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केतन अग्रवाल केस पर ये क्या बोल गई रिचा चढ्ढा? एक बयान से मचा हड़कंप!

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एक्ट्रेस रिचा चड्डा महिलाओं के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती है। 18 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में रिचा चड्डा ने कुछ ऐसी बातें कही थी जिसका वीडियो अब पुणे केतन अग्रवाल केस के बाद सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। संवाद कार्यक्रम में एक महिला ने रिचा से लड़कों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ लिया था।

महिला ने अभिनेत्री से कहा कि मुझे मुस्कान रस्तोगी और सोनम जैसी महिलाओं से अपने बेटे को बचाना है। मेरा बेटा आज शादी नहीं करना चाहता है। पहले तो इस सवाल पर रिचा थोड़ी हिचकिचाई लेकिन फिर रिचा ने जो जवाब दिया यानी महिला और रिचा चड्डा के बीच की बातचीत अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। महिला ने रिचा से कहा कि यहां पर लड़कियों को बचाने की बात हो रही है। लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि लड़कों को कौन बचाएगा? बेटियां तो बहुत पढ़ा ली, आगे बढ़ा ली मगर बेटों का क्या करें? क्या उन्हें गड्ढे में डाल दें? हर बार गलती लड़के की तो नहीं होती ना।

इस पर रिचा ने महिला से पूछा, आपको बेटे को किससे बचाना है? तब महिला ने कहा, “मुझे मुस्कान, रस्तोगी और सोनम जैसी महिलाओं से अपने बेटे को बचाना है। वही मुस्कान जिसने अपने पति को ड्रम में डाल दिया था।” इस डर से मेरा बेटा आज शादी नहीं करना चाहता है।

इस पर रिचा ने उन्हें जवाब दिया कि आप देखिए कि एक महिला ने किया तो इन्हें नाम, केस, पता सब याद है। इसकी क्या वजह है? इसकी वजह यह है कि एक आदमी हर रोज ऐसा करता है महिलाएं कभी-कभी। हालांकि इस महिला से पहले भी एक और महिला ने महिला सुरक्षा पर रिचा चड्डा से कुछ सवाल पूछा था। रिचा चड्डा ने उसका जवाब भी बड़े ही बेबाकी से दिया था।

मैं अब आपको सचेत करना चाहूंगी अगर आपका बेटा है उसकी भी जिंदगी नरक होगी। यहां पे बात लड़कियों को बचाने की तो हो रही है। लेकिन लड़के को कौन बचाएगा? किनको? लड़के को कौन बचाएगा? बेटे को। बेटियां तो बहुत पढ़ा ली पढ़ा ली। क्या करें? बेटे को गड्ढे में डाल दें क्या? भाई हर बार गलती लड़के की तो नहीं होती ना मैम।आपको मैं आप थोड़ा रिवर्ब ज्यादा है। आप नहीं आपको बेटे को किससे बचाना? रिचा रिचा मैं ये कहना चाहती हूं कि मुझे बेटे को बचाना है। मुस्कान रस्तोगी से सोनम से बचाना है मुझे। क्या मुस्कान रस्तोगी जिसने ड्रम में के अपने पति को डाल दिया था। मुझे उस मुस्कान से अपने बेटे को बचाना है। मेरा बेटा शादी नहीं करना चाहता आज। मुस्कान रसोगी मेरठ की जिसने ड्रम में अपने पति को करके फेंक दिया था। डाल दिया था।

जी आप देखिए एक औरत ने किया। इनको नाम केस पूरा याद है। इसकी क्या वजह है? क्योंकि रोज एक आदमी ऐसा करता है। इसलिए हमें वो नाम नहीं याद रहता। यह बात नहीं है। एनसीआरबी का डाटा ये कहता है कि 92,000 मैन इन अ ईयर कर रहा है। ढाई गुना आदमी कर रहा है। भारत में। भारत आज का देश नहीं है। मैडम आपकी बात सही है।

आदमी कर रहा है। औरत भी कर रही है। भारत गुना कम। भारत हैप्पीनेस इंडेक्स पे क्या कहानी बनाएं? इस पर जरूर आप स्टोरी बनाएं। कि मैं आदमियों के सुसाइड पे कहानी बना। नहीं नहीं आपको बनाना है मर्द के दर्द पर। मर्द दर्द होता है।

