और तेरे को बोला था ना लड़की का नाम तक नहीं लेने का। झील सी गहरी आंखों में तेरी आ डूब जाऊं सनम। साले। आज हम बात करेंगे उस एक्टर की जिसे एक्टर कहने के लिए भी सोचना पड़ता है। वो कलाकार जिसका नाम लेते ही मेला का शंकर दिमाग में आ जाता है। साला तेरी जात का पैदा मारूं साले शंकर शाने ट्रक ड्राइवर तू समझता क्या अपने को? जो आज भी सदमे में है और आमिर खान को कोसता रहता है। लेकिन मैं अपने कुत्ते का नाम आमिर कभी नहीं रखूंगा क्योंकि डॉग जो होता है इसमें ये क्वालिटीज होती हैं। इंटेलिजेंट एंड आई थिंक आमिर हैज़ नन ऑफ़ दोज़ क्वालिटीज। गजब बेेज्जती है। तो हम बात कर रहे हैं मेला फिल्म के शंकर और आमिर खान के छोटे भाई फैसल खान की। हंस ले गा ले ये दिन ना मिलेंगे कल थोड़ी खुशियां है। आखिर क्यों जिसकी एक्टिंग मेला में आमिर खान पर भी भारी पड़ गई थी वो कभी एक सफल एक्टर नहीं बन पाया। आखिर क्यों आमिर खान कभी अपने उस भाई की बात तक नहीं करते। फैसल खान ने कितनी फिल्मों में काम किया है? क्या सच में आमिर खान अपने ही सगे भाई को हीरो नहीं बनने देना चाहते थे? और उसे पागल बनाने के लिए उन्होंने सच में उसे कैद में रखा था। उसके बाद मैं 20 दिन में मेंटल हॉस्पिटल में रहा। जनरल जनरल वार्ड में। फैसल खान से जुड़े वो कौन से सच हैं जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। जानेंगे और भी बहुत कुछ। तो चलिए शुरू करते हैं। तेरी आशिकी में दिल तो क्या हम जा भी लुटा दें। फैसल खान का जन्म 3 अगस्त 1966 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम ताहिर हुसैन था जो एक फिल्म प्रोड्यूसर थे और इन्हीं के भाई थे नासिर हुसैन जो बॉलीवुड के जानेमाने फिल्म मेकर रहे हैं। ताहिर हुसैन के चार बच्चे थे। दो बेटियां निखत खान और फरहद खान और दो बेटे। बड़े बेटे का नाम आमिर खान और छोटे बेटे का नाम फैसल खान रखा गया था। मतलब आमिर खान फैसल खान के सगे भाई हैं जो उनसे 1 साल बड़े हैं। हालांकि लगते वो छोटे हैं। अरे कौन है? क्या है? मैं कहां हूं? जमीन पे है तू। फैसल खान की पढ़ाई लिखाई मुंबई में ही हुई। वो केवल 3 साल के थे। तभी उन्होंने एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर बॉलीवुड में कदम रख दिया था। मूवी का नाम था प्यार का मौसम और उन्होंने शशि कपूर के बचपन का किरदार निभाया था। इसके बाद जब आमिर खान ने एक हीरो के तौर पर बॉलीवुड में कदम रखा, तो वह कहने लगे पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा। आमिर खान की नाजायज औलाद और गर्लफ्रेंड का जिन 20 साल बाद फिर बाहर आ गया है। बेटा हमारा ऐसा काम करेगा। अब इन फिल्मों को बनाने वाले उनके चाचा जान ही थे। तो इसमें फैसल को भी एक छोटा सा रोल दे दिया गया। मूवी का नाम था कयामत से कयामत तक और आमिर खान के इस मूवी में फैसल खान ने एक छोटे से विलेन का किरदार निभाया था। जिस पर किसी का