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बुनियाद और जुनून जैसी धारावाहिक का कलाकार मंगल ढिल्लों आज कहां है गुमनाम? कहानी चौंका देगी

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हिंदी सिनेमा और भारतीय टेलीविजन की दुनिया में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी दमदार आवाज, शानदार अभिनय और अलग अंदाज से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। अभिनेता मंगल ढिल्लो भी उन्हीं कलाकारों में से एक थे। उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन की दुनिया में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक बुनियाद और जुनून में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया। मंगल ढिल्लू केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि लेखक, निर्देशक और निर्माता भी थे। उनकी रुचि अभिनय के साथ-साथ रंगमंच, साहित्य और आध्यात्मिक विषयों में भी थी। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। ऐसे में आज के हमारे इस वीडियो में हम आपको मंगल ढिल्लो साहब के बारे में तो बताएंगे ही साथ ही बताएंगे उनके परिवार के बारे में। तो अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें। मंगल ढिलो का पूरा नाम मंगल सिंह ढिलो था। उनका जन्म 18 जून को पंजाब के फरीदकोट जिले के वांडर जटाना गांव में हुआ था। मंगल ढिल्लू का संबंध एक सिख परिवार से था। उनका बचपन पंजाब और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश में बीता। उनके पिता खेतीबाड़ी से जुड़े हुए थे और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में भी उनकी कृषि भूमि थी। मंगल ढिल्लो का बचपन सामान्य परिस्थितियों में बीता। बचपन से ही उनके मन में कुछ अलग करने की इच्छा थी। उनके पिता चाहते थे कि वह भविष्य में किसी पारंपरिक और स्थिर पेशे को अपनाएं। लेकिन मंगल ढिल्लो की रुचि अभिनय और कला की दुनिया में थी। यही रुचि आगे चलकर उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत की और अभिनय को अपना पेशा बनाने का फैसला किया। शिक्षा रंगमंच से जुड़ाव मंगल ढिल्लो ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंजाब के सरकारी स्कूल में की।

इसके बाद वह उत्तर प्रदेश चले गए। जहां उन्होंने लखीमपुर खीरी जिले के निघासन में पढ़ाई जारी रखी। बाद में उन्होंने पंजाब लौटकर अपने आगे की शिक्षा पूरी की। उन्होंने मुक्तसर के सरकारी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही उनकी रुचि, रंगमंच और अभिनय की तरफ बढ़ने लगी थी। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मंगल ढिल्लो अभिनय के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए दिल्ली पहुंचे। उन्होंने महसूस किया कि अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए केवल रुचि होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि इसके लिए प्रशिक्षण और अनुभव भी जरूरी है। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय के भारतीय रंगमंच विभाग में प्रवेश लिया। वहां उन्होंने अभिनय का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया और 1980 में अपना पाठ्यक्रम पूरा किया। उनकी प्रतिभा और प्रदर्शन के लिए उन्हें स्वर्ण पदक भी मिला। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। रंगमंच ने उन्हें अभिनय की बारीकियां समझने, संवाद बोलने, किरदार को महसूस करने और दर्शकों के सामने अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर दिया। मंगल ढिल्लो ने रंगमंच को अपने अभिनय करियर की मजबूतनीय बनाया। आगे चलकर फिल्मों और टेलीविजन में उन्हें जो पहचान मिली उसमें उनके रंगमंच के अनुभव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रंगमंच से अभिनय करियर की शुरुआत मंगल ढिल्लो ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत रंगमंच से की थी। उन्होंने दिल्ली, चंडीगढ़ और मुंबई में नाटकों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई। वह केवल एक अभिनेता के रूप में ही काम नहीं करते थे बल्कि लेखन और निर्देशन में भी उनकी रुचि थी। रंगमंच के दौरान उन्होंने कई तरह के किरदार निभाए। इस अनुभव ने उनके अभिनय को गहराई दी और उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं को समझने का अवसर मिला। वर्ष 1982 में उन्होंने चंडीगढ़ में अपना थिएटर, समूह, नाट्यालय भी शुरू किया। वह ऐसे विषयों पर काम करना चाहते थे जिनमें समाज, मानवीय भावनाओं और जीवन की वास्तविकताओं को दिखाया जा सके। मंगल ढिल्लू के लिए अभिनय केवल प्रसिद्धि पाने का माध्यम नहीं था।