जब मैडम मैं चाहूंगी कि मर्द खड़ा होके मान ले कि मर्द को दर्द होता है। मैं उस पे कहानी बना दूं। मैम मैं बहुत कम मैं एक ऐसा समाज चाहती हूं जहां आदमी खुल के रो सके। जहां आदमी को यह प्रेशर ना फील हो कि मुझे ही रोजी रोटी कमानी है। जहां आदमी टेंडर पर डेट पे जाए तो यह ना सोचे कि अरे अरे बिल इतना ज्यादा आ गया यह तो देगी नहीं। अगर इक्वलिटी चाहिए, बराबरी चाहिए तो हमें यह बराबरी यहां से शुरू करनी होगी। औरतों को भी घर में इस तरह से कंट्रीब्यूट करना होगा। नहीं मैम मैं उस समाज को बनाना चाहती हूं जहां वी द पीपल ऑफ इंडिया हैं। वी द पीपल ऑफ इंडिया हैं। वहां हम स्त्री पुरुष नहीं है। क्योंकि हमारी जो आईडेंटिफिकेशन संविधान में है वो वी द पीपल ऑफ इंडिया की है ना कि स्त्री और पुरुष की।

हमारा संविधान में जब हमें समानता मिली। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हमें समानता पर लिया। तो मैम मैं ये चाहती हूं कि आपकी स्टोरीज में वो समाज दिखे जहां पर हम बेटे को भी यह कह सकें। थैंक यू सो मच मैम। थैंक यू फॉर शेयरिंग विद अस दिस सजेशन। हेलो मैम। हेलो मैम या हाय मैम आपकी एक बात मुझे बहुत अच्छी लगी कि सोसाइटी में चेंज लाना बहुत जरूरी है लड़कियों के लिए स्पेशली क्योंकि लड़कियों के लिए जो हमारी सोच है उनकी जो सिक्योरिटी है क्योंकि आज भी लड़कियां सेफ नहीं फील करती हैं सड़कों पर अगर 10:00 बज रहा है 11:00 बज रहा है कहीं पर भी वो घर से निकलने के लिए पेरेंट्स भी मना करते हैं और कहीं ना कहीं एज अ मदर आप भी फील करेंगे कि हम अपनी बेटी को अकेले ना भेजें कहीं तो उसके लिए सोसाइटी में चेंज कैसे आ सकता है?

लोगों की सोच कैसे बदल सकते हैं? इस कमरे में कितनी औरतें हैं? औरतें कितनी हैं? हां। तो आप देख लीजिए मेरे ख्याल से 10 या 20% औरतें हैं। बाकी आदमी हैं। बिल्कुल मैम। अगर आपको समाज को बदलना है तो आपको आदमियों को बदलना होगा। बिल्कुल मैम। और आप बेटियों को घर में ना रखें। आपके अगर बेटे पर आपको जरा सा भी शक है वो क्लास 10th फेल हुआ है। बाथरूम में छुप के पी रहा है और सड़क पर चित्र बना रहा है। पोस्टर बना रहा है। उसको आप घर में रखें। आपकी बेटी ऑटोमेटिकली सेफ हो जाएंगी।

वरना मैं नहीं चाहती कि ऐसा दिन आए इस देश में कि जिस तरह से हम गल्फ कंट्रीज के बारे में सुनते हैं कि शरिया लॉ लग गया या कुछ कि जहां जो है सरकार या प्रशासन इतना परेशान हो जाए कि आदमी के लिए कोई विकल्प ना छोड़े। अगर उससे गलती हो तो फिर उसका इलाज किया जाए। मैं अभी सचेत करना चाहूंगी कि आप अपने लड़कों को संभालें। लड़कियां नहीं जा के बोल रही कि मैं खुद से ही छिड़ गई। कोई उनको छेड़ रहा है, कोई उनको परेशान कर रहा है।

