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जयपुर केस:चचारे भाई के साथ … मां को मौ!त देने वाली आयुषी को लेकर खौफनाक खुलासा।

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जयपुर की एक खबर ने पूरे देश को हिला के रख दिया। लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि किस तरह से 23 साल की एक लड़की ने 14 करोड़ की संपत्ति और सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए अपनी ही मां का कत्ल करा दिया। जब यह खबर का खुलासा होता है तो उसके बाद पूरे देश भर में इस बात को लेकर चर्चा होना शुरू हो जाती है। चाहे गांव हो, शहर हो, कस्बा हो, चौराहे हो, स्कूल हो, कॉलेज हो या फिर कई चाय की दुकान हो जहां देखो वहां पर हर कोई यही बात कर रहा था कि आखिरकार यह समाज में हो क्या रहा है?

एक लड़की ने आखिरकार ऐसा क्यों किया? लेकिन सोचने वाली बात यह है जिस लड़की के बारे में लगातार बातचीत चल रही है उस लड़की का नाम आयुष शर्मा होता है। आयुष शर्मा के पिता जिनका नाम विजय वशिष्ठ होता है उसकी मां जिसका नाम नीरज शर्मा होता है और एक 16 साल का भाई होता है।

यदि माता और पिता की बात अलग भी कर दी जाए तो बात बचती है भाई की। भाई जिसकी उम्र लगभग 16 साल के आसपास होती है। भाई 50% दिमागी रूप से कमजोर है। ऐसा कमजोर है कि जैसे और सामान्य लोग अपनी जिंदगी जीते हैं। सामान्य तरीके से कहीं भी घूमना खाना फिरना ये सब होता है। साथ ही शादी होती है।

शादी के बाद बच्चे होते हैं। एक आम जिंदगी जी जाती है। शायद आयुष शर्मा का जो भाई होता है वो ऐसी जिंदगी जीने का कभी वो मौका ही नहीं मिलता। मौका इसलिए नहीं मिलता क्योंकि वो 50% दिमागी रूप से कमजोर जो है। अब ऐसी स्थिति में माता या पिता ने जितनी भी संपत्ति अर्जित की है वो बेटा उस संपत्ति को लेकर भी वो क्या करता? क्या उसका भौतिक सुख सुविधाओं का लाभ तो शायद कभी उठा नहीं पाता लेकिन देर सवेेर वो सारी की सारी संपत्ति आनी बेटी के ही नाम थी।

चाहे वो मां की नौकरी से मिलने वाली आमदनी हो या कुछ हो। सिर्फ छोटे भाई के हिस्से में अगर कुछ आना था तो या तो उसके खाने पीने पर जो खर्च होता है वो या फिर उसके इलाज पे जो खर्च होता है वो बाकी सब कुछ बचता है तो आयुष के नाम ही बचता है।

फिर सवाल उठता है कि अगर सब कुछ आयुष के नाम ही होने वाला था तो फिर आयुषी अपनी मां का कत्ल क्यों करेगी? आज की इस कहानी के माध्यम से यही जानने और समझने की कोशिश करते हैं। आदाब नमस्कार, सत श्री अकाल। मैं उस्मान सैफी। 3 जुलाई 2026 की शाम 4:45 के आसपास का वक्त हो रहा था। राजस्थान प्रदेश के जयपुर में एक थाना लगता है।

प्रताप नगर और प्रतापनगर क्षेत्र की यह बात है। Scorpio कार जो सफेद रंग की होती है जिसका नंबर होता है HR51 CU 1230। यह गाड़ी आराम से इत्मीनान से खड़ी हुई थी और जैसे ही सड़क के किनारे चल रही एक महिला होती है। उस महिला के पास बहुत तेजी के साथ यह कार जाती है। ऐसा दावा किया जाता है कि कार की जो स्पीड थी उस वक्त लगभग 120 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार रफ्तार से वो कार दौड़ रही थी।

