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एक साथ 40 फिल्में साइन करने वाला ये एक्टर अचानक क्यों गुमनाम हो गया?

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[संगीत] बदनसीबी किस तरह से एक उभरते स्टार का करियर बर्बाद कर देती है इसका जीता जागता उदाहरण अभिनेता जुगल हंसराज हैं आप सोच रहे होंगे कि इतना मशहूर एक्टर अचानक से कैसे गायब हो गया था वह गायब नहीं हुआ था बल्कि किस्मत ने इस उभरते स्टार का करियर तबाह कर दिया था उनके फिल्मों में आने से लेकर उनकी गुमनामी की कहानी आपको चौका कर रख देगी यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि जुगल हंसराज को बड़े होकर एक क्रिकेटर बनाने का सपना देखा गया था जी हां इनके पिता एक मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी प्रवीण हंसराज थे मगर जुगल हंसराज की किस्मत में क्या लिखा था यह तो कोई नहीं जानता था 26 जुलाई 1972 को मुंबई में पैदा हुए जुगल हंसराज की किस्मत उन्हें बॉलीवुड की ओर खींच कर ले आई आइए इनके सिनेमा में आने की दिलचस्प कहानी आपको बताते हैं हुआ यह कि जुगल अपने परिवार के साथ मुंबई के बांदरा इलाके में रहा करते थे उनका दूसरा जन्मदिन मनाने की तैयारियां चल रही थी जुगल की मां उन्हें रोज पार्क में घुमाने ले जाया करती थी बचपन से ही जुगल हंसराज का चेहरा बड़ा ही मासूम और सुंदर हुआ करता था एक बार की बात है जुगल हंसराज पार्क में खेल रहे थे

और उस दौर के मशहूर फोटोग्राफर गौतम राज दक्ष भी उस पार्क में मौजूद थे जब गौतम की नजर 2 साल के मासूम जुगल हंसराज पर पड़ी तो वह उन्हें देखते ही रह गए उनसे रहा नहीं गया और उनकी मां के पास आकर बोले कि आपके बच्चे का मासूम चेहरा तो व के लिए बना है साथ ही साथ उन्होंने यह भी पूछ लिया क्या मैं जुगल हंसराज की कुछ फोटोज खींच सकता हूं जुगल की मां ने परमिशन दे दी और साथ ही साथ उन्हें अगले दिन चाय पर अपने घर बुला लिया गौतम अगले ही दिन अपनी टीम के साथ जुगल हंसराज के घर पहुंच गए और उनकी बहुत सारी तस्वीरें खींचकर अपने साथ ले गए और इनकी फोटोज लेकर कई सारी विज्ञापन एजेंसियों को दे दिया 2 साल के मासूम जुगल की तस्वीरें देखने के बाद कई सारी विज्ञापन एजेंसीज ने जुगल को तलाशना शुरू कर दिया छोटे से जुगल की तो मानो लॉटरी लग गई उस दौर के दिग्गज डायरेक्टर श्याम बेनेगल प्रहलाद कक्कड़ से लेकर कैलाश नाथ जैसे बड़े डायरेक्टर्स के साथ इन्हें टीवी विज्ञापन में काम मिल गया करीब 7 साल तक जुगल हंसराज इसी तरह विज्ञापन की दुनिया में छाए रहे मगर अब उनकी किस्मत उन्हें बॉलीवुड में लाने वाली थी 1979 या 80 की बात होगी जुगल हंसराज करीब 9 साल के रहे होंगे एक दिन बॉलीवुड के एक दिग्गज डायरेक्टर शेखर कपूर इनके घर पहुंच गए उनकी मां से बोले आपके बच्चे को मैं अपनी फिल्म में कास्ट करना चाहता हूं मैंने इसे टीवी ऐड में देखा है और मुझे अपनी फिल्म के लिए एक ऐसा ही बच्चा चाहिए मां ने जुगल को

बुलाया तो उन्होंने कहानी भी सुना दी जुगल ने कहानी सुनने के बाद फौरन मना कर दिया दरअसल यह फिल्म एक ऐसे बच्चे पर थी जो हमेशा रोता रहता है और ऐसे में जुगल हंसराज ने जब कहानी सुनी तो उन्हें यह लगा कि जब उनके दोस्त इस फिल्म को देखेंगे तो उसे रो ू बच्चा कहकर चढ़ाएंगे और यही वजह थी कि वह इस फिल्म को नहीं करना चाहते थे लेकिन बाद में मां ने और शेखर कपूर ने इन्हें समझाया तब जाकर वह माने 1983 में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी की वह फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था मासूम यह फिल्म सुपरहिट हो गई और बाल कलाकार के रूप में जुगल हंसराज अब छा गए थे इसके बाद तो उनको 1984 में आई झूठा सच 1986 में आई कर्मा और 1987 में आई लोहा फिल्म भी मिल गई वैसे यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि मिस्टर इंडिया फिल्म में भी वह बच्चों के लीडर बनने से जरा सा के लिए चूक गए थे शेखर कपूर ने उन्हें फिल्म में लेने का पूरा मन बना लिया था जुगल हंसराज की उम्र उस वक्त करीब 14 साल हो चुकी थी लेकिन उस बच्चे का किरदार 10 साल का होना था लेकिन फिर भी शेखर कपूर यह रोल जुगल हंसराज को ही देना चाहते थे लेकिन जब जुगल हंसराज को उन्होंने अपने पास मिलने बुलाया तो देखा कि उनके चेहरे पर हल्के हल्के बाल आ गए थे और इस वजह से शेखर कपूर चाहते हुए भी जुगल हंसराज को इस फिल्म में नहीं ले पाए थे इसके बाद जुगल अपनी पढ़ाई पूरी करने में लग गए साल 1992 की बात होगी सलीम अख्तर उर्मिला मातोंडकर को लेकर एक फिल्म बना रहे थे उनको जुगल हंसराज याद आ गए पहली बार उन्होंने जुगल हंसराज को अपनी फिल्म में हीरो बना दिया यह फिल्म थी आ गले लग जा लेकिन यह फिल्म खासा कमाल ना कर सकी लेकिन इसके बाद जो फिल्म आई उसने तो जुगल हंसराज को बुलंदियों पर पहुंचा द 1994 की बात होगी महेश भट्ट जुगल हंसराज को बहुत पसंद थे और वह एक बार सीधा-सीधा महेश भट्ट के पास पहुंच गए और कह दिया कि मैं

आपके साथ काम करना चाहता हूं महेश भट्ट बोले कि ठीक है कुछ होगा तो बताऊंगा जुगल ने समझा कि वह बात को टालने के लिए ऐसा कह रहे हैं और वहां से चले गए करीब एक साल बाद जुगल हंसराज की नौकरानी ने उनसे कहा कि महेश भट्ट का फोन आया है वह आपसे कुछ बात करना चाहते हैं जुगल को लगा कि उनका कोई कोई दोस्त उनके साथ मजाक कर रहा है इस वजह से उन्होंने बात तक नहीं की बाद में यश जोहर का फोन आया और उन्होंने डांटते हुए कहा महेश भट्ट तुमसे मिलना चाहते हैं और तुम उनसे बात क्यों नहीं कर रहे हो तब जाकर वह भागे भागे महेश भट्ट जी के पास पहुंचे पहले तो महेश भट्ट ने खूब डांटा और इसके बाद बताया कि एक नई लड़की के साथ एक फिल्म बना रहा हूं और इस फिल्म में हीरो तुम हो 1996 में आई यह फिल्म थी पापा कहते हैं मयूरी कांगो और जुगल हंसराज की जोड़ी ने फिल्म में कमाल कर दिया था यह फिल्म सुपर हिट हो गई और इस फिल्म के गीतों ने उस दौर के युवाओं का दिल धड़का दिया खासकर घर से निकलते ही कुछ दूर चलते ही गीत तो आज तक लोग गुनगुनाया करते हैं रातों-रात जुगल हंसराज स्टार बन बैठे और इनके चॉकलेटी चेहरे पर तो लड़कियां मर मिटने को तैयार थी वह जब शाम को बांदरा के एक पार्क में जॉगिंग करने जाया करते तो लड़कियां पहले से ही उनका इंतजार किया करती कोई लड़की उन्हें देखते ही उनका गाना गाने लगती तो कोई लड़की उनका ऑटोग्राफ लेने के लिए उनके पीछे दौड़ पड़ती उनका यह स्टारडम देखकर मशहूर डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा की नजर जुगल हंसराज पर पड़ गई जुगल को उन्होंने अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार्स के साथ फिल्म में एक रोल दे दिया साल 2000 में यह फिल्म आई जिसका नाम था मोहब्बतें फिल्म सुपरहिट रही और जुगल हंसराज का करियर अब सातवें आसमान पर पहुंच गया अब तो बॉलीवुड के डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के बीच इन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए होड़ स लग गई मगर दोस्तों अचानक ऐसा क्या हुआ कि इतना मशहूर हो रहा अभिनेता अचानक से गायब हो गया दरअसल दोस्तों वह कहीं गायब नहीं हुए थे

बल्कि वह तो उन फिल्मों की शूटिंग में मशगूल थे जिन फिल्मों ने इन्हें बर्बाद कर दिया हुआ यह कि पापा कहते हैं और मोहब्बतें फिल्म के बाद इनके पास करीब 40 फिल्में आ गई एक से बढ़कर एक डायरेक्टर और प्रोड्यूसर की फिल्में उन्होंने यह फिल्म में साइन भी कर ली और शूटिंग में बिजी भी रहने लगे लेकिन बदकिस्मती ने इन्हें तबाह कर दिया जिन 40 फिल्मों की शूटिंग में यह लगे हुए थे उनमें से करीब 35 फिल्में तो बन ही नहीं पाई कुछ फिल्मों की शूटिंग आधी हो जाने के बाद बंद हो गई तो कुछ फिल्में पूरी हो जाने के बाद भी बंद कर दी गई वहीं कुछ फिल्में तो शुरू ही ना हो सकी जुगल हंसराज का वह गोल्डन टाइम जो किसी भी अभिनेता के लिए एक बहुत महत्त्वपूर्ण समय होता है इन फिल्मों के चक्कर में बर्बाद हो गया इन फिल्मों की वजह से वह सालों तक बॉलीवुड से गायब से नजर आने लगे इक्का दुक्का फिल्में रिलीज भी हुई लेकिन वो फ्लॉप हो गई धीरे-धीरे अभिनेता के पास ऑफर्स आने ही बंद हो गए सिर्फ फिल्म मेकर्स ही नहीं बल्कि अभिनेता को

चाहने वाले दर्शक भी उन्हें भूल गए और इस तरह बदनसीबी ने इस उभरते स्टार का पूरा करियर डुबो डाला गुमनाम सितारा बन चुके जुगल हंसराज अब करीब 51 साल के हो चुके हैं उन्होंने साल 2014 में अपनी दोस्त जैस्मिन से ऑकलैंड में शादी कर ली थी उनकी शादी में कुछ चुनिंदा दोस्त ही शामिल हुए थे जैस्मीन न्यूयॉर्क में एक इन्वेस्ट इमेंट बैंकर हैं जुगल हंसराज भी अपनी पत्नी के साथ न्यूयॉर्क चले गए और वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ वहीं रहते हैं जुगल हंसराज अब एक लेखक बन चुके हैं और उनकी एक किताब भी पब्लिश हो चुकी है वैसे यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि करण जोहर की फिल्म कुछ-कुछ होता है कि टाइटल सॉन्ग की कुछ लाइनें जुगल हंसराज ने लिखी थी धर्मा प्रोडक्शंस के लोगों में जो धुन आती है वो भी जुगल हंसराज की ही देन है दोस्तों आपको जुगल हंसराज कैसे लगते थे उनकी कोई फिल्म या कोई गाना अगर आपको याद हो तो हमें कमेंट्स में जरूर बताइएगा वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक करिएगा और अगर आप हमारे चैनल वारद ही मंथन पर नए हैं तो इसे सब्सक्राइब करके बेल आइकन जरूर दबा दीजिएगा इससे हमारा हौसला बढ़ेगा और हम आपके लिए ढेर सारी अनसुनी कहानियां लाते [संगीत] रहेंगे

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