ध्यान भी नहीं गया कि यह आमिर खान का भाई है। क्या चाहिए तुम्हें? आओ बेबी मां के तेरी बहन काट। इसके बाद आमिर खान की एक और बेहतरीन मूवी आई जो जीता वही सिकंदर और इस मूवी में भी जहां आमिर खान हीरो थे तो वहीं फैसल खान को इतना छोटा रोल मिला था कि लोगों की नजर तक उन पर नहीं टिकी। बड़ी बात यह थी कि जब एक भाई फिल्म का हीरो बन रहा था और खुद चाचा और पापा मिलकर फिल्में बना रहे थे तो फिर फैसल को अच्छे किरदार क्यों नहीं दिए जा रहे थे? मतलब अगर आमिर खान या नासिर हुसैन चाहते तो फैसल खान को भी एक दमदार रोल दे सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुझे सपोर्ट नहीं किया गया था आमिर के थ्रू। और यही कारण था कि जिस फिल्म से आमिर खान हीरो बन रहे थे, उन्हीं फिल्मों में फैसल खान गुमनाम किरदार निभा रहे थे। इसके बाद फैसल खान को समझ में आ गया कि उनका भाई और उनके पापा तो उसे पर्दे पर बड़ा रोल नहीं देंगे तो उन्हें खुद ही काम ढूंढना पड़ेगा और उन्होंने दूसरे फिल्म मेकरों से बात करना शुरू कर दिया और उन्हें किस्मत से मूवी भी मिल गई। मूवी का नाम था मदहोश जिसे विक्रम भट्ट डायरेक्ट कर रहे थे। हम दीवाने कुछ ना माने हार ना तो हम ना जाने। लेकिन यह फिल्म फैसल को सिर्फ इसलिए मिली थी क्योंकि वह आमिर खान के भाई थे जो अब हिट हो चुके थे। लेकिन आमिर खान ने फैसल की फिल्म बनने से साफ मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं पहले स्क्रिप्ट पढूंगा पूरी कहानी जानूंगा और अगर मुझे सब कुछ अच्छा लगा तो ही फैसल आपकी फिल्म में काम करेगा। तेरे मेरे मेरे तेरे बीच है क्या यार आमिर खान चाहते तो खुद के पैसे लगाकर या खुद के दम पर अपने भाई का बॉलीवुड में डेब्यू करवा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उल्टा जब फैसल खान दूसरे डायरेक्टरों के साथ डेब्यू करने वाले थे तो उसमें भी टांग अड़ाने लगे। मधोश की कहानी 4 महीने से भी ज्यादा आमिर खान के पास पड़ी रही और उन्होंने ना तो उसे पढ़ा और ना ही फिल्म शुरू होने दी। पहली बार कहानी सुना सुनाने की बात आई थी मधु के लिए तो आमिर ने चारप महीने टालमटोल कर दी थी। सुन ही नहीं रहे थे कहानी। और जब डायरेक्टर परेशान हो गए तो उन्होंने बिना आमिर खान से पूछे ही मूवी की शूटिंग शुरू कर दी। और इस तरह से 1994 में फैसल खान ने एक एक्टर के तौर पर बॉलीवुड में कदम रखा। तेरा खो गया। है ये क्या बेखदी है यही। लेकिन इस मूवी को बनने में ही बहुत ज्यादा समय लग गया था और फैसल खान की एक्टिंग भी लोगों को उतना प्रभावित नहीं कर पाई। यह मूवी बुरी तरह से फ्लॉप हो गई और पहली ही मूवी फ्लॉप होने से फैसल खान दुखी हो गए। ये तो मुझे बता क्या है मेरी खता? लेकिन इसके बाद उन्हें दूसरी किसी भी मूवी में काम नहीं मिल रहा था। जहां एक तरफ आमिर खान साल में 10-10 फिल्में कर रहे थे तो वहीं फैसल खान को छोटा-मोटा किरदार भी