इधर उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के पुजारी कह रहे हैं कि पहले ये मेरे में था लेकिन अब मेरे में नहीं है। केवल हनुमान जी की से ही मूर्ति को संभव है। हमारे साथ मंदिर के पुजारी महेश वैरागी जी हैं। पंडित जी, इस मंदिर की मूर्ति के स्थान परिवर्तन को लेकर जिला प्रशासन से आपकी मुख्य तौर पर क्या बात हुई है?
मैंने जब उनको आवेदन दिया था, तब मैंने कहा था कि सबसे पहले, जनभावना का सम्मान किया जाए और मूर्ति को यथास्थान ही रखा जाए। प्रशासन जब चाहे आता था, और अचानक पिछले रविवार को आकर मंदिर की बात कहने लगा कि आज हम इसे देंगे। बस, वहीं से स्थिति बिगड़नी शुरू हो गई.
अच्छा पंडित जी, बहुत सी तो आई थीं। फिर भी हनुमान जी एक इंच भी नहीं हिले।वो आई थीं। खड़ी ही रहीं। उससे पहले उनके इंजीनियरों ने दोनों तरफ 5-5 फीट खोदकर देखा था। उसके बाद जब का ड्राइवर आया, तो उसने खुद ही कहा कि अगर हम इसे उठाने की कोशिश करेंगे, तो मूर्ति सकती है। यानी मूर्ति का हो सकता है। इसलिए वे वापस चले गए थे।
फिर उन्होंने इंदौर से विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई। वो विशेषज्ञ आकर भी उनसे बोले कि इसे इस तरह उठाना संभव नहीं है। फिर उन्होंने पुरातत्व विभाग के किसी व्यक्ति को बुलाया, उन्होंने भी यही बात कही कि आपको इंजीनियरों को बुलाना चाहिए।
उनके पास होती हैं, लेकिन वे भी बिना के ही आए थे और अब वे कब लेकर आएंगे ये प्रशासन ही बता पाएगा, और जो कुछ भी हो रहा है उसका कुछ भी मुझे नहीं बताया जा रहा है कि ये लोग देखकर क्या कह कर गए हैं। तो पंडित जी, इसे आप हनुमान जी की इच्छा कहेंगे या , आप क्या कहेंगे?
ये हनुमान जी की इच्छा है कि वो नहीं चाहते, और दूसरा, अब ये मामला भक्तों की भावनाओं से जुड़ गया है, जिस तरह से यहां भक्त आ रहे हैं। उस हिसाब से अब मुझे लग रहा है कि ये मामला अब मेरे नियंत्रण से बाहर चला गया है। अब मेरी सहमति या असहमति का कोई मतलब नहीं है
यानी हनुमान जी की सहमति से ही होगा। तो अब हनुमान जी की सहमति से ही सब कुछ होगा और भक्तों की सहमति से।ये थे खड़िया हनुमान मंदिर के पुजारी जिन्होंने कहा कि ये हनुमान मंदिर डॉक्टर हनुमान के नाम से भी जाना जाता है और यहां जो भी आते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, और अब इस मूर्ति को हटाना सिर्फ हनुमान जी के द्वारा ही संभव है।
इस वक्त प्रशासन की तरफ से क्या फैसला लिया गया है? देखिए, प्रशासन की तरफ से कोई फैसला लेने से पहले ही। उससे पहले ही यहां महामंडलेश्वर आचार्य शेखर जी ने डेरा डाल दिया है। वो यहां सुबह से बैठे हैं और नजर रख रहे हैं कि प्रशासन क्या फैसला लेता है। साधु-संत जगत ने फैसला ले लिया है।
गुरु महाराज, आप लोगों ने क्या फैसला लिया है? हम तो सात दिन से यहां बैठे हैं। हमारा धरना चल रहा है। हमने अपना सिंहस्थ कुंभ शुरू कर दिया है और लाखों लोग दर्शन कर रहे हैं। प्रशासन से अनुरोध किया था कि इतनी सी जगह छोड़ दी जाए।
आप लोगों ने 40 से 50 मंदिर दिए हैं। विकास के नाम पर कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन ये बहुत प्राचीन मंदिर है। 200 साल से यहां पूजा हो रही है। इसे छोड़ दिया जाए। 4/4 की एक जगह है। उसे छोड़ दिया जाए। यहां बहुत जगह है। इसलिए हम अडिग हैं कि प्रशासन ऐसा कोई काम न करे जिससे मूर्ति हो जाए। कई तरह के लोग आकर यहां से चले गए हैं। खोदकर चले गए हैं। प्रशासन की मशीनें फेल हो गई हैं।
