मुबारक फिर कभी मत आना। मशहूर एक्ट्रेस के निधन पर सहेली ने ली सुकून की सांस। मौत से पहले नर्क बन गई थी सुपरस्टार की जिंदगी। में डूब गई थी रातें। आंसुओं से भरे रहते थे दिन।
38 साल में एक्ट्रेस ने ली अंतिम सांस। दुखी होने की जगह खुश दिखी बेस्ट फ्रेंड। बेशुमार शोहरत, सुपरहिट फिल्में, लाखों चाहने वाले और पर्दे पर ऐसी मासूमियत जिसे देखकर हर कोई एक्ट्रेस का दीवाना हो जाता। लेकिन असल जिंदगी इतनी दर्द भरी कि रातें में डूबी रहती और आंखें आंसुओं से भरी रहती। और जब हुई तो सबसे चहीती सहेली के शब्द थे, मुबारक हो, फिर कभी मत आना।
यहां हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा की खूबसूरत और मशहूर एक्ट्रेसेस में से एक मीना कुमारी की। ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी की जिंदगी बाहर से बेहद ग्लैमरस और शोहरत से भरी दिखती थी। लेकिन अंदर ही अंदर वह अकेलेपन तकलीफ और तनाव से गुजर रही थी। फिल्म डायरेक्टर कमाल अमरोही से शादी के बाद उनकी जिंदगी में प्यार कम और दर्द ज्यादा आ गया था। रिश्ते में दूरियां बढ़ी, झगड़े हुए और आखिरकार दोनों अलग हो गए।
कहते हैं उन्होंने मीना कुमारी की जिंदगी नर्क बना दी थी। काम, कपड़े, कहीं आने जाने हर चीज पर पाबंदियां लगाना शुरू कर दिया था। यहां तक कि कमाल अमरोही के सेक्रेटरी ने जब मीना को थप्पड़ मार दिया था तब भी डायरेक्टर ने कुछ नहीं कहा था। तालाब के बाद मीना कुमारी पूरी तरह से टूट गई थी। कहा जाता है उन्होंने अपने दर्द को भुलाने के लिए का सहारा लेना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई और इसी लत ने उनकी सेहत छीन ली। उन्हें लिवर जैसी गंभीर बीमारी हो गई थी और सिर्फ 38 साल की उम्र में 31 मार्च 1972 में मीना कुमारी ने दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।
लेकिन उनकी के बाद जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही वो था नरगिस दत्त का लिखा हुआ एक खत जिस पर लिखा था मुबारक फिर कभी मत आना। हर कोई यही सोचता रहा कि आखिर कोई अपनी दोस्त की मौत पर मुबारक कैसे कह सकता है? इस सवाल का जवाब नरगिस ने यह उन दिनों की बात है उर्दू मेमोरीज ऑफ सिनेमा लेजेंड्स किताब में दिया था। जिसमें नरगिस का एक खत दर्ज है जिसमें उन्होंने मीना के लिए लिखा था मीना मैं तुम्हें की बधाई दे रही हूं। इस दुनिया में कभी मत आना। नरगिस के मुताबिक मीना की जिंदगी दर्द से भरी हुई थी। दोनों एक समय पड़ोसी हुआ करते थे और नरगिस अक्सर मीना के कमरे से चीखने चिल्लाने की आवाजें सुना करती थी। एक रात उन्होंने मीना को गार्डन में बेहद कमजोर हालत में देखा। जब नरगिस ने उनसे पूछा आराम क्यों नहीं करती हो? तो मीना ने जवाब दिया था बाजी मेरी किस्मत में आराम नहीं है। मैं सिर्फ एक बार आराम करूंगी। कहते हैं उस रात के बाद नरगिस ने मीना की सूझी हुई आंखें भी देखी थी। उन्होंने कमाल अमरोही के सेक्रेटरी से पूछा था कि आखिर मीना को इतना दर्द क्यों दिया जा रहा है? तो जवाब मिला था जब सही वक्त आएगा मीना को आराम करने देंगे।
यही वजह थी कि नरगिस ने उनकी को मुक्ति माना क्योंकि वह जानती थी कि मीना अब उस दर्द, अकेलेपन और तकलीफ से हमेशा के लिए आजाद हो चुकी हैं।