हिंदी सिनेमा के इतिहास में अगर तीन सबसे बड़े सितारों की बात की जाए तो सबसे पहले जिन नामों का जिक्र होता है उसमें है दिलीप कुमार, राज कपूर और देवानंद। तीनों ने लगभग एक ही दौर में अपने करियर की शुरुआत की और तीनों ने अपनी-अपनी अलग पहचान बनाई। पर्दे पर भले ही वे प्रतिद्वंद थे, लेकिन निजी जीवन में उनके बीच सम्मान और दोस्ती भी थी।
लेकिन समय-समय पर एक दावा खूब सुनने को मिलता है कि देवानंद ने कभी कहा था मेरा दिल और दोस्ती दोनों टूट गई और यह बात उन्होंने राज कपूर को लेकर कही थी। आखिर क्या यह दावा सच है? आइए जानते हैं पूरा किस्सा। नमस्कार आप सुन रहे हैं बॉलीवुड किस्से और मैं हूं आपके साथ अंशु परमान। दरअसल सोशल मीडिया और कई YouTube चैनलों पर यह कहानी अक्सर सुनाई जाती है कि किसी बात को लेकर देवानंद इतने आहत हुए कि उन्होंने राज कपूर के बारे में यह भावुक टिप्पणी कर दी। लेकिन जब इस दावे की पड़ताल की जाती है तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
देवानंद की आत्मकथा रोमांसिक विद लाइफ उनके कई पुराने इंटरव्यूज और फिल्म इतिहास से जुड़े विश्वसनीय दस्तावेजों में ऐसे कोई प्रमाणित बयान नहीं मिलता। जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा हो कि मेरा दिल और दोस्ती दोनों टूट गई। यानी इस मशहूर लाइन की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। हां, इतना जरूर सच है कि देवानंद और राज कपूर के बीच कई बार पेशेवर मतभेद और प्रतिस्पर्धा रही। दोनों लगभग एक ही समय पर बड़े स्टार बने और कई बार एक जैसे फिल्में या दर्शकों का ध्यान पाने की होड़ ही रहती थी। इसके बावजूद दोनों एक दूसरे की प्रतिभा का सम्मान करते थे।
वहीं देवानंद कई मौके पर राज कपूर के फिल्म निर्माण क्षमता की तारीफ कर चुके हैं। जबकि राज कपूर भी देवानंद के स्टाइल, व्यक्तित्व और लोकप्रियता को खुले दिल से स्वीकार करते हैं। व फिल्म इंडस्ट्री में उस दौर में प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक था। लेकिन प्रतिस्पर्धा का मतलब हमेशा दुश्मनी नहीं होता। कई बार मीडिया और फिल्मी पत्रिकाएं छोटी-छोटी बातों को बढ़ा चढ़ाकर पेश करती हैं। जिससे ऐसे किस्से जन्म लेते हैं। और इसी तरह मेरा दिल और दोस्ती दोनों टूट गई वाला कथन भी वर्षों से
फिल्मी गलियारों में सुना जाता है। लेकिन इसे साबित करने वाला कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड आज तक सामने नहीं आया। और यही कारण है कि अधिकांश फिल्म इतिहासकार इस कथन को एक लोकप्रिय लेकिन अप्रमाणित फिल्मी किस्सा मानते हैं ना कि एक ऐतिहासिक तथ्य। एक बात बिल्कुल साफ है कि देवानंद राज कपूर और दिलीप कुमार तीनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा का स्वर्णिम दौर बनाया। तीनों की अभिनय शैली अलग थी और सोच अलग थी लेकिन भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में तीनों का योगदान बराबर था। आज भी जब हिंदी सिनेमा के महान कलाकारों की चर्चा होती है तो इन तीनों का नाम सबसे पहले लिया जाता है। दोस्तों फिलहाल इस पॉडकास्ट में इतना ही। ऐसे और भी पॉडकास्ट के लिए बने रहे हमारे चैनल के साथ।