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पत्रकार के सवाल पर अचानक क्यों बौखलाए बाबा रामदेव? मचा हड़कंप!

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एक धरती माता की संतान है। ये मैं कहता हूं और इसको जीता हूं। आपका आपका जन्म एक किसान परिवार में हुआ। आपका नाम रामकृष्ण यादव था। आपने भी यादव को बोल दिया ना। यही खुराफात मैं आपके दिमाग की खत्म करना चाहता हूं। इसीलिए मैं आप मैं साधु होने के बाद आपने जाति सूचक शब्द क्यों बोला? मुझे इससे आपत्ति है। क्यों आपको बुरा?

इस रूप में है कि साधु होने के बाद जाति खत्म। और एक कुल में पैदा हुआ हूं। आप मुझे बताइए कि कब आपको लगा कि मैं इसी के बंधन सेक बात करता हूं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता के बारे में। जाति के बारे में मैं इसलिए कह रहा हूं कि ये जानबूझकर के आप लोग छेड़ते हो कि जो है राम कृष्ण यादव और मैं जब सन्यासी हूं तो मैं मेरे सन्यास के बारे में बात कर रहा हूं।

आपको सन्यास का दूसरा जन्म हो जाता है। सन्यास के बाद में पूरा जन्म खत्म। ये सन्यास की मर्यादा है। फिर मैंने यह सवाल योगी आदित्यनाथ से पूछा। मैंने यही सवाल मोदी जी से भी पूछा है। मैं यही सवाल देखो वो वो वो राजनीति में वो राजनीति में मैं सन्यासी में हूं। मैं ना एमएलए हूं ना एमपी हूं ना सीएम हूं ना पीएम हूं ना बनना चाहता हूं। मैं सन्यास को जीता हूं। तो यदुवंश बहुत गौरवशाली वंश है। भगवान कृष्ण का वंश है।

अब जो लोग जाति के नारे लगाते हैं। मैं उसके मैं मुझे किसी जाति से कोई ना नफरत है ना किसी जाति से गौरव है। मैं कहता हूं सब जाति एक समान है। सब जाति वर्ग समुदाय बाद में कर्म के आधार पर आजीविका के आधार पर बने। इसलिए अब लोग कहते हैं ब्राह्मण सबसे श्रेष्ठ होता है। लेकिन पूछते किसको हैं?

भगवान रामकृष्ण को। वो क्या है? क्षत्रिय है। तो ये ये श्रेष्ठता किस कहां रहेगी? फिर इसी जाति वर्ग समुदाय का ये व्यक्ति ऐसा हो सकता है वैसा हो सकता है। तो मैं इसलिए कहता हूं मैं जातीय व्यवस्था के खिलाफ व्यक्ति हूं। मैं कहता हूं कोई भी आजीका कोई भी कर सकता है। कोई भी कथाकार हो सकता है। कोई भी नेता हो सकता है। कोई भी वैज्ञानिक हो सकता है। कोई भी मीडिया मैन हो सकता है। कोई भी साधु हो सकता है।

कोई भी रिसर्च कर सकता है। कोई भी बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर सकता है। आजीविका का भेद कहां रह गया? उसमें जाति कहां आ गई? कोई जातिपात नहीं होना चाहिए। तो जाति वर्ग समुदायों के नाम पर जो भेदभाव और एक जो आग्रह बुद्धि है ना यादव ऐसे होते हैं, अहीर ऐसे होते हैं, जाट ऐसे होते हैं, गुर्जर ऐसे होते हैं। मैं सो कहावत बोलते हैं लोग। ब्राह्मण ऐसे होता है। उस ब्राह्मणों में भी यह ब्राह्मण ऐसे होते हैं। वो ब्राह्मण ऐसे होते हैं। कुछ लोग बकवास करते रहते हैं। मैं कहता हूं सब जाति वर्ग समुदाय सब बराबर है। हमारी राजनीति तो पूरी उसी में लगी हुई है।

लेकिन ये गड़बड़ है ना स्वामी रामदेव ये नहीं करता और मैं इसको नहीं जीता। और इसमें इससे मुझे नफरत है इस बात से कि कुछ लोग बोलने में कहते हैं कि जाति मुक्त भारत बनना चाहिए। लेकिन खुद जातिवाद को जीते हैं। जब थोड़ा सा मंच से अलग होते हैं। ज़रा जब कोई बड़ा निर्णय करना होता है ना। जब उनको पॉलिटिक्स में कोई अपने इंस्टीट्यूशन में अपनी राजनीतिक पार्टी में या अपने वैयक्तिक जीवन में, अपने आर्थिक जीवन में, सामाजिक जीवन में बड़े निर्णय लेने और अरे तू तो हमारी जाति का है, तू तो हमारी बिरादरी।