हालांकि उस महिला ने अपने आप को सेफ करने के लिए 60 फुट का वो चौड़ा रोड होता है। सड़क के किनारे आराम से चल रही थी। लेकिन फिर भी स्कर्पियो गार्ड जब जोरदार टक्कर मारती है, टक्कर मारने के बाद वो महिला फुटबॉल की तरह हवा में उछलती है और उसकी मौके पर ही मौत हो जाती है।

आसपास जितने लोगों ने इस दृश्य को देखा था वो लोग उस महिला को पहचानते थे। इस महिला के परिवार वालों को सूचना दे देते हैं और जैसे सूचना दी जाती है तो इस घर की एक बेटी होती है। 23 साल की जिसकी उम्र होती है। नाम जिसका आयुष होता है क्योंकि इस महिला के पति की 1 साल पहले करीब मौत हो चुकी थी। अब लड़की मौके पर पहुंचती है। मौके पर आने के बाद सबसे पहले उस लड़की ने अपने मामा जिनका नाम राकेश शर्मा होता है उनको फोन लगाती है और फोन लगाने के बाद कहती है कि मामा मां का एक्सीडेंट हो गया है और मां मर गई है। उस लड़की ने बहुत ही सामान्य तरीके से यह बात कही थी।

ऐसी सामान्य तरीके से जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं है। तभी उसके मामा के दिमाग में कुछ सवाल गूंने लगते हैं। सवाल परेशान करने लगते हैं। सवाल परेशान इसलिए करने लगते हैं कि किसी की मां अगर इस तरह से मारी गई है तो वो लड़की रो क्यों नहीं रही है? वह लड़की आखिरकार अपने मामा से अपने लिए तसल्ली वाली बात क्यों नहीं कर रही है? वह इतने सामान्य तरीके से ऐसा कैसे पेश आ सकती है? इतनी मैच्योरिटी क्यों दिखाने की कोशिश कर रही है? मामा को शक होता है और जैसे ही मामा को शक होता है तो वो पुलिस स्टेशन जाते हैं। महज एक या दो लाइन ही लिखी थी और उस लाइन में लिखा हुआ था कि साहब यह एक सामान्य हादसा नहीं है बल्कि एक हत्याकांड है और इस हत्याकांड की आप जांच करा लीजिए। पुलिस शुरुआत में इस मामले को हादसा ही मान रही थी। जितने लोगों ने इस दृश्य को अपनी आंखों से देखा था। सब के सब इसे हादसा ही मान रहे थे।

लेकिन मामा ने जिस तरह से शक की सुइयां घुमानी शुरू की हैं। उसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच पड़ताल करना शुरू किया है। जो लोगों के सामने आता है वो लोगों के पैरों तले जमीन खिसका देता है। सोचने पर मजबूर कर देता है। हर घर में इस बात की चर्चा करना शुरू कर देता है कि आखिरकार एक लड़की ऐसा क्यों करेगी। मामा ने मीडिया के सामने बयान देना शुरू किया। मामा ने फिर एक परिवार भी डाला। मामा ने जब लोगों को बताना शुरू किया है, मीडिया में यह बात आनी शुरू हो जाती हैं। तो चार ऐसे पॉइंट थे जिन चार पॉइंट की आज हर जगह चर्चा हो रही है।

पहले पॉइंट की अगर हम बात करें तो पहला पॉइंट होता है नीरज शर्मा का। नीरज शर्मा जिसका एक्सीडेंट हुआ है जो मर चुकी है। उन्होंने 1 मार्च 2026 को सांगानेर थाना थाना लगता है। पुलिस स्टेशन लगता है। पुलिस स्टेशन में वो एक तहरीर देके आती हैं। शिकायती पत्र देके आती हैं और जाकर कहती हैं कि साहब हमारे घर पर चोरी हुई है। उसमें कैश गया है, ज्वेलरी गई है। साथ ही कीमती सामान भी गया है। इस मामले की जांच पड़ताल कर लीजिए। चोर को पकड़ लीजिए। जो चोर होगा उसके खिलाफ आप कारवाई कर दीजिए।