नहीं मिल रहा था। इसके बाद फैसल खान को एक ऐसी मूवी का ऑफर मिला जो उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म होने वाली थी। मूवी का नाम था मेला मेला मेला मेला मेला मेला [संगीत] [प्रशंसा] और इस मूवी में फैसल खान ने अपने ही सगे भाई आमिर खान के साथ काम किया। इस मूवी में निभाया गया उनका शंकर का किरदार आज भी लोग नहीं भूले हैं। पंगा तूने लिया है। नंगा भी तो ही कर। चल जा। यह बिन बादल की बरसात है प्यारे। आज खुद रो रही है। कल तुझे रुलाएगी। इसकी किसी कहानी का कोई भरोसा नहीं समझा। गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है यह। बहुत अत्याचार हुआ है ना तेरे साथ। जाने दो उसे। वो इस वक्त नहीं रुकेगा। मेला बॉलीवुड की एक ऐसी मूवी बनी जो अब कल्ट बन चुकी है और हफ्ते में तीन-चार बार तो टीवी पर आ ही जाती है। लच के रे [प्रशंसा] [संगीत] बच के रे। है। इस मूवी को लोग इतनी बार देख चुके हैं कि अब अगर कोई कहे कि यह फ्लॉप थी, तो कोई मानता भी नहीं है। इस मूवी का सब कुछ हिट था।
फिर चाहे आमिर खान और फैसल की जोड़ी हो। क्या हुआ तुझे? मर गया। ओए शंकर यार मेरे पेट में सर दर्द हो रहा है यार। तेरे पेट में सर दर्द हो रहा है। हां बहुत जोर से जॉनी लीवर की कॉमेडी हो। [संगीत] शराब शराब है बेबिया उसका या फिर गुर्जर सिंह हो। तू गुर्जर का सर्वनाश करेगी। तू गुर्जर का सर्वनाश करेगी। लेकिन सिर्फ एक चीज मूवी में ऐसी थी जो नहीं होनी चाहिए थी। और वह थी मूवी की हीरोइन यानी कि अक्षय कुमार की धर्मपत्नी ट्विंकल खन्ना। तू जिंदा है रूपा तू जिंदा है और तू क्यों जिंदा है रूपा? कौन है ये लोग? जिसका यह रिकॉर्ड था कि अगर उसने मूवी में काम कर लिया तो फिर उस मूवी को फ्लॉप होने से किसी का बाप भी नहीं रोक सकता। मतलब जिसने सलमान खान और शाहरुख खान को भी फ्लॉप फिल्मों की परिभाषा सिखा दी, तो आमिर खान को कैसे छोड़ सकती थीं? इस बेचारी की दुखी दास्तान सुनकर तेरा दिल नहीं भरा है? बेचारी यह बेचारी है। बेचगी तेरे को और मेरे को। दूसरी तरफ अक्षय कुमार की किस्मत भी इस मूवी से जुड़ी हुई थी। उन्होंने ट्विंकल खन्ना से शर्त लगाई थी कि अगर मेला मूवी हिट हो गई तो वो आगे भी फिल्मों में काम कर सकती हैं। और अगर यह मूवी फ्लॉप हो गई तो उन्हें फिल्मों को छोड़कर उनसे शादी करनी पड़ेगी। भगवान भी नहीं चाहते थे कि अक्षय कुमार कुंवारी मरें। इसलिए उन्होंने फिल्म फ्लॉप करवा दी और ट्विंकल खन्ना अक्षय कुमार की गले में वरमाला पहनाकर फिल्मों से दूर हो गई। शी वास वेरी कॉन्फिडेंट कि मेला चलेगी। एंड आई सेड ओके अगर नहीं चली तो शी सेड देन आई विल गेट मैरिड यू। मैं कहता हूं कोई नहीं देखेगा। स्टाइल है बाबू भैया राजू। लेकिन इस मूवी के फ्लॉप होने से सबसे बड़ा नुकसान फैसल खान को ही हुआ और वह बर्बाद हो गए। लेकिन मूवी फ्लॉप होने का असली कारण आमिर खान ही थे। मूवी की शूटिंग के