वह इसे अपनी अभिव्यक्ति का जरिया मानते थे। यही कारण था कि उन्होंने अपने करियर में अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन को महत्व दिया। रंगमंच के बाद उन्होंने टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। जल्दी उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी और उन्हें ऐसे धारावाहिकों में काम करने का अवसर मिला जिन्होंने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। धारावाहिक बुनियाद से मिली पहचान। मंगल ढिल्लो के करियर में दूरदर्शन का लोकप्रिय धारावाहिक बुनियाद एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इस धारावाहिक का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था और इसका प्रसारण 1986 में शुरू हुआ था। बुनियाद भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक चर्चित धारावाहिक था। इसमें विभाजन से प्रभावित परिवारों के जीवन, उनके संघर्षों और रिश्तों को दिखाया गया था। मंगल ढिल्लू ने इस धारावाहिक में लभाया राम का किरदार निभाया। उनके अभिनय ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। धारावाहिक की लोकप्रियता के कारण उन्हें टेलीविजन जगत में पहचान मिली। उस समय दूरदर्शन भारतीय परिवारों के मनोरंजन का एक प्रमुख माध्यम था। ऐसे में किसी लोकप्रिय धारावाहिक का हिस्सा बनना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि थी। बुनियाद ने मंगल ढिल्लो के लिए हिंदी टेलीविजन और फिल्म उद्योग में आगे बढ़ने के रास्ते खोले। इसके बाद उन्हें कई अन्य धारावाहिकों और फिल्मों में काम करने के अवसर मिले। उनकी गंभीर आवाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण वह ऐसे किरदारों में विशेष रूप से प्रभावी दिखाई देते थे। जिनमें आत्मविश्वास गंभीरता और मजबूत व्यक्तित्व की जरूरत होती थी।

धारावाहिक जुनून में सुमेर राजवंश का किरदार। बुनियाद के बाद मंगल ढिल्लू के करियर में एक और बड़ा मुकाम आया जब वह धारावाहिक जुनून में नजर आई। यह धारावाहिक 1990 के दशक में काफी लोकप्रिय हुआ था। इस धारावाहिक में उन्होंने सुमेर राजवंश का किरदार निभाया। उनका व्यक्तित्व और अभिनय इस भूमिका के लिए काफी प्रभावशाली था। जुनून में उनके काम को दर्शकों ने पसंद किया और वह टेलीविजन के जाने पहचाने चेहरों में शामिल हो गई। मंगल ढिलो की खासियत यह थी कि वह अपने किरदार को केवल संवादों के सहारे नहीं निभाते थे बल्कि अपनी आवाज, चेहरे के भाव और शारीरिक हावभाव से उसे प्रभावशाली बनाने की कोशिश करते थे। इस धारावाहिक में उनके अभिनय के लिए उन्हें 1998 में रेडियो एंड टेलीविजन एडवर्टाइजिंग प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन यानी राबा का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिलने का उल्लेख मिलता है। जिन्होंने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। इस धारावाहिक के बाद भी उन्होंने कई टेलीविज़ कार्यक्रमों में काम किया और अपनी अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया। मंगल ढिल्लो की प्रमुख फिल्में टेलीविज़ में सफलता प्राप्त करने के बाद मंगल ढिल्लो ने हिंदी फिल्मों में भी अपनी जगह बनाई। उन्होंने 1988 में आई फिल्म खून भरी मांग से अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में रेखा मुख्य भूमिका में थी। मंगल ढिल्लो ने अपने फिल्मी करियर में कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया।