पुलिस ने उस शिकायती पत्र को संज्ञान ही नहीं लिया। यानी कि उस पर कोई कारवाई ही नहीं की। जब ऐसी स्थिति आ जाती है कोई कारवाई नहीं होती है काश कि कारवाई हो जाती तो चोर पकड़े जाते और जो चोर पकड़े जाते तो हो सकता है कि इन चोरों में वो लोग भी पकड़े जाते जिन्होंने क्या नीरज शर्मा का एक्सीडेंट कराने के बाद उनकी हत्या कराई थी अगर वो पहले ही पकड़े जाते तो शायद यह घटना होती ही नहीं इसलिए वो इस मामले की जांच की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं कि जिसने भी ज्वेलरी चुराई है जिसने कीमती सामान चुराया है जो भी घर के अंदर आया था इसका भी पता किया जाए और पता करने के बाद यह पता किया जाए कि आखिरकार उस पैसे का हुआ क्या है?

कहीं ऐसा तो नहीं है कि उस पैसे से ही वह ज्वेलरी बेची गई हो। ₹7 लाख इकट्ठे किए गए हो और फिर कातिलों को हायर किया गया हो। दूसरा सवाल उनकी तरफ से आता है कि नीरज शर्मा के जो पति होते हैं जिनका नाम विजय वशिष्ठ होता है। दरअसल उनको ब्रेन ट्यूमर की शिकायत थी। उनका इलाज चल रहा था। यह दिसंबर 2024 तक इनका इलाज चल रहा था। एक हॉस्पिटल में वह एडमिट होते हैं। लेकिन अचानक ही जो उनकी बेटी होती है जिसका नाम आयुष होता है।

आयुष और उस आयुष का चचेरा भाई होता है रवि उर्फ बलराम वो हॉस्पिटल पहुंचते हैं और घर वालों को परिवार वालों को किसी को कोई सूचना नहीं देते और बिना सूचना दिए हुए विजय वशिष्ठ को वहां से निकालते हैं। उनकी हॉस्पिटल से छुट्टी करा देते हैं और छुट्टी कराने के बाद कहीं ले जाते हैं। कहीं ऐसी जगह ले जाते हैं जहां घर में परिवार में किसी को भी पता नहीं था। जो उनकी पत्नी होती है जिनका नाम नीरज शर्मा होता है। नीरज शर्मा बार-बार अपनी बेटी से पूछती थी कि बेटा तुम्हारे पापा का इलाज कहां चल रहा है? तो बेटी जवाब देती थी कि किसी अच्छे हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

आईसीयू में है। वहां कोई मिल नहीं सकता। वहां कोई बात नहीं कर सकता। लेकिन मां अपने पति से यानी कि नीरज शर्मा अपने पति से मिलने के लिए इसलिए भी असमर्थ थी क्योंकि उनका जो बेटा है 16 साल का उसके साथ कोई ना कोई हर वक्त रहेगा। अगर रहेगा तो बच्चा सुरक्षित रहेगा। अगर कोई साथ नहीं रहेगा तो फिर वह बच्चा सुरक्षित नहीं रहेगा।

