भगवान को क्यों आप बोल रहे हो जो राम मंदिर में प्रू हो गया है कि एक बंदा ₹ लाख हर महीने चराता था मालूम पड़ा कि ऊपर तो पैसा गया ही नहीं सब बीच में ही खा गए। नेचुरली यार क्या भगवान को आप घूस देते हो। तिरुपति के मंदिर में भी जाकर जो जो हुंडियां लगी रहती हैं और वह बोलते हैं एक करोड़ डाल रहा हूं 10 करोड़ देना मेरा स्वार्थ है तो हो सकता है कि आप किसी ने आपको जब कहा होगा तो वो ये देख के बोला होगा कि आप आप रियल लाइफ में तो धार्मिक नहीं है पर आप ये टीका लगा कर आई हैं तो आपको अजीब लगा होगा कपड़े आप ऐसे पहन रही हैं लेकिन आपके आचरण टोटल मॉडर्न है।
आपकी थिंकिंग मॉडर्न है। आपकी मेकिंग मॉडर्न है। ऐसे-ऐसे कंटेंट बनाए मेरा मेरे कभी-कभी शर्म से आंखें झुक जाती हैं। शी इज अ गुड मेकर। सो कोई हिंदू फोबिया नहीं है साहब। यह स्टेटमेंट दे देना एक ऐसे प्रोग्राम में जो मशहूर है जिनका एंकर मशहूर है। बेचारा फंस गया था। अदरवाइज अच्छे-अच्छे पडकास्ट बनाए उन्होंने। धर्म के बारे में बनाए हैं। मैंने मैंने दो तीन देख डाले थे उस वक्त जब मेरा भी मैंने भी कटाक्ष मारा था कि शर्म आनी चाहिए। अगर आप आप लेटेंट टैलेंट या लेटेंट में बैठकर आप बात करते हो ऐसी गंदी माता-पिता के बारे में पूरा देश खड़ा हो गया था। वो फंस गया था। और यहां पर भी मैंने ध्यान एक जगह पे देखा और वो बोल रहे हैं कि एक घटना ने आपके करियर को हिला दिया।
साहब वो एक घटना बहुत जबरदस्त थी सर। आपने एक ऐसा स्टेटमेंट पास किया था जो नॉर्मल आदमी रिएक्ट नहीं करता पर पूरा हिंदुस्तान खड़ा हो गया था। मैं अकेला मेरे जैसा आदमी तो छोटी बात में भी खड़ा हो जाता है। राम को राम को मूछ लगा दी तो मैं खड़ा हो गया था। राम को पेड़ पर चढ़कर अभी वो मार रहा है तीर तो मैं खड़ा हो गया। राम कभी भी पेड़ पे चढ़ के तीर नहीं मारा करता था। मर्यादा पुरुषोत्तम थे। समुद्र को भी कहते थे हट जाइए। कभी वह शौशगर और सलमान खान की तरह खड़े हो के नहीं बोले कि हट जा रही तो तेरे को खत्म कर दूंगा। मैंने एक प्रोमो में देखा मैं रिएक्ट करता हूं। पर यहां पर मेरा रिएक्ट करने का रीज़न यह है कि कि कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि आप आपको कहीं ना कहीं ये नहीं बोलना चाहिए। हिंदू फोबिया आप हिंदू हैं। हमारा देश कोई हिंदूफिया में नहीं जी रहा है। ऑन द कंट्री हिंदू जाग रहे हैं।
हिंदुओं से मजाक उड़ाया गया। हिंदुओं से हिंदुओं के कैरेक्टरों को के ऊपर हमेशा देखो कल तो किसी और ने भी अच्छा लिख दिया था। दीवार और के जमाने में अह दो दो सो कॉल्ड जावेद अख्तर जो आजकल पूरा कम्युनिज्म को लेकर जा रहा है और एक शबाना आजमी है और एक प्रकाश राज है। तीन चार लोग मालूम पड़ता है कि आप कम्युनिज्म लाना चाहते हैं और हमारे धर्म के खिलाफ है। उस जमाने में आप फिल्म को किसी किसी पडकास्ट किसी ने अच्छी तरह से उसका विश्लेषण किया। सर वो 786 का बिल्ला ने उसको बचा दिया था और मंदिर नहीं जाता था वो अमिताभ बच्चन कैरेक्टर सर उस जमाने में एक नैरेटिव था कि पंडित जो टीका लगाता है साला दूरत निकलता है और जो मौलाना होते हैं वो बहुत अच्छे होते हैं। इट वाज़ नॉट द फ इट वाज़ नॉट द रियलिटी। इट वाज़ इट वाज़ डन बाय समबडी टू प्रमोट सम धर्म एंड डिमोट सम धर्म। तो सर आपके कहने का यह है कि जो हिंदूफोबिया जैसी चीज है वो फिल्म इंडस्ट्री में है नहीं।
