31 जनवरी 1975 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक ऐसी लड़की का जन्म हुआ जिसे आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे चुलबुली और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिना जाने लगा। उसकी मुस्कान पर लाखों लोग फिदा हुए। उसकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और बड़े-बड़े सितारों के साथ उसकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। लेकिन इस मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी जिंदगी भी थी जिसने बचपन में पिता को खोने का दर्द सहा। प्यार में मुश्किल दौर देखा। एक बड़े कानूनी विवाद का सामना किया और फिर अपनी जिंदगी को एक बिल्कुल नई दिशा दे दी। एक समय ऐसा था जब वह बॉलीवुड की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक थी। उनकी फिल्मों की चर्चा होती थी। उनके अभिनय की तारीफ की जाती थी और उनकी निजी जिंदगी को लेकर अखबारों में तरह-तरह की खबरें छपती थी। फिर अचानक उन्होंने फिल्मों से दूरी बनानी शुरू कर दी। जिस अभिनेत्री को कभी कैमरे के सामने देखना दर्शकों की आदत बन चुका था, वह अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हो गई। आखिर ऐसा क्या हुआ कि करियर के सबसे महत्वपूर्ण दौर में उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदल ली। क्यों एक बड़े कारोबारी के साथ उनका रिश्ता अदालत और पुलिस तक पहुंच गया। कैसे एक अमेरिकी नागरिक से शादी करने के बाद उन्होंने जुड़वा बच्चों के साथ अपनी नई दुनिया बसाई और कई साल तक बड़े पर्दे से दूर रहने के बाद उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी क्यों की? यह कहानी है प्रीति जिंटा की। जिनकी जिंदगी में शोहरत भी आई, मुश्किलें भी आई और ऐसे फैसले भी आए जिन्होंने उनकी पूरी जिंदगी का रास्ता बदल दिया। प्रीति जिंटा का जन्म हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में हुआ था। उनके पिता दुर्गानंद जिंटा भारतीय सेना में अधिकारी थे। जबकि उनकी मां नील प्रभा जिंटा परिवार की देखभाल करती थी। प्रीति का परिवार अनुशासन, जिम्मेदारी और पारिवारिक मूल्यों को महत्व देता था। उनके पिता की सेना से जुड़ी पृष्ठभूमि का असर प्रीति के व्यक्तित्व पर भी पड़ा। प्रीति के दो भाई हैं। उनके बड़े भाई दीपांकर जिंटा भारतीय सेना में अधिकारी रहे हैं। जबकि छोटे भाई मनीष जिंटा अमेरिका में रहते हैं। बचपन में प्रीति अपने भाइयों के साथ समय बिताती थी और परिवार में उन्हें काफी प्यार मिलता था। लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसी घटना हुई जिसने बचपन की सारी खुशियों को अचानक बदल दिया। जब प्रीति केवल 13 साल की थी तब उनके पिता की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस दुर्घटना में उनकी मां भी गंभीर रूप से घायल हो गई थी और उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा।
जरा सोचिए जिस उम्र में बच्चों को अपने माता-पिता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस उम्र में प्रीति ने अपने पिता को खो दिया। मां भी गंभीर रूप से घायल थी। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। प्रीति ने बाद में कई बार बताया कि पिता की मृत्यु ने उन्हें बहुत जल्दी बड़ा होना सिखा दिया। उन्हें समझ में आने लगा कि जिंदगी में हर चीज हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होती और कभी-कभी परिस्थितियां इंसान को उसकी उम्र से पहले ही जिम्मेदार बना देती हैं। उनके पिता उनके लिए केवल एक अभिभावक नहीं थे बल्कि प्रेरणा का स्रोत भी थे। वह उनसे बहुत प्यार करती थी और उनकी मृत्यु का असर लंबे समय तक उनके जीवन पर रहा। शायद यही वजह थी कि प्रीति ने आगे चलकर अपनी जिंदगी में आत्मनिर्भर बनने को बहुत महत्व दिया। वह चाहती थी कि उन्हें अपनी जरूरतों और फैसलों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर ना रहना पड़े। प्रीति की शुरुआती पढ़ाई शिमला के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने सेंट पेट्स कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई की। उन्होंने मनोविज्ञान की पढ़ाई भी की और आपराधिक मनोविज्ञान में स्नातोत्तर डिग्री हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि प्रीति बचपन में कई अलग-अलग पेशों के बारे में सोचती थी। कभी