यह खबर शुरू करने से पहले हम आपको चार तारीखें दिखाना चाहते हैं। इन्हें ध्यान से देख लीजिए। उसके बाद असली मुद्दे पर आएंगे। पिछली बार 20 जुलाई को दिल्ली में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ था क्योंकि 22 जुलाई को एफसीआरए संशोधन कानून पर चर्चा होनी थी और इस बार 10 अक्टूबर को फिर से जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है क्योंकि 12 अक्टूबर को एफसीआरए पर अंतिम फैसला आ सकता है।
आप इस खतरनाक पैटर्न को समझिए। बहरहाल अब आते हैं असली खबर गद्दारी और जोरदार तमाचे पर। दरअसल अमेरिका से चलने वाला एक डिजिटल प्लेटफार्म भारत और पीएम मोदी के पीछे पड़ गया है। इस प्लेटफार्म ने कहा है कि साल के आखिर तक पीएम मोदी के हटने की संभावना 9% है। यानी जिस वक्त दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कराए जा रहे हैं। उसी वक्त अमेरिका से यह प्लेटफार्म पीएम मोदी पर भविष्यवाणियां कर रहा है। अब आप कहेंगे कि हम इस दो कौड़ी के प्लेटफार्म की बातें क्यों कर रहे हैं? दरअसल इसकी बात करना इसलिए जरूरी है
क्योंकि यह डॉन्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ा है। इस प्लेटफार्म में डोन्ड ट्रंप के लड़के डॉन्ड ट्रंप जूनियर का निवेश है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसे बैन करने की कोशिश की थी। लेकिन उससे पहले ही डॉन्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बन गए। भारत इस प्लेटफार्म को पहले ही बैन कर चुका है। इसी प्लेटफार्म ने कुछ दिन पहले फर्जी खबर चलाई थी कि भारत ने 13 करोड़ वोटर्स के नाम काट दिए हैं। यानी डोन्ड ट्रंप के परिवार से जुड़े इस प्लेटफार्म के तार दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से कहीं ना कहीं जुड़ रहे हैं। डॉन्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ा यह प्लेटफार्म कनाडा के अलगाववादियों का समर्थन कर रहा है। कनाडा के बंटवारे की बातें कर रहा है। इस प्लेटफार्म का समर्थन एललेन मस्क भी कर रहे हैं।
बहरहाल डॉन्ड ट्रंप से जुड़े लोग भारत और पीएम मोदी के खिलाफ षड्यंत्र जरूर कर रहे हैं मगर भारत से गद्दारी करने वाले डॉन्ड ट्रंप और अमेरिका को जबरदस्त झटका लगा है। पहला झटका यह है कि डॉनल्ड ट्रंप इस बार भी शांति का नोबेल पुरस्कार मांग रहे थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बार भी डॉन्ड ट्रंप को नॉमिनेट कर दिया था। लेकिन जिस महिला को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है, वह भारतीय मूल की निकली। इससे बड़ी बेइज्जती डोनल्ड ट्रंप के लिए क्या होगी? मजे की बात देखिए कि कुछ घंटों पहले ही अमेरिका की सरकार ने अमेरिका में
काम करने वाले भारतीयों को इनडेंचर्ड सर्वेंट यानी बंधुआ मजदूर कहा है। लेकिन सहयोग देखिए कि अमेरिका जिन शानदार लोगों को बंधुआ मजदूर बोल रहा है। उन्हीं में से एक भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी मानवाधिकार वकील नवी पिल्ले को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दे दिया गया है। इसी के साथ अमेरिका को एक और बड़ा झटका लगा है। खबर है कि भारत अब रूस और अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए यूरोप के लिए सबसे बड़ा डीजल सप्लायर बन गया है। यूरोप जाने वाले कुल डीजल शिपमेंट्स में अकेले भारत की हिस्सेदारी 60% हो गई है। अब यह बात अमेरिका को पसंद नहीं आ रही है।