1980 के दशक में फिल्म ‘बुलंदीकी शूटिंग के दौरान राजकुमार, रजनीकांत और नसीरुद्दीन शाह एक साथ काम कर रहे थे।
राजकुमार अपनी दमदार आवाज़, बेबाक अंदाज़ और सेट पर अनुशासन के लिए मशहूर थे। कहा जाता है कि जब नए कलाकार उनके सामने पहला सीन देने आते थे, तो उनके आत्मविश्वास और प्रभावशाली व्यक्तित्व से घबरा जाते थे।एक इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने स्वीकार किया था कि राजकुमार जैसे बड़े कलाकार के साथ अभिनय करना आसान नहीं था।
उनके सामने संवाद बोलते समय कलाकारों पर अतिरिक्त दबाव महसूस होता था। वहीं रजनीकांत भी उस दौर में हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बना रहे थे। राजकुमार के सामने पहला सीन करते समय वे भी काफी गंभीर और सतर्क थे, क्योंकि राजकुमार संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस में बेहद प्रभावशाली माने जाते थे।हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों उनसे व्यक्तिगत रूप से भयभीत थे।
दरअसल, यह डर नहीं बल्कि एक महान अभिनेता के प्रति सम्मान, दबाव और उनके अभिनय स्तर के अनुरूप प्रदर्शन करने की स्वाभाविक घबराहट थी। शूटिंग आगे बढ़ने के साथ माहौल सहज हुआ और तीनों कलाकारों ने शानदार अभिनय से फिल्म को यादगार बना दिया।