क्या आप भी विदेश घूमने का सपना देखते हैं? लेकिन कम बजट खाली जेब और व्यस्त दिनचर्या आपको लंबी छुट्टियां लेने का मौका नहीं देती। तो यह वीडियो आपके लिए ही है। क्योंकि आज हम आपको भारत के ऐसे आठ शहरों के बारे में बताने वाले हैं जो अपनी खूबसूरती, संस्कृति और मशहूर पर्यटन स्थलों की वजह से कई विदेशी देशों जैसे दिखाई देते हैं। इनमें एक ऐसा शहर भी शामिल है जिसे वेनिस का जुड़वा भाई कहा जाता है। तो आखिर यह शहर कौन-कौन से हैं और किन देशों की याद दिलाते हैं? आइए जानते हैं और कोशिश करते हैं कि विदेश जैसा मजा अपने ही देश में कम खर्च में और ज्यादा मनोरंजन के साथ लिया जा सके। तो फिर इंतजार किस बात का? अपनी सीट बेल्ट कस लीजिए
और निकल पड़िए इस शानदार डिजिटल सफर पर। नंबर वन है गुलम्ग यानी भारत का स्विट्जरलैंड। बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़, चारों तरफ फैली हरियाली, हरे-भरे मैदान, अल्पाइन जंगल, साफ बहता पानी, छोटे-छोटे गांवों की खूबसूरती और चमचमाती सड़कें। अगर आपको लग रहा है कि हम स्विट्जरलैंड की बात कर रहे हैं तो आप गलत हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं जम्मू कश्मीर में बसे खूबसूरत शहर गुलमर्ग की। गुलम्ग नाम का अर्थ होता है फूलों का मैदान और यह जगह सच में अपने नाम को पूरी तरह साबित करती है। फूलों और प्राकृतिक सुंदरता से सजा यह शहर ऐसा लगता है मानो किसी खूबसूरत गुलदस्ते को धरती पर उतार दिया गया हो। यही वजह है कि यहां आने वाले पर्यटक कम खर्च में स्विट्जरलैंड जैसा अनुभव लेते हैं। करीब 180 वर्ग कि.मी. में फैला गुलमर्ग अपने मनमोहक नजारों से स्विट्जरलैंड को भी चुनौती देता है। जिस तरह स्विट्जरलैंड अपने स्की रिसोर्ट्स, स्विस आल्प्स और रोमांचक गतिविधियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उसी तरह गुलम्ग भी स्किंग, आइस स्केटिंग और स्नो बोर्डिंग जैसे विंटर स्पोर्ट्स के लिए जाना जाता है। यहां की सबसे लोकप्रिय गतिविधि गोंडोला राइड है। जिसे एशिया की सबसे बड़ी केबल कार राइड्स में गिना जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं
जैसे यूरोप की सबसे बड़ी अल्पाइन झील ले जिनेवा स्विट्जरलैंड की पहचान मानी जाती है। वैसे ही कश्मीर की डल झील भी यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। डल झील हो या लेख जिनेवा दोनों जगहों पर साफ पानी ऊंचे पहाड़ों के मनमोहक दृश्य और बोटिंग का शानदार अनुभव मिलता है। वहीं शिकारी की सवारी के लिए डल झील पूरी दुनिया में मशहूर है। जिस तरह लेक जिनेवा के आसपास ऐतिहासिक इमारतें, ग्रैंड थिएटर और ओपेरा हाउस जैसे सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं। उसी तरह डल झील के पास स्थित मुगल गार्डन भी अपनी खास पहचान रखते हैं। यहां आप निषाद बाग, शालीमार गार्डन, नसीम बाग और चश्मा-ए शाही जैसी खूबसूरत जगहों की यादगार सैर कर सकते हैं। अगला नाम है पुडुचेरी यानी भारत का फ्रांस। अगर आप बंगाल की खाड़ी के किनारे बसे किसी शहर में फ्रेंच संस्कृति, फ्रेंच भाषा और हर तरफ फ्रांस का असर देखें तो उसे फ्रांस समझने की भूल मत कीजिए क्योंकि यह है पुुडुचेरी जिसे पहले पंडिचेरी कहा जाता था। आज यह भारत के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की राजधानी है। पुुडुचेरी को भारत का फ्रेंच रिवेरा, लिटिल फ्रांस और फ्रांस की डुप्लीकेट सिटी तक कहा जाता है। यहां समुद्र तटों से लेकर स्वादिष्ट भोजन तक औपनिवेशिक गलियों
