इस तस्वीर को ध्यान से देखिए। यह तस्वीर यूरोपीय देश डेनमार्क से आई है। इस तस्वीर की सच्चाई को देखकर पूरा भारत हैरान हो जाएगा। इस होश उड़ा देने वाली तस्वीर की असली कहानी हम आपको बताएंगे। लेकिन उससे पहले वह खबर देखिए जिसे देखने के बाद भारत में रहने वाले लोग कहेंगे कि हम तो बाल-बाल बच गए। दरअसल पहली बार दावा किया गया है कि फ्रांस में हुए दंगों और भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जो प्रदर्शन हो रहे हैं उन दोनों घटनाओं में खतरनाक कनेक्शन सामने आ गया है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार भारत और फ्रांस समेत अचानक यूरोपीय देशों में जो दंगे शुरू हुए हैं, उनके पीछे 13 देशों में फैले 101 संगठनों का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क एक्टिव है।
और इन 101 संगठनों को चलाने वाले दो सबसे बड़े संगठन है। आसान भाषा में कहें तो दो बड़े संगठन दुनिया भर के 101 छोटे संगठनों का नेटवर्क चला रहे हैं। यही सब लोग मिलकर भारत, फ्रांस और कई यूरोपीय देशों को जला रहे हैं। इन देशों में जबरन सत्ता परिवर्तन करवाने की कोशिश कर रहे हैं। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि इस नेटवर्क में कुछ खतरनाक भारतीय भी शामिल है जो भारत से ही गद्दारी कर रहे हैं। भारत और फ्रांस में कराए गए दंगों के पीछे जिन दो सबसे बड़े संगठनों का नाम लिया गया है उनमें से पहला है इंडियन अलायंस पेरिस जो भारतीय मूल के छात्रों रिसर्चरर्स और नौकरी पेशा लोगों का एक ग्रुप है। इंडियन अलायंस पेरिस नाम का यह संगठन कट्टर मोदी विरोधी है।
इस संगठन ने भारत में नक्सलियों के खिलाफ की गई कार्यवाही का भी विरोध किया। यही संगठन भारत में बैठे वामपंथियों को पैसा और सारी मदद देता है। अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक दंगे कराने वाला दूसरा सबसे बड़ा संगठन है प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल। यह दुनिया का बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय वामपंथी नेटवर्क है। इसका काम दुनिया भर के अलग-अलग देशों के वामपंथी आंदोलनों, ट्रेड यूनियंस और फर्जी सामाजिक कार्यकर्ताओं के जरिए रिजीम चेंज कराना है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। जिनमें देखा जा सकता है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के संगठन के लोगों से मिल रहे हैं। यह मुलाकात 28 अप्रैल 2025 को ही हुई है। बीजेपी का आरोप है उसी के बाद से भारत में बवाल शुरू हो गया। बहरहाल आपको बता दें कि इंडियन अलायंस, पेरिस और प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाकर कई देशों में आग लगा रहे हैं। दिस इंफो लैब्स के मुताबिक फ्रांस के दंगे अच्छे स्कूलों की मांग को लेकर शुरू करवाए गए। यूरोपीय देश स्पेन के दंगे किराएदारों के अधिकारों को लेकर शुरू करवाए गए। भारत में वोट चोरी का फर्जी जुमला उठाने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने एआईएसए और एसएफआई जैसे वामपंथी छात्र संगठनों से हाथ मिला लिया।
मगर दिलचस्प बात देखिए कि कई यूरोपीय देश तो जल गए लेकिन भारत का बाल तक बांका नहीं हुआ। राहुल गांधी देश से बाहर हैं। अभिजीत दीप के कहीं छुप कर ट्वीट कर रहा है। आशुतोष रांका और सौरव दास कोर्ट में माफी मांग रहे हैं। बहरहाल जाते-जाते इस तस्वीर पर आते हैं। हमने आपको बताया था कि यह तस्वीर डेनमार्क से आई है। डेनमार्क में भी ऐसे ही संगठनों ने दंगे शुरू करवाए हैं। इन दंगों के दौरान डेनमार्क की पुलिस ने कई पत्रकारों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा। डेनमार्क वही देश है जो भारत को फ्रीडम ऑफ प्रेस का ज्ञान दे रहा था। प्रेस फ्रीडम रैंकिंग में डेनमार्क चौथे नंबर पर है। जबकि यूरोप के इन लोगों ने भारत को 157 नंबर पर रखा है। लेकिन देखिए किस तरह की प्रेस फ्रीडम है। पत्रकारों को जमकर पीटा जा रहा है। अब आप हैप्पीनेस इंडेक्स भी देख लीजिए। हैप्पीनेस इंडेक्स में फ्रांस का नंबर 35 है। यानी यहां के लोग बहुत खुश हैं। जबकि भारत को 116वें नंबर पर रखा गया है। लेकिन देखिए खुशहाल पेरिस में ऐतिहासिक इमारतें जलाई जा रही हैं। जबकि भारत में अच्छाई बुराई को जला रही है। यह है भारत की ताकत। शुक्र मनाइए कि आप भारत में हैं।