हनुमान जी जरा भी नहीं हिल रहे हैं। उन्होंने अपनी शक्ति का अहसास लोगों को कराया है कि सनातन सत्य है और मैं कलियुग में यहां मौजूद हूंतो गुरु महाराज, कोई रास्ता निकलता दिख रहा है क्या? आप लोग किसका इंतजार कर रहे हैं? प्रशासन के किसी कदम का इंतजार कर रहे हैं, या आपकी भावना क्या है? संत समाज क्या कहना चाहेगा? पूरा सनातन समाज और संत समाज चाहता है कि हनुमान जी यहीं रहें।
उन्हें न जाए। बाकी आप जो विकास करना चाहते हैं, कर सकते हैं। इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं है। हनुमान जी को यहीं रहना चाहिए। यहां थे और यहीं रहना चाहिए। ये साधु-संतों की भावना है। मैं आपको एक बार दिखाना चाहता हूं कि कैसे यहां भक्तों की भीड़ उमड़ी है। भारी संख्या में भक्त आ रहे हैं।
हनुमान जी की जय-जयकार कर रहे हैं और सभी भक्तों का कहना है कि हनुमान जी की प्रतिमा यहीं रहनी चाहिए। आपको क्या लगता है, हनुमान जी की प्रतिमा यहीं रहनी चाहिए या कहीं और हटाई जानी चाहिए?यहीं रहनी चाहिए सर। इससे पहले भी इन्होंने कई मंदिर तोड़े हैं।असंख्य भक्त यहां आए हैं और भगवान के नाम पर नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे क्या प्रशासन ने फिलहाल समय दिया है, या प्रशासन ने मंदिर का फैसला पक्के तौर पर रद्द कर दिया है?
देखिए, मंदिर प्रशासन यानी जिला प्रशासन ने अब यहां पुरातत्व विभाग की टीम को भी बुलाया है और उनके जरिए रिपोर्ट मंगवाई गई है। और फिलहाल, चूंकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बाहर थे, ये उनका क्षेत्र है, उनका अपना शहर है, तो निश्चित रूप से ये संभावना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अधिकारी बात करके और जनता की भावना को बताकर अगला फैसला लेंगे; ऐसी बातें भी सुनने में आ रही हैं। अब पूरा इलाका दिखाएं और बताएं कि सड़क चौड़ी करने के बहाने इस मंदिर को की बात कही जा रही है, वो ठीक कहां पर बाधा पैदा कर रहा है जिसके लिए प्रशासन को इसे हटाना पड़ रहा है। सड़क चौड़ी करने के इस काम में यहां लगभग 200 से ज्यादा घर हटाए गए हैं। आप पूरी सड़क , चौड़ी करने से पहले ये काफी संकरी थी .
लेकिन ये मंदिर सड़क के ठीक बीच में आ रहा है। पूरी सड़क ही। उसके बीच में ही ये मंदिर आ रहा है। और यहीं पर लोग, दूर से आप देख सकते हैं कि मंदिर सड़क को पूरी तरह दो हिस्सों में बांट रहा है। इस मंदिर का पूरा हिस्सा कहीं न कहीं ईंट-पत्थर से बना पक्का था। उसे दिया गया है। यहां जो टेंट लगाया गया है वो इसी वजह से है कि जिस दिन इसका भवन तोड़ा गया था उसी दिन से कई तरह की बाधाएं पैदा होने लगीं।
सबसे पहले, किसी न किसी तरह खराब हो गई थीं। उसके बाद जब इस मंदिर को का काम शुरू हुआ तो बारिश होने लगी। फिर इस मंदिर को लेकर के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। तो इस तरह ये मंदिर सड़क के ठीक बीच में है।
लेकिन भक्तों और यहां के पंडित-पुजारियों का कहना है कि जगह बहुत छोटी है। ऐसी स्थिति में अगर इसे नहीं भी जाता है, तब भी सड़क चौड़ी करने के मुख्य उद्देश्य में कोई बाधा नहीं आएगी।