बॉलीवुड में मिथुन चक्रवर्ती का आगे बढ़ना किसी चमत्कार से कम नहीं था. अपने करियर की शुरुआत में नेशनल अवॉर्ड जीतने के बावजूद, मिथुन को आउटसाइडर होने का खामियाजा भुगतना पड़ा था. कहा जाता है कि उस जमाने की बड़ी हीरोइनों ने उनके रंग और लुक्स की वजह से उनके साथ काम करने से मना कर दिया था, लेकिन 1979 की फिल्म ‘तराना’ ने सब कुछ बदल दिया. जब एक्ट्रेस रंजीता कौर ने मिथुन का हाथ थामा तो स्क्रीन पर ऐसा धमाका हुआ कि उसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई दी. आइए, आज हम आपको बताते हैं कि मिथुन को कैसे मिला सुपरस्टार का टैग?
बॉलीवुड में सफलता की कई कहानियां हैं, लेकिन एक आउटसाइडर के लिए सुपरस्टार बनने का रास्ता हमेशा मुश्किल रहा है. मिथुन दा, जिन्हें हम अब बॉलीवुड का ग्रैंडमास्टर कहते हैं, उनके करियर की शुरुआत इतनी मुश्किलों भरी थी कि इंडस्ट्री की सबसे मशहूर हीरोइनें भी उनके साथ एक फ्रेम शेयर करने से हिचकिचाती थीं. लेकिन, 1979 में एक चमत्कार हुआ जिसने न सिर्फ मिथुन की किस्मत बदली, बल्कि बॉलीवुड उन्हें एक नई पहचान दिलाई
यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि मिथुन चक्रवर्ती, जिन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘मृगल्या’ (1976) के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता था, उनको काम पाने के लिए स्ट्रगल करना पड़ा. उस समय बॉलीवुड में गोरी स्किन और चॉकलेटी लुक का बोलबाला था. मिथुन का सांवला रंग और फिजीक उस समय के तय स्टैंडर्ड के हिसाब से फिट नहीं बैठते थे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कई डायरेक्टर्स ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास उनके लिए कोई हीरोइन नहीं है, क्योंकि उस जमाने की टॉप एक्ट्रेस मिथुन के साथ रिस्क लेने से हिचकिचा रही थीं.

जब मिथुन चक्रवर्ती रिजेक्शन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब डायरेक्टर रविकांत नागाइच अपनी फिल्म ‘तराना’ की तैयारी कर रहे थे. वह एक ऐसे एक्टर की तलाश में थे जो स्पॉन्टेनियस हो और जिसमें एक अलग तरह की एनर्जी हो. मिथुन को कास्ट कर लिया गया, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती हीरोइन ढूंढना था.बता दें, उस समय रंजीता कौर इंडस्ट्री में एक उभरता हुआ और इज्जतदार नाम थीं. जब उन्हें मिथुन के साथ काम करने का ऑफर मिला तो उन्होंने उनके लुक या स्टारडम के बजाय उनके टैलेंट पर भरोसा किया. रंजीता की हां, मिथुन के करियर के लिए लाइफलाइन साबित हुई.

कहा जाता है कि ‘तराना’ की सक्सेस के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया, जो एक्ट्रेस पहले मिथुन का नाम सुनते ही फिल्में रिजेक्ट कर देती थीं, वे अब उनके साथ काम करने के लिए अपनी डेट्स एडजस्ट करने लगीं. मिथुन और रंजीता की जोड़ी इतनी लकी मानी जाती थी कि बाद में उन्होंने ‘सुरक्षा’, ‘हमसे बढ़कर कौन’ और ‘बाजी’ जैसी दर्जनों फिल्मों में साथ काम किया