और अगर मैं मां हूं और मेरी बेटी अभी दो साल की भी नहीं है और मेरे दिमाग में ख्याल आता है क्योंकि मैं अखबार पढ़ती हूं। अब रणदीप जी भी आए हैं। उनको भी अभी बेटी हुई है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं मेरी। [प्रशंसा] तो यह हर पेरेंट के दिमाग में विचार है। मैं अब आपको सचेत करना चाहूंगी। अगर आपका बेटा है उसकी भी जिंदगी नरक होगी। यह मत सोचिए कि वह माइनर है। छूट जाएगा। उसका भी शहर बदलना पड़ेगा। उसको भी कोई ना कोई पहचान के आज नहीं तो कल गोली मार देगा। तो यह छोड़ दीजिए आप। ये चीजें इसको बहुत जीरो टॉलरेंस की तरह देखना चाहिए। बिल्कुल। बिफोर यू वाइंड अप विल टेक वन क्वेश्चन। वन क्वेश्चन ओनली। यहां पे बात लड़कियों को बचाने की तो हो रही है लेकिन लड़के को कौन बचाएगा? किनको? लड़के को कौन बचाएगा? बेटे को। बेटियां तो बहुत पढ़ा ली पढ़ा ली। क्या करें? बेटे को गड्ढे में डाल दें क्या? भाई हर बार गलती लड़के की तो नहीं होती ना मैम। [प्रशंसा][हौसला बढ़ाने की आवाज़] आपको मैं आप थोड़ा रिवर्ब ज्यादा है। आप आपको बेटे को किससे बचा? रिचा रिचा मैं ये कहना चाहती हूं कि मुझे बेटे को बचाना है।

मुस्कान रस्तोगी से सोनम से बचाना है मुझे। क्या मुस्कान रस्तोगी जिसने ड्रम में के अपने पति को डाल दिया था। मुझे उस मुस्कान से अपने बेटे को बचाना है। मेरा बेटा शादी नहीं करना चाहता आज। मुस्कान रसोगी मेरठ की जिसने नीले ड्रम में अपने पति को काट के फेंक दिया था। डाल दिया था। जी आप देखिए एक औरत ने क्राइम किया इनको नाम केस पूरा याद है। इसकी क्या वजह है क्योंकि रोज एक आदमी ऐसा करता है। इसलिए हमें वो नाम नहीं याद रहता। ये बात नहीं है। एनसीआरबी का डाटा यह कहता है कि 92,000 मैन इन अ ईयर सुसाइड कर रहा है। ढाई गुना आदमी सुसाइड कर रहा है भारत में। भारत आज बलात्कारियों का देश नहीं है। मैडम आपकी बात सही है। आदमी सुसाइड कर रहा है। औरत भी सुसाइड कर रही है। भारत कम भारत हैप्पीनेस इंडेक्स पे क्या है? कहानी बनाएं। इस पर जरूर आप स्टोरी बनाएं। कि मैं आदमियों के सुसाइड पे कहानी बनाऊंगी। नहीं नहीं आपको बनाना है मर्द के दर्द पर। मर्द होता है।

जब चाहूंगी कि मर्द खड़ा होके मान ले कि मर्द को दर्द होता है। मैं उस पे कहानी बना दूंगी। मैम मैं पहुंच मैं एक ऐसा समाज चाहती हूं जहां आदमी खुल के रो सके जहां आदमी को ये प्रेशर ना फील हो कि मुझे ही रोजी रोटी कमानी है। जहां आदमी टेंडर पे डेट पे जाए तो ये ना सोचे कि अरे अरे बिल इतना ज्यादा आ गया ये तो देगी नहीं। अगर इक्वलिटी चाहिए बराबरी चाहिए तो हमें यह बराबरी यहां से शुरू करनी होगी। औरतों को भी घर में इस तरह से कंट्रीब्यूट करना होगा। नहीं मैम। मैं उस समाज को बनाना चाहती हूं जहां वी द पीपल ऑफ इंडिया हैं। जहां वहां वी द पीपल ऑफ इंडिया हैं। वहां हम स्त्री पुरुष नहीं है। क्योंकि हमारी जो आइडेंटिफिकेशन संविधान में है वो वी द पीपल ऑफ इंडिया की है ना कि स्त्री और पुरुष की। हमारा संविधान में जब हमें समानता मिली बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने हमें समानता पे लिया।

तो मैम मैं ये चाहती हूं कि आपकी स्टोरीज में वो समाज दिखे जहां पर हम बेटे को भी यह कह सकें। थैंक यू सो मच मैम। थैंक यू फॉर शेयरिंग विद अस सजेशन। बट आई थिंक दिस नॉट अ डिबेट वी डोंट हैव टाइम थैंक यू सो मच एंड इनर टू एक्सप्रेस ग्रेटट्यूड टू रिचा मैम थैंक यू फॉर बीइंग सो

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