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कुत्ते का मुखौटा पहनकर कलेकटर के पास पहुंचा शख्स,वजह जानकर रूह कांप जाएगी।

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वा नगर निगम मुर्दाबाद मुर्दाबाद अरे खंडवा नगर निगम मुर्दाबाद मुर्दाबाद जब कोई इंसान ही कुत्ता बनकर कलेक्टेट पहुंच जाए। जी हां, खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या और के नाम पर हुए कथित के खिलाफ एक बेहद अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जब एक शख्स कुत्ते का मुखौटा पहनकर जन सुनवाई में पहुंच गया। कुत्ते के इस रूप को देखकर वहां मौजूद अधिकारियों और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

लेकिन जन सुनवाई हॉल के दरवाजे पर पहुंचते ही नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर के साथ माहौल गमा गया। गेट पर तैनात पुलिसकर्मी ने कुत्ते का मुखौटा पहने शख्स को अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस हुई। काफी मशक्कत और अधिकारियों के दखल के बाद आखिरकार नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर के साथ कुत्ते के मुखौटे पहने शख्स को जन सुनवाई में जाने की इजाजत मिली। क्यों नहीं जाएगा? आप तमीज से बात करो। आप तमीज से बात करो। पहली बात तो आप इस तरीके से व्यवहार नहीं कर सकता। क्यों नहीं जाएगा अंदर? कारण क्या है? कारण क्या है?

तो आप उनसे पूछ के आओ। ये रिपोर्ट डला नहीं जा रहा है। डलवा दो। हां, तो आप इस तरीके से रोक नहीं सकते हो। क्यों नहीं जा सकता है? क्यों नहीं जा सकता है? क्यों नहीं जा सकता है? हां। इसको भेजूं? हां। आएगा। सारे सारे मत जाओ सारे। जन सुनवाई में पहुंचे नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने अधिकारियों के सामने आरोपों की झड़ी लगा दी।

उन्होंने दावा किया कि पिछले 4 सालों में कुत्तों की के नाम पर नगर निगम ने करीब ₹40 लाख फूंक दिए। लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसी दौरान शहर में 13,225 लोग शिकार हो चुके हैं। राठौर ने व्यंग करते हुए कहा कि के दावों की हवा तो तब निकल गई जब कराए जाने के बावजूद एक कुत्ता छह बच्चों का बाप बन गया। कितना खा गए? करने के नाम पे 40 लाख खा गए और बार-बार उसी कंपनी को टेंडर दे रहे हैं जो काम नहीं कर पा रही उसको सीधा नगर निगम मिलकर उनका पैसा हजम कर गई ये बहुत दिल्ली से बढ़ के आया है और इसने बोला है कि मैं खुद जाऊंगा एफआईआर कराने तो नगर निगम की एफआईआर दर्ज होगी कि नहीं होगी कि नहीं जिनके कुछ नगर निगम को ये पता ही नहीं है कि क्या नाम से वो बंद है चालू बताऊं ये इंसानों की तो सुन नहीं रहे थे नगर निगम तो आज ये बहुत इंटेलिजेंट है।

सर इसमें एमकॉम बीकॉम बीकॉम और बहुत पढ़ के आया है जो ये खुद इसकी लड़ाई लड़ेगा ये पीआईएल भी लगाएगा और हाई कोर्ट तक जाएगा तो धनवा नगर निगम ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए पहले नाश्ते में ₹4 करोड़ अब कुत्तों के नाम पे कितने ₹ लाख भैया 40 ये सर को मत बहुत अच्छे हैं तो सर को भी मत नहीं बेटा ऐसा नहीं अच्छा आदमी है तो बेटा अपन को कुछ करना है ना क्योंकि सर 13225 लोगों को है जो हमें चार साल इसमें से कभी दो लोगों को पूरा खत्म हो जाएगा आवारा पशु के आए दिन आए दिन हो रहा है बड़े-बड़े वादे चार साल बेसल और इंसान तो खुश नहीं है जानवर भी खुश नहीं है ठंडवा नगर हम आपसे हाथ जोड़ के हाथ जोड़ भैया हाथ जोड़कर है कंपनी के खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई हो और उनको जेल भेजा जाए वहीं इस मामले में नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि सुनवाई नहीं हुई तो वे नगर निगम के विरुद्ध मानहानि का दावा भी ठोकेंगे क्योंकि नगर निगम उनके नाम पर कर रही है। 4 साल में 13225 लोगों को कुत्तों ने है और ₹40 लाख अभी तक 4 साल में कुत्तों की के ऊपर खर्च हो चुका है।

