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भारत से लड़ेगा ईरान ? चीन-पाक की दोहरी साजिश!

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इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सीधे मिडिल ईस्ट के ज़ोन यानी हरमूज स्टेट से आ रही है। खबर है कि ईरान ने उस संक्रे समुद्री रास्ते में एक भारतीय जहाज को निशाना बनाया है।इस हमले ने ना केवल दिल्ली के गलियारों में खलबली मचा दी है बल्कि भारतीय नौसेना को भी हाई अलर्ट पर डाल दिया है। एक तरफ तो पूरी दुनिया ईरान और अमेरिका के बीच जारी 15 दिनों के नाजुक पर नज़रें टिकाए बैठी थी। वहीं ईरान की इस गुस्ताखी ने भारत को एक ऐसी स्थिति में ला खड़ा कर दिया है जहां से वापसी का रास्ता सीधा युद्ध के मैदान की ओर जाता दिख रहा है।

आज हम विश्लेषण करेंगे कि क्या भारत अब ईरान के खिलाफ कोई बड़ा एक्शन लेगा? क्या दोस्ती के पुराने दावों के बीच पीठ में घोंपा गया है? साथियों, स्टेट ऑफ हार्मोस वो समुद्री रास्ता जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है।

यह भारतीय जहाज इराक से तेल और गैस लेकर भारत आ रहा था जिसे ईरानी नौसेना की परमिशन भी मिली हुई थी। फिर भी हमला किया गया। गनीमत रही कि हमारे किसी नाविक की जान नहीं गई।लेकिन जहाज को भारी नुकसान पहुंचा है। सवाल यह है कि जब भारत और ईरान के रिश्ते हमेशा से संतुलित रहे हैं तो फिर भारत के जहाज को क्यों निशाना बनाया गया? इस हमले के बाद नई दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल ने इस स्थिति को असहनीय करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने तुरंत ईरानी राजदूत को तलब कर दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। भारत के गुस्से के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला सुरक्षा की गारंटी। यानी अगर भारतीय जहाज सुरक्षित नहीं है तो भारत की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।दूसरा धोखा यानी भारत ने हमेशा चाबहार कोर्ट के जरिए ईरान की मदद की है। इस हमले को भारत के सामरिक हितों पर प्रहार माना जा रहा है।

तीसरा अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा। यानी अगर भारत इस हमले का जवाब नहीं देता है तो यह वैश्विक मंच पर उसकी मजबूती पर सवाल खड़े करेगा।अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारत का काउंटर स्ट्राइक कैसा होगा। जानकारों की मानें तो भारत के पास तीन रणनीतिक रास्ते खुले हैं। पहला विकल्प है आक्रामक समुद्री स्कॉट यानी भारतीय नौसेना अब अपने डिस्ट्रयर्स और फ्रीग्रेड्स को हरमूस में तैनात कर सकती है।अब से हर भारतीय जहाज के साथ नौसेना के भी साथ चलेंगे। अगर फिर से किसी ईरानी बोट ने पास आने की कोशिश की तो नौसेना को ओपन के आदेश दिए जा सकते हैं। दूसरा विकल्प है कूटनीतिक और आर्थिक । यानी भारत चाबहार प्रोजेक्ट पर काम रोक सकता है और ईरान से होने वाले दूसरे व्यापारिक समझौते को ठंडे बस्ते में डाल सकता है। ईरान के लिए यह एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका होगा।तीसरा विकल्प है अज्ञात जवाबी कारवाई यानी भारत हमेशा सीधी जंग के बजाय पिन पॉइंट एक्शन में ही विश्वास रखता है।

साइबर अटैक या खुफिया ऑपरेशंस के जरिए भी ईरान को उसकी औकात बताई जा सकती है। यहां एक बड़ा ट्विस्ट है जहां एक तरफ भारतीय जहाज पर हमला हुआ है। वहीं दूसरी तरफ चीन के प्रतिबंधित जहाज रिचरी को बिना किसी रोक-टोक के हार्मोंस पार करने दिया गया।क्या चीन ईरान को भारत के खिलाफ रहा है? डोन्ड ट्रंप ने पहले ही हारमूस की नाकेबंदी कर रखी है। अगर भारत और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो ट्रंप इसका फायदा उठाकर ईरान पर सीधा हमला बोल सकते हैं। भारत इस वक्त एक बहुत ही पतली लकीर पर चल रहा है। वो नहीं चाहता कि मिडिल ईस्ट में एक और नया फ्रंट खुले।लेकिन वो अपने नागरिकों और संपत्ति की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर का समझौता नहीं कर सकता है। ईरान को यह याद रखना होगा कि आज का भारत अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर भी अपने हितों की रक्षा करना जानता है। अगर शांति की भाषा ईरान को समझ नहीं आती तो भारत को शक्ति का इस्तेमाल करने में देर नहीं लगेगी।आपको क्या लगता है? क्या भारत को ईरान के खिलाफ कड़ा सैन्य कदम उठाना चाहिए या फिर यह बातचीत से सुलझाना चाहिए? क्या आपको लगता है कि इस हमले के पीछे चीन का हाथ है?

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