28 फरवरी को शुरू हुई ईरान और होमोस्टेड बंद होने के बाद दुनिया अब बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों में महंगाई बढ़ रही है। उड़ाने कम हो रही हैं और सरकारों को सख्त फैसले लेने पड़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी आईईए के मुताबिक यह इतिहास का सबसे बड़ा वैश्विक ऊर्जा संकट बनता जा रहा है।
60 से ज्यादा देशों ने करीब 200 नीतियां लागू की हैं ताकि ईंधन बचाया जा सके और आम लोगों पर असर कम हो। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जनता से अपील की कि ईंधन का इस्तेमाल कम किया जाए। विदेश यात्रा टालें। सोना खरीदना रोके। पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें। वर्क फ्रॉम होम अपनाएं और किसान केमिकल फर्टिलाइजर पर निर्भरता घटाएं। नेचुरल फार्मिंग करें। जंग की वजह से एक समय ब्रैंड क्रूड $120 प्रति बैरल तक पहुंच चुका है।
जबकि एशियाई देशों ने अपना बजट $70 प्रति बैरल मानकर बनाया था। भारत में इस वक्त सब्सिडी देकर सरकार पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर रख रही है। लेकिन तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 33 करोड़ घरों को खाना पकाने की गैस देने के लिए फर्टिलाइजर प्लांट्स की सप्लाई 30% कम की गई है। अब हर देश अपने-अपने तरीके से इस संकट से लड़ रहा है। आइए जानते हैं इस संकट से निपटने के लिए अलग-अलग देशों ने क्या-क्या कदम उठाए हैं।
फिलीपींस ने ईंधन बचाने के लिए 4 दिन का वर्क वीक लागू कर दिया है। गरीब परिवारों को सब्सिडी भी दी गई है। लेकिन ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण कारोबार और बाजार की रफ्तार [संगीत] धीमी पड़ गई है। थाईलैंड ने डीजल पर दी जा रही सरकारी सब्सिडी खत्म कर दी क्योंकि सरकार का फंड खत्म हो गया था। अब सरकार दूसरे खर्चों में कटौती कर रही है। थाईलैंड ने मई तक रसोई गैस की कीमतें स्थिर रखने का फैसला किया है और बायोडीजल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देने की योजना बनाई है।
अब बताते हैं वियतनाम ने क्या कदम उठाए हैं। वियतनाम ने ईंधन टैक्स में छूट दी है लेकिन जेट फ्यूल की कमी की वजह से उड़ाने कम करनी पड़ी। इससे पर्यटन उद्योग पर असर पड़ा जो देश की जीडीपी का करीब-करीब 8% है। वियतनाम ने तेल की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए अपने फ्यूल प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड का इस्तेमाल किया है। केंद्रीय बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह बैंकों के जरिए ईंधन व्यापारियों को ज्यादा कर्ज दें ताकि वह अधिकतेल खरीद पाएं। जापान ने क्या फैसला लिया है? अब आपको बताते हैं।
जापान पहले अपनी 95% तेल जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी करता था। अब उसने अमेरिका से तेल खरीदना शुरू किया है। लेकिन इसकी शिपिंग लागत [संगीत] और समय दोनों ज्यादा है। जापान ने मार्च में ऑयल रिजर्व से 8 करोड़ बैरल तेल भी रिलीज किया था। पाकिस्तान के क्या कदम है वो भी समझिए। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। मई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 414.78 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर हो चुकी है। वहीं हाईस्पीड डीजल 414.58 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर में मिल रहा है।
पाकिस्तान में बीते 3 महीने में पेट्रोल डीजल के दाम में लगभग 64% का इजाफा हुआ है। पाकिस्तान सरकार ने 4 दिन का वर्क वीक लागू किया है। आधे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दिया गया है। स्कूल कॉलेज भी दो हफ्ते के लिए बंद [संगीत] किए गए थे। चीन की तरफ से क्या कदम उठाए गए हैं? अब इस बात को समझिए। चीन ने ईंधन और उर्वरक निर्यात सीमित [संगीत] कर दिया है ताकि देश के अंदर सप्लाई बनी रहे। चीन ने मार्च महीने में ही पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे रिफाइंड ईंधन के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इधर इंडोनेशिया ने एलएनजी निर्यात रोक दिया और घरेलू बाजार को प्राथमिकतादी।
इसके साथ ही देश B50 बायोडीजल प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इसमें 50% पाम ऑयल से बने बायोडीजल और 50% सामान्य [संगीत] डीजल को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। जिससे पारंपरिक तेल पर निर्भरता कम होती है। और बांग्लादेश ने ईंधन खरीद की सीमा भी तय कर दी है। विश्वविद्यालय बंद किए हैं। ऑयल डिपो पर सेना तैनात की है। एलपीजी सिलेंडरकी कीमत 900 टका से बढ़ाकर 1500 टका हो गई है। गमेंट इंडस्ट्री का उत्पादन 30 से 40% तक घट चुका है।
अब बता दें नेपाल में क्या किया गया है। नेपाल ने फैसला लिया है कि खाली एलपीजी सिलेंडर में सिर्फ आधी गैस भरी जाएगी ताकि स्टॉक लंबे समय तक चल सके। सरकार ने मार्च में ही रसोई गैस यानी एलपीजी की राशनिंग शुरू कर दी है। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने 13 मार्च 2026 से 14.2 किलो वाले सिलेंडर में सिर्फ 7.1 किलो गैस भरने का फैसला किया है।
बात अब अमेरिका की कर लेते हैं। अमेरिका की तरफ से तेल निर्यात बढ़ाया गया है। लेकिन देश में पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अप्रैल में अमेरिका का तेल निर्यात 1.29 करोड़ बैरल प्रति दिन था। ईरान की बढ़ती कीमतों की वजह से यहां स्पिरिट एयरलाइंस ने ऑपरेशन बंद कर दिया है।
अमेरिका ने फ्यूल प्राइस कंट्रोल करने के लिए अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने को कहा है। यूरोप को खाड़ी से जेट फ्यूल मिलना बंद होने के बाद अमेरिका पर निर्भर होना पड़ा है। महंगाई बढ़ने लगी तो कई देशों ने राहत पैकेज दिए। [संगीत] जर्मनी और इटली समेत आठ देशों ने कोयला संयंत्र बंद करने की योजना टाल दी है। तो कुल मिलाकर यूएनडीपी के मुताबिक इस संकट से एशिया प्रशांत क्षेत्र को करीब 299 अरब डॉलर यानी लगभग 29.9 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। करीब 88 लाख लोग गरीबी की तरफ जा सकते हैं।