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CJP पर बड़े एक्शन की तैयारी, द्विटर के बाद अब ये अकाउंट होगा सस्पेंड।

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कॉकरोच ने पूरे भारत में बवाल मचा कर रख दिया है और इस बवाल से उभरी है एक पार्टी सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी आजादी जो मांग रही पूरी आबादी आजादी आजादी पर मांग रही आधी आबादी आजादी आजादी जो अपने आप को एक पॉलिटिकल पार्टी की तरह पेश कर रही है।

रातोंरात सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है और महज 5 दिन में सीजेपी ने 10 मिलियन फॉलोवर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। जो किसी भी इंडियन पॉलिटिकल पार्टी से ज्यादा है। साथ ही सीजीपी ने फोब्स मैगजीन तक में जगह बना ली है। तो चलिए आपको बताते हैं कि सीजीपी का सच क्या है? उनका मेनिफेस्टो क्या बोलता है?

इसके फाउंडर कौन है? और साथ ही कैसे ऑनरेबल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के एक स्टेटमेंट ने इस मुहिम और इस बड़े विवाद को जन्म दिया। नमस्कार, मैं उत्कर्ष प्रताप सिंह और आप देख रहे हैं टीवी 9 भारतवर्ष। सब शुरू होता है चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत के एक स्टेटमेंट से। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं को कॉकरोचेस की तरह बताया था जो नौकरी नहीं मिलने पर मीडिया सोशल मीडिया और एक्टिविज्म के रास्ते पर जाकर सिस्टम पर हमला करते हैं।

इस बयान पर भारी विवाद हुआ। सीजीआई ने बाद में स्पष्टीकरण भी दिया कि उनका इशारा फेक डिग्री वाले लोगों की तरफ था। लेकिन तब तक युवाओं में आग लग चुकी थी और फिर जन्म होता है कॉकरोच जनता पार्टी का। 16 मई को अभिजीत दीबके नाम के एक 30 साल के युवा ने इस बयान के जवाब में मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी ल्च कर डाली। अभिजीत का Lindin अकाउंट बताता है कि वह बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के छात्र हैं। अभिजीत मूल रूप से महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले बताए जाते हैं और वो जर्नलिज्म की पढ़ाई भी कर चुके हैं।

इससे पहले वह आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से भी जुड़े रहे हैं और उनके कुछ पुराने ट्वीट्स उनका आप नेताओं की तरफ झुकाव दिखाते हैं। उन्होंने एक वेबसाइट भी बनाई जिसमें लिखा था आर यू अनइंप्लॉयड लेज़ क्रॉनिकली ऑनलाइन एंड कांट रेंट प्रोफेशनलली? अगर हां तो आप कॉकरोच जनता पार्टी के मेंबर बन सकते हैं। युवा इस पार्टी में शामिल होने लगे और प्राउड कॉकरोचेस कहकर खुद को टैग करने लगे। फिलहाल सीजीपी का Twitter पेज सस्पेंडहो चुका है। सीजीपी ने अपना मेनिफेस्टो तक ल्च किया है जिसमें लिखा है हमारा मिशन सिर्फ यही है कि उन युवाओं की आवाज बने जो बार-बार लेजी, क्रॉनिकली ऑनलाइन और कॉकरोचेस कहे जा रहे हैं।

बाकी सब सटायर है। पांच बड़े वादे जो उन्होंने किए हैं। कोई भी चीफ जस्टिस रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा सीट नहीं पाएंगेमहिलाओं को संसद में 50% आरक्षण, दल बदलू सांसद विधायक 20 साल तक चुनाव नहीं लड़ेंगे। अगर वोट डिलीट हुए तो मुख्य चुनाव आयुक्त पर यूएईपीए लगेगा और अंबानी अडानी के मीडिया हाउसेस के लाइसेंस रद्दकिए जाएंगे।

यही नहीं उन्होंने अपना इलेक्शन सिंबल तक जारी कर डाला है और महुआ मोहित्रा जैसे बड़े नेताओं ने इस मुहिम को सपोर्ट तक कर दिया।

अब यह इतना सब कुछ वायरल क्यों हो रहा है? है। असल में युवाओं के बीच बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई और सिस्टम की नाकामी पर गुस्सा है जो सटायर और मीम्स के फॉर्म में निकल रहा है। अब युवा अपने आप को कॉकरोच बताकर अपनी कोई इज्जत वापस पाना चाह रहे हैं।

अभिजीत दीपके कहते हैं कि ये सिर्फ एक मजाक नहीं है बल्कि युवाओं की नाराजगी को एक प्लेटफार्म देने की कोशिश है। एक छोटी सी टिप्पणी से शुरू हुई इस कहानी को आज पूरा देश देख रहा है और यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। तो क्यासीजेपी सिर्फ एक वायरल मीम है या यह युवाओं का असली गुस्सा है जो आगे और बड़ा रूप ले सकता है या फिर यह बस एक मीम और मुद्दे की तरह आया और गया क्योंकि पॉलिटिकल पार्टी बनाना कोई मजाक की बात नहीं है। वो कोई एक वेबसाइट या फिर एक Instagram पेज बनाने जितना आसान नहीं है।

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