दौरान ही आमिर खान समझ चुके थे कि फैसल का किरदार उन पर भारी पड़ रहा है और उन्हें इस मूवी से ज्यादा फायदा नहीं होने वाला। तो आमिर खान ने मेला को हल्के में लेना शुरू कर दिया और उस पर ध्यान देना ही बंद कर दिया। आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि मेला 1994 में ही बनना शुरू हो गई थी। लेकिन आमिर खान ने इतनी लापरवाही की कि इसे बनते बनते ही 6 साल लग गए। इनफैक्ट एक बार आमिर ने मुझे यह भी कह दिया था कि फैसल फॉरगेट दिस फिल्म वी विल स्टॉप इट। उस दिन मुझे शॉक लगा कि आमिर ऐसा बोल सकता है। चार साल लगना जायज नहीं था उस पिक्चर पे क्योंकि जब तक वो पिक्चर रिलीज़ हुई थी उसका चाम भी चला गया था। आमिर खान अपनी दूसरी फिल्में कर रहे थे लेकिन मेला को भूल चुके थे। उन्होंने फैसल से भी कह दिया था कि तुम यह मूवी भूल जाओ क्योंकि मेला कभी नहीं बन पाएगी और फैसल खान उनसे विनती करते थे कि आप यह मूवी पूरी करवा दीजिए। यह मूवी भले ही फ्लॉप हुई थी, लेकिन इस मूवी में निभाया गया शंकर का किरदार आज भी यादगार है और फैसल खान को लोग आज भी मेला में आमिर खान से भी बेहतर मानते हैं। वाह रे औरत एक ने पहचान लिया तो दूसरे को फंस लिया। किशान, क्या बक रहा है तू? और आमिर खान शायद यही नहीं चाहते थे कि उनका भाई उनकी बराबरी करें। और यही कारण था कि जब यह मूवी शुरू हुई तो 90ज का दशक चल रहा था और जब यह रिलीज हुई तो लोग यह कहने लगे थे देखो जमाना आ गया अच्छा और इस समय तक यह कहानी पुरानी हो चुकी थी और अब लोग डाकुओं की फिल्मों से ऊब चुके थे तो यह मूवी बुरी तरह से फ्लॉप हो गई। फैसल खान ने इस दौरान दूसरी किसी भी मूवी में काम नहीं किया और वह पूरी तरह से मेला पर ध्यान देते रहे और जब यह फ्लॉप हुई तो वह भी टूट गई। आज के समय पर आमिर खान भले ही यह कहते हैं कि वो अपना सब कुछ फैसल को देना चाहते थे। लेकिन अगर ऐसा होता तो क्या वो उसे अपनी बड़ी-बड़ी फिल्मों में एक छोटा सा रोल भी नहीं दिलवा सकते थे। हां, मतलब मुझे इतना सपोर्ट नहीं मिला। जितना कि मिल सकता था। इसके बाद 2 साल तक फैसल को कोई भी काम नहीं मिला और फिर 2002 में उनकी मूवी आई काबू और इस मूवी में फैसल खान का लुक अलग ही लगा। उन्हें देखकर भरोसा ही नहीं हो रहा था कि 2 साल में उनका चेहरा और पर्सनालिटी इतनी कैसे बदल सकती है। काबू मूवी भी बुरी तरह से फ्लॉप हुई और इससे भी फैसल खान को कोई भी फायदा नहीं हुआ। इसके बाद फैजल खान एक मल्टीस्टारर मूवी में दिखाई दिए जिसका नाम था दुश्मनी। तेरी आशिकी में दिल तो क्या हम जान भी लुटा दे और उन्होंने मिथुन दा के साथ काम किया। दुश्मनी मूवी में फैसल खान की एक्टिंग भी लोगों को खूब अच्छी लगी। मूवी के गाने भी ठीक-ठाक रहे और उन्हें देखकर हीरो जैसा फील भी आया। इस मूवी की भी लोगों ने खूब तारीफ की। लेकिन फ्लॉप होने के बाद तेजस्वी लोग हैं हमारे पास। इसके बाद किसी डायरेक्टर