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हम सांस तक…हाईकोर्ट के इस फैसले पर तिलमिलाए CJP के सौरभ दास, कह दी चौंकाने वाली बात।

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सीजेपी नेता सौरभ दास ने हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए हैं। मामला दिल्ली और छठ के दौरान हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी से जुड़ा है। एक तरफ आम आदमी त्यौहार पर अपने घर पहुंचने के लिए टिकट खरीदने की कोशिश कर रहा है। तो दूसरी तरफ कई रूटों पर टिकटों की कीमत सामान्य किराए से कई गुना ज्यादा बताई जा रही है। इसी मुद्दे पर जब सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की गई तो अदालत ने कहा हवाई यात्रा मत कीजिए।

अब इस टिप्पणी और हवाई किराए पर नियंत्रण की जरूरत को लेकर बहस तेज हो गई है। दरअसल 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में घरेलू उराणों से किराए में भारी बढ़ोतरी का मुद्दा उठा। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि त्योहारों के दौरान हवाई किराया सामान्य कीमत के मुकाबले 700% तक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा जरूरी सेवा है और किराए में इतनी बड़ी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। लेकिन जस्टिस विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मामले पर तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया। अदालत ने याचिका को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग स्वीकार नहीं की और कहा हवाई यात्रा मत कीजिए। इसी पर सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा जहरीले वायु प्रदर्शन का सामना कर रहे हैं। सांस मत लो। सड़कों पर गड्ढे हैं। चलो मत। पेट्रोल के दाम ज्यादा हैं। निजी वाहन मत चलाओ। पेपर लीक का सामना कर रहे हो। परीक्षा मत दो। मीडिया समाज को बांट रहा है। टीवी मत देखो। फर्जी बाबा धर्म के साथ खेल रहे हैं। उनके पास मत जाओ। बेरोजगारी है। नौकरी मत खोजो। यह वही सिस्टम है जिसने हमें कॉकरोच बना दिया है। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है। सौरव दास इससे पहले भी अदालत के फैसलों पर आपत्ति जता चुके हैं और तंज कसते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने लिखा था याद रखें कि हमारे पास ऐसे जज भी हैं जो सरकार के मनमाने और अनुचित इस्तेमाल का लगाम लगाने के बजाय और कानून के बजाय निजी पूर्वाग्रहों के आधार पर फैसले देने और उपदेश देने में भरोसा रखते हैं। यह हमारे देश पर बड़ा धब्बा है। जो लोग संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कई हवाई मार्गों के किराए का उदाहरण दिया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक दिल्ली से कोलकाता जाने का टिकट सामान्य दिनों में करीब 10 से ₹11,000 का होता है। लेकिन 6 नवंबर की यात्रा के लिए इसकी कीमत ₹78,694 तक पहुंच गई है। इसी तरह 6 नवंबर को बेंगलुरु से दिल्ली जाने वाली सुबह 5:00 बजे की उड़ान का किराया करीब ₹15,901 बताया गया है। जबकि उसी दिन दोपहर 3:45 पर जाने वाली फ्लाइट की टिकट का दाम ₹40,506 अर्ज़ में मुंबई से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई की टिकटों की कीमतों में भी भारी अंतर का हवाला दिया गया है। यह आंकड़े याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए हैं और इन्हें संबंधित उराणों के मौजूदा किराए की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जानी चाहिए। हवाई किराए में बढ़ोतरी को लेकर एयरलाइंस की ओर से एिएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की लागत का हवाला दिया जाता है। लेकिन याचिका में सवाल उठाया गया है कि अगर एक ही दिन एक ही रूट पर उड़ान भरने वाले विमानों की ईंधन खपत लगभग समान है तो टिकट की कीमतों में इतना बड़ा अंतर क्यों है? याचिकाकर्ता का तर्क है कि ईंधन की कीमत बढ़ने से किराए में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन इसके आधार पर सामान्य किराए से सात गुना तक कीमत बढ़ाना उचित नहीं है। याचिका में त्यौहारों के दौरान हवाई टिकटों की अधिकतम कीमत तय करने और यात्रियों को मनमाने किराए से राहत देने की मांग की गई है।

हवाई किराए पर कंट्रोल को लेकर केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान नियम 2026 अधिसूचित किए हैं। यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। नए प्रावधानों के तहत असाधारण परिस्थितियों में सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए एयरलाइंस को किराए के संबंध में निर्देश दे सकती है। हालांकि इन नियमों के लागू होने से पहले ही त्यौहारों के दौरान महंगे टिकट का मुद्दा सामने आया है। ऐसे में यात्रियों को तत्काल राहत कैसे मिलेगी यह बड़ा सवाल है। सुप्रीम कोर्ट में हवाई किराय से जुड़ी जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होनी है।

अब देखना होगा कि सुनवाई में अदालत सरकार से क्या जवाब मांगती है और हवाई यात्रियों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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