से लेकर फ्रांसीसी वास्तुकला तक हर जगह फ्रांस की झलक दिखाई देती है। करीब 492 वर्ग कि.मी. में फैले इस शहर का नाम भी यहां रहने वाले फ्रांसीसी तमिल लोगों ने रखा था। जिसका अर्थ था नया शहर। इस शहर का इतिहास भी 1673 ईस्वी में फ्रांसीसियों के आगमन के साथ शुरू हुआ था। यही कारण है कि उस समय जहां फ्रांसीसी लोग यहां की पहचान थे, वहीं आज भी फ्रांसीसी मूल के कई भारतीय नागरिक यहां खुशी-खुशी रहते हैं और पुडुचेरी को मिनी फ्रांस का दर्जा दिलाते हैं। यहां बोली जाने वाली भाषाओं में फ्रेंच भी शामिल है जिसे आज भी कई लोग इस्तेमाल करते हैं। फ्रेंच क्वार्टर जिसे वाइट टाउन के नाम से जाना जाता है। फ्रांसीसी औपनिवेशिक वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। इसके अलावा यहां मौजूद कई चर्च भी ऐसा एहसास कराते हैं मानो आप किसी विदेशी देश में घूम रहे हो। तीसरे नंबर पर है खजियार यानी एक और स्विट्जरलैंड। खूबसूरती के मामले में खजियार ने भी स्विट्जरलैंड को जबरदस्त टक्कर दी है।
अगर यूरोप के पास एक स्विट्जरलैंड है तो भारत को प्रकृति ने दो-दो स्विट्जरलैंड जैसी जगहों का तोहफा दिया है। पहला गुलम्ग और दूसरा खजियार जो हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित है। यह एक छोटा लेकिन बेहद सुंदर हिल स्टेशन है। जहां कटोरे जैसी आकृति वाले मैदानों के चारों ओर फैले घने देवदार और चीड़ के जंगल बिल्कुल स्विट्जरलैंड के आल्प्स क्षेत्र की याद दिलाते हैं। यहां के हरेभरे घास के मैदान ना सिर्फ इसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं बल्कि पर्यटकों को ऐसा अनुभव देते हैं जैसे वे किसी मुलायम हरे कालीन पर चल रहे हो। जहां तक नजर जाती है वहां सिर्फ हरियाली और पहाड़ दिखाई देते हैं। बिल्कुल स्विट्जरलैंड के पहाड़ी इलाकों की तरह खजियार ग्राउंड यहां की सबसे खास जगहों में से एक है। इसे देखकर कई बार लोगों को यकीन ही नहीं होता कि वे भारत में है या स्विट्जरलैंड में। चारों तरफ देवदार के पेड़ों से घिरा और हरी घास से ढका यह मैदान बेहद आकर्षक लगता है। यहां आने वाले पर्यटक घुड़सवारी और पैराग्लाइडिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भरपूर आनंद लेते हैं। वहीं सर्दियों के मौसम में जब पूरा खजियार बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है तो यह नजारा बिल्कुल स्विट्जरलैंड जैसा दिखाई देता है। अगला है कुर्ग यानी भारत का स्कॉटलैंड। क्या आपने कभी भारत के स्कॉटलैंड के बारे में सुना है? अगर नहीं तो कर्नाटक के पहाड़ी इलाकों में बसा कुर्ग आपके लिए किसी सरप्राइज़ से कम नहीं है। भले ही यह भारत का हिस्सा हो लेकिन इसकी हरी-भरी वादियां, ऊंची-नीची पहाड़ियां, कॉफी के विशाल बागान, चारों तरफ फैली प्राकृतिक सुंदरता और शांत माहौल इसे स्कॉटलैंड जैसा एहसास देते हैं।
