अभी तू मुझे जानता नहीं है 2 मिनट में उठा दूंगा होगा। यह डायलॉग किसी फिल्म के विलेन या राह चलते गुंडे का नहीं बल्कि मेरठ सिटी के एडीएम बृजेश सिंह का बताया जा रहा है। वही बृजेश सिंह जिनकी सोशल मीडिया पर सख्त अवसर वाली सिंघम टाइप इमेज खूब दिखाई जाती है। लेकिन इस बार उनका एक वीडियो वायरल है और लोग पूछ रहे हैं कि जनता अपनी समस्या लेकर जाए तो क्या उसे इसी भाषा में जवाब मिलेगा?
मामला मेरठ के वार्ड नंबर छह का है। आज तक से जुड़े मोहम्मद उस्मान चौधरी की रिपोर्ट के मुताबिक इलाके के लोग काफी समय से गंदगी, जलभराव, आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्याओं से परेशान थे।
कई बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो लोग कमिश्नर ऑफिस पहुंच गए। वहां धरना प्रदर्शन किया। वार्ड छह के पार्षद प्रदीप कसाना भी उनके साथ थे। प्रदर्शनकारी कमिश्नर कार्यालय के बाहर अपने ट्रैक्टर भी ले आए थे। ट्रैक्टर को कमिश्नर कार्यालय के बाहर पार्क किया गया। इसी बात पर पुलिसकर्मियों से प्रदर्शनकारियों की कहासनी हो गई और पुलिस ने ट्रैक्टरों की चाबियां छीन ली।
इसके बाद वे कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सूचना मिलने पर एडीएम सिटी बृजेश सिंह और अपर नगर आयुक्त लवि त्रिपाठी भी मौके पर पहुंचे। एडीएम बृजेश सिंह ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि संबंधित अधिकारी से बातचीत चल रही है और उनकी मांगे जल्द पूरी की जाएंगी। उन्होंने ट्रैक्टर ट्रॉलियों को किनारे लगाने को कहा लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं मानी जिस पर पार्षद और एडीएम के बीच तीखी बहस हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक एडीएम ने प्रदर्शनकारियों को मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी भी दी। जिसके बाद हंगामा और बढ़ गया। वीडियो में वो यह कहते भी सुनाई देते हैं कि अभी तू मुझे जानता नहीं है। 2 मिनट में उठा दूंगा।
दिमाग खराब है तुम्हारा। मुझे तरीका सिखाओगे तो। पार्षद प्रशांत किसाना का कहना है कि उनके वार्ड में साफ सफाई जैसी कोई चीज नहीं बची है। हालत खराब है लेकिन फिर भी कोई उस तरफ ध्यान नहीं दे रहा। गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं मगर प्रशासन अपना काम करने को ही तैयार नहीं। गांव में सफाई कर्मचारी नहीं है। जिस कारण ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने और क्या बताया सुनिए। मेरा नाम प्रशांत कसाना है। मैं पार्षद हूं वार्ड नंबर छ से मेरठ नगर निगम। आज हम सफाई और कूड़े की गाड़ी और बंदरों की और जो हमारे यहां कच्चे रास्ते हैं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हम कमिश्नर साहब से मिलने आए हैं क्योंकि नगर निगम के अधिकारियों को हमने कई बार शिकायत कर ली लिखित में भी और वैसे भी तो कोई सुनने को तैयार नहीं है।
ना नगर आयुक्त साहब ना मेयर साहब ना कोई अपर नगर आयुक्त ना कोई डॉक्टर कोई समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। आज हम मंडल के भी और हमारे जिले के भी सबसे बड़े अधिकारी कमिश्नर साहब हैं। हम उनसे मिलने आए हैं और उनसे ही अपनी समस्या का समाधान करा के जाएंगे। अधिकारी कोई सुनता ही नहीं। कान पे जुई ही नहीं रेंग रही उनके। कहते हैं कि हां सफाई हो रही है। मैंने कहा सफाई कागजों में हो रही है। धरातल पे कोई सफाई नहीं है। गंदगी बंदर आवारा कुत्ते गंदगी। मैं आपको अभी फोटो वीडियो दिखा रहा हूं। आप देखना हाल कैसा हुआ है। बंदरों का आतंक बंदरों का आतंक ऐसा है। जी डूंगरावली और सुंदरा और कुटा गांव है मेरे वार्ड के। दोनों गांवों में बच्चे और महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल पा रही।
बंदरों के आतंक के कारण। मैंने दो बार कमिश्नर साहब के यहां इसकी शिकायत भी लगाई है। कमिश्नर साहब ने मुझे आश्वासन भी दिया था। कमिश्नर साहब ने डीएफओ मैम को फोन भी किया था। पर डीएफओ मैम ने तब कहा था कि हमारा कोई इस कदर नहीं है पकड़ने का कि नगर निगम पकड़ेगा। हंगामे को बढ़ता देख भारी पुलिस बल। मौके पर तैनात किया गया। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है। हालांकि काफी देर तक चली जद्दोजहद और अपर नगर आयुक्त द्वारा जल्द समाधान के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए। एडीएम सिटी ने साफ किया कि ट्रैक्टरों की वजह से आम जनता को परेशानी हो रही थी।
इसीलिए उन्हें हटाने को कहा गया था। फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो अप्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार और जनता से संवाद के तरीके पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। खासकर तब जब लोग अपनी बुनियादी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। l