एक सवाल अगर अमिताभ बच्चन को हर जगह से रिजेक्ट किया जाता तो क्या होता? रेडियो वालों ने कहा कि आवाज सूटेबल नहीं है। है ना? कुछ लोगों ने कहा कि इसमें वो बात नहीं है। दिलीप कुमार ने रोल नहीं किया। धर्मेंद्र ने मना कर दिया। राजेश खन्ना ने कहा नहीं। मुंबई के हर डायरेक्टर ने दरवाजा बंद कर दिया। 12 फ्लॉप फिल्म्स डिस्ट्रीब्यूशन वालों ने कहा कि इसकी फिल्म में कोई नहीं आएगा। यह आदमी मरीन [संगीत] ड्राइव की बेंच पर रातें बिताने को मजबूर हो गया था। और फिर एक फिल्म ने सब कुछ बदल दिया।
आज उस पूरी कहानी को तुम्हें सुनाऊंगी। वो रिडक्शन जिन्होंने इंडिया को शहिंशा देने से लगभग रोक ही दिया था। शुरुआत करते हैं 1960 के। इलाहाबाद से हरिवंत राय बच्चन के घर में एक लंबा पतला दुबला लड़का पड़ा हो रहा था। इंडिया के सबसे बड़े हिंदी पोएट्स में से एक घर में लिटरेचर था, पोएट्री थी, आर्ट था और उस लड़के के मन में था कि उसे कुछ बड़ा करना है। दिल्ली से ग्रेजुएशन करता है। कोलकाता में शिपिंग कंपनी में जॉब मिलती है। ठीक-ठाक लाइफ थी। लेकिन मन में था कि कुछ तो अलग करना है। फिर एक दिन उनके भाई ने अजिताब ने एक फॉर्म भरा एक टैलेंट फॉर्म, एक टैलेंट कॉन्टेस्ट जिसमें खन्ना को ब्रेक मिला। अमिताभ की एक फोटो खींची ब्लैक एंड वाइट दुबला पतला ऑकवर्ड सा खड़ा हुआ था। फॉर्म भेजा रिजेक्ट हो गए। 2016 में अमिताभ बच्चन ने वो फोटो खुद Twitter पर पोस्ट की थी। हां, यही फोटो और लिखा कि यह वो फोटो है जो मैंने कॉन्टेस्ट में भेजी थी और मैं रिजेक्ट हुआ था।
यह कोई हैरानी की बात नहीं है। मुझे रिजेक्शन मिला। यह पहला रिजेक्शन था। लेकिन कहानी यहीं से शुरू होती है। अब आता है दूसरा रिजेक्शन। मुंबई ऑल इंडिया रेडियो। उस वक्त रेडियो का जमाना था। अमीन सयानी और भी बड़े-बड़े नाम थे जो रेडियो उस टाइम पर होस्ट करते थे। रेडियो के किंग थे। अमिताभ उनसे मिलने चाहते हैं। रेडियो प्रेजेंटर बनना चाहते थे। अमीन सयानी के स्टूडियो [संगीत] में कई बार गए। लेकिन उन्होंने कहा कि वो बिजी हैं। तो मिल नहीं पाए। कभी टाइम नहीं दिया। अमिताभ बच्चन ने ऑडिशन दिया इंग्लिश में हिंदी में और उन्हें कहा गया कि आपकी आवाज सूटेबल नहीं है। जरा सोचो वो आवाज जिसने आज पूरी दुनिया पहचानती है वो केबीसी लॉक किया जाए जो बोलते हैं करोड़ों लोगों के दिल रुक जाते हैं वो अनसूटेबल आवाज थी। अमिताभ बच्चन ने कहा कि हो सकता है कि मैं वो आवाज नहीं था जिसे वो ढूंढ रहे थे। उस टाइम पर बहुत सारे कमेंटेटर्स थे।
इतनी ग्रेसफुली उन्होंने वो बात कही जो एक्चुअली बहुत पेनफुल रही होगी। एक इंटरेस्टिंग ट्विस्ट जब अमिताभ बच्चन स्टार बन गए और अमीन सयानी ने फिल्म आनंद में उनकी आवाज सुनी तो वो चौंक गए। बाद में उन्होंने पहचाना कि यह वही पतला दुबला लड़का है। अमीन सयानी ने कहा कि अगर मैंने उसे उस वक्त रेडियो में रख लिया होता इंडियन सिनेमा अपना सबसे बड़ा स्टार खो देता। तीसरा रिजेक्शन मुंबई के फिल्म सर्कल्स में अमिताभ बच्चन ने हर डायरेक्टर के दरवाजे खटखटाए। हर जगह वो गए। एक बार उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया कि मैं सब जगह जाता था। फेल हो जाता था। कोई किसी रोल को नहीं देता था। बहुत टफ था ये सब टाइम। मैं शायर था। मैं दुबला पतला था। और यह वही इंसान है जो आगे चलकर ठो बनता है और कहता है कि डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन। लेकिन उस वक्त वो खुद को ही नहीं पकड़ पा रहे थे। एक और बात जो बहुत कम लोग जानते हैं। मुंबई में स्ट्रगलिंग डेज में अमिताभ बच्चन ने मरीन ड्राइव की बेंच पर रातें बिताई। पैसे नहीं थे। रहने का ठिकाना नहीं था।
