आप मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से यह कह रहे हैं कि मैं तुम्हारी तरह अपने बाप की नाम और वेल्थ और पावर के ऊपर नहीं रहती हूं। तो जब कोई इंसान सर देखिए आप ना मेरी चीजों को ना अच्छे से पेश नहीं कर रहे हैं।आई थिंक अच्छे से नहीं पेश कर रहे हैं। आप अगर कोई बंदा आप सोचिए अगर कोई इंसान चेयर पे जो एक हमारा गार्डियन है यू नो जो हमारे गार्डियन है जो हमारे हैं और जिनको जिनका यह बनता है कि ठीक है आपको ऐसा फील हुआ आप मुझसे बात करिए और वो मैच्योरिटी उनमें कहां से आती अगर उन्होंने कोई संघर्ष किया होता जिस तरह से वो छोटे बच्चों की तरह बात कर रहे तो तो जाहिर है कि उनको हर चीज जो है बड़ी आसानी से मिली हुई है और ये ख्याल मुझे आया कि इनमें किसी भी पॉलिटिशियंस की टैक्टफुलनेस या कोई पॉलिटिकल स्ट्रेटजी या किसी तरीके का कोई एक एक पॉलिटिक्स पॉलिटिशियंस की भी एक अपना चाम होता है।
वह भी हर चीज में जो है शाइन करके निकलना चाहते हैं और वह भी वह भी हर हर मौके का फायदा उठाके जो है अपने आप को बिल्ड करना चाहते हैं। इमेज जो कि एक टैटफुल पॉलिटिशियंस होते हैं जिन्होंने मेहनत से ऊपर आते।
लेकिन ये तो किसी तरह के बिगड़े हुए बेटों की तरह बात कर रहे हैं। जैसे अमीर बाप के बेटे बात करते हैं। तो उनका क्या-क्या नुकसान आपका हुआ ना? बना बनाया घर टूट गया। सर मेरा वही नुकसान नहीं हुआ। मेरा और भी बहुत ज्यादा नुकसान हुआ। मेरी जो एक महिला होने के नाते इन लोगों को जो मुझे एक देने की आदत पड़ गई है वो ना कि सिर्फ महाराष्ट्र भी जो पंजाब में भी जिसको देखो पुतले ले चप्पल से एक महिला के लिए उसकी इंटेग्रिटी किसी भी उसके गहने से पैसों से ज्यादा ज्यादा जरूरी होती है और हम अपनी बेटियों को जब देखो जिसका मन करता है वो देता रहता है तो आई थिंक इस देश को थोड़ा तो काम डाउन करना पड़ेगा यू नो आप बेटियों को इस तरह से इतने गंदे से ट्रीट नहीं कर सकते हैं.
लेकिन लेकिन कुछ अच्छी बातें भी हैं। फाइनलीजब आप चुनाव लड़ रही थी मंडी में तो योगी आदित्यनाथ ने मुंबई की घटना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि विरोधियों से जूझने के लिए रानी लक्ष्मीबाई जैसा शौर्य और भाव है कंगना में। इन्होंने मुंबई में उद्धव ठाकरे को सड़कों पर लाकर पानी पिलाने के लिए मजबूर कर दिया। अच्छा हुआ किसी महान आत्मा का, किसी किसी अच्छे इंसान का यहां पे जिक्र तो हुआ। नहीं तो सारे जो चोर उचके क्रिमिनल उन्हीं के ही मुझसे पूछे जा रहे हैं क्वेश्चन।
सर मेरा तो यही कहना है कि मैंने ऐसा कुछ मतलब वो मेरे बारे में बहुत अच्छे विचार रखते हैं। योगी जी मेरे तो मेरे लिए तो बहुत पूजनीय है। मेरे भाई हैं। मेरे लिए बहुत अच्छे विचार रखते हैं। लेकिन वो क्यों रखते हैं? हमें क्या हमें क्या होता है कि कुछ लोग हमें ऐसे ही अच्छे लगते हैं। वो हमारी एनर्जी होती है। कुछ लोग हमें महादुष्ट लगते हैं। अब जैसे इंडस्ट्री वालों को तो मैं एक आंख नहीं भाती।