इसलिए मां के सामने ऐसी मजबूरी बन जाती है कि वह अपने बेटे को देखे या फिर पति को देखे। बार-बार बातचीत की जाती है लेकिन बेटी यह सही-सही जवाब दे नहीं रही थी। कब 3 महीने का वक्त बीत जाता है। किसी को पता ही नहीं चलता। 3 महीने के बाद तारीख आती है 9 अप्रैल 2025। यह लड़की जिसका नाम आयुष होता है। आयुष शर्मा अपने मामा जिनका नाम राकेश शर्मा होता है। उनको फोन करती है। फोन करने के बाद कहती है कि सब के सब लोग परेशान हो रहे हैं कि विजय वशिष्ठ कहां है, पापा कहां है, पापा कहां है? हॉस्पिटल में एडमिट है। जाकर देख सकते हो कि पापा कहां है। जैसे ही राखी शर्मा को ये बात पता चलती है, राखी शर्मा सीधा हॉस्पिटल पहुंच जाते हैं। हॉस्पिटल में जाने के बाद देखते क्या है कि वाकई उसकी क्रिटिकल कंडीशन होती है। बहुत ज्यादा हालत खराब थी। तभी डॉक्टर के पास जाते हैं। डॉक्टर साहब से पूछते हैं डॉक्टर साहब विजय जी की हालत कैसी है?

यानी कि उनके जीजा जी की हालत कैसी है? डॉक्टर साहब कहते हैं कि उनके शरीर के जो ऑर्ग्स हैं, चाहे वह फेफड़े हो, चाहे वह लीवर हो या हार्ट हो, लगभग 90% खराब हो चुके हैं। यानी कि उनके बचने के चांस बहुत कम है। लेकिन हम अंतिम क्षणों तक उनका इलाज करेंगे ताकि कहीं से कोई भी अगर 1% भी गुंजाइश होगी तो हम उस गुंजाइश को बचा कर रखने की कोशिश करेंगे। उनका इलाज करेंगे। लेकिन वो ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह पाते। 9 अप्रैल की यह सूचना थी और 21 अप्रैल 2025 को आखिरकार उनकी मौत हो जाती है और जैसे ही मौत होती है तो उसके बाद फिर इस मामले को एक हादसा ही समझा जा रहा था। लेकिन अब राकेश शर्मा पुलिस के पास जाकर यह कहते हैं इस मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार 3 महीने उनके जीजा कहां रहे?

किस हॉस्पिटल में इलाज चला? पैसे कहां से आए? कितने रुपए खर्च हुए? बिल होंगे, कौन-कौन सी दवाइयां दी गई होंगी? उनकी पूरी फाइल बनाई होगी। वो फाइल सामने आनी चाहिए और यह मामला सार्वजनिक होना चाहिए कि आखिरकार ऐसा क्यों हुआ? तीसरा सवाल जो उनका होता है वह कहते हैं कि रवि उर्फ बल बलराम जो होता है जो उनका विजय का भतीजा होता है दरअसल पढ़ने में शुरू से ही वो कमजोर होता है। जो कमजोर होता है तो वो उसके अपने पढ़ने के लिए या फिर रहने के लिए वो अपने चाचा के घर पे यानी कि विजय कुमार के घर पे आ जाता है। ऐसा मीडिया रिपोर्ट में भी कहा जाता है। जब वो कमजोर होता है पढ़ने में तो उसको एलएलबी कराई जाती है और एलएलबी वो कर लेता है। ना जाने कब उसने अपनी ही बहन को आयुष को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया और जब प्रेम जाल में फंसा लेता है तो उस पर पूरी तरह से उसे अपने वश में कर लेता है। ऐसा वश में करता है कि जैसा वो बलराम बोलता है आयुषी वैसा ही करती है।

यानी कि 2025 जब शुरू होता है तब तक वो उसके पूरी तरह से कब्जे में थी। पूरी मुट्ठी में थी। जैसा बलराम चाहता था आयुषी वैसा ही करती थी। आखिरकार इसके पीछे क्या वजह है? क्या नहीं है? इस मामले की भी जांच होनी चाहिए। क्यों आखिरकार आयुषी शर्मा बलराम की कठपुतली की तरह उसके लिए पीछे आगे घूमती थी। क्यों उसके लिए पूरा काम करती थी? क्यों वो अपनी मां से बार-बार झगड़ा करती थी, फसाद करती थी। वो आगे चौथा पॉइंट जो है जो मीडिया में लगातार इस बात की चर्चा हो रही है। वो पॉइंट ये है कि जब पिता की मौत हो जाती है, पिता की के बाद अब नौकरी की बात आती है क्योंकि उनकी सरकारी नौकरी होती है।