खासकर यहां के कॉफी स्टेट्स से ढकी पहाड़ियां तो मानो सीधे स्कॉटलैंड की घाटियों की तस्वीर पेश करती हैं। यही वजह है कि लोग इसे अक्सर भारत का स्कॉटलैंड कहते हैं। इस समानता की पहली वजह है यहां की संस्कृति। कुर्ग में नव वर्ष, ईस्टर और मकर संक्रांति जैसे कई त्यौहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। लेकिन जब यहां के लोग अपने पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं तो उनका पहनावा काफी हद तक स्कॉटिश पोशाक से मिलताजुलता नजर आता है। यही नहीं यहां के कुछ व्यंजनों में भी स्कॉटिश भोजन की झलक देखने को मिलती है। अगर मौसम की बात करें तो दोनों जगहों के बीच काफी समानता दिखाई देती है। जिस तरह स्कॉटलैंड अपनी ठंडी और सुहावनी जलवायु के लिए मशहूर है। उसी तरह कुर्ग का मौसम भी साल भर लोगों को आकर्षित करता है। यहां कभी खिली धूप तो कभी हल्की फुहारे माहौल को और भी खूबसूरत बना देती हैं और अगर इसी मौसम में धुंध से ढकी पहाड़ियों के बीच लंबी पैदल यात्रा का मजा मिल जाए तो यह सफर जिंदगी भर याद रहता है। यहां के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में राजा सीट गार्डन, मल्लाली वाटरफॉल और ओंकारेश्वर मंदिर रोड जैसी जगह शामिल हैं। अब बात करते हैं अलिपी की जिसे भारत का वेनिस कहा जाता है। वेनिस को दुनिया का तैरता हुआ शहर कहा जाता है। जहां सड़कों की जगह नहरे दिखाई देती हैं और लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए कार या बाइक नहीं बल्कि नाव का इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के लोग वेनिस घूमने का सपना देखते हैं। लेकिन अगर बजट आपको वहां जाने से रोक रहा है तो अलेप्पी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। केरल में स्थित अलेप्पी को पूर्व का वेनिस और भारत का वेनिस जैसे नामों से जाना जाता है। भले ही यह भारत में है, लेकिन इसकी झलक काफी हद तक वेनिस से मेल खाती है। यहां की नहरे, बैक वाटर और हाउसबोट्स इस शहर को खास बनाते हैं। वेनिस की नहरें और अलेप्पी के बैक वाटर दोनों ही पानी के रास्तों का शानदार उदाहरण है और दोनों की सुंदरता का मुख्य आकर्षण भी यही है।
वहीं वेनिस की गोंडोला और अलेप्पी की हाउसबोट्स भी काफी हद तक एक जैसी लगती हैं। यह ना सिर्फ पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों को भी पानी के रास्ते सफर करने का मौका देती हैं। शांत पानी पर चलती नावों से शहर को देखना अपने आप में एक अलग ही अनुभव होता है। जिस तरह वेनिस अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों को अपनी ओर खींचता है। उसी तरह अलेप्पी भी कई शानदार जगहों का घर है। इनमें कुटनाड बैक वाटर सबसे खास माना जाता है। इसे चावल का कटोरा भी कहा जाता है। यह एक अनोखी जगह है जहां समुद्र तल से लगभग 2 मीटर नीचे खेती की जाती है। छठे नंबर पर है शिलॉन्ग यानी पूर्व का स्कॉटलैंड। भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित शिलांग एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है और साथ ही मेघालय की राजधानी भी है। इसे प्यार से पूर्व का स्कॉटलैंड कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां की प्राकृतिक सुंदरता। चारों ओर फैली पहाड़ियां साल भर बरसते बादल और हरियाली से भरा वातावरण इस शहर को बेहद खास बना देते हैं। शिलांग चारों तरफ से लहरदार पहाड़ियों से घिरा हुआ है जो स्कॉटलैंड के मनमोहक पहाड़ी इलाकों की याद दिलाती हैं। जब धुंध और बादल धीरे-धीरे इन पहाड़ियों को अपनी चादर में समेट लेते हैं तो इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है और स्कॉटलैंड से इसकी समानता साफ नजर आने लगती है। सिर्फ प्राकृतिक नजारे ही नहीं बल्कि यहां की संस्कृति भी इसे अलग पहचान देती है। जिस तरह स्कॉटिश लोग अपनी विरासत को सहेज कर रखते हैं, उसी