उन्हें सेना में जाने का विचार आता, कभी किसी दूसरे क्षेत्र में काम करने का। लेकिन उस समय उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि एक दिन वह हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो जाएंगी। उनकी पढ़ाई और रुचियों ने उन्हें लोगों को समझने, परिस्थितियों का विश्लेषण करने और अलग-अलग व्यक्तित्वों को करीब से देखने का अवसर दिया। आगे चलकर अभिनय में भी यह अनुभव उनके काम आए। लेकिन फिल्मों में आने का उनका फैसला किसी लंबे समय से देखे गए सपने का परिणाम नहीं था। यह एक संयोग से शुरू हुई कहानी थी। साल 1996 के आसपास एक दोस्त की जन्मदिन पार्टी में प्रीति की मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसने उन्हें विज्ञापन की दुनिया में काम करने का अवसर दिया। इसके बाद उन्होंने विज्ञापनों में काम करना शुरू किया। प्रीति ने पर्क चॉकलेट और लिरिल जैसे ब्रांड के विज्ञापनों के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी मुस्कान, आत्मविश्वास और चेहरे की मासूमियत ने उन्हें बाकी मॉडलों से अलग पहचान दिलाई। धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री के लोगों की नजर भी उन पर पड़ने लगी। एक दिन निर्देशक शेखर कपूर ने प्रीति को देखा और उन्हें फिल्म में काम करने का अवसर देने की इच्छा जताई। हालांकि वह शुरुआती फिल्म आगे नहीं बन सकी लेकिन इस मुलाकात ने प्रीति के लिए हिंदी सिनेमा के दरवाजे खोल दिए। इसके बाद निर्देशक मणि रत्नम के फिल्म दिलसे में उन्हें काम करने का अवसर मिला। साल 1998 में रिलीज हुई दिलसे में प्रीति ने एक छोटी लेकिन यादगार भूमिका निभाई।
फिल्म में शाहरुख खान और मनीषा कोयराला मुख्य भूमिकाओं में प्रीति का किरदार सीमित समय के लिए पर्दे पर दिखाई दिया लेकिन दर्शकों ने इस नए चेहरे पर ध्यान दी। इसी साल उनके फिल्म सोल्जर भी रिलीज हुई जिसमें उनके साथ बॉबी देओल थे। सोल्जर को दर्शकों ने पसंद किया और प्रीति की लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, चुलबुला अंदाज और सहज अभिनय ने उन्हें नई पीढ़ी की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। दिल से और सोल्जर में उनके अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री पुरस्कार मिला। लेकिन प्रीति के करियर का असली कमाल अभी बाकी था। साल 2000 में फिल्म क्या कहना रिलीज हुई। इस फिल्म में प्रीति ने एक ऐसी युवती का किरदार निभाया जो शादी से पहले मां बन जाती है और समाज के तानों तथा परिवार के दबाव के बीच अपने बच्चे को जन्म देने और अकेले उसकी परवरिश करने का फैसला करती है। उस दौर में इस तरह के विषय पर खुलकर बात करना आसान नहीं था। समाज में अविवाहित मां बनने वाली महिलाओं को अक्सर गलत नजर से देखा जाता था। फिल्म ने इसी मानसिकता पर सवाल उठाए। प्रीति के अभिनय को काफी सराहना मिली और दर्शकों ने उनके किरदार से जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने दिखाया कि वह केवल खूबसूरत और चुलबुली भूमिकाएं निभाने वाली अभिनेत्री नहीं है बल्कि गंभीर विषयों को भी पड़ते पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर इसके बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा। साल 2000 में मिशन कश्मीर में वह ऋतिक रोशन के साथ नजर आई। इसके बाद 2001 में दिल चाहता है जैसी फिल्म आई जिसमें आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना जैसे कलाकार थे। दिल चाहता है ने युवाओं के बीच दोस्ती, रिश्तों और बदलती जिंदगी को एक नए अंदाज में प्रस्तुत किया। प्रीति ने इस फिल्म में भी अपनी अलग पहचान बनाई। साल 2002 में दिल है तुम्हारा में उनके अभिनय को पसंद किया गया। फिर 2003 में आई कोई मिल गया जिसमें रितिक रोशन के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को बेहद पसंद आई। इसी साल कल हो ना हो रिलीज हुई। शाहरुख खान, सैफ अली खान और जया बच्चन जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म में प्रीति ने नैना नाम की युवती का किरदार निभाया जो अपनी पारिवारिक परेशानियों और जिंदगी की मुश्किलों के बीच खुशी ढूंढने की कोशिश करती है। फिल्म की भावनात्मक कहानी और प्रीति के अभिनय ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। कल हो ना हो आज भी हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म के बाद