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नहीं है मां के मौ!त का मलाल, आरोपी आयुषी ने की ऐसी हरकत, मचा बवाल!

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कितना पढ़ाई किए हो? लास्ट ईयर। बेटा मां तो बचपन से पालती पोछती। ऐसा क्यों किया? अफसोस है आपको? कितने दिन से कर रही थी प्लानिंग? कब से कर रही थी प्लानिंग आप? उसने कहा था क्या आपसे? भाई ने। आपको डर नहीं लगा कि पकड़ा जाऊंगा। आयुषी अरे आपसे बात कर रहा हूं मैं। अकेले क्यों रहती थी आप? मां से मिलती थी आप। वहां रहने का खर्चावर्चा कौन देता था? हम ही देती थी ना।

आपने सुन भी लिया और देख भी लिया होगा। हमारे रिपोर्टर शरद कुमार ने बहुत कोशिश की यह जानने की कि आखिर आयुषी ने अपनी मां का कत्ल क्यों करवा दिया। लेकिन वो बेशर्मी से तन कर खड़ी रही। बस एक ही सवाल का जवाब दिया कि वह कानून की पढ़ाई कर रही है। लेकिन उसी कानून की पढ़ाई से सीखे गए दांव पेच उसने अपनी ही मां पर आजमा डाले और उनकी जान ले ली।

यह कहानी है उस बेटी की जिसने अपनी मां की सरकारी नौकरी और संपत्ति हासिल करने के लिए अपनी ही मां का करवा दिया। की साजिश काफी वक्त से रची जा रही थी लेकिन अंजाम तक पहुंचाने में काफी दिक्कतें आ रही थी। घर के बाहर आयुष ने अपनी मां को गाड़ी से कुचलवाकर मारने की कोशिश की थी।

जिसके बाद उसकी मां नीरज शर्मा काफी डरी हुई थी। काफी सहम गई थी। उन्होंने घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया था। लेकिन आयुषी अब किसी भी कीमत पर उनकी जान लेना चाहती थी। आयुषी घर से नाराज होकर अपने ताऊ के घर रहने के लिए चली गई और वहीं से शुरू हुई की यह साजिश।

मां घर में रहती थी। आयुषी का एक 16 साल का भाई जो कि मानसिक तौर पर कमजोर था। वह भी घर में ही रहा करता था। अब आयुष के लिए मां के कत्ल की साजिश को अंजाम देना टेढ़ी खीर बन चुका था। लिहाजा आयुषी ने अपने घर पर ही टोने टटके के जरिए मां को डराना शुरू कर दिया ताकि वह डरकर घर से बाहर निकले और फिर उनका घर के बाहर एक्सीडेंट करवाकर जान ली जा सके।

आयुषी ने इसी साजिश के तहत अपने ही घर में जलते हुए कपड़े फेंके, नारियल और सिंदूर भी फेंके और तो और घर के अंदर पत्थर भी फेंकवाए ताकि मां नीरज शर्मा डरकर घर से बाहर निकले और फिर उनकी जान ली जा सके। बेटी आयुषी ने था गाड़ी से कुचलकर मां नीरज शर्मा को पहले भी मारने की कोशिश की थी। उसके बाद मां डर गई थी।

मां घर से निकलना बंद कर दी थी। मां को घर से निकालने के लिए बेटी आयुषी ने तरह-तरह के तरीके आजमाए। नींबू, मिर्चा, कलर सब घर के अंदर खुद ही फेंक दिया करती थी। और यह देख सकते हैं किस तरह से पथराव भी कई बार उसने करवाया है ताकि मां घर से बाहर निकले और गली में उसका एक्सीडेंट करवा दें। उसके बाद मां ने आप देख सकते हैं किस तरह से घर के बाहर जाली लगा दिया है।

एक दो तीन ऊपर चार और फिर अंदर पांच। पांच-पांच सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं ताकि कोई भी आए तो पता चल जाए। वह इतना डर गई थी कि कोई ना कोई उसके जान के पीछे पड़ा हुआ है। बस उसे यह नहीं पता था कि उसके जान के पीछे उसकी बेटी ही पड़ी है। नीरज शर्मा काफी डर चुकी वह समझ गई थी कि जरूर कोई उनकी जान का दुश्मन है जो उन्हें मारना चाहता है। लिहाजा उन्होंने घर के बाहर की बाउंड्री को लोहे की जाली से पैक करवा लिया और घर के बाहर कई सीसीटीवी भी लगा दिए ताकि यह पता किया जा सके कि आखिर घर के अंदर टोने-टोटके कौन करवा रहा है?