एक आंख नहीं और मैं चाहे अपना मैं सिंपल ब्रीथिंग ही करूं चाहे मैं कुछ भी नहीं करूं फिर भी वो लोग मुझे खत्म करने को आते हैं क्योंकि क्या मैंने इन पे केसेस किए थे नहीं इन्होंने मुझ पे केसेस किए इन्होंने मुझे खत्म करने की कोशिश की क्योंकि इनको मैं भारतीय नहीं हूं बीजेपी वालों को आप इतनी अच्छी क्यों लगती हो बहुत अच्छी लगती हो क्यों क्योंकि मैं सच्ची सच्ची हूं और मैं ईमानदार हूं जो जो लोग खुद सच्चे और ईमानदार होते हैं वो उन लोगों को तो वैसे ही लोग अच्छे होंगे ना अब राक्षस तो राक्षसों की सेना में होंगे देव देवों की सेना में होंगेलेकिन मैंने सुना आजकल वो भी परेशान है। नड्डा जी आपसे कह रहे हैं कि कम बोलो चुप रहो। देखिए क्या होता है सर के अब मैं बहुत ज्यादा देर तक जो है मैं अपने आप ही सब चीजों से जो है लड़ती आई हूं। अब इन हर चीज की जो जानकारी है पॉलिटिक्स की तो मुझे तो हो नहीं सकती।
तो पार्टी की गाइडलाइंस मुझे आती हैं कि आप इस तरह से पार्टी की गाइडलाइंस पे चलें। तो मुझे लगता है ये तो एक अपनी जॉब का एक हिस्सा होता है। लेकिन इस चीज को भी इस चीज को भी मेरे अगेंस्ट यूज़ किया जा रहा है। इसको तो फटकार पड़ी इसको लताड़ा इसको ये इसको वो क्या वो एक सीनियर हो के मुझे मुझे मतलब मुझे पार्टी गाइडलाइन भी ना दे अब। अजीब है। ये पार्टी की गाइडलाइन है कि आप किसानों को बलात्कारी कहें। यह पार्टी की गाइडलाइन है कि किसानों के बारे में अब इस तरह की कि वहां लाशें लटकी हुई है। सर देखिए आप कितना गलत मुझे पोट्रे कर रहे हैं। मुझे बताइए कौन सी अदालत चल रही है ये?
ये आपके शब्द हैं लिखे हुए मेरे पास में आपने क्या कहा? आपने ये कहा ना कि जहां किसान आंदोलन हो रहा था वहां ये अभी अभी अभी चेंज की इन्होंने और आप प्लीज एडिट मत करना इसको। एडिट मत करनाक्योंकि क्योंकि अभी रजत सर ने जो है पूरी मीडिया को रिप्रेजेंट किया पूरी मीडिया को जो आधा अधूरा सुना वही हेडलाइन सीधी चेक दो तो मैंने क्या कहा था मैंने कहा था कि जहां पे किसान आंदोलन हुए उस जगह पे उस जगह पे जहां किसान आंदोलन हुए वहां पे जो है वो मेरे पास पूरी कवरेज है। मैं दिखा सकती हूं। वहां पे उसकी भी मेरे पास कवरेज है। मैं दिखा सकती हूं। क्या मैंने यह कहा कि किसानों ने वो किए? नहीं। मैंने कहा ने वह चीज को जो है टेक ओवर कर लिया है। लेकिन फिर भी मैं जब ये चीज मीडिया में हर जगह है। ये चीज बच्चे बच्चे को पता है। ठीक है। लेकिन जभी भी कोई एक बेचारी लड़की उसी चीज को बोलेगी जो सबके अरे बोल दिया। इसने तो बोल दिया। तो ऐसी एक्टिंग करते हैं कि जैसे अरे क्या बेबाक है और तुमको वो नहीं दिखी जो 1 लाख न्यूज़ आइटम इसकी आई थी। मतलब कैसे लोग हैं। सो आई फील एज अ पर्सन मुझे बहुत हैरानी होती है कि ये ये दुनिया जो है सच को देख के झुठलाती है। सच को देख के झुठलाती है।
झूठ के झूठ में जीती है। और फिर दूसरे इंसान जो जो बिल्कुल साधारण हो जिस इंसान को कोई ये चीज ना आती हो आगे का पीछे पीछे का आगे प्लस का माइनस माइनस का उसको बदनाम करके लिटरली जो है कहीं का नहीं छोड़ते हैं। ऐसी ये दुनिया है।