ने सस्ते नशे फूंक कर बॉर्डर जैसी फिल्म बनाने का सपना देखा और मूवी आई बॉर्डर हिंदुस्तान का। हम हिंद के वीर सिपाही हिंदुस्तान पे जान लुटा देंगे। यह मूवी भी एक मल्टीस्टारर थी जिसे देखकर बॉर्डर जैसा फील ही आता है। और इस मूवी में भी बॉर्डर मूवी जैसा ही एक गाना भी था। याद आती है। याद आती है। फैसल खान की एक्टिंग भी इस मूवी में अच्छी थी। किसी ने देखी नहीं वो अलग बात है।
100 मीलों से भी लंबी दिलबर तेरी जुदाई। इसके बाद फैसल खान एक और बेहतरीन मूवी में दिखाई दिए जिसका नाम था बस्ती और यह मूवी भी अच्छी थी और फैसल खान की एक्टिंग भी गजब की थी। लेकिन समस्या यह थी कि फैसल खान को कोई बड़ी मूवी नहीं मिल रही थी और वह लो बजट की फिल्में और छोटे-मोटे फिल्म मेकरों के साथ काम करने को मजबूर थी। मदहोशियां है तनहाइयां है बाहों में आओ सजन। बस्ती भी उसी तरह की फिल्म थी जिसका ना तो बजट ज्यादा था और ना ही उसे बनाने वाला कोई बड़ा डायरेक्टर था। और यही कारण रहा कि उनकी फिल्मों पर अब कोई ज्यादा ध्यान ही नहीं दे रहा था और वह बी ग्रेड की फिल्मों में भी काम करने लगे थे। इसके बाद फैसल खान ने एक और मूवी में काम किया जिसका नाम था आंधी। लेकिन यह मूवी कभी पूरी ही नहीं हो पाई। 2005 में फैसल खान की मूवी आई चांद बुझ गया। और इस मूवी में भी फैज़ल खान का काम देखने लायक था, लेकिन किसी ने देखा ही नहीं। चुपके-छुपके दे जाती है प्यार का पैगाम तेरी आंखें। और बुझ गया चांद जैसी फिल्मों में काम करके। उनका कैरियर भी बुझ रहा था। इसके बाद अचानक से फैसल खान कहीं गायब हो गए और ऐसे गायब हुए कि उनका नाम तक लोग भूल गए थे। और पूरे 8 साल वो किसी को नजर भी नहीं आए। और फिर अचानक से एक दिन लोगों के सामने आ गए। लेकिन जब वह लोगों के सामने आए और इसके बाद उन्होंने जो खुलासे किए तो लोग सोच में पड़ गए जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। 2015 में फैसल खान की मूवी आई चिनर दास्ताने इश्क और यह मूवी बहुत अच्छी थी। पहली बार फैसल खान को देखकर मेला वाले शंकर की याद आ गई। मोहब्बत को मोहब्बत से अगर मोहब्बत की जाए। इस मूवी में भी फैसल खान की एक्टिंग अच्छी थी और मूवी की कहानी भी अच्छी थी। लेकिन अब यह वो समय था जब लोगों ने उन्हें एक एक्टर मानना ही बंद कर दिया था। तो यह मूवी भी बुरी तरह से फ्लॉप हो गई। इसके बाद 2021 में फैसल खान ने फिर से हीरो बनने की कोशिश की। मूवी आई फैक्ट्री। सही कहा है किसी महापुरुष ने। औरत को कोई समझ नहीं पाया है। यह मूवी भी एक लो बजट और कमजोर डायरेक्शन का शिकार हो गई और इसने फैसल खान की एक्टिंग पर भी अच्छे से मोत दिया। इसके बाद 2022 में फैसल खान एक साउथ मूवी ओपेंड में भी दिखाई दिए थे। लेकिन इससे भी उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ और अब वह पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं और जैसे तैसे अपनी गुजर-बसरर कर रहे हैं। तो अब हम बात करेंगे फैसल खान से जुड़े विवादों की और उनकी पर्सनल लाइफ की। 