हाई कोर्ट में वो एलडीसी होते हैं। क्लर्क की नौकरी थी। अब ऐसी स्थिति में जो बेटी है वह 23 साल की है, पढ़ी लिखी है। वो अपनी मां से कहती है कि मां मैं अपने पिता की जगह नौकरी करना चाहती हूं। इसलिए यह नौकरी मैं ही करूंगी। यानी कि वो अपनी मां से शायद उतनी पूरी बात जानी भी नहीं और उसने जाकर फॉर्म भी भर दिया था नौकरी का। लेकिन जैसे ही मां को यह बात पता चलती है, मां को पहले ही रिश्तेदारों ने बताया कि तुम्हारी जो बेटी है, वह पराए घर की हो जाएगी। वो बाहर चली जाएगी। बेटे को हमेशा इलाज की जरूरत पड़ती रहती है। 16 साल का वो बालक है। कहां रहेगा, किसके सहारे रहोगी? कैसे जिंदगी जिओगी?

बिना पैसे के यह जिंदगी चलती नहीं है। इसलिए इस नौकरी को तुम करो और जो बेटी है उसको बहुत अच्छे से पढ़ाओ, पढ़ाओ, लिखा हो चाहे वह जज बने या कोई बड़ी ऑफिसर बने उसको पूरी खुली छूट दे दो। बेटी को पढ़ाओ। जब बेटी को बात पढ़ाने की आती है तो मां यानी कि नीरज शर्मा ने उस नौकरी को खुद ही करना चाहा और जैसे ही वो मां नौकरी कर लेती है तो यह बात कहीं ना कहीं आयुषी को बहुत ज्यादा खराब लगती है। और आयुषी से ज्यादा यह बात खराब लगती है। रवि उर्फ बलराम को। रवि उर्फ़ बलराम ने इस तरह से आयुषी पर अपना हाथ रखा क्योंकि उसे वश में तो पहले कर ही चुका था। इसलिए जनवरी 2000 26 की बात है। इन्होंने इस घर को छोड़ दिया। यानी कि जो जिस घर में वो रह रहे हैं। यह घर है रविंद्र नगर में जो प्रताप नगर थाना क्षेत्र में लगता है। और इसके बाद यहां से यह पुराना घर जो कल्याण नगर थर्ड में है वो सीधा वहां पहुंच जाते हैं। वहां रहने लगते हैं और ऐसा दावा किया जाता है कि भाई-बहन यानी कि जो आयुषी है वो अपने ही चचेरे भाई रवि उर्फ़ बलराम के साथ बिल्कुल ठीक वैसे ही रह रही है जैसे कोई पति और पत्नी रहते हैं। यानी कि लिव इन रिलेशनशिप में रहते हैं।

हालांकि हम इस बात का कोई दावा नहीं कर रहे हैं। लेकिन इस बात की मीडिया में चर्चा है, चर्चा बहुत ज्यादा है। तो इस मामले की भी जांच पड़ताल होनी चाहिए। क्योंकि मेडिकल में अगर यह सब चीज की पुष्टि हो जाती है। क्या वाकई आयुष सेक्सुअली एक्टिव थी कि नहीं थी? जब उसका मेडिकल होगा तो इस बात का क्लियर हो ही जाएगा। लेकिन इस बात के क्लियर भी और तब होगा जब रवि उर्फ़ बलराम सलाखों के पीछे जाएगा। पुलिस की पकड़ में आएगा। यह घटना हो चुकी है। घटना के बावजूद भी पुलिस अभी तक उस मुख्य आरोपी जिसने इस पूरे हत्याकांड को अंजाम दिलवाया है आयुष के माध्यम से। आखिरकार वो कहां है, कहां नहीं है। पुलिस अभी उसका पता नहीं निकाल पाई है। पुलिस जब उसे गिरफ्तार करेगी, गिरफ्तार करने के बाद उससे एक-एक सवाल का जब जवाब मांगेगी कि जिस चाचा ने तुझे अपने घर पर रखा, तेरी कमजोरी को देखते हुए तुझे पढ़ाया, लिखाया, एलएलबी कराई, सब कुछ कराया। फिर आखिरकार तूने अपनी ही बहन को अपने वश में किया और अपने वश में करने के बाद ₹1 करोड़ की संपत्ति को हथियाने के लिए अपनी ही भती बहन को नौकरी दिलवाकर उस पर पूरी तरह से अधिकार अपना स्थापित करने के लिए तूने यह सब काम क्यों किया है? क्या यह बात सही है या नहीं है? यह तो रवि उर्फ़ बलराम ही पुलिस की जांच के बाद ही कह सकेगा।

