महेश बाबू समान सरोत प्रभु विजय देवराकोंडा और एसएस राजा मौली समेत साउथ के कई बड़े नामों को के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इन सबके वोटर रिकॉर्ड अचानक चुनाव आयोग की जांच के दायरे में आ गए हैं।
इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण, बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल से लेकर महेश बाबू की पत्नी नम्रता शिरोतकर, एक्टर वेंकटेश दगो भाटी और उनकी बेटियां पुले गोपीचंद और एक्टर रामचरण की पत्नी उपासना कामिनी निकोनीला जैसे कई चर्चित लोगों को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इन नामों के अलावा फिल्म, स्पोर्ट्स और दूसरे फील्ड से जुड़े कई चर्चित लोगों के वोटर रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर इन लोगों को नोटिस मिला क्यों है? दरअसल तेलंगाना में चुनाव आयोग वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी कर रहा है। इसका मकसद वोटर लिस्ट में दर्ज नाम, उम्र, पता और दूसरी जानकारियों को दोबारा वेरीफाई करना है ताकि रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियों को ठीक किया जा सके।
इस प्रक्रिया में कुछ लोगों के नाम, उम्र या माता-पिता के नाम में अंतर मिला है। वहीं कुछ लोगों का मौजूदा वोटर रिकॉर्ड पुराने डाटा से मैच नहीं हो पाया। ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारियों की तरफ से नोटिस भेजे जा रहे हैं। लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह समझ लेना है कि का नोटिस मिलना वोटर कार्ड रद्द होने या वोटर लिस्ट से नाम के बराबर नहीं है। नोटिस का मतलब सिर्फ इतना है कि चुनाव अधिकारी संबंधित व्यक्ति के रिकॉर्ड की पुष्टि करना चाहते हैं।
इसके लिए तय प्रक्रिया के तहत जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। अगर किसी जानकारी में गलती है तो उसे ठीक भी कराया जा सकता है। यानी महेश बाबू या वीवीएस लक्ष्मण का नाम नोटिस लिस्ट में आना यह नहीं बताता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गया है। अब जरा कर्नाटक का मामला भी देखिए। यहां भी एसआईआर की वजह से कई बड़े नाम चर्चे में हैं। Infosys के कोफाउंडर नंदन नीलकानी और उनके परिवार के नाम अनमैप्ड विद लास्ट एसआईआर कैटेगरी में सामने आए हैं। यानी उनके मौजूदा रिकॉर्ड को 2002 की पिछली वोटर लिस्ट से मैच नहीं किया जा सका। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नंदन नीलकर्णी और उनके परिवार के लिए नोटिस जनरेट किए गए हैं।
वहीं ज़ीरोधा के फाउंडर्स नितिन कमत और निखिल कामत के नाम भी रिकॉर्ड में मिसमैच की वजह से चर्चे में है। भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम भी इस लिस्ट में सामने आया है। पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें पहचान साबित करने के लिए नोटिस दिया गया है।
लेकिन चुनाव अधिकारियों ने अब साफ कर दिया है कि सीएनआर राव को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। दरअसल पुराने रिकॉर्ड में उनका नाम रामा दर्ज था। जबकि मौजूदा रिकॉर्ड में प्रोफ सी एन राव एम है। इसी वजह से उनका नाम लिस्ट में हुआ। लेकिन बूथ लेवल ऑफिसर ने बिना नोटिस जारी किए उनका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में रखने की सिफारिश कर दी। कर्नाटक में एसआई का पैमाना भी काफी बड़ा है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 4.5 करोड़ मतदाताओं में से 43 करोड़ 81 लाख मतदाताओं के लिए नोटिस जनरेट किए गए हैं। इन लोगों को अपने रिकॉर्ड से जुड़े जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
नोटिस की प्रक्रिया 22 अक्टूबर तक चलेगी और अंतिम वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है। जिन लोगों को नोटिस जारी हुए हैं अब उन्हें अपने रिकॉर्ड और जरूरी डॉक्यूमेंट्स दिखाने होंगे। इसके बाद चुनाव आयोग तय प्रक्रिया के तहत अंतिम वोटर लिस्ट तैयार करेगा। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। अगर देश के इतने चर्चित और हाई प्रोफाइल लोगों के वोटर रिकॉर्ड में भी नाम, उम्र, माता-पिता के नाम या पुराने रिकॉर्ड की मैपिंग को लेकर दिक्कतें सामने आ रही है तो आम वोटरों के लिए यह प्रक्रिया कितनी बड़ी चुनौती होगी?