पत्थर कौन फेंकवा रहा है। अब आयुष के लिए मां को मारने की प्लानिंग फेल होती नजर आने लगी। आयुषी के ताऊ का बेटा उसका दोस्त लगातार नीरज शर्मा की निगरानी करने लगे। फिर आई 4 जुलाई की तारीख। जब नीरज शर्मा अपने बेटे की फिजियोथेरेपी करवाने के लिए घर से बाहर निकली। नीरज शर्मा घर के बाहर आई। सड़क पार कर ही रही थी। तभी एक तेज रफ्तार स्कर्पियो गाड़ी आई। नीरज शर्मा को जोरदार टक्कर मारते हुए निकल गई। नीरज शर्मा इस हादसे में उछलकर सड़क के दाहिनी ओर जा गिरी।

काफी दूर तक जाकर उछल कर गिरी। उनके शरीर से प्राण वहीं निकल गए। पहले लोगों को यह हादसा लग रहा था। हादसे की ही शिकायत भी दर्ज करवाई गई थी। लेकिन जब पुलिस ने अपनी जांच पड़ताल शुरू की तो परत दर परत सच सामने आता गया। एक स्कर्पियो गाड़ी से एक महिला की टक्कर होती है और उसमें उसकी मृत्यु हो जाती है।

जब इसमें आगे अनुसंधान हुआ, गहन जांच की तो यह तथ्य सामने आए कि ये एक एक्सीडेंट एक दुर्घटना ना होते हुए एक हत्या का मामला है। जिसमें महिला के ही जो निजी परिवार के लोग हैं उन्होंने ही एक षड्यंत्र पूर्वक साजिश करके कुछ लड़कों को पेमेंट पर हायर करके इस महिला की हत्या करने के लिए बाहर से बुलाया। ये जो लड़के थे जिनको अब गिरफ्तार किया गया है। ये लगभग महीने भर से इस रेकी में शामिल थे और घटना के दिन इन्होंने रेकी करी। महिला की जो मूवमेंट थी उनको देखा और उसके बाद में शाम को इस दुर्घटना को कारित किया। मैम कितना पेमेंट दिया?

कौन-कौन गिरफ्तार हुए? इसमें अभी तक की तफ्तीश में ₹ लाख की पेमेंट हत्या के लिए दी गई है और विशेषकर प्रॉपर्टी जो लालच है मुख्यत ये बिंदु सामने आया है और दूसरा इसमें जो नौकरी है महिला की उसको पाने के लिए जो महिला की स्वयं की बेटी है और उसके जो जेठ है और जेठ के जो बच्चे हैं उनको इसमें शामिल पाया गया है। मैम इसमें आयुष और उसकी बेटी और बाकी लोग गिरफ्तार हुए। इसमें सात लोग अभी तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एक जो आरोपी है वह अभी फरार है।

उसको भी जल्दी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही इसमें जो गाड़ी प्रयुक्त हुई थी उसको भी बरामद कर लिया गया है। नीरज के घर के बाहर रेकी करते हुए एक लड़का भी सीसीटीवी में देखा गया। वो फोन पर अपने एक साथी से बात कर रहा था। दूसरे साथी की तस्वीर भी सीसीटीवी में कैद हो गई और इसके कुछ देर बाद वाला वीडियो सीसीटीवी फुटेज जो था वह भी पुलिस को मिल गया जिसमें नीरज शर्मा को एक गाड़ी ने जोरदार टक्कर मारी थी। नीरज शर्मा हर शाम कोर्ट से लौटने के बाद अपने 16 साल के मानसिक रूप से कमजोर बेटे को फिजियोथरेपिस्ट के हाथ छोड़ने जाया करती थी। उस दिन बेटी ने उसे फोन करके वापस बुला लिया और वह अकेले लौट रही थी।

इसी रास्ते से वह लौट रही थी और मोटरसाइकिल लेकर रोहित जाटव रेकी कर रहा था। उसने दूर बैठे स्कर्पियो में आकाश शर्मा और हेमंत शर्मा को इशारा किया। जैसे ही नीरज शर्मा यहां पहुंची। यह 60 फीट चौड़ी सड़क है और सड़क पूरी तरह से खाली थी और वह किनारे चल रही थी। रोड़ी आप देख रहे हैं और यहां पर किनारे चल रही थी। पीछे से तेज गति से स्कर्पियो लेकर आया और उसे एक्सीडेंट करवाया जिसके बाद वह उछलकर 100 मीटर दूर वो ईंट पड़ा है उसके पीछे जाकर गिरी। दो मजदूर थे वह भी बाल-बाल बचे। सामने सीसीटीवी कैमरा लगा था जिसमें यह पूरा घटनाक्रम कैद हो गया। उसके बाद जब नीरज शर्मा के भाई ने यानी कि आयुषी शर्मा के मामा ने शक जताया तो फिर पुलिस जब सीसीटीवी कैमरे को देखी तो देखा कि पूरी सड़क खाली है और किनारे चल रही है।

उसके बावजूद स्कर्पियो में सवार जो आरोपी हैं वो उसे तेज गति से धक्का देते हुए रौंदते हुए कुचल कर चले जाते हैं और फिर जब सीसीटीवी कैमरे को तलाश करती हुई पुलिस आगे गई तो वह स्कर्पियो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर पड़ा हुआ था उसके बाद यह पूरा खेल खुल गया। हत्यारों ने पूरी प्लानिंग की थी कि नीरज शर्मा को इतनी स्पीड से टक्कर मारी जाए कि उनके बचने की कोई गुंजाइश बाकी ना रहे। हादसे के बाद Scorpio आगे जाकर टकराई और उसका लोहे का बोनट भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया।

