एक सगाई जो शादी तक पहुंचते-पहुंचते टूट गई। एक ऐसा प्यार जिसकी कहानी ने पूरे बॉलीवुड में हलचल मचा दी। और एक ऐसी अभिनेत्री जिसने कभी अपनी खूबसूरती से लाखों दिलों पर राज किया तो कभी अपनी निजी जिंदगी के फैसलों से पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर दिया। जिस अभिनेत्री के एक इशारे पर बड़े-बड़े फिल्म निर्माता उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए तैयार रहते थे। उसी अभिनेत्री की जिंदगी में एक ऐसा वक्त भी आया जब प्यार, भरोसे और रिश्तों को लेकर उन्हें मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा। अक्षय कुमार के साथ उनका रिश्ता इतना आगे बढ़ चुका था कि बात सगाई तक पहुंच गई थी। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों की शादी नहीं हो सकी। आखिर क्यों इस रिश्ते के टूटने के बाद कई दूसरी अभिनेत्रियों के नाम विवादों में घसीटे जाने लगे? और क्यों इस अभिनेत्री की जिंदगी का एक पुराना रिश्ता आज भी चर्चा का विषय बन जाता है। लेकिन दोस्तों इस कहानी का सबसे हैरान करने वाला पहलू सिर्फ उनका अधूरा प्यार नहीं है। जरा सोचिए एक ऐसी लड़की जिसकी उम्र महज 22 साल के आसपास थी। जिसके सामने फिल्मों की लंबी कतार लगी थी, जिसके पोस्टर देश भर में बिक रहे थे, उसने अचानक दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला कर लिया। लोगों ने सवाल उठाए। कुछ ने कहा कि इससे उसका करियर खराब हो जाएगा। कुछ ने कहा कि दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने वाली इस अभिनेत्री से आखिर शादी कौन करेगा? लेकिन उस लड़की ने दुनिया की परवाह नहीं की। फिर उसकी जिंदगी में एक शादीशुदा रह चुके कारोबारी की एंट्री हुई। दोनों के बीच प्यार हुआ और आखिरकार शादी भी हो गई। लेकिन शादी के बाद भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। कभी पति की पूर्व पत्नी के साथ टकराव की खबरें सामने आई तो कभी पुरानी मोहब्बत की कहानियां फिर से सुर्खियां बनने लगी। आखिर कौन थी वह अभिनेत्री जिसने बॉलीवुड में ग्लैमर की दुनिया से निकल कर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तक का सफर तय किया। जिसने शादी और बच्चों के लिए अपने करियर की रफ्तार धीमी कर दी। लेकिन फिर कई साल बाद बड़े पर्दे पर ऐसी वापसी की कि नई पीढ़ी भी उसके अभिनय की तारीफ करने लगी। यह कहानी है बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रवीना टंडन की। लेकिन रवीना की जिंदगी को समझने के लिए हमें वापस लौटना होगा उस दौर में जब मुंबई को बंबई कहा जाता था और हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और राजेश खन्ना जैसे सितारों का बोलबाला था। 26 अक्टूबर 1972 को मुंबई में एक बच्ची का जन्म हुआ। उसके पिता थे मशहूर फिल्म निर्देशक और निर्माता रवि टंडन। जबकि मां का नाम वीना टंडन था। कहा जाता है कि पिता के नाम रवि और मां के नाम वीना को मिलाकर बच्ची का नाम रवीना रखा गया। रवीना के पिता रवि टंडन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का जाना पहचाना नाम था। उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया था। उनके काम की वजह से परिवार का फिल्मी दुनिया से गहरा संबंध था। वहीं रवीना की मां वीना टंडन परिवार को संभालने के साथ सामाजिक कार्यों में भी रुचि रखती थी। रवीना ने बाद के वर्षों में कई बार बताया कि महिलाओं और जरूरतमंद बच्चियों की मदद करने की प्रेरणा उन्हें अपनी मां से मिली। रवीना के परिवार में उनके भाई राजीव टंडन भी हैं।