2015 में जब फैसल खान 10 साल के बाद दुनिया के सामने आए तो उन्होंने अपने परिवार और आमिर खान के बारे में कई खुलासे किए और आमिर खान पर कई गंभीर आरोप लगाए। मुझे मेंटल हॉस्पिटल में पकड़ के ले गए कोजी क्लीनिक में तो उन्होंने मुझे ड्रग्स देना चाहिए तो मैंने बोला मैं तो लूंगा नहीं। उन्होंने कहा कि आमिर खान ने उन्हें जबरदस्ती कैद करके रखा था और वह उसे पागल बनाने के लिए ड्रग्स भी देते थे। फैसल खान का कहना था कि सन 2002 में उन्हें एक लड़की से प्यार हुआ था। बाद में उनकी शादी भी हो गई। लेकिन उनके परिवार वालों को वह लड़की पसंद नहीं थी और फिर हमारे बीच भी प्रॉब्लम्स होने लगी और कुछ ही महीनों के बाद हमारा तलाक भी हो गया। मैं उस समय बहुत परेशान था। करियर डूब रहा था। जिंदगी में भी कोई मुझे समझाने वाला नहीं था। आमिर खान भी मुझे सपोर्ट नहीं कर रहे थे। तो मैं डिप्रेशन में रहने लगा था। इसी समय पर मेरा परिवार चाहता था कि मैं अपनी ही मौसी से शादी कर लूं। मेरी मां का कहना था कि वह जुबान दे चुकी हैं तो तुम्हें मेरी दूर की बहन से शादी करनी पड़ेगी। धीरे-धीरे उनकी बहनें और आमिर खान उन्हें यह शादी करने के लिए फोर्स करने लगे। जबकि मैं नहीं चाहता था कि मैं अपनी ही आंटी से शादी करूं। तो मेरी फैमिली मुझे बार-बार बोल रही थी कि शादी करो शादी करो शादी करो। तो मैं इतना पक गया था वो सब से और लेकिन वो लोग नहीं माने और मुझे समझाते रहे। मैं फ्रस्ट्रेट हो गया और मैंने अपने परिवार के सभी सदस्यों की शादी के ऊपर एक लेटर लिख दिया। जिसमें मैंने अपने पिता, बहनों, आमिर खान की सभी शादियों और अफेयर्स का खुलासा कर दिया था। मैं यह बताना चाहता था कि जो लोग मुझे शादी का ज्ञान दे रहे हैं,
वह खुद कितने पानी में हैं। तो मैंने सबकी पोल खोल दी। लेकिन मेरा यह कदम किसी को पसंद नहीं आया और इससे नाराज होकर आमिर खान सीधा पुलिस लेकर घर पर आ गए और उसने मुझसे कहा कि फैसल तुम पागल हो चुके हो। इसलिए पुलिस तुम्हें अभी ले जाएगी। तुम अपना अच्छा बुरा नहीं सोच सकते हो। इसलिए मैं तुम्हारी कस्टडी ले रहा हूं। आज के बाद तुम्हारी सारी चीजों पर मेरा कंट्रोल होगा। आमिर ने गलत किया कि उन्होंने ये सब किया मेरे साथ तो उसका भी उनको ऊपर वाला सिला देगा। फैसल खान यह सुनकर घबरा गया। वो पुलिस को भी समझाता रहा कि वो ठीक है। उसे कोई मेंटल प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। यहां तक कि उसकी मां ने भी उसे पागलखाने भेजने के लिए कह दिया। उन्हें जबरदस्ती एक ऐसी जगह पर रखा गया जहां बहुत सारे मानसिक रोगी रहते थे। उन्हें जबरदस्ती दवाईएं दी जाने लगी और इंजेक्शन लगाए जाने लगे। वो मेरे पानी में देने लगे। कि मैं 20-20 घंटा सोने लग गया। तब मुझे पता चल गया कि ये लोग मुझे ड्रग्स दे