दिल्ली में अब हाइड्रोजन बस चलेगी। जी हां, यह एक बड़ा फैसला लिया गया है। डीएमआरसी ने फीडर बस के तौर पर इसे उतार भी दिया इस प्लीट को। हाइड्रोजन ईंधन से चलेगी दिल्ली में बस। सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में हाइड्रोजन बस सेवा की शुरुआत हो गई है। और यह देखिए जिस बस सेवा का हम जिक्र कर रहे हैं वो आपको तस्वीरें भी दिखा रहे हैं।
इसकी शुरुआत कर दी गई है। केंद्रीय सचिवालय से सेवा तीर्थ मेट्रो के बीच यह बस चलेगी। यानी कुल मिलाकर जितनी ज्यादा हो सके पेट्रोल और डीजल से निर्भरता कम करनी है और इस तरफ एक-एक करके तमाम जो उपाय है वो किए जा रहे हैं। देखिए हमारे संवाददाता जितेंद्र भाटी की यह रिपोर्ट। मेरे पीछे आप जो देख रहे हैं यह अगर मैं यह कहूं कि पानी से चलने वाली बस है तो अतिशयक्ति नहीं होगी क्योंकि यह हाइड्रोजन से चलती है। पानी से हाइड्रोजन बनता है।
उससे इलेक्ट्रिसिटी बनती है और इन बसों को आज से सड़कों पर उतारा गया है ताकि क्लीन एनर्जी रहे। आपने देखा होगा जो डीजल बसें होती हैं उससे पोलशन निकलता है। लेकिन इस बस से जो उत्सर्जन निकलता है वो पानी निकलता है। यानी कि यह भविष्य की तकनीक है ताकि जो पोलशन है उस पर काबू पाया जा सके। जो ईंधन पर हमारी निर्भरता है और ये देखिए यहां पर भी आप देखेंगे तो पानी ही आपको बाहर निकलता हुआ नजर आएगा और अंदर से दिखाते हैं।
बिल्कुल जो सामान्य बसें आप देखते थे वही जो बस होती है बिल्कुल वैसी है। बस फर्क ये है कि ना इसमें पेट्रोल भरता है ना डीजल भरता है ना सीएनजी भरती है ना बैटरी चार्ज करनी पड़ती है। इसमें भरता है हाइड्रोजन। हाइड्रोल फ्यूल जैसे चलती है। और बस का आगे चलने का समय भी हो गया। आगे चलेंगे और आपको दिखाते हैं। बिल्कुल सामान्य बसों की तरह ही है। वही कैपेसिटी है। इस बस के अंदर आपको दिखाएं तो इसकी शुरुआत जो है वो कर दी गई है। मकसद यही है कि क्लीन एनर्जी जो है वो लोगों को प्रोवाइड कराई जाए और जो निर्भरता है भारत की दूसरे देशों पर जीवाश्म ईंधन के लिए उसको बिल्कुल जो है कम किया जाए और किराया उतना ही है या अलग है? कितना कितना किराया? 10 और ₹15 मिनिमम ₹1 जी सर और मैक्सिमम ₹1 जी जी और ये क्या रूट रहता है इसका? इसका रूट सर यहां से इंडिया गेट होते हुए फिर य आएगी केंद्रीय सचिवालय पूरा एक लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए जी जी आपको बता दें कि अभी क्योंकि लोगों के लिए अभी इसको उतारा गया है तो लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इसको जो है केंद्र सचिवालय जो है वहां से शुरू किया गया है
और एक पूरा रूट है उस पे घूम के वापस आती है। फ्रीक्वेंसी क्या रहती है इसकी? कितनी कितनी देर बाद? सर यहां से 5 मिनट बाद मतलब 5 मिनट बाद जी जी जी और कैपेसिटी मतलब कितने लोग बैठ सकते हैं इसमें? लमसम इसमें 32 आदमी बैठ सकते हैं। कुछ फर्क लग रहा है दूसरी बस चलाने में बस चलाने में? सर स्मूथ बस है। स्मूथ है? हां जी।
इलेक्ट्रिक से भी स्मूथ है। हां जी। हां जी। इसमें हाइड्रोजन खत्म होगी तो कहां जाएंगे? सर अभी तो स्टेशन हमारी कंपनी में ही है। जहां से भरवा के लाएंगे। उसके बाद जैसे आम स्टेशन खोलते हैं ऐसे ही यहां पे भी खोलेंगे। लेकिन जिम्मा इंडियन ऑयल का है। जी जी। ये देखिए इंडियन ऑयल से भी यहां पर बैठे हैं। डीएमआर से भी बैठे हुए हैं। थोड़ा कुछ रूट के बारे में बता रहे हो। समझा दीजिए बस। निर्माण भवन विज्ञान भवन अकबर रोड इंडिया गेट करतब भवन से होते हुए फिर हम केंद्रीय सचिवालय वापस वापस आ जाएंगे।
अभी कितनी बसें उतरी हैं यहां? अभी दो बसें हैं सर। दो बस जो इंडियन ऑयल ने दी है। शुरुआत में ये दो बसें हैं जो कि इंडियन ऑयल ने डीएमआरसी को दी है और जैसे-जैसे प्रयोग जो है सफल होता जाएगा वैसे-वैसे आगे जो है इन बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।