आपने कभी इस चीज को आभास नहीं किया या कभी आपको इस तरीके की चीजें सुनने में आई कि लोग इस तरीके से रिएक्ट करते हैं कि मंदिर क्यों जाते हैं? टीका क्यों लगाते हैं? आउटफिट उस तरीके से क्यों पहनते हैं? इन सारी चीजों को लेकर कभी कोई चर्चा? अरे साहब कभी नहीं हमारे देश हमारे सारे प्रोड्यूसर डायरेक्टर एक्टर यहां तक कि बड़े-बड़े एक्टर चाहे वो सलमान खान भी हो गणपति का उत्सव मनाते हैं। कभी किसी ने ये नहीं कहा सलमान खान को। अरे तुम गणपति मनाते हो। नहीं कहा किसी ने। एक्सेप्ट किया कि वो करता है उसकी उसकी उसकी उसकी मदर आई थिंक हिंदू थी मानते हैं तो कहीं किसी का यह बात नहीं बोला गया है कि उसको बोला अभी मत लगा मैं बाद लगवाऊंगा तो सो तो आप कहते हैं कि हमारे देश में हमारे यहां पर हिंदू फोबिया है सर हिंदू फोबिया नहीं है
हमारे यहां पर डायरेक्टर अभी मत लगाओ मैं बताऊंगा प्रोड्यूसर डायरेक्टर जो बनाते हैं फिल्म वो कोई हिंदू के खिलाफ नहीं है हिंदू हैं मानते भी हैं मंदिर में भी जाते हैं। सुबह सुबह मंत्र भी पढ़ते होंगे, टीका भी लगाते होंगे, पूजा भी कराते हैं। चाहे वो नवरात्रि की हो, चाहे ये गलत सोच है हमारे हिंदुओं के अंदर कि हिंदू। हां, हमारे हिंदू प्रोड्यूसर थोड़े से स्वार्थी भले हो गए हैं कि कि टीआरपी के लिए या फिल्म की कमाई के लिए नेगेटिविटी डाल दी जो उनको छूट है हिंदू धर्म में। टू दैट एक्सटेंट वो लोग बिगड़ गए हैं। मैं बोलूंगा कि मैं तो कभी हैरान होता कि जिसने ऐसा बनाया है जिसने हनुमान से यह बुलवा दिया है कि तेरे बाप की लंका जली थी। मेरे मेरे मेरे बाप का वो वो होगा। आपने सुना होगा टपोरी हनुमान जी टपोरी डायलॉग जो ऐसे बैठ के बातें करते थे। साहब वो बोलता है मैं मॉडर्न लोगों के लिए बना रहा हूं। राइटर का मैं बोलना चाहता हूं। बाद में माफी मांगे उस आज के मॉडर्न के बच्चे लोग चाहते हैं कि आप आप राम और हनुमान और भरत को आज की स्टाइल से दिखाओ डिस्को करते हुए दिखाओ नहीं साहब अगर मानते हो तो उसको चेंज करो उनको मत बताओ और अगर आप बताते हो तो आप इसलिए नहीं बताते कि आप ही ये सोचते हो कि रामायण को पूरा चेंज कर आप अपने बाप दादा की की बता सकते हो कि पैंट शर्ट पहन के घूमते थे हैट पहन के घूमते थे नहीं बता सकते ना तो आप यहां पर हमारे पुराणों के कैरेक्टर को चेंज करने की हिम्मत क्यों कर रहे हैं.
आप किसी मुस्लिम धर्म का करके बताइए सिख का धर्म का कराइए तलवारें चलनी शुरू हो जाएगी अब उसका फायदा उठाकर हिंदू धर्म सॉफ्ट टारगेट है बोल दो मुकेश खन्ना जैसा पै प करेगा करोड़ों की पब्लिसिटी मिल जाएगी फिल्म चल जाएगी ये स्वार्थ है टू दैट एक्सटेंट हमारे प्रोड्यूसर्स मैं बोलूंगा दोषी हैं। बट कोई प्रोड्यूसर चाहे वो राइट फ्रॉम बड़े से बड़ा प्रोड्यूसर ले लो जो बड़े से बड़े एक्टर ले लो चाहे वो राजेश खन्ना हो अमिताभ बच्चन हो से लेकर आज तक के एक्टर या प्रोड्यूसर या डायरेक्टर बी आर चोपड़ा एव्री वीक उनके घर में उनके बंगले में हर संडे को हवन लगता था मैं भी विटनेस किया मैंने मैंने कहा आप हर बोला मैं करता हूं मुकेश 10:00 बजे उनका पूरा बंगले के ऊपर हवन होता था मेरे घर वाले जिसको आना है आता है.
जिसको नहीं आते उन्होंने किया तो क्या वो क्या दिखावा कर रहे थे नहीं साहब उनको पता है यज्ञ की महिमा हवा हवन की महिमा उसमें से निकलने वाले ओजर की महिमा सो अगर इनका यह कहना है कि हिंदू फोबिया है मैं इसके खिलाफ हूं कोई हिंदू फोबिया नहीं हमारे हमारे सभी लोग हिंदू हैं अगर आप कुछ कर रहे हैं तो उनको अगर कोई अजीब लगता है तो वो आपकी वजह से है नॉट बिकॉज़ ऑफ़ देम सर बात करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया वीडियो जर्नलिस्ट आशीष दयालकर के साथ अतुल सिंह टाइम्स ऑन भारत मुंबई भाई