राजीव का रिश्ता भी मनोरंजन जगत से रहा है। उनकी शादी टेलीविजन अभिनेत्री राखी टंडन से हुई थी। हालांकि बाद में दोनों का रिश्ता समाप्त हो गया। रवीना के परिवार में और भी कई लोग फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे हैं। उनके मामा मशहूर चरित्र अभिनेता मैकमोहन थे जिन्हें आज भी फिल्म शोले में सांभा के किरदार के लिए याद किया जाता है। यानी रवीना का बचपन ऐसे माहौल में बीता जहां फिल्मों की बातें, शूटिंग, कलाकार और निर्देशक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि इतने मजबूत फिल्मी बैकग्राउंड के बावजूद रवीना ने बचपन से अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा था। उन्हें फिल्मों में हीरोइन बनने की कोई खास जल्दी नहीं थी। वह अपनी पढ़ाई और सामान्य जिंदगी में व्यस्त थी। रवीना ने मुंबई के जूहू स्थित जमुनाबाई नारसी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मीठीबाई कॉलेज में दाखिला लिया। बचपन में उनका व्यक्तित्व काफी अलग था। उन्होंने अपने कुछ पुराने इंटरव्यूज में बताया था कि बचपन में उनका वजन ज्यादा था और वह खुद को किसी फिल्मी हीरोइन की तरह नहीं देखती थी। लेकिन समय के साथ उनका व्यक्तित्व बदलने लगा। कॉलेज के दिनों में रवीना ने विज्ञापन और पब्लिक रिलेशंस की दुनिया में काम सीखना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें मशहूर विज्ञापन निर्माता प्रहलाद कक्कड़ के साथ काम करने का मौका मिला। वह कैमरे के सामने अभिनय करने के बजाय कैमरे के पीछे होने वाले काम को समझ रही थी। शूटिंग के दौरान लोगों की मदद करना, विज्ञापन की तैयारियां देखना और कामकाज सीखना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। लेकिन धीरे-धीरे उनके आसपास के लोगों की नजर उनकी खूबसूरती और आत्मविश्वास पर पड़ने लगी। कई लोगों ने उनसे कहा कि उन्हें मॉडलिंग करनी चाहिए। शुरुआत में रवीना इन बातों को गंभीरता से नहीं लेती थी। लेकिन फिर उन्हें मॉडलिंग के प्रस्ताव मिलने लगे। इसी दौरान फोटोग्राफर और निर्देशक शांतनु शोरे से भी उनका संपर्क हुआ। इसके बाद मॉडलिंग और फिल्मों की दुनिया के रास्ते उनके लिए खुलने लगे। रवीना ने अपने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में वह फिल्मी प्रस्ताव ठुकरा दिया करती थी। लेकिन प्रह्हाद कक्कड़ ने उन्हें समझाया कि जिस मौके के लिए लाखों लोग संघर्ष करते हैं उसे बिना आजमाए छोड़ देना समझदारी नहीं होगी। और फिर रवीना ने वह फैसला लिया जिसने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। साल था 1991। रवीना टंडन को सलमान खान के साथ फिल्म पत्थर के फूल में काम करने का मौका मिला। उस समय सलमान खान हिंदी सिनेमा में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे। उनकी फिल्मों के लिए युवाओं में जबरदस्त उत्साह रहता था। ऐसे अभिनेता के साथ पहली फिल्म मिलना किसी भी नई अभिनेत्री के लिए बड़ा अवसर था। लेकिन रवीना के सामने एक मुश्किल भी थी। उन्हें अभिनय का ज्यादा अनुभव नहीं था। कैमरे के सामने किस तरह खड़ा होना है, चेहरे पर भाव कैसे लाने हैं, संवाद कैसे बोलने हैं? और बड़े कलाकारों के साथ किस तरह काम करना है, यह सब उनके लिए नया था। फिर भी उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पहली फिल्म में काम किया। जब पत्थर के फूल रिलीज हुई, तो दर्शकों ने इस नए चेहरे को पसंद किया। रवीना की खूबसूरती, मासूमियत और स्क्रीन प्रेजेंस ने लोगों का ध्यान खींचा। उन्हें इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट फीमेल डेब्यू पुरस्कार भी मिला। जिस लड़की ने कभी अभिनेत्री बनने का गंभीर सपना नहीं देखा था, वह अपनी पहली ही फिल्म से पुरस्कार जीत चुकी थी। लेकिन दोस्तों, बॉलीवुड में पहली सफलता हासिल करना और लंबे समय तक स्टार बने रहना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। रवीना के सामने असली चुनौती अब शुरू होने वाली थी। पहली फिल्म की सफलता के बाद उन्हें कई प्रस्ताव मिलने लगे। साल 1992 और 1993 में उन्होंने अलग-अलग फिल्मों में