इसी से आप अंदाजा लगाइए कि गाड़ी की स्पीड आखिर कितनी रही होगी। टक्कर कितनी जोरदार मारी है। आप स्कर्पियो को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। यह पुरानी स्कर्पियो है और इसका लोहा काफी मजबूत माना जाता है। मगर जिस तरह से किनारे चल रही नीरज शर्मा को इसने टक्कर मारा है। यह पूरा लोहा मुड़ गया है। गाड़ी बुरी तरह से डैमेज हो गई है। यह हरियाणा नंबर की गाड़ी है जिसे हेमंत शर्मा ने ₹35,000 के किराए पर लेकर आया था हादसा करवाने के लिए और इसे छोड़कर भाग गया था। गाड़ी आकाश शर्मा चला रहा था और बताया जा रहा था कि इतनी तेज थी गाड़ी कि बिजली की गति से नीरज शर्मा को कुचलते हुए आगे भाग गई। मां के हत्या के आरोपी आयुषी इसी घर में रहती थी। पैदा भी यह इसी घर में हुई थी।

विजय वशिष्ठ उनके पिता थे राजस्थान हाई कोर्ट में एलडीसी वह इस घर में रहते थे मगर वो दूसरा मकान बना लिए थे उसके बाद यह घर खाली पड़ा था। इस हादसे के बाद हमारे रिपोर्टर शरद कुमार ने नीरज शर्मा के घर के आसपास लगे सारे सीसीटीवी फुटेज देखे। पड़ोसियों से भी बात की लेकिन सब ने यही बताया कि आयुषी काफी चुप रहती थी। बहुत कम बोलती थी। इससे जाहिर होता है कि उसके दिमाग में एक शैतानी साजिश पल रही थी जिसे वह अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही थी और आखिरकार उसने इसे अंजाम तक पहुंचा ही दिया। क्या नाम है आपका? मेरा नाम नितिन चौहान। ये बाहर निकलती थी बात करती थी। बाहर तो नहीं निकलती थी। जब रात का घूमने जाती थी जब निकलती थी बाहर। ऐसे बाहर नहीं निकलती थी। भाई था जो भाई साथ में रहता था। इसके अंदर ही रहती थी। अंदर ही रहती थी। किसी से बात करती थी यहां पर। किसी से बात नहीं करती थी

बहुत कम बात बहुत ही कम कैसा स्वभाव था तुम आपस में खेलते भीगे बड़े साथ बचपन में तो सही रहता है स्वभाव तो कैसा रहता है बचपन में जैसे थे बच्चे वैसे ही रहते थे खेलते थे साथ में और कैसे खेलते थे जैसे यहीं पे रोड पे खेलते थे साथ में खेलते थे हम अच्छा था बचपन में तो ज्यादा यहां से जाने के बाद हुआ जो हुआ है ये लॉबी कब वापस ये अब इसी साल जनवरी के शुरुआत में आई थी शायद से ये शुरू से य रहते थे। हां, शादियों की तो यही आई थी। हां। अभी यहां कौन रह रहे थे? अभी तो उनकी सास थी शहीद। हां। ताला ही लग रहा था पहले तो। हां। व रहती थी। ये मतलब अभी बेटी यहां रह रही थी ना? हां, बेटी आ गई थी यहां पे। बेटी आ गई थी अभी। बेटी मिलती थी? नहीं, हम बात नहीं करते। हम किसी से नहीं करते बात इनसे।

क्या करती थी बेटी यहां? ये भी पता नहीं मेरे को। यह भी मालूम नहीं मेरे को। बोलते ही नहीं थे हम तो। आप लोगों को कब पता चला कि इसने किया है। क्या पता कब रात को गाड़ी आई थी ये भी मेरे को तो पता नहीं। रात को हॉस्पिटल की गाड़ी आई बताया है। हमको पता नहीं था। मैं तो अकेली रहती हूं। मेरे को मालूम नहीं था। मैं अंदर रहती हूं। इसलिए तो पहले लोग परिवार यहीं रहता था। हां रहते तो यहीं थी। और पूछ लो सामने वाले। कैसी थी? स्वभाव वगैरह कैसा था नीरज जी का? ठीक था। मां का कत्ल करवाने के आरोप में अब आयुष और उसके सभी साथी गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन आयुष के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी। आयुष सामने खड़ी थी। शरद कुमार सवाल पूछे जा रहे थे।

लेकिन आयुष ने इस तरह से चुप्पी साध रखी थी मानो वो कुछ जानती ही नहीं। कितना पढ़ाई किए हो? लास्ट ईयर बेटा मां तो बचपन से पास ही पहुंचती। ऐसा क्यों किया? अफसोस है आपको? कितने दिन से कर रही थी प्लानिंग? कब से कर रही थी प्लानिंग आप? उसने कहा था क्या आपसे? भाई ने आपको डर नहीं लगा कि पकड़ा जाऊंगा। आयुष आपसे बात कर रहा हूं मैं। अकेले क्यों रहती थी आप? मां से मिलती थी आप खर्चा कौन देता था? दे ना

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