हरिव राय बच्चन का बेटा मुंबई के फुटपाथ पर चौथा रिजेक्शन। फिल्म दुनिया का मेला अमिताभ कास्ट हुए और फिर मेकर्स ने उन्हें निकालकर संजय खान को ले लिया। क्योंकि डिस्ट्रीब्यूशन का ओपिनियन था इस आदमी की फिल्म कोई नहीं देखने आएगा। 1974 के आसपास की बात है। तब तक अमिताभ बच्चन 12 फिल्में कर चुके थे। और सब फ्लॉप। पांचवा रिजेक्शन जंजीर का पहला ड्राफ्ट मिलता है। राइटर सलीम जावेद ने स्क्रिप्ट लिखी स्क्रिप्ट ओरिजिनली धर्मेंद्र के लिए थी। धर्मेंद्र ने मना किया। डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने दिलीप कुमार को अप्रोच किया। उन्होंने मना कर दिया। राजकुमार ने मना कर दिया। देव आनंद को मना कर दिया। राजेश खन्ना ने मना कर दिया। हर सुपरस्टार ने स्क्रिप्ट को रिजेक्ट किया। क्योंकि उस वक्त राजेश खन्ना का रोमांटिक हीरो का जमाना था। एंग्री यंग मैन कोई नहीं जानना चाहता था। जावेद अख्तर ने बाद में बताया कि प्रकाश मेहरा को कोई मिल ही नहीं रहा था। मैं बार-बार कहता था कि अमिताभ [संगीत] को ले लेते हैं लेकिन उनकी फिल्म्स उस वक्त चल नहीं रही थी। यह कोई अट्रैक्टिव प्रपोजल नहीं था उस टाइम पर और बस एक ट्विस्ट था जया बहादुरी जो अमिताभ बच्चन की होने वाली वाइफ थी उस टाइम पर। उन्होंने प्रकाश मेहरा से कहा अमिताभ को ले लो। तब जाकर लास्ट चॉइस के तौर पर अमिताभ का नाम फाइनललाइज हुआ। लास्ट चॉइस याद रखो लास्ट चॉइस। 11 मई 1973 जंजीर रिलीज होती है और बॉलीवुड की हिस्ट्री बदल गई।
विजय वो एंग्री यंग मैन जो सिस्टम से लड़ता है, जो करप्ट लोगों को ललकारता है, वो कैरेक्टर इतना पावरफुल था कि इंडिया ने पहली बार किसी हीरो में खुद को देखा। सालों से गुस्सा था जो देश वो अमिताभ की आंखों में सब कुछ देख रहा था। फिल्म ने ₹17 करोड़ वर्ल्ड वाइड कमाए जो आज के हिसाब से ₹500 करोड़ हैं। इसके बाद दीवा, शोले, अमर अकबर, एंथनी एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्में मिलती रही। और वो जंजीर जिसे दिलीप कुमार ने रिजेक्ट किया उसने अमिताभ को दिलीप कुमार से बड़ा बना दिया। अमीन सयानी ने जिस आवाज को अनसूटेबल कहा वो आवाज आज इंडिया की सबसे आइकॉनिक आवाज बनी। जिस ऑडिशन में उनका फोटो रिजेक्ट किया गया वो आदमी आज सबसे ज्यादा अवार्ड जीत रहा था। वो एक्टर है। मुंबई के जिस डायरेक्टर्स ने जिस प्रोड्यूसर हाउस ने दरवाजे बंद किए वो आज अमिताभ बच्चन को याद कर रहे थे। जहां एक रात हारा हुआ लड़का बेंच पर सोता है। उसी रात मुंबई में आज उसके पांच बंगलो हैं। यह कहानी इसलिए नहीं कि अमिताभ बच्चन लकी हैं। यह कहानी इसलिए कि हर रिजेक्शन के बाद वो रुके नहीं। वो एक दिन उन्हें वो चांस मिला जो वो चाहते थे और वो था जंजीर। जो सब ने छोड़ा था और उन्होंने उसका हाथ पकड़ा। कमेंट करके बताओ इन रिजेक्शंस में से कौन सा तुम्हें पता था और कौन सा तुम्हें सबसे शॉकिंग लगा। मैं तुम्हें नेक्स्ट वीडियो में मिलूंगी। तब तक तुम चैनल को सब्सक्राइब करो, वीडियो को लाइक और शेयर करो। बेल आइकॉन दबाओ सब करो टूटे हाथ में लड़की तुम्हारे लिए वीडियो बना रही है। इतना तो कर ही सकते हो ना।