या फिर जो कहानी पुलिस ने अभी तक बताई है, जो पुलिस की जांच में आया है, आयुषी ही पूरी मुख्य इसमें कर्ताधर्ता है। उसी ने ही अपने भाई को अपने वश में किया। फिर अपने ताऊ को अपने वश में किया। फिर ताऊ ने जितने भी लोगों को चाहे वो हेमंत हो, आकाश हो, अरविंद हो, रोहित हो जितने भी उसने हायर किए थे जिनको ₹7 लाख की रकम दी थी। ₹7 लाख की रकम रकम देने के बाद उनसे अपनी मां की हत्या कराने की पूरी प्लानिंग की थी। क्या यही बात सही है कि पहले Thar से अपनी मां को मरवाने की कोशिश की। Thar से जब कामयाबी नहीं मिलती है तब एक महीने तक वो रेकी करते हैं और रेकी करने के बाद 3 जुलाई 2026 की शाम 4:45 के आसपास Scorpio कार से जोरदार टक्कर लगवाई जाती है और ऐसी टक्कर लगती है कि मां की घटना स्थल पर ही मौत हो जाती है।

यह घटना आज पूरे भारतवर्ष में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। इससे जुड़ी हुई हर एक कड़ी के बारे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिरकार कोई बेटी ऐसा कैसे कर सकती है। बहुत सारी घटनाएं आपने सुनी होंगी कि बेटे ने मां को मार दिया, बाप को मार दिया। लेकिन बेटी द्वारा मां को मारने की घटना या फिर बेटी द्वारा पिता को मारने की घटना ऐसी घटना कम ही सुनने को देखने को मिलती हैं। आज आयुषी इसीलिए चर्चाओं का विषय बनी हुई है। दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम को सोने का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है। किसी का दिल दुखाना नहीं है। बल्कि आपको जागरूक करना है। आपको सचेत करना है और जाते-जाते अंकित वर्मा हैं। अबू शाद खान जो कि मऊ के रहने वाले हैं। मोहम्मद हसनैन सैफी हैं। आज इन सभी का जन्मदिन है।

इनको जन्मदिन की ढेरों सारी शुभकामनाएं। बहुत-बहुत मुबारकबाद और कुछ लोगों ने नाम लेने की अपील की है जिसमें राज बहादुर सिंह भगवती प्रसाद उन्नाव से हैदर अली सीतामणि से मनोज कौशल भिंड से रेखा वर्मा हिसार से यूनुस खुजानगढ़ से अनुज गुप्ता सुशील कुमार अशोक सिंह कानपुर से रीना कुमारी अवधेश त्यागी हसनपुर से एडवोकेट धीरज कौशिक गाजियाबाद से भूपेंद्र सिंह साहिल चौधरी करनाल से विनय कुमार विनय प्रताप सिंह गुरुगांव से रणवीर सिंह दिल्ली से सिद्धार्थ सागर बिहार से आप सब लोग अपना ख्याल रखें सुरक्षित रहें जय हिंद जय भारत

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