आपसे आके कहते हैं। मैं कह रहा हूं समाज में ऐसा होता है। मैं इस बात को फॉलो नहीं करता। मैंने तो अपने मेरे पास करीब 200 सन्यासी हैं। सब जाति वर्ग समुदाय के सन्यासी हैं। मेरे पास हम जो सनातन पर ये कलंक लगाते हैं कि जातिवादी हैं ये लोग। स्वामी रामदेव ने 200 सन्यासी बनाए। सब जाति वर्ग समुदाय के बनाए। स्वामी रामदेव ने अपने इंस्टिट्यूशन में अपने ट्रस्ट में सब जाति वर्ग समुदाय के बच्चे रखे हैं। स्वामी रामदेव के जो सब कार्य ये बहुत बड़ी बात होती है। आदमी जब अपना किसी को उत्तराधिकारी बनाता है उस समय अपनी जाति का देख लेता है। जब किसी बड़े ओदे पर बैठाना होता है किसी ऑर्गेनाइजेशन में कहीं पॉलिटिक्स में किसी अपने संगठन में तब अपनी जाति वाले को बैठा देता है। फिर कहता है हमारे लिए सब जातियों के द्वार खुले हुए हैं।

तो आप बड़े निर्णय करते हो तब आप जो है अपने जाति वर्ग समुदाय के लोगों को देख लेते हो। हम और बाकी आप कहते हो जाति मुक्त भारत बनना चाहिए। मैं इस पाखंड में विश्वास नहीं रखता। भीतर से होना चाहिए आपके भीतर कि सब मेरे नारायण के स्वरूप है। सब एक ब्रह्म के अंश हैं।

वासुदेवा सर्वम ओम सर्वम खरो इदम ब्रह्मा सब सीताराम के स्वरूप है। लक्ष्मी रानी के स्वरूप है। सब शिव शक्ति के स्वरूप है। मैं इस बात को मानता हूं जीता और अंतिम सांस तक जिऊंगा। और आज मैं कह रहा हूं थोड़ा मैं वो तो प्रवाह में मैंने थोड़ा आपको कुछ ऊंचानीचा बोल दिया हो बात वो क्षमा करना। स्वामी रामदेव अंतिम स्वास तक इस बात के लिए लड़ेगा और भारत को जाति मुक्त बना करके छोड़ेगा। इस देश के लोग करोड़ों लोग मुझे मानते हैं और मैं सबसे कहता हूं बार-बार जाति वर्ग समुदायों के नाम पर घृणा नफरत मत करो। यूपीएससी एग्जाम को लेकर आपके यहां ट्रेनिंग भी होती है।

आप वो भी इसलिए कर रहे हैं। उसमें भी मैं पूछना चाहती हूं रिजर्वेशन को लेकर आपके क्या विचार हैं? तो देखो मैं कह रहा हूं प्रशासनिक नेतृत्व हो, राजनीतिक नेतृत्व हो, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका हो या हेल्थ हो, एग्रीकल्चर हो, इंडस्ट्री हो, कहीं बिजनेस हो, सब जगह सब जाती वर्ग समुदायों के लोगों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। और कुछ हाई गाइस, वेलकम टू अनदर एपिसोड ऑफ़ मी गेटिंग माय लाइफ टुगेदर।

एंड टुडे स्पेशल इज समथिंग दैट हैव बीन अवॉयडिंग फॉर मंथ। दिस सोफा लुक्स फाइन फ्रॉम द आउटसाइड। आई मीन आई स्पेंड सो मच टाइम ऑन दिस थिंग चिलिंग, स्नैकिंग, प्लेइंग विथ शुगर एंड एला। जस्ट एक्सिस्टिंग हियर ऑनेस्टली। एंड आई फील लाइक एट दिस पॉइंट इवन दो सोफा नीड द लिल थेरेपी। सो आई गॉट अर्बन कंपनी इन। लेट्स सी हाउ ग्रोस दिस एक्चुअली गेट्स। फर्स्ट अप वैक्यूमिंग एवरीथिंग आउट। इवन जाति वर्ग समुदाय ऐसे रहे कई ऐसे बीच में कारण बने 100 200 500 सालों में कि कुछ जाति वर्ग समुदायों के लोगों के साथ अन्याय हुआ। भेदभाव हुआ। तो वो पहले नहीं होना चाहिए था। हो गया। अब तो उन लोगों को कहीं रिजर्वेशन मिल रहा है तो मैं उसका विरोध नहीं करता हूं।

हम अर्थात कुछ मामलों में तो उनको आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए ना। हम कुछ लोगों का आधिपत्य या वर्चस्व नहीं रहना चाहिए। पर वो जो इंटरव्यू के दौरान जो है वह कुछ कहते हैं कि वहां पर हो जाता है। हां वो तो मैं बोला आपने भी कहा मैं मैं कह रहा हूं ना आज भी कह रहा हूं ये गलत है और उसमें देखो ये चीजें तो पतंजलि सीवर सर्विज एकेडमी पतंजलि कैरियर एकडमी आज कह फ्रस्ट्रेशन है हमारे यहां नीट और जेई की तैयारी करने वाली 60% 50 से 60% हमारा सक्सेस रिजल्ट है बच्चे क्लियर कर लेते हैं और उसमें कास्ट फैक्टर नहीं है। कोई कास्ट फैक्टर नहीं है।

