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इटली में प्रदर्शनकारियों पर सख्त हुई मैलोनी, किया बड़ा चौंकाने वाला ऐलान, मचा घमा;सा!न

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प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों पर 5 साल तक की जेल और 20,000 यूरो तक के जुर्माने की तलवार लटक सकती है। इतना ही नहीं अगर तोड़फोड़ और लूटपाट की इसमें नाबालिग शामिल हुए तो उनके माता-पिता को भी नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों को नया अपराध बनाने से लेकर नाबालिकों के खिलाफ कार्रवाई के नियम सख्त करने तक के कई बड़े फैसले लिए हैं। दरअसल यह सख्त कदम इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने मंगलवार को मंजूर किए हैं। इसके पीछे वजह है इटली के कई शहरों में हुई हिंसा। जहां महंगाई और बढ़ती लागत को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बीच कुछ समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पे की। हिंसा का सबसे ज्यादा असर इटली की आर्थिक राजधानी मिलान में देखने को मिला।

जहां प्रदर्शन के दौरान कई दुकानों को निशाना बनाया गया और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर इन फैसलों की जानकारी देते हुए साफ कहा कि तोड़फोड़ और चोरी करना कोई क्रांतिकारी काम नहीं। उनके मुताबिक तोड़फोड़ और चोरी प्रदर्शन नहीं बल्कि अपराध है।

सरकार का कहना है कि विरोध करने के अधिकार की आड़ में हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब सख्ती जरूरी हो गई है। नए नियमों के तहत अगर पांच या उससे ज्यादा लोगों का कोई समूह प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है तो उसमें शामिल लोगों को 5 साल तक की जेल और अधिकतम 20,000 यूरो का जुर्माना हो सकता है। अगर हिंसा करने वाले अपना चेहरा ढकते हैं या उनकी वजह से किसी को चोट लगती है तो सजा और बढ़ सकती है। इसके अलावा अधिकारियों को नुकसान की भरपाई के लिए तुरंत आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है। सरकार ने नाबालगों को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। अगर 18 साल से कम उम्र के बच्चे तोड़फोड़ या लूटपाट में शामिल होते हैं तो उनके माता-पिता को हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यानी अगर कोई नाबालिक किसी दुकान के शीशे तोड़ता है या संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है तो उसके परिवार पर भी आर्थिक जिम्मेदारी आ सकती है। पुलिस की शक्तियों में भी इजाफा किया गया है। अब 14 से 17 साल के उन किशोरों को भी हिरासत में लिया जा पाएगा जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया लेकिन उनके खतरनाक होने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इससे पहले ऐसी कारवाही से जुड़ी शक्तियां मुख्य रूप से व्यस्को पर लागू होती थी। नए प्रावधानों में 14 साल से ज्यादा उम्र के किशोरों की अपने काम के परिणाम समझने की क्षमता को लेकर भी नियम बदले गए हैं। अब इसे सामान्य रूप से मानकर चला जाएगा जब तक कि इसके विपरीत साबित ना हो जाए। सरकार ने किशोर न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हिरासत केंद्रों में अतिरिक्त जगह और किशोरों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले जजों की संख्या बढ़ाने की बात कही है।

हालांकि इस पर फैसले को कानून का स्थाई रूप देने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। डिग्री के रूप में लागू इन प्रावधानों को 60 दिनों के अंदर संसद से कानून में बदलवाना होगा। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलान में पुलिस के साथ 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का ऐलान किया गया है। यह सैनिक अहम स्थानों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगे। सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है जब अधिकारियों को शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान फिर से हिंसा भड़कने की आशंका थी। दरअसल मिलान में हिंसा के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके जबकि कई जगहों पर दुकानों के शीशे तोड़ दिए गए।

संपत्तियों में आग लगाने की घटनाएं सामने आई। कुछ प्रदर्शनकारियों के चेहरे ढके हुए थे। पुलिस के मुताबिक हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी थी और गिरफ्तार किए गए लोगों में नाबालग भी शामिल थे। अधिकारियों ने इन घटनाओं में पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी। लेकिन यहां एक अहम सवाल है। आखिर इटली में ऐसी स्थिति क्यों बनी और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध? हिंसा तक पहुंचा कैसे? इसकी वजह समझने के लिए इटली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे की परिस्थितियों को देखना जरूरी है। देश में बढ़ती महंगाई, महंगा होता जीवन, कमाई के मुकाबले बढ़ते खर्च, लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। दक्षिणी इटली में ट्रक ड्राइवर, डीजल की बढ़ती कीमतों और परिवहन लागत के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। उनके विरोध के चलते कई जगह सड़कें बाधित हुई जिससे सामान की आपूर्ति प्रभावित होने लगी। कुछ पास्ता निर्माताओं को उत्पादन रोकना पड़ा। जबकि कृषि संगठनों ने चेतावनी दी कि सप्लाई में रुकावट जारी रही तो फल और सब्जियां भी खराब हो सकती हैं।

यानी एक तरफ आम लोग रोजमर्रा के खर्चों को लेकर परेशान रहे तो दूसरी ओर ट्रांसपोर्ट और कृषि जैसे क्षेत्र में बढ़ती लागत का दबाव झेल रहे हैं। सरकार ने ट्रक ड्राइवर्स और परिवहन क्षेत्र के लिए नई आर्थिक सहायता देने का भरोसा दिया है। लेकिन लोगों की नाराजगी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई। इसी बीच इटली में छात्रों और युवाओं के नेतृत्व में भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए लेकिन कुछ जगहों पर शांतिपूर्ण विरोध के साथ हिंसक घटनाएं भी जुड़ गई। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स में सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को शहरों के सार्वजनिक चौकों पर जुटने के लिए बुलाए जाने की बात भी सामने आई। हालांकि हर प्रदर्शनकारी को हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। राजनीतिक विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच फर्क करना भी जरूरी है। इटली में हुई इन घटनाओं की तुलना पड़ोसी देश फ्रांस में हुए प्रदर्शनों और हिंसा से भी की जा रही है। फ्रांस समेत यूरोप के कई देशों में बढ़ती जीवन लागत और युवाओं की नाराजगी के बीच प्रदर्शन हुए।

कुछ जगहों पर शांतिपूर्ण रैलियों के दौरान हिंसक झड़पें भी देखने को मिली। मिलान के मेयर ने भी इन घटनाओं को एक ऐसे नए घटनाक्रम के रूप में देखा जो अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि फ्रांस की घटनाओं ने ही इटली में ईंसा को जन्म दिया। दोनों देशों में महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत को लेकर असंतोष जरूर दिखाई दे रहा है। लेकिन हर देश में विरोध के अपने स्थानीय कारण भी हैं। इटली में भी आर्थिक मुश्किलें, युवाओं की नाराजगी और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने सरकार पर सुरक्षा के सवालों को लेकर दबाव बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री मैलौनी की सरकार अब सख्त कानूनों और अतिरिक्त सुरक्षा बलों के जरिए इस स्थिति पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इन फैसलों पर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल सजा बढ़ाने से अपराध और हिंसा की मूल वजह दूर नहीं होंगी। ऐसे में इटली के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी ओर उन आर्थिक परेशानियों का समाधान करना जिनसे आम लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं।

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