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रावण के किरदार के लिए अमरीश पुरी थे पहली पसंद! फिर अरविंद त्रिवेदी कैसे बने ‘लंकेश’?

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1987 में जब रामानंद सागर रामायण बना रहे थे, [संगीत] तो पूरा देश सोच रहा था कि लंकापति रावण का खूंखार रोल कौन निभाएगा। सेठ पर सबकी पहली पसंद थे बॉलीवुड के सबसे बड़े विल्लेन अमरीश पुरी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक ऐसा अभिनेता जो [संगीत] गुजरात से सिर्फ केवट का एक छोटा सा रोल मांगने आया था। वो अपनी चाल ढाल से भारत के इतिहास का सबसे [संगीत] बड़ा रावण बन गया।

आज जानिए रामानंद सागर के रावण यानी अरविंद त्रिवेदी के संघर्ष, शादी और रावण बनने [संगीत] की पूरी अनसुनी कहानी। 8 नवंबर 1938 को इंदौर में जन्मे अरविंद त्रिवेदी का बचपन उज्जैन में बीता। अभिनय का बुखार चढ़ा तो पढ़ाई के लिए मुंबई आ गए। उनके भाई उपेंद्र त्रिवेदी गुजराती सिनेमा के बड़े नाम थे। लेकिन अरविंद जी के लिए रास्ता आसान नहीं [संगीत] था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गुजराती थिएटर से की। सालों तक छोटे-मोटे रोल किए। नाटक मंडली [संगीत] के साथ गांव-गांव घूमकर संघर्ष किया।

लगभग 40 सालों के लंबे सफर में उन्होंने 300 से ज्यादा गुजराती और हिंदी फिल्मों में काम किया। जब रामायण की कास्टिंग शुरू [संगीत] हुई तो रामानंद सागर और उनकी पूरी टीम की पहली पसंद अमरीश पुरी थे। उनकी भारी आवाज और विलेन का आभा [संगीत] मंडल रावण के लिए परफेक्ट माना जा रहा था। लेकिन भारी फीस और डेट्स की वजह से बात नहीं बन पाई। लगभग 300 कलाकारों के ऑडिशन [संगीत] के बाद अरविंद त्रिवेदी गुजरात से मुंबई आए। वे तो रामानंद सागर से केवट नाव [संगीत] चलाने वाले का छोटा सा रोल मांगने आए थे।

उन्होंने केवट का ऑडिशन दिया और जब बिना कुछ कहे अपनी चौड़ी छाती और रोबीली चाल के साथ [संगीत] वापस लौटने लगे तो रामानंद सागर की नजर उनकी चाल पर पड़ गई। रामानंद सागर तुरंत चिल्लाए। मुझे मेरा लंकेश मिल गया। इस बंदे में रावण का अहंकार और राजसी [संगीत] ठाट साफ दिखता है। रावण बनना जितना गर्व का काम था, उतना ही शारीरिक और मानसिक रूप से कष्टदाई [संगीत] भी। शूटिंग गुजरात के उमरगांव में होती थी। अरविंद जी रोज मुंबई से लोकल और पैसेंजर ट्रेनों के [संगीत] धक्के खाकर सेट पर पहुंचते थे। घंटों खड़े रहकर सफर करना पड़ता था। वॉइस ओवर रोज शूटिंग से पहले [संगीत] 5 घंटे भारी मेकअप लगता था। 10 किलो से ज्यादा का भारी मुकुट और गहने पहनकर वे घंटों शूटिंग करते थे।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि पर्दे पर राम जी को ललकारने वाले अरविंद जी असल जिंदगी में भगवान राम और शिव के अनन्य भक्त थे। सीन खत्म होते ही वे रो पड़ते थे और भगवान राम [संगीत] से हाथ जोड़कर माफी मांगते थे। अगर बात उनके निजी जीवन की करें तो 4 जून 1966 को उनका विवाह नलिनी त्रिवेदी से हुआ। टीवी पर भले ही [संगीत] वे भयानक रावण थे, लेकिन घर में वे एक समर्पित पति और अपनी तीन बेटियों के प्यारे [संगीत] पिता थे। रामायण की सफलता के बाद 1991 में वे बीजेपी के टिकट पर गुजरात की [संगीत] साबरकांठा सीट से सांसद चुने गए। 6 अक्टूबर 2021 को 82 वर्ष [संगीत] की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। पर्दे पर रावण बनकर इतिहास रचने वाला यह महान कलाकार हमेशा अमर रहेगा। क्या आपको भी रामानंद सागर की रामायण में अरविंद त्रिवेदी जी की एक्टिंग सबसे बेहतरीन लगती थी? कमेंट में जय श्री राम [संगीत] या हर हर महादेव लिखकर इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि जरूर दें।

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