उत्तर प्रदेश में एक ऐसे जज हैं जिनकी चर्चा अब दुनिया भर में हो रही है। इनका नाम सुनते ही अपराधी कांप रहे हैं। अपराधी और उनके वकील दुआ कर रहे हैं कि इस जज की कोर्ट में मामला ना चला जाए। इन जज का नाम रवि कुमार दिवाकर है। जज रवि कुमार दिवाकर मामले में एक ऐसा हैरतंगेज मोड़ आया है
जिसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। हमने आपको कुछ दिन पहले खबर दिखाई थी कि सिर्फ 4 महीने के अंदर जज रवि कुमार दिवाकर ने 22 दोषियों को मौत की सजा सुना दी थी। इन फैसलों से अपराधियों और उनके वकीलों में भयंकर डर पैदा हो गया। इसके बाद रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से करीब 100 मर्डर केस ट्रांसफर कर दिए गए। कईयों को लग रहा था कि कहीं रवि कुमार दिवाकर इन लोगों को भी मौत की सजा ना सुना दे।
लेकिन अब इस पूरे मामले में बड़ा खेल हो गया है। मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने 23वें फैसले में भी एक अपराधी को मौत की सजा सुना दी है। यानी अब उन्होंने कुल 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। 23वीं सजा सुनाने के बाद जज रवि कुमार दिवाकर ने जो कहा है वह आपको हिलाकर रख देगा। दहेज के कारण हुई मौत के एक मामले में फैसला सुनाते हुए जज रवि कुमार दिवाकर ने हिंदी में एक बयान लिखा। इस नए मामले में उन्होंने 7 सितंबर को नदीम नाम के एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है। जज दिवाकर ने लिखा कि अगर मैं दूसरी ताकतों से डरने लगूं तो मेरे लिए इस पवित्र न्याय संस्थान से इस्तीफा देना ही सही होगा। उन्होंने आगे कहा कि मैं मरना पसंद करूंगा।
कायर जज नहीं कहलाना चाहूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं फैसले लेने का अधिकार सिर्फ मेरा ही होगा। आपको बता दें कि 46 साल के जज रवि कुमार दिवाकर साल 2022 में वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के आदेश को लेकर चर्चा में आए थे। इसके बाद मार्च 2024 में बरेली दंगों से जुड़े एक मामले में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना प्लेटो के फिलॉसफर किंग से ही कर दी। उस समय जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने कोर्ट ऑर्डर में लिखा कि सत्ता में धार्मिक व्यक्ति अच्छे परिणाम देते हैं।
हालांकि बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों को हटा दिया था। जानकारी के लिए बता दें कि रवि कुमार दिवाकर लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2009 में आजमगढ़ से अपने करियर की शुरुआत की। जज रवि कुमार दिवाकर के फैसलों की रफ्तार को समझने के लिए आप इन आंकड़ों को देखिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में पूरे उत्तर प्रदेश में ट्रायल कोर्ट्स ने 20 मामलों में कुल 28 मौत की सजाएं सुनाई थी। जबकि जज दिवाकर ने अकेले 2026 के 4 महीनों में 22 मौत की सजा सुना दी और अब यह संख्या 23 हो गई है।