उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा ऐलान किया है जिसे देखकर भारत और दुनिया के कई देश चौंक जाएंगे। आप यह तो पहले ही देख चुके हैं कि इटली समेत कई देश अब दंगाइयों से निपटने के लिए योगी मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह देश अब दंगाइयों से ही तोड़फोड़ की भरपाई का फैसला ले रहे हैं। मगर दंगाइयों से निपटने के लिए अब योगी का सबसे नया मॉडल सामने आ गया है। खासतौर पर रिजीम चेंज करने वालों के खिलाफ।
आजकल भारत समेत यूरोप के कई देश इन रिजीम चेंज करने वाले वामपंथियों से परेशान हैं। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जब वामपंथी रिजीम चेंज के नाम पर दंगे करते हैं तो इनका इलाज करने के लिए कानून में बदलाव भी जरूरी हो जाता है। और अब सीएम योगी ने वही कर दिया है। अब अगर कोई दंगाई उत्तर प्रदेश में हिंसक और गैरकानूनी तरीके से रिजीम चेंज की बातें करेगा, तो उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिनका उद्देश्य हिंसा के दम पर व्यवस्था बदलना यानी रिजीम चेंज करना है, तो उन लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र यानी इनएलिजिबल मान लिया जाएगा। उन्हें उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
भारत में बांग्लादेश और नेपाल की तरह सत्ता परिवर्तन की साजिश के खिलाफ योगी आदित्यनाथ ने बहुत बड़ा फैसला लिया है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार के नियमों में देश विरोधी यानी एंटीनेशनल गतिविधियों का जिक्र पहले से ही है। लेकिन यूपी सरकार ने हाल ही में बांग्लादेश में हुए हिंसक तख्ता पलट जैसे हालातों को देखते हुए विशेष रूप से रिजीम चेंज शब्द को शामिल किया है। ऐसा नियम बनाने वाला यूपी पहला राज्य बन गया है। वैसे बात सही भी है।
पहले तो आपको बता दें कि भारत में सरकार लोगों द्वारा चुनी जाती है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों को रिजीम नहीं कहा जाता। रिजीम शब्द देश पर बोझ बन चुके वामपंथियों ने गढ़ा है। रिजीम तो ऐसी व्यवस्था होती है जहां ना तो चुनाव होते हैं और अगर होते भी हैं तो वह दिखावे के होते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन है। इसके अलावा खाड़ी के कुछ मुस्लिम देश भी ऐसे ही हैं। मगर भारत में लोकतांत्रिक सरकार है। कोई रिजीम नहीं है। ऐसे में अगर उत्तर प्रदेश के किसी युवा ने कूल बनने के चक्कर में सड़कों पर दंगा किया। हिंसक तरीके से रिजीम चेंज करने की बातें की तो उसे जिंदगी भर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। ऐसे लोग फिर जिंदगी भर वामपंथियों के साथ ढपली बजाते रहेंगे। बहरहाल अब आपको एक और दिलचस्प चीज बताते हैं। यदि किसी उम्मीदवार ने 21 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और वेरिफिकेशन की तारीख से पिछले 3 वर्षों के भीतर वह किसी हिंसक गतिविधि में शामिल हो चुका है तो उसे अभी भी सक्रिय ही माना जाएगा। यानी किसी कैंडिडेट ने 3 साल पहले रिजीम चेंज के नाम पर दंगा किया है तो उसे अभी भी सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल है। योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर कोई कैंडिडेट किसी अलग राजनीतिक सोच या विचारधारा को मानने वाला है तो उस कैंडिडेट को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
भले ही उसकी विचारधारा कुछ भी हो उसे सरकारी नौकरी मिलेगी। लेकिन अगर वह कैंडिडेट लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई किसी सरकार के खिलाफ हिंसा करेगा तब उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। अगर किसी कैंडिडेट पर सिर्फ एफआईआर दर्ज हुई है या उसकी जांच अभी भी चल रही है तो केवल इस आधार पर उसे सीधे बाहर नहीं किया जाएगा।
जब तक आरोप या हिंसक गतिविधि पूरी तरह से साबित नहीं होगी, तब तक फैसला नियमों के तहत ही लिया जाएगा। यह नियम केवल नई सीधी भर्तियों पर लागू होगा। जो लोग पहले से ही सरकारी सेवा में हैं उनका दोबारा वेरिफिकेशन नहीं होगा। रिजीम चेंज के अलावा अगर कोई कैंडिडेट मर्डर, रॉबरी, रेप, महिलाओं से बदसलूकी, भ्रष्टाचार, आतंकी गतिविधियों या एग्जाम, पेपर लीक और सॉल्व गैंग से जुड़ा पाया गया तो उसे भी सरकारी नौकरी के लिए हमेशा के लिए बैन कर दिया जाएगा।