रहे हैं। फैसल खान समझ गए थे कि आमिर खान उन्हें बर्बाद करना चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि मैं जिंदा रहूं और वह मुझे पागल बनाना चाहते हैं। मैंने डॉक्टरों से भी विनती की कि मैं ठीक हूं। मुझे ऐसी दवाइयां क्यों दी जा रही हैं? तो डॉक्टर उल्टा मुझे डांटते थे और मारते थे। बाद में मुझे पता चला कि इन डॉक्टरों को भी मेरी बहन और आमिर खान ने ही बोला था कि इसे टॉर्चर करना है। डॉक्टर मुझसे बड़ी बदतमीजी से बात करते थे। तो अब डॉक्टर आके आपको ऐसा बोलेगा कि मैं इसकी गुरमी निकालूंगा। गुरमी मराठी वर्ड है। मतलब घमंड तोडूंगा, इसको ईगो ईगो तोड़ दूंगा, प्राइड तोडूंगा तो कैसे चलेगा? यह डॉक्टर कैसा है? यह सिलसिला बहुत लंबा चला और सालों तक फैसल खान यह यातना झेलते रहे और धीरे-धीरे उनका मानसिक संतुलन ही बिगड़ने लगा और लंबे समय के बाद जैसे तैसे फैसल खान ने अपने पिता को यह समझाया कि मैं पागल नहीं हूं मुझे बचा लो। तो उनके पिता ने आमिर खान से फैसल खान की कस्टडी अपने हाथों में ले ली। इसके बाद कुछ समय तक फैसल खान ठीक रहे। लेकिन यह वो समय था जब उनके पिता भी कर्जे में डूब चुके थे और उन्होंने फैसल खान की कस्टडी सिर्फ इसलिए ली थी ताकि फैसल खान उनकी फिल्मों में फ्री में एक्टिंग करें और वो पैसा कमा सकें लेकिन अब फैसल खान भी यह समझ चुके थे कि अब एक्टिंग में उन्हें सफलता नहीं मिलने वाली तो वो डायरेक्टर बनना चाहते थे और इसी बात पर फैसल के पिता भी उनसे नाराज हो गए और उन्होंने फैसल खान की कस्टडी छोड़ दी और फिर से कस्टडी आमिर खान के पास जा रही थी। जिससे फैसल खान डर गए। तो उन्होंने अपने ही भाई से कानूनी लड़ाई लड़ी और वह भी यह साबित करने के लिए कि वो पागल नहीं है। पूरी तरह से ठीक है।
वरना अगर वो नहीं आता आदमी सीधे फैमिली के पास वापस फिर से इंजेक्शन लॉकडाउन और मैं आपके साथ बैठा भी नहीं होता। मैं वही होता और उन्हें किसी की कस्टडी की जरूरत भी नहीं है। बाद में कोर्ट ने भी यह माना कि फैसल खान दिमागी तौर पर पूरी तरह से ठीक हैं और वह अपना ध्यान खुद रख सकते हैं तो आमिर खान उनसे दूर रहें। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब फैसल खान ठीक था तो आमिर खान उन्हें पागल क्यों बनाना चाहते थे? क्यों वो नहीं चाहते थे कि फैसल दुनिया के सामने हीरो बने। क्यों उन्होंने उसकी जिंदगी जीते जी नर्क बना दी थी? और अपने ही सगे भाई के साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव किया था। तो इसका जवाब भी फैसल खान के उस लेटर में ही था। फैसल खान के परिवार ने उन्हें परेशान किया था और उसे अपने परिवार, अपनी मां, बहन और आमिर खान से नफरत हो गई थी। इसलिए उसने सबके काले चिट्ठे लिख दिए थे। उसने यहां तक लिखा था कि उसकी बहन के कितने अफेयर रहे हैं। कैसे शादी हुई है। उनके पिता ने दो शादियां की हैं और एक सबसे बड़ा खुलासा उसने