उन्होंने फिल्मों में अधिकतर सहायक और चरित्र भूमिकाएं निभाई। उनकी गंभीर आवाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने दूसरे कलाकारों से अलग पहचान देते थे। खून भरी मांग 1988 दयावान 1988 भ्रष्टाचार 1989 नाकाबंदी 1990 आजाद देश के गुलाम 1990 न्याय अन्याय 1990 लक्ष्मण रेखा 1991 विश्वात्मा 1992 दगी एक जुआ 1992 हीर राझा 1992 इसके अलावा उन्होंने अकेला रणभूमि अंबा न्याय अन्याय साहिबान और ट्रेंड टू पाकिस्तान जैसी फिल्मों में भी काम किया। मंगल ढिल्लो के अन्य लोकप्रिय धारावाहिक मंगल ढिल्लो ने अपने लंबे करियर में अनेक टेलीविजन धारावाहिकों में काम किया। दूरदर्शन के दौर में उनके अभिनय को विशेष रूप से पहचान मिली थी। बुनियाद जुनून कथा सागर परमवीर चक्र द ग्रेट मराठा किस्मत पैंथर घुटन साहिल मौलाना आजाद मुजरिम हाजिर रिश्ता लहू के फूल नूरजहां इन धारावाहिकों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। ऐतिहासिक विषयों पर आधारित कार्यक्रमों में भी उन्होंने अभिनय किया। नूरजहां उनके टेलीविजन करियर के अंतिम दौर के चर्चित कामों में से एक था। उनके अभिनय में गंभीरता और संवादों पर मजबूत पकड़ दिखाई देती थी। उस दौर में जब टेलीविजन पर आज की तरह मनोरंजन के अनेक विकल्प उपलब्ध नहीं थे। दर्शक अपने पसंदीदा कलाकारों को देखने के लिए धारावाहिकों का इंतजार करते थे। मंगल ढिल्लो ने भी अपने अभिनय से उस समय के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। अभिनेता के साथ लेखक और निर्देशक भी थे मंगल ढिल्लो। मंगल ढिल्लनू की प्रतिभा केवल अभिनय तक सीमित नहीं थी। वह लेखन, निर्देशन और फिल्म निर्माण में भी रुचि रखते थे। उन्होंने अपनी निर्माण कंपनी एमडी एंड कंपनी के माध्यम से फिल्मों और वृत्त चित्रों के निर्माण की दिशा में काम किया। मंगल ढिलो की पत्नी और परिवार मंगल ढिल्लो के निजी जीवन की बात करें तो उनकी पत्नी का नाम ऋतु ढिल्लो था। ऋतु एक कलाकार और चित्रकार थी। मशहूर अभिनेता, लेखक और निर्देशक मंगल ढिल्लो की पत्नी का नाम ऋितु ढिलो है और उनके दो बच्चे, एक बेटा और एक बेटी है। ऋितु ढिल्लो पेशा ऋितु ढिल्लो दुनिया भर में अपनी कला के लिए जानी जाने वाली एक मशहूर पेंटर यानी कि कलाकार हैं। शादी मंगल ढिल्लो और ऋितु की शादी 26 अप्रैल 1994 को मुंबई में हुई थी। 11 जून 2023 को कैंसर के कारण मंगल ढिल्लो के निधन तक दोनों एक दूसरे के साथ रहे। व्यावसायिक साझेदारी ऋतु केवल उनकी जीवन संगिनी ही नहीं बल्कि उन्होंने मंगल ढिल्लू के रचनात्मक कार्यों में भी उनका पूरा साथ दिया। दोनों ने मिलकर एमडी एंड कंपनी मंगल ढिल्लो एंड कंपनी नाम से एक प्रोडक्शन हाउस खोला था। इस बैनर के तहत उन्होंने प्रसिद्ध पंजाबी ऐतिहासिक फिल्म खालिसा और कई धार्मिक व सामाजिक डॉक्यूमेंट्री जैसे अट द गोल्डन टेंपल का निर्माण किया। बेटा नानक ढिल्लो उनके बेटे का नाम नानक ढिल्लो है। जब मंगल ढिल्लो का लुधियाना के अस्पताल में इलाज चल रहा था तब उनका बेटा और पत्नी उनके साथ ही थे। बेटी उनकी एक बेटी भी है। हालांकि वह लाइमलाइट और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहती है। जिसके कारण सार्वजनिक रूप से उनका नाम और विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। मंगल ढिल्लो का परिवार हमेशा मीडिया और चकाचौंध से दूर एक सादगी भरा जीवन जीना पसंद करता है।

मंगल ढिल्लो की बीमारी और निधन। मंगल डिलोल्लो के जीवन का अंतिम दौर बीमारी से संघर्ष करते हुए बीता। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार वह कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। 11 जून 2023 को पंजाब के लुधियाना क्षेत्र में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। उनके निधन के समय उनकी उम्र को लेकर भी समाचारों में अंतर दिखाई दिया। कुछ समाचार संस्थानों ने उनकी उम्र 64 वर्ष बताई। जबकि कई अन्य स्रोतों में 65 वर्ष का उल्लेख किया गया। उनकी जन्मतिथि और जन्म वर्ष से संबंधित अलग-अलग जानकारियों के कारण यह अंतर सामने आता है। उनके निधन से हिंदी और पंजाबी मनोरंजन जगत ने एक अनुभवी कलाकार को खो दिया। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाई और अभिनय के अलावा लेखन और निर्देशन तथा फिल्म निर्माण में भी योगदान दिया। मंगल ढिलो भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उन्होंने भारतीय टेलीविजन हिंदी सिनेमा और सिख इतिहास से जुड़े उनके रचनात्मक कार्यों में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। तो दोस्तों अभी के लिए बस इतना ही मिलते हैं अगली वीडियो में। तब तक आप अपना ध्यान रखिए। बाय बाय।

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