नमस्कार आप देख रहे हैं न्यूज़ 18 का डिजिटल प्लेटफार्म। मैं हूं आपके साथ सृष्टि शेखर। दुनिया की अर्थव्यवस्था की धड़कन कहे जाने वाले स्टेट ऑफ हॉरर्मच को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें लगातार जारी है।
लेकिन इसी बीच तेहरान ने इस बेहद अहम समुद्री मार्ग को लेकर ऐसा प्रस्ताव रखा है जिसने वैश्विक व्यापार जगत और ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी है। ईरान अब दावा कर रहा है कि वह हॉर्मोज स्टेट से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल टैक्स नहीं वसूलेगा। लेकिन इसके साथ ही उसके नई एक नई व्यवस्था का संकेत दिया है। जिसके तहत जहाजों को नेविगेशन, समुद्री सुरक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवाओं के बदले शुल्क देना होगा। ईरान के उपदेश मंत्री काजीम गरीबादी का कहना है कि हॉर्न स्टेट ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में स्थित है और इसलिए दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत इसके प्रबंधन और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने का अधिकार है।
उनका दावा यह भी कि प्रस्तावित शुल्क केवल सेवाओं के बदले होगा और ना कि मार्ग से गुजरने की अनुमति के बदले। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में सर्विस फीस है या फिर टोल टैक्स का नया दाम। दरअसल मई 2026 में ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। जिसमें अमेरिकी और इजराइली हितों में जुड़े जहाजों पर $20 लाख तक का ट्रांजिट शुल्क लगाने की बात कही गई थी और इस प्रस्ताव ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी थी। कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। बढ़ते दबाव और आलोचना के बाद अब ईरान ने अपनी भाषा बदल दी है। टोल की जगह नेविगेशनल फीस और सर्विस चार्ज जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि नाम बदलने से व्यवस्था की प्रकृति नहीं बदल जाती। हॉर्न स्टेट की अहमियत को समझना जरूरी है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। युद्ध और तनाव शुरू होने से पहले यहां पे हर दिन 120 से 140 जहाज यहां से गुजरते थे। इनमें लगभग आधे तेल टैंकर होते थे जो रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचाते थे। यही वजह है कि हॉरमुज में होने वाला कोई भी बदलाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहता बल्कि इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग लागत और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसी बीच ईरान ने पर्शियन गल्फ स्टेट अथॉरिटी यानी कि पीजीएसए का नाम की नई संस्था भी बनाई है जो इस समुद्री मार्ग की निगरानी करेगी और जहाजों को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराएगी। अब हालांकि अमेरिका ने इस संस्था को लेकर कहा कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि पीजीएसए का संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्डको कॉप्स यानी आईआरजीसी से है और इसके जरिए जुटाया गया राजस्व सैन्य गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है।
इसी आधार पर अमेरिका ने संस्था पर आतंकवाद रोधी प्रतिबंध लगा दिया है। इस पूरे विवाद में ओमान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के बावजूद ओमान ईरान के साथ संवाद बनाए हुए हैं। मस्कट का कहना है कि वो किसी टोल व्यवस्था का समर्थन नहीं करता बल्कि ऐसा ढांचा चाहता है जो इंटरनेशनल समुद्री कानून और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी है कि ईरान की प्रस्तावित नेविगेशनल फीस वास्तव में सेवाओं के बदले लिए जाने वाला शुल्क साबित है या फिर यह टोल टैक्स की नई पैकेजिंग है क्योंकि हॉर्मोज स्टेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार का सबसे संवेदनशील गलियारा है और इसी वजह से यहां लिया गया फैसला पूरी दुनिया की इकॉनमी को प्रभावित करने की क्षमता भी रखता है। अब देखने वाली बात होगी आगे इसमें क्या रुख अपनाया जाता है और किस तरीके से जो बाकी देश है वह इसे देखते हैं। अपडेट्स के लिए आप देखते रहिए न्यूज़ 18, नमस्कार।