नूतन और मोहनीश बहल के बीच का ये गहरा रिश्ता… सच सुन हैरान रह जाओगे आप!हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर को याद करें तो नूतन का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है। अपनी सादगी, संजीदगी और दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली नूतन ने भारतीय सिनेमा को ‘सुजाता’, ‘सीमा’, ‘बंदिनी’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी कालजयी फिल्में दीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 80 और 90 के दशक में विलेन और सपोर्टिंग किरदारों से पर्दे पर अपनी खास पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता मोहनीश बहल, नूतन के सगे बेटे हैं?जी हां, पर्दे पर कभी खौफनाक विलेन तो कभी संस्कारी बड़े भाई का किरदार निभाने वाले मोहनीश बहल, बॉलीवुड की सबसे महान अभिनेत्रियों में से एक नूतन के बेटे हैं।
लेकिन मां-बेटे के इस खूबसूरत रिश्ते के पीछे प्यार, संघर्ष और एक गहरे दर्द की अनसुनी कहानी भी छिपी है।फिल्मी विरासत और मां-बेटे का रिश्तानूतन ने 1959 में नेवल ऑफिसर रजनीश बहल से शादी की थी और 1961 में मोहनीश बहल का जन्म हुआ। फिल्मी बैकग्राउंड होने के बावजूद मोहनीश का बचपन किसी आम बच्चे की तरह ही बीता। नूतन अपनी निजी जिंदगी को चकाचौंध से दूर रखना पसंद करती थीं और उन्होंने मोहनीश को भी एक साधारण माहौल में पाला।मोहनीश अपनी मां को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मेंटोर और दोस्त मानते थे।
उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि नूतन ने उन पर कभी एक्टर बनने का दबाव नहीं डाला, बल्कि हमेशा अपनी पसंद की जिंदगी जीने की आजादी दी।जब बेटे के करियर के लिए नूतन ने ली राहत की सांसमोहनीश बहल ने 1983 में फिल्म ‘बेकरार’ से डेब्यू किया था, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें लगातार नाकामी का सामना करना पड़ा। उनका करियर पटरी पर नहीं आ पा रहा था। एक मां होने के नाते नूतन अपने बेटे के संघर्ष को देखकर बेहद चिंतित रहती थीं।फिर आया साल 1989, जब सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ रिलीज हुई। इस फिल्म में मोहनीश ने ‘जीवन’ नाम के विलेन का किरदार निभाया था। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और मोहनीश बहल रातोंरात स्टार बन गए। कहा जाता है कि जब नूतन ने अपने बेटे को पर्दे पर सफलता हासिल करते देखा, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे। उन्होंने राहत की सांस ली थी कि उनका बेटा
आखिरकार इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहा।कैंसर का दर्द और मां का साथ छूट जानाजब मोहनीश का करियर सही दिशा में आगे बढ़ रहा था, तभी बहल परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 1990 में नूतन को ब्रेस्ट कैंसर होने का पता चला। यह वो दौर था जब पूरा परिवार एक मुश्किल दौर से गुजर रहा था।मोहनीश ने अपनी मां की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। नूतन भी बीमारी से बेखौफ रहीं और उन्होंने बहुत हिम्मत से इसका मुकाबला किया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 21 फरवरी 1991 को महज 54 साल की उम्र में नूतन ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
मां का अचानक यूं चले जाना मोहनीश बहल के लिए एक ऐसा सदमा था, जिसने उन्हें अंदर तक तोड़कर रख दिया।मां की परछाई और विरासतनूतन के जाने के बाद भी मोहनीश ने हार नहीं मानी। उन्होंने ‘हम आपके हैं कौन..!’, ‘हम साथ-साथ हैं’ और ‘वास्तव’ जैसी सुपर-डुपर हिट फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया। मोहनीश बहल की सादगी और उनके काम के प्रति समर्पण में आज भी लोग नूतन की परछाई देखते हैं।नूतन और मोहनीश बहल का यह रिश्ता सिर्फ मां-बेटे का नहीं, बल्कि हिम्मत, सम्मान और अटूट प्यार की एक मिसाल है। मां के जाने के इतने सालों बाद भी मोहनीश जब भी पर्दे पर आते हैं, तो नूतन की वो विरासत और संस्कार जीवंत हो उठते हैं।