जब संडे बना करियर का टर्निंग पॉइंट, फिरोज खान ने शूटिंग से किया इंकार और अमिताभ बच्चन की झोली में आ गई ब्लॉकबस्टर फिल्म। हिंदी सिनेमा की चमक-दमक के पीछे कई ऐसे किस्से छिपे होते हैं जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं होते। यह कहानी भी एक ऐसे सुपरस्टार की है जिसने अपने उसूलों के लिए सफलता को ठुकरा दिया और वही फैसला आज भी लोगों को चौंका देता है।
जब मूड ही पहचान बन गया। हम बात कर रहे हैं फिरोज़ खान की। एक ऐसा नाम जिसकी स्टाइलिश स्क्रीन प्रेजेंस और बेबाक अंदाज ने 70-80 के दशक में बॉलीवुड पर अलग ही छाप छोड़ी। फिरोज खान सिर्फ एक्टर ही नहीं बल्कि एक शानदार डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी थे जो अपने फैसले खुद लेते थे और उन पर अडिग रहते थे। एक उसूल जिसने बदल दी किस्मत फिरोज खान का एक सख्त नियम था। वह संडे के दिन काम नहीं करते थे। आज के दौर में यह एक छोटी बात लग सकती है।
लेकिन उस समय जब इंडस्ट्री में हर दिन कीमती होता था। यह फैसला बड़ा माना जाता था। इसी उसूल की वजह से उन्होंने एक ऐसी फिल्म ठुकरा दी जो बाद में इतिहास बन गया। हेराफेरी का ऑफर और ठुकरा दिया मौका। 70 के दशक में मशहूर फिल्म मेकर प्रकाश मेहरा अपनी फिल्म हेराफेरी का ऑफर लेकर फिरोज़ खान के पास पहुंचे। कहानी उन्हें पसंद आई। रोल भी दमदार था।
सब कुछ ठीक लग रहा था। लेकिन जैसे ही शूटिंग की डेट की बात आई मामला पलट गया। प्रकाश मेहरा ने बताया कि शूटिंग रविवार को शुरू होगी। बस यही वो पल था जिसने इतिहास बदल दिया। फिरोज खान ने साफ कहा मैं रविवार को काम नहीं करता और उन्होंने फिल्म करने से इंकार कर दिया। मौका गया और इतिहास बन गया। इसके बाद यह फिल्म पहुंची अमिताभ बच्चन के पास। 1976 में रिलीज हुई हेराफेरी जबरदस्त हिट साबित हुई और बिग वी के करियर के यादगार फिल्मों में शामिल हो गई।
लोगों ने कहा फिरोज़ खान ने अपनी ज़िद में एक बड़ी गलती कर दी। लेकिन सच यह भी है कि उन्होंने अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया। उसूल या ज़िद फैसला आपका। फिरोज खान का यह फैसला आज भी बहस का विषय है। क्या उन्होंने एक सुनहरा मौका गवा दिया या फिर अपने सिद्धांतों को सबसे ऊपर रखकर एक मिसाल कायम की? सिनेमा की दुनिया में जहां लोग सफलता के लिए हर समझौता कर लेते हैं, वहां फिरोज खान जैसे कलाकार कम ही मिलते हैं। जो कहते हैं काम बाद में उसूल पहले और शायद यही वजह है कि वह सिर्फ स्टार नहीं बल्कि एक अलग सोच वाले इंसान के रूप में आज भी याद किए जाते हैं।