आमिर खान को लेकर भी किया था कि आमिर खान एक ऐसे इंसान हैं जो औरतों को सिर्फ भोग विलास की चीट समझते हैं और ना ही उन्हें कभी किसी से प्यार होता है और ना ही वह उतने अच्छे इंसान हैं जितने वो पर्दे पर दिखते हैं। आमिर का भी जो उनका इललीगल बच्चा है उनकी रीना से डिवोर्स हो गया था। ये सब मैंने लिखा है लेटर में। तो जिस समय आमिर खान भारत में अपनी शादीशुदा जिंदगी जी रहे थे, उसी समय वो एक ब्रिटिश पत्रकार से भी संबंध बना रहे थे। बात उस समय की है जब आमिर खान अपनी गुलाम फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। तभी एक ब्रिटिश पत्रकार जिसका नाम जैसिका हंस था, वह अमिताभ बच्चन पर एक किताब लिखने के लिए भारत आई थी और उसकी मुलाकात आमिर खान से हुई।
धीरे-धीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ गई और दोनों प्यार के समुंदर में गोते लगाने लगे और पता भी नहीं चला कि कब आमिर खान ने उसका मटका फुला दिया। जब जैसिका प्रेग्नेंट हो गई तो उसने आमिर खान से शादी करने को कहा लेकिन आमिर खान ने साफ मना कर दिया और कह दिया कि बच्चा गिरवा दो। मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है। सत्य में सत्य में सत्यमेव कहते हैं। सच्चा है। तू समझा? लेकिन जेसिका ने ऐसा नहीं किया और वह अपने पेट में आमिर खान का बच्चा लेकर वापस चली गई और उसने आमिर खान के बच्चे को जन्म भी दिया और एक सिंगल मदर बनकर उसका पालन पोषण भी किया और उसका नाम जान रखा गया जो आज भी जिंदा है और अपनी मां के साथ रह रहा है और आमिर खान इतना घटिया इंसान है कि जहां एक तरफ वो सत्यमेव जयते जैसा शो चलाता है तो वहीं उसका असली चेहरा इतना घिनौना था कि लड़कियों को वह सामान की तरह इस्तेमाल करके अलग कर देता था। यही सब बातें फैसल खान ने अपने लेटर में लिखी थी
और आमिर खान नहीं चाहते थे कि उनकी यह सच्चाई दुनिया को पता चले। इसलिए उन्होंने फैसल खान को इतना टॉर्चर किया और उसे पागल बनाने की कोशिश भी की। लेकिन वो लोग समझे कि यह पागल हो गया। पिछ फैमिली से दूर हटाए मिलना ही मिल नहीं रहा है। तो इसलिए वो सब टॉर्चर शुरू हुआ। और अभी एक बार फिर से फैसल खान ने उन्हीं सब बातों को छेड़ा है जिससे आमिर खान का असली चेहरा एक बार फिर से बेनकाब हुआ है। आमिर खान भले ही आज कहते हैं कि उसने खूब कोशिश की कि फैसल खान एक अच्छे एक्टर बन जाए लेकिन सच्चाई यही है कि आमिर खान कभी नहीं चाहते थे कि फैसल खान एक्टर बने और ना ही उसने कभी फैसल खान को सपोर्ट किया और यही कारण है कि आज फैसल खान एक साधारण इंसान से भी साधारण जिंदगी जी रहा है। ना उसकी कोई पहचान बन पाई है और ना ही वह सफल हो पाया है। तो यह थी आमिर खान के सगे भाई और मेला फिल्म के शंकर यानी कि फैसल खान की कहानी। सोच ले तू रिश्ता तोड़ के जा रहा है। नहीं मेरे दोस्त मैं रिश्ता तोड़ के नहीं मैं रिश्ता जोड़ने जा रहा हूं। मेला दिलों का आ