तो आज ये स्वयं पढ़े लिखे हमारे जो कुत्ते भाई साहब हैं ये दिल्ली से यहां पर आया कि खंडवा में हमारे नाम पर मोटी मात्रा में पैसे निकाल लिए गए ₹40 लाख और कुत्तों की संख्या खुद बढ़ गई। इन्होंने खुद आकर यहां पर कराई लेकिन उसके बाद भी इनको छह बच्चे हो गए हैं तो ये आश्चर्यचकित है कि होने के बाद भी अगर बच्चे पैदा हो रहे हैं तो मतलब इसमें फर्जीवाड़ा है। इनकी आत्मा झोक गई। इन्होंने मेरे से संपर्क करा और फिर हम लोग आवेदन लेकर हमने उस कंपनी जो कंपनी है जिसने टेंडर लिया है वह पूरी तरीके से फर्जी कंपनी है और उसको टेंडर नहीं होना चाहिए।

लेकिन नियम विरुद्ध उसको नगर निगम में कौन टेंडर दे रहा है इसकी भी जांच होनी चाहिए और ₹40 लाख जो जनता के खून पसीने की कमाई है उसको वापस होना जाना चाहिए नहीं तो हमारे डॉगी भाई परिवार सहित इनका कुनबा बहुत बड़ा है। यह परिवार सहित यहां जन सुनवाई में या नगर निगम में भूख हड़ताल पर बैठेंगे और ऐसे जो भ्रष्टाचारी जो जिनने भी इस कंपनी का या इस इनके नाम पर पैसा खाया उन पर सख्त से सख्त कारवाई होनी चाहिए।

क्या किया आज क्या किया? ये आज आए इन्होंने अपना आवेदन एडीएम साहब को दिया और उनको साफ लफ्जों में कहा है कि साहब खंडवा बहुत अच्छा है लेकिन कुत्तों के नाम पर पैसा खाना खंडवा नगर निगम बंद करे। इससे हमारी जात और हमारी जो कौम है उसको सरबंदगी महसूस हो रही है। इसलिए यह इन्होंने लगा और हो सकता है कि मानहानि का दावा भी यह लगाएं कि भैया हमारे नाम पर पैसा खाना खंडवा नगर निगम बंद करें।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल कलेक्टर कांशीराम बड़ोले ने शिकायत सुनी। उन्होंने बताया कि कुछ नागरिकों ने कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर करीब ₹40 लाख के बिल निकाले जाने और काम नहीं होने की शिकायत की है। इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से बात की गई है और मामले की जांच के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी जिसके बाद नियमानुसार कारवाई होगी। आज जन सुनवाई में कुछ यहां के खंडवा के नागरिक आए थे। जिन्होंने ये शिकायत की थी कि यहां पे जो कुत्ता का बधियाकरण के नाम पे ₹40 लाख का बिल निकाले गए हैं और किसी प्रकार का कोई बयाकरण नहीं किया गया है और अभी तक 13,000 से ज्यादा लोगों को कुत्ते ने काटा है।

इस प्रकार की शिकायत लेके आए थे। इसके संबंध में आयुक्त नगर निगम से बात की गई है। जो जो भी अभी उचित नियम अनुसार का कारवाई होगी करेंगे। आगे जांच कमेटी भी बनाई जाएगी। किस प्रकार की कारवाई की जाएगी और जो आरोप लगा रहे हैं कि ब्याकरण के नाम पे पैसे की यह हुआ है इसकी जांच भी की जाएगी। बहरहाल जिन्होंने भी इस पूरे घटनाक्रम को देखा उन्होंने इस विषय की गंभीरता को महसूस किया।

नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर की जन समस्याओं के प्रति जागरूकता और उन्हें अलग अंदाज से पेश करने की भी सराहना की जा रही है। यह स्पष्ट है कि आवारा कुत्तों की वजह से आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कड़े निर्देश जारी कर चुका है। लेकिन इसका असर यहां जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।

लगातार कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। जिसे लेकर नगर निगम और प्रशासन भी अपेक्षित गंभीर नजर नहीं आ रहा। अब देखना होगा कि इस जांच कमेटी के बाद कोई ठोस कार्यवाही होगी या यह मामला भी आम शिकायतों की तरह फाइलों में हो जाएगा।

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