प्रीति की पहचान और मजबूत हो गई। साल 2004 उनके करियर के सबसे यादगार वर्षों में शामिल रहा। इसी साल लक्ष्य और वीर जारा जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया। वीर जारा में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म में प्यार, इंतजार, त्याग और इंसानी रिश्तों की भावनाओं को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया था। प्रीति ने पाकिस्तानी लड़की ज़ारा का किरदार निभाया जिसकी जिंदगी भारतीय वायुसेना के अधिकारी वीर से मिलने के बाद बदल जाती है। उनके अभिनय दर्शकों को भावुक कर दिया और फिल्म को लंबे समय तक याद किया गया। इसके बाद साल 2005 में सलाम नमस्ते आई। इस फिल्म में प्रीति और सैफ अली खान ने आधुनिक रिश्तों की कहानी प्रस्तुत की। फिल्म में शादी से पहले साथ रहने, जिम्मेदारी और अनचाही परिस्थितियों के बीच रिश्तों को संभालने जैसे विषयों को दिखाया गया। फिर 2006 में कभी अलविदा ना कहना में वह दिखाई दी। इस फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन जैसे कलाकार एक के बाद एक सफल फिल्मों ने प्रीति को बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया था। लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ भी आने वाला था जहां उनके अभिनय से ज्यादा उनके निजी रिश्ते की चर्चा होने लगी। साल 2005 में प्रीति जिंटा का नाम कारोबारी नेसवाडिया के साथ जुड़ने लगा। नेसवाडिया एक बड़े कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते थे। दोनों की मुलाकात के बाद उनका रिश्ता आगे बढ़ा और वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ दिखाई देने लगे। धीरे-धीरे मीडिया में उनकी शादी की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं होने लगी। दोनों केवल प्रेमीप्रेमिका ही नहीं थे बल्कि कारोबार के क्षेत्र में भी एक साथ जुड़े।
उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग की टीम k्स 11 पंजाब में हिस्सेदारी ली जो बाद में पंजाब किंग्स के नाम से जानी जाने लगी। के मैचों में प्रीति को अपनी टीम का उत्साह बढ़ाते हुए अक्सर देखा जाता था। मैदान में खिलाड़ियों के साथ उनकी बातचीत, जीत पर उनका उत्साह और हार के बाद टीम का हौसला बढ़ाने का अंदाज दर्शकों को पसंद आता था। लेकिन 2009 तक आते-आते प्रीति और नेसवाड़िया के रिश्ते में दरार की खबरें सामने आने लगी। मीडिया में दोनों के अलग होने की चर्चा होने लगी। हालांकि उनके निजी रिश्ते के हर पहलू की जानकारी सार्वजनिक नहीं थी, लेकिन दोनों के बीच दूरी बढ़ने की खबरें लगातार सामने आती रही। फिर आया साल 2014। यह वह साल था जब प्रीति जिंटा की जिंदगी का सबसे चर्चित विवाद सामने आया। 30 मई 2014 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में IPL मैच के दौरान प्रीति और नेसवाडिया के बीच विवाद होने का आरोप सामने आया। बाद में प्रीति ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि नेसवाडिया ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, उन्हें धमकाया और अनुचित व्यवहार किया। नेसवाडिया ने इन आरोपों से इंकार किया। इस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। एक तरफ प्रीति जिंटा थी जो बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री और आईपीएल टीम की सहमा मालिक थी। दूसरी तरफ नैसवाडिया थे जो एक प्रभावशाली कारोबारी परिवार से आते थे। मीडिया में इस मामले को लेकर लगातार खबरें चलने लगी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपनी-अपनी राय रखनी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने प्रीति का समर्थन किया जबकि कुछ ने मामले के दूसरे पक्ष को सामने रखने की मांग। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच चुका था और आरोपों की सच्चाई का निर्धारण केवल सोशल मीडिया की राय से नहीं किया जा सकता था। नेसवाडिया ने आरोपों को खारिज किया और कानूनी प्रक्रिया के दौरान अपना पक्ष रखा। आखिरकार दोनों पक्षों के बीच मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ गया और 2018 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रीति की शिकायत को रद्द कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रीति की निजी जिंदगी को कई साल तक सुर्खियों में बनाए रखा। लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे इस विवाद से आगे बढ़ने और अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने का फैसला किया। इस दौरान प्रीति का फिल्मी करियर भी बदल रहा था। वह पहले की तरह लगातार फिल्मों में नजर नहीं आ रही थी। उनकी प्राथमिकताओं में बदलाव आने लगा था और वह अपने निजी जीवन पर ज्यादा ध्यान देना चाहती थी। इसी बीच उनकी जिंदगी में जीन गुडनफ की एंट्री हुई। जीन गुडनफ अमेरिका में रहने वाले एक वित्तीय विश्लेषक हैं। वह फिल्म इंडस्ट्री से नहीं जुड़े थे और उनकी दुनिया बॉलीवुड की चकाचौंध से काफी अलग थी। प्रीति और जीन के बीच रिश्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ा। दोनों ने अपने संबंधों को निजी रखा और आखिरकार शादी करने का फैसला किया। 29 फरवरी 2016 को प्रीति जिंटा ने लॉस एंजेलिस में एक निजी समारोह में जीन गुडनफ से शादी कर ली। यह शादी उनके लिए जिंदगी का नया अध्याय थी। एक तरफ वह बॉलीवुड में अपने करियर के उतार-चढ़ाव देख चुकी थी। दूसरी तरफ निजी रिश्तों से जुड़े विवादों का भी सामना कर चुकी थी। अब वह अपने जीवन साथी के साथ शांत और संतुलित जिंदगी बनाना चाहती थी। शादी के बाद प्रीति का अधिक समय अमेरिका में बीतने लगा। उन्होंने फिल्मों से अपनी दूरी बढ़ा दी और परिवार को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया। लेकिन उनके जीवन का सबसे खूबसूरत अध्याय अभी बाकी था। साल 2021 में प्रीति और जीन जुड़वा बच्चों के माता-पिता बने।
उनके बेटे का नाम जय और बेटी का नाम जिया रखा गया। बच्चों का जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ। मां बनने के बाद प्रीति की जिंदगी की प्राथमिकताएं और बदल गई। उन्होंने कई बार कहा कि बच्चों की परवरिश उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह चाहती थी कि उनके बच्चे सामान्य वातावरण में बढ़े और उन्हें अपनी निजी जिंदगी जीने का अवसर मिले। यही वजह है कि वह अपने बच्चों को लगातार सार्वजनिक सुर्खियों में लाने से बचती रही है। प्रीति ने अपनी जिंदगी में एक लंबा समय फिल्मों को दिया था। बचपन से लेकर जवानी तक उन्होंने लगातार काम किया और सफलता के शिखर तक पहुंची। लेकिन मां बनने के बाद उन्होंने महसूस किया कि जिंदगी में कामयाबी के अलावा भी कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें समय देना जरूरी है। अब उनके लिए परिवार, बच्चों की परवरिश और अपने पति के साथ जीवन बिताना बेहद महत्वपूर्ण हो गया था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने सिनेमा को हमेशा के लिए छोड़ दिया था। प्रीति का आईपीएल से जुड़ाव भी लगातार बना रहा। वह अपनी टीम की गतिविधियों पर नजर रखती थी और क्रिकेट के प्रति अपना उत्साह जाहिर करती रहती थी। फिल्मों से दूर रहने के दौरान भी उनके प्रशंसक उन्हें पर्दे पर दोबारा देखने की उम्मीद लगाए बैठे थे। साल 2018 में वह फिल्म भैया जी सुपरहिट में नजर आई। हालांकि फिल्म को बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली लेकिन यह उनकी प्रमुख हिंदी फिल्मी प्रस्तुतियों में से एक रही। इसके बाद वह लंबे समय तक बड़े पर्दे से दूर रहीं। इस दौरान बहुत कुछ बदल गया। नई अभिनेत्रियां सामने आई। फिल्मों के विषय बदले और दर्शकों की पसंद भी पहले जैसी नहीं रही। लेकिन प्रीति ने इस बदलाव को स्वीकार किया। वह जानती थी कि उनका करियर केवल फिल्मों की संख्या से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने अपने जीवन में एक ऐसा दौर भी चुना जिसमें परिवार को सबसे अधिक महत्व दिया। फिर साल 2026 में उनके प्रशंसकों के लिए एक नई खबर सामने आई। करीब 8 साल के अंतराल के बाद प्रीति जिंटा ने फिल्म बंटवारा 1947 के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी की। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके साथ सनी देओल, शबाना आजमी और दूसरे कलाकार भी नजर आए। फिल्म की कहानी भारत के विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। प्रीति ने हमीदा का किरदार निभाया। उनकी वापसी को लेकर प्रशंसकों में उत्सुकता थी क्योंकि लंबे समय बाद उन्हें एक गंभीर ऐतिहासिक कहानी में देखने का अवसर मिला था। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली लेकिन प्रीति ने अपने काम पर गर्व जताया। उनका कहना था कि एक कलाकार अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर सकता है। लेकिन किसी फिल्म का अंतिम परिणाम उसके नियंत्रण में नहीं होता। इसके बाद वह सितंबर 2026 में रिलीज हुई फिल्म वाइब में भी नजर आई। जिसमें कुणाल खेमू के साथ उन्होंने काम किया। इस तरह कई साल तक परिवार को प्राथमिकता देने के बाद प्रीति ने फिल्मों में दोबारा सक्रिय होना शुरू किया। लेकिन अब उनका नजरिया पहले से अलग था।
