महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी को लेकर छात्रों का अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। सड़कों पर उतरकर हज़ारों युवा इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं और इसी बीच इस आंदोलन में हो गई है दीपके की एंट्री। अब सीधे के छात्रों के समर्थन में अभिजीत दीपके ने कूदने का बड़ा ऐलान किया है।
छत्रपति संभाजी नगर में छात्रों से मुलाकात के बाद दीपके ने आर-पार की दिया है। सरकार को और प्रशासन को दिया है। दीपके ने साफ कहा है कि अगर के चेयरमैन और सचिव ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया तो यह पूरे महाराष्ट्र में फैल जाएगी और वह खुद एक बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे। छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों से मुलाकात के बाद दीपके ने बकायदा एक वीडियो संदेश जो है वह जारी किया। दीपके ने स्पष्ट शब्दों में कहा सीजेपी यानी कॉकरोस जनता पार्टी और मैं इस में अभ्यर्थियों के साथ हैं।
हम तब तक अभ्यर्थियों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे जब तक के शीर्ष अधिकारियों का इस्तीफा नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और इसके लिए आयोग के चेयरमैन और सचिव को अपने पदों से तुरंत हट जाना चाहिए।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग को लेकर इस समय पूरे राज्य में खासकर अह बड़े जो शहर हैं वहां पर बवाल मचा हुआ है। इस पूरे बवाल की मुख्य परीक्षा से । आरोप है कि परीक्षा का पेपर पहले ही लीक हो गया था। जिसके बाद गड़बड़ी का पता चलते ही ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया। जो छात्र सालों से तैयारी कर रहे थे और इंटरव्यू स्टेज तक पहुंच चुके थे, वह इस फैसले से बेहद गुस्से में हैं।
उनका कहना है कि सिस्टम की गलती की सजा ईमानदार छात्रों को क्यों मिल रही है? छात्रों का आरोप है कि आयोग की कई ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षाओं में लगातार धांधलियां सामने आ रही हैं। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा के डिस्क्रिप्टिव पेपर्स के मूल्यांकन में भी गंभीर गड़बड़ियों की बात सामने आई है। छात्रों को अब परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं रहा है।
एक बड़ा मुद्दा पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती को लेकर भी है। भर्ती का विज्ञापन बहुत देरी से निकाला गया। जिसकी वजह से हजारों छात्र परीक्षा की अधिकतम उम्र सीमा यानी एज लिमिट को पार कर गए। छात्र मांग कर रहे हैं कि सरकार उन्हें एज रिलैक्सेशन दे क्योंकि विज्ञापन में देरी सरकार की तरफ से हुई थी।
छात्रों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि इन सब गड़बड़ियों के लिए एमपीएससी का ढीला प्रशासन जिम्मेदार है। इसीलिए प्रदर्शनकारी एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और आयोग के सचिव के तुरंत इस्तीफे और उन्हें तुरंत पद से हटाए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। जिन एमपीएससी चेयरमैन के इस्तीफे की मांग हो रही है उनका नाम है विवेक भीमनवार।
अपनी सफाई में विवेक ने कहा कि परीक्षा के पेपर लीक होने की यह घटना जनवरी 2026 में हुई थी। जबकि उन्होंने खुद 18 फरवरी 2026 को एमपीएससी प्रमुख का प्रभार संभाला और 3 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण किया था। इसलिए इस घटना की टाइमलाइन को देखते हुए उन पर व्यक्तिगत रूप से आरोप लगाना पूरी तरह गलत है।
चेयरमैन ने बयान में यह भी कहा कि मैं इस बात से बेहद आहत हूं कि तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने रखने के बावजूद मेरी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए लगातार व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने अपने आलोचकों को खुली चुनौती दी कि अगर उनके पास चेयरमैन के खिलाफ गड़बड़ी का कोई ठोस सबूत है तो उसे सामने लाया जाए।