हम अब सिविल सर्विज में भी ऐसा ही हाल है। हमारे यहां मुसलमान बच्चे भी कर रहे हैं। हमारे यहां ब्राह्मण बच्चे भी हैं। क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र में, दलित, आदिवासी, वनवासी सब हैं। दूसरे समुदाय से भी लोग आते हैं आपके यहां सीखने के लिए। तो मैं इसलिए कह रहा हूं ये जो आपस में ना ये ये विभाजनकारी चीजें ठीक नहीं है। देश तो संविधान देखो संविधान हो या वेद का विधान हो। कहीं पर भी अभेद दृष्टि रखिए। एक शब्द बोल रहा हूं बार-बार।

अभेद दृष्टि भेद और भेदभाव। यह ना वेद की दृष्टि है ना ही संविधान की दृष्टि है ना सनातन की दृष्टि हम इससे मुक्त होना चाहिए देश तो ये आगे हमारा सपना है जो हमारे आईएस आईपीएस आईएस आईएफएस पीसीएस आदि भी नहीं बन पाएंगे वो सामाजिक आर्थिक राजनीतिक नेतृत्व करेंगे देश में हम इस तरह से बच्चों को तैयार कर रहे हैं उनको घर जैसा वातावरण घर जैसा खाना पूरा सुरक्षित वातावरण और पूरा संयमित वातावरण कोई वहां गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड बनाने के लिए नहीं जा रहे वहां कोई गजड़ी बच्चे हम नहीं पैदा करना चाह रहे बहुत से लोग आईएएस आईपीएस की तैयारी करते हैं।

जरा सा स्ट्रेस होता है। का लेते हैं। कुछ बीच-बीच में वाइन और जो है वो भी पी लेते हैं। क्या कहते हैं? थोड़ा लाइट क्या आज ये आज जो जो हो रही है स्ट्रेस और इससे इसको इसको रिलीज करने के लिए एक्सरसाइज है। मेडिटेशन है। अच्छा एनवायरमेंट है। खुशी का वातावरण है। ये देना पड़ता है। क्योंकि आजकल मां-बाप बीड़ी से स्ट्रेस दूर नहीं होता। हां। बाजी करने से करने से ये इससे तो कोई स्ट्रेस दूर नहीं होता है। जी कित अरे पढ़ाई कर रहे हो अभी पहले कुछ बन जाओ कितने गर्लफ्रेंड है कितने बॉयफ्रेंड है इससे इससे करियर बन जाएगा इससे फ्रस्ट्रेशन दूर हो जाएगा यह चरित्रहीनता है तो हमें समझना पड़ेगा आजादी में और चरित्रहीनता में और बर्बादी में और श्रृंखलता में क्या फर्क है.

आजादी नारे लगाते हैं आजादी वी वांट फ्रीडम वी वांट जस्टिस और -छोटे जूते चप्पलों के गुलाम है। छोटे-छोटे एमएसी के विदेशी कंपनियों के गुलाम है। ब्रांड्स के गुलाम है। अब आजाद कहां हो? चमड़ी दमड़ी के गुलाम है। किसी का ऐसा नाक देखा, ऐसा चेहरा देखा, ऐसी आंखें देखी। आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल हमें। दिल की धड़कन ठहर गई। मिल गया हमें। ये काया है ये सब। तो ये ये जो आजादी के देखो हमें हर चीज को समझना पड़ेगा। जीवन चलेगा गंभीरता से प्रमाणिकता से जी और आजादी के नाम पर बर्बादी का रास्ता इ्तियार नहीं करना पड़ेगा। समाज के जितने भी बड़े हैं माता-पिता हैं देखो मैं मुझे पता है मैंने पिछले पांच छह इंटरव्यू दिए हैं बड़े और उसमें कड़वा भी बोला है.

जानबूझकर के बोला है हां मैं मुझे कुछ जजीज स्वामी रामदेव जिंदाबाद ये करें कोई फर्क नहीं स्वामी रामदेव और ताली से देश नहीं चलता आपको जो सही है वो बोलना चाहिए जेंजेस को भी वो बोलिए जो उनके लिए हितकारी है और खाली बच्चों के और जवानों की बात नहीं हर जाति वर्ग समुदाय के बारे में वो वो बोलिए जो सही है। लोग जरा सा कोई किसी को अपने बस किसी की सहानुभूति लेने के लिए किसी को अपने फेवर में खड़ा करने के लिए कोई किसी की जाति किसी वर्ग किसी समुदाय के पक्ष में बोल रहा है कोई तो

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