काम किया। इनमें एक ही रास्ता, परंपरा और दिव्य शक्ति जैसी फिल्में शामिल थी। हालांकि इन फिल्मों से उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली जिसकी उनकी पहली फिल्म के बाद उम्मीद की जा रही थी। उस समय बॉलीवुड में माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी, जूही चावला, मीनाक्षी शेषाद्री और करिश्मा कपूर जैसी अभिनेत्रियों का मजबूत दबदबा था। इन अभिनेत्रियों के पास बड़े निर्माता, सफल फिल्में और दर्शकों का भरपूर प्यार था। ऐसे माहौल में किसी नई अभिनेत्री के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था। रवीना के पास खूबसूरती थी, आत्मविश्वास था और फिल्मी परिवार का बैकग्राउंड भी था। लेकिन उन्हें अभी एक ऐसी फिल्म की तलाश थी। यह साल रवीना टंडन के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसी साल उनकी फिल्म मोहरा रिलीज हुई। इस फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, नसीरुद्दीन शाह और परेश रावल जैसे कलाकार थे। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की। रवीना का ग्लैमरस अंदाज दर्शकों को इतना पसंद आया कि वह देखते ही देखते देश की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गई। उनकी लोकप्रियता छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक फैलने लगी। फिल्मी पत्रिकाओं में उनकी तस्वीरें छपने लगी। उनके पोस्टर बिकने लगे और उनके फैशन को युवा लड़कियां अपनाने लगी। मोहरा की सफलता ने रवीना को उस मुकाम पर पहुंचा दिया जहां से उनके लिए बड़े बजट की फिल्मों के दरवाजे खुलने लगे। इसी साल उनकी फिल्म दिलवाले भी आई जिसमें अजय देवगन और सुनील शेट्टी के साथ उनकी भूमिका को पसंद किया गया। इसके बाद लाडला और अंदाज अपना-अपना जैसी फिल्मों ने उनके करियर को और मजबूती दी। अंदाज अपना-अपना में आमिर खान, सलमान खान, करिश्मा कपूर और रवीना टंडन ने साथ काम किया। हालांकि रिलीज के समय यह फिल्म बहुत बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल नहीं कर सकी लेकिन बाद के वर्षों में यह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाने लगी। अब रवीना का नाम उन अभिनेत्रियों में शामिल हो चुका था जिनके पास एक साथ कई फिल्मों के प्रस्ताव आते थे। लेकिन इसी चमकदार दौर में उनकी जिंदगी में एक ऐसा रिश्ता शुरू हुआ, जिसने आगे चलकर उनके निजी जीवन को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। यह रिश्ता था अक्षय कुमार के साथ। मोहरा की शूटिंग के दौरान दोनों की नजदीकियां बढ़ी। धीरे-धीरे उनके रिश्ते की खबरें फिल्मी पत्रिकाओं में आने लगी। दर्शकों को पर्दे पर दोनों की जोड़ी पसंद थी। ऐसे में जब उनकी निजी जिंदगी में भी नजदीकियों की खबरें सामने आई तो चर्चाओं का सिलसिला तेज हो गया। रवीना और अक्षय का रिश्ता सिर्फ मीडिया की कल्पना नहीं था। दोनों ने बाद में स्वीकार किया कि उनके बीच गंभीर संबंध थे और बात सगाई तक पहुंची थी। यही वह दौर था जब रवीना की निजी जिंदगी उनके करियर जितनी ही चर्चित होने लगी। एक तरफ उनकी फिल्में रिलीज हो रही थी और दूसरी तरफ उनकी शादी को लेकर तरह-तरह की खबरें छप रही थी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अक्षय कुमार चाहते थे कि रवीना शादी के बाद फिल्मों में काम कम करें या छोड़ दें। हालांकि इन दावों को अक्षय के रिश्ते की पूरी और निर्विवाद सच्चाई नहीं माना जा सकता। लेकिन इतना जरूर था कि दोनों का रिश्ता काफी गंभीर हो चुका था। फिर अचानक उनकी सगाई टूटने की खबर सामने आई। जिस जोड़ी को दर्शक पर्दे पर पसंद करते थे, उनके निजी जीवन के रास्ते अलग हो गए। रवीना ने बाद के इंटरव्यूज में रिश्ते में बेलफाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। वहीं अक्षय कुमार ने भी पुराने इंटरव्यू में सगