कहा जाता है जन्नत जाओगे तो हरे मिलेंगी। क्या यह वाकई सच है कि बस कहने की बात है। देखिए जब कोई एक सिस्टम समाज का डेवलप किया जा रहा है तो उसमें दोनों बातें होती हैं। सजा भी होती है, इनाम भी होता है। तो कहीं इनाम का तस्करा होगा जरूर। अब उसको ओवर एफेसाइज किया जा रहा है और उसको बढ़ा के बयान किया जा रहा है। ऐसी चीजें ढूंढी जाती है।
सर ने भी ऐसा बहुत रिसर्च करके ऐसी चीजें ढूंढी है हमारे भाई साहब ने। तो वो इसी तरह का है के बहुत ज्यादा उसको उसका प्रोपेगेंडे के तौर पर उसको प्रेजेंट किया जा रहा है। वरना सजाएं भी बहुत सारी हैं। बहुत सारी। अच्छा हर धर्म में सिर्फ इस्लाम की बात नहीं है। सब जगह इनाम और सजाएं दोनों चीजें रखी गई हैं। एक पाकिस्तान की जर्नलिस्ट हैं। उन्होंने वहां एक मौलाना से पूछा कि मेरे हस्बैंड को तो हरे मिलेंगी। मैं जाऊंगी तो मुझे क्या मिलेगा? एक प्रॉब्लम है। एक एक प्रॉब्लम है वो ये है के मैं तो ये चाहता हूं आपसे भी कि पाकिस्तान का तो जिक्र ही ना किया जाए। लेकिन आपने आपने एक जरा सा एक इससे इनके सवाल से रिलेट करके एक सवाल किया है तो जो इनाम मर्दों को मिलेगा जो भी मिलेगा अच्छे काम करने पर और बुरे काम करने पर जो सजा मर्दों को मिलेगी इसी तरह औरतों के लिए भी होगा इनाम भी और सजा भी ऐसा नहीं हो सकता कि औरत के लिए कुछ और हो मर्द वहां तो मौलाना साहब ने उसे जवाब दिया कि आपको तो अपने हस्बैंड ही मिल जाएंगे। तो उन्होंने कहा मैं क्यों उसको लेके क्या करूं?
ठीक है? उसको हो सकता है मैं उसको इख्तियार ही ना करूं। अगर मैं औरत हूं तो हो सकता है मैं अपने हस्बैंड को चूस ही ना करूं। बिल्कुल ये इख्तियार मिलेगा औरत को। वेल एजुकेटेड मुस्लिम फैमिलीज में भी मतलब बच्चे होते हैं। तो ये कौन डिसाइड करता है कि कितने बच्चे होने चाहिए? ऊपर वाला या फिर फैमिली। उनका सवाल है कि इंप्रेशन ये है कि जो मुस्लिम फैमिलीज हैं उनमें बहुत ज्यादा बच्चे होते हैं। तो कितने बच्चे होने चाहिए ये पेरेंट्स डिसाइड करते हैं कि ऊपर वाला डिसाइड करता है? यह सवाल ही गलत है। इसलिए कि आप यह सवाल कर रहे हैं कि मुसलमान कम्युनिटी में बहुत ज्यादा होते हैं। ये डाटा के खिलाफ है। कि आज की तारीख में जो डाटा है वो ये कहता है बे पढ़े लिखों में और गरीब लोगों में ज्यादा होते हैं। उसमें हिंदू भी हैं, मुसलमान भी हैं। सब तरह के लोग हैं।
आप तालीम दे दीजिए। आपके पास सही फिगर सही तादाद में बच्चे भी हो जाएंगे और उनकी एजुकेशन भी हो जाएगी, अपलिफ्टमेंट भी हो जाएगी, मुल्क की तरक्की भी होगी। तो जो शादियां करेंगे उनके ज्यादा होंगे या एक करेगा उसके जो चार करेंगे इसके ऊपर भी डाटा मौजूद है। इसके ऊपर भी डाटा मौजूद है। मतलब आज तो आज तो दुनिया तरक्की कर गई है। हर काम रिसर्च बेस्ड होना चाहिए। इंफॉर्मेशन बेस्ड नहीं होना चाहिए कि आपसे मिल गई, किसी और से मिल गई, किसी और से मिल गई। आप सारी संख्या को निकाल लीजिए। शादियां ज्यादा कहां हो रही हैं? कौन लोग एक्स्ट्रा मेरिट मेरिटल अफेयर्स में हैं?
कौन लोग किस कम्युनिटी के लोग ज्यादा हैं इसमें? यह मुसलमान हिंदू का मामला है ही नहीं। ना संख्या का मामला मुसलमान हिंदू का है ना ही एक से ज्यादा ताल्लुकात रखने किसी और मजहब में तो एक से ज्यादा शादियां करने की इजाजत नहीं है। हां नहीं है। उसके बावजूद कौन है ज्यादा इसमें? ये जरा देख लीजिए इंडिया में।
अच्छा आप कह रहे हैं कि इजाजत नहीं। उसके बावजूद कई-कई रखी हुई है। यही हो रहा है। तो उसका क्या करेंगे आप? मुझे नहीं लगता कि लोग इस बात से इत्तफाक करें क्योंकि मेरी तो अक्सर बातें ऐसी हैं के एक खास एनवायरमेंट क्रिएट हो गया है। मेरी तो एक बात भी लोग मान ले तो बड़ी बात है। बहुत बड़ी बात होगी मेरे लिए। सौभाग्य की बात होगी। एक और सब्जेक्ट जिसकी आजकल बहुत चर्चा है वो भी 100 साल पुराना कानून है। वो है व को लेकर। और व बोर्ड के कानून में जो अमेंडमेंट किए जा रहे हैं यह आउटडेटेड सोच की वजह से उनको एक्सेप्ट नहीं किया जा रहा। देखिए एक तो ये सवाल के 100 साल पुराना कानून है। ये सवाल गलत है। ये कानून तो अभी अमेंड हुआ है। 95 वगैरह में कुछ इसके ऊपर काम हुआ है। एक बात ये है।
दूसरी बात ये है कि औकाफ है क्या? इसको समझना जरूरी है। हमारे भारत में खासतौर से लोगों का एक मिजाज है सब मजहब वालों का कि वो दान करते हैं गरीबों के लिए। तो कुछ लोगों ने कुछ चीजें दान करी है। और वो दान की हुई चीजों के मैनेजमेंट के लिए एक सिस्टम की जरूरत महसूस हुई अंग्रेजों के जमाने में और उन्होंने एक एक्ट बनाया। फिर 53 में 54 में अमेंडमेंट हुआ या बनाया गया नए सिरे से और फिर 95 में हुआ .
फिर 2013 में भी उसमें कुछ हुआ है। ये जरूरत के हिसाब से इसको चीजों को मॉडिफाई किया गया है। अब ये जो नया अमेंडमेंट का सिस्टम डेवलप किया जा रहा है। इस वक्त लाने की कोशिश की जा रही है। ये उसके उसकी जो जरूरतें थी जिस जरूरत के लिए यहां तक पहुंचे थे उसको बजाय बेटर करने के वापस पीछे की तरफ ले जा रहे