वह अब लगातार फिल्मों में काम करने के बजाय अपनी पसंद की भूमिकाएं चुनना चाहती थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि छोटे बच्चों की परवरिश उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी और वह अपने काम तथा परिवार के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती हैं। अगर प्रीति जिंटा के पूरे फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने दिल से सोल्जर क्या कहना मिशन कश्मीर दिल चाहता है दिल है तुम्हारा कोई मिल गया कल होना हो लक्ष्य वीर जारा सलाम नमस्ते कभी अलविदा ना कहना झूम बराबर झूम हीरोज़ हर पल इश्क इन पेरिस और भैया जी सुपरहिट जैसी फिल्मों में काम किया उन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलुगु और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी अभिनय किया। उनकी फिल्मों की कुल संख्या अलग-अलग फिल्मोग्राफी सूचियों में अलग हो सकती है क्योंकि कुछ सूचियों में विशेष भूमिकाएं कैमियो और दूसरी भाषाओं की फिल्में भी शामिल होती हैं। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ फिल्मों की संख्या तक सीमित नहीं है। प्रीति जिंटा ने अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। कभी वह चुलबुली और शरारती लड़की के रूप में नजर आई। कभी प्यार में संघर्ष करती युवती बनी तो कभी ऐसी महिला के किरदार। उनकी मुस्कान और गालों पर पड़ने वाले डिंपल उनकी खास पहचान बन गए। लेकिन पर्दे पर दिखाई देने वाली इस मुस्कान के पीछे एक ऐसी महिला भी थी जिसने बचपन में पिता को खोया। परिवार की कठिन परिस्थितियों को देखा और अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने प्यार किया, रिश्तों में मुश्किलें देखी। सार्वजनिक विवादों का सामना किया और फिर अपने लिए एक नई जिंदगी चुनी। आज प्रीति जिंटा को केवल बॉलीवुड की पुरानी सफल अभिनेत्री के रूप में नहीं देखा जा सकता। वह एक व्यवसाय से जुड़ी महिला भी हैं। एक मां है, एक पत्नी है और ऐसी इंसान हैं जिसने समय के साथ अपनी प्राथमिकताओं को बदलना सीखा है। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि जिंदगी में सफलता का अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। किसी के लिए सफलता का मतलब लगातार काम करना और प्रसिद्धि हासिल करना है
तो किसी के लिए अपने परिवार के साथ समय बिताना और बच्चों को बड़ा होते देखना। प्रीति ने अपने जीवन में इन दोनों रास्तों का अनुभव किया है। एक समय था जब उनकी पहचान बड़े पर्दे, फिल्मों और पुरस्कारों से होती थी। आज उनके जीवन में परिवार और बच्चों की भूमिका कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है और इसके बावजूद वह अभिनय की दुनिया में वापस आई क्योंकि कुछ रिश्ते और कुछ जुनून ऐसे होते हैं जिन्हें इंसान अपनी जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर फिर से अपना सकता है। तो दोस्तों, यह थी प्रीति जिंटा की जिंदगी की कहानी। एक ऐसी अभिनेत्री का सफर जिसने कम उम्र में अपने पिता को खो दिया। मेहनत से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। रिश्तों से जुड़े विवादों का सामना किया। शादी की, मां बनी और फिर लंबे अंतराल के बाद फिल्मों में वापसी की। आपको प्रीति जिंटा का कौन सा दौर सबसे ज्यादा पसंद है? कल हो ना हो और वीर जारा वाली उनकी रोमांटिक छवि, कोई मिल गया वाली चुलबुली प्रीति या फिर आज की वह प्रीति जो अपने परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही हैं। अपनी राय कमेंट में जरूर बताइएगा। अगर आपको बॉलीवुड के सितारों की ऐसी दिलचस्प, भावनात्मक और जिंदगी के अनदेखे पहलुओं से जुड़ी कहानियां पसंद आती है, तो वीडियो को लाइक करें, अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें क्योंकि किसी भी सितारे की असली कहानी सिर्फ उसकी फिल्मों में नहीं होती बल्कि उन फैसलों में भी छुपी होती है, जो वो कैमरे से दूर अपनी जिंदगी में लेता है।