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अटक गई केबल कार, हवा में फंसीं 300 जिंदगियां और फिर….

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हवा में फंस गई करीब 300 जिंदगियां। मुश्किल पहाड़ी इलाका और खराब मौसम अटक गई सांस और तभी फरिश्ते की तरह आई इंडियन आर्मी। जम्मू कश्मीर के गुलम्ग में रोपवे में तकनीकी खराबी आने के बाद 250 से ज्यादा टूरिस्ट बीच हवा में अटकने पर मजबूर हो गए।

65 केबल कार या गुंडाला जहां थे वहीं थम गए। अफरातफरी और अनहूनी की आशंका के माहौल के बीच सेना की मदद का फैसला लिया गया। सबसे पहले भारतीय सेना और उसकी चीनार कॉप्स यूनिट ने रेस्क्यू का मोर्चा संभाला। ना आराम से जाओ आराम से। ऊपर देखो नीचे नहीं देखना है। जब सेना के मजबूत कंधों पर कोई जिम्मेदारी आती है तो हर खतरा टल जाता है।

सीटी पकड़ कर रखना। इस मासूम के मां-बाप ने पूरे भरोसे के साथ जवान के कंधों पर बच्चे को बिठा दिया। उन्हें यह एहसास था कि अब बच्चे के साथ कुछ बुरा नहीं हो सकता। सेना के जवान ने भी बड़ी एहतियात के साथ बच्चों को सही सलामत केबिन कार के नीचे तक पहुंचाया।

उठा एक पैर आगे पीछे रख गुड शाबाश यहीं पर दे दे रेस्क्यू की ऐसी कितनी तस्वीर गवाह हैं भारतीय सेना की जाबाजी की उसके जज्बे की बच्चों के साथ मासूमियत बुजुर्गों का सम्मान और खास ख्याल बार-बार उनकी खैरियत पूछकर उन्हें सामान्य करने की कोशिश ताकि वह इस घटना की तस्वीरें बहुत देर तक अपने ज़हन में ना रखें। पानी मंगाओ यार ये रखा है।

पानी इधर रखा है। पानी रखा है। जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी भी राहत और बचाव कार्य का जायजा लेने गुलम्ग पहुंचे। उन्होंने बताया कि आर्मी के साथ दूसरी एजेंसियां भी रेस्क्यू में जुटी और यह ऑपरेशन कामयाब रहा। खुद इस पूरे ऑपरेशन को सुपरवाइज किया और खुद देखा और अभी जो जब मैं वहां से वापस आया हूं ऑलमोस्ट ऑपरेशन खत्म हो गया है और सारे लोग सेफ हैं और कोई 200 60 लोग थे टूरिस्ट थे जो गुंडोला के अंदर जो कैबिन अलग-अलग कैबिन है 63 कैबिन थे टोटल तो सारे कैबिन में से लोग निकाल लिए गए हैं और इसमें आर्मी ने भी बड़ा-बड़ा रोल अदा किया है एसडीआरएफ ने अपना रोल अदा किया है जो लोकल वहां के गाइड थे उन्होंने अपना और पुलिस ने अपना रोल अदा किया है और इसलिए अब सारे सेफ हैं। 2:00 बजे से ऑपरेशन चल रहा था।

लगभग 65 के करीब केबल कार थे जो फंस गए थे पूरे जो बेस से स्टेज वन तक का तो ये लगभग चला 6:30 घंटे एंड इसमें सभी ने एक्चुअली हिस्सा लिया है जो एसडीआरएफ एनडीआरएफ की टीमें थी जम्मू कश्मीर पुलिस की टीमें थी इसमें जो लोकल पुणे वाले हैं एटीवीज है उसके अलावा इंडियन आर्मी की टीम्स थी कई सारी यहां पे हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल है उसकी टीम थी ये सारे मिलके एक्चुअली इन्होंने इकट्ठा काम किया।

लगभग छ से सात केबल्स कार्स के ऊपर एक साथ काम हो रहा था तो हम इस वजह से लास्ट लाइट से पहले इसको पूरा कर पाए सेना सेना के तुरंत एक्शन में आने से एक बड़ा हादसा तो टल गया। लेकिन अब सरकार को भी केवल कार दोबारा शुरू करने से पहले यह तय करना होगा कि तकनीकी तौर पर सारी चीजें सही

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