तरह शिलंग की मूल जनजातियां भी अपनी परंपराओं पर गर्व करती हैं और समय-समय पर लोक प्रस्तुतियों के जरिए उन्हें जीवित रखती हैं। यहां का संगीत, नृत्य और कला पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। आदिवासी त्यौहार और पारंपरिक हस्तशिल्प शिलॉन्ग को ऐसी पहचान देते हैं जो स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से मेल खाती है। स्कॉटलैंड और शिलॉन्ग दोनों ही अपने शानदार झरनों के लिए मशहूर हैं। अनगिनत झीलों और झरनों से घिरा शिलोंग भी बिल्कुल स्कॉटलैंड जैसी प्राकृतिक खूबसूरती पेश करता है। यहां की झीलें और झरने किसी भी पर्यटक को स्कॉटलैंड की याद दिलाने के लिए काफी हैं।
अब बात करते हैं कच्छ के रण की जो अमेरिका के यूटा जैसा दिखाई देता है। दूर-दूर तक फैली सफेद नमक की चादर से ढका कच्छ का रण गुजरात के कच्छ जिले का सबसे बड़ा आकर्षण है। इसकी खूबसूरती को देखकर ही बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा था, “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। मीलों तक फैली सफेदी इसे किसी बर्फीली धरती जैसा रूप देती है और यही वजह है कि इसे अमेरिका के यूटा राज्य का डुप्लीकेट भी कहा जाता है। कच्छ का रण और यूटा के नमकीन मैदान देखने में काफी हद तक एक जैसे लगते हैं। इसी कारण कई लोग रण ऑफ कच्छ को यूटा का जुड़वा भाई भी कहते हैं। दोनों ही जगहों पर नमक की मोटी परत जमी हुई है जो उन्हें सफेद मैदानों का रूप देती है। इतना ही नहीं दोनों क्षेत्रों का विशाल फैलाव भी काफी हद तक समान दिखाई देता है। खुला आसमान, दूर-दूर तक फैला शांत वातावरण और सुकून भरा नजारा इन दोनों जगहों को और भी खास बना देता है।
यही कारण है कि हर साल हजारों पर्यटक इनकी खूबसूरती देखने दूर-दूर से पहुंचते हैं। अब बारी है ओली और ऑस्ट्रिया की। औली उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक छोटा सा हिल स्टेशन है। लेकिन इसकी खूबसूरती की चर्चा आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक होती है। इसकी तुलना अक्सर ऑस्ट्रिया से की जाती है क्योंकि दोनों जगहों में कई समानताएं देखने को मिलती हैं। सबसे बड़ी समानता है पहाड़ और स्किंग। ऑस्ट्रिया अपने शानदार पर्वतीय दृश्यों और स्किंग गतिविधियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। वहीं ओली भी लोगों को बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच स्किंग का शानदार अनुभव देता है। दोनों जगहों पर स्किंग के साथ-साथ स्नो बोर्डिंग और कई रोमांचक गतिविधियां भी पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं। सिर्फ एडवेंचर ही नहीं बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के मामले में भी ओली किसी से कम नहीं है। दिसंबर से मार्च तक पूरा ओली बर्फ की सफेद चादर में ढक जाता है। चारों ओर फैली धुंध और बर्फ इसे किसी सपनों की दुनिया जैसा बना देती है। ठीक इसी तरह ऑस्ट्रिया में भी सर्दियों के मौसम में कड़ाके की ठंड पड़ती है और भारी बर्फबारी के कारण पूरा इलाका सफेद रंग में रंग जाता है। तो अब बताइए इन डुप्लीकेट शहरों में से आप सबसे पहले किस जगह घूमना पसंद करेंगे और अगर आप इनमें से किसी शहर की यात्रा कर चुके हैं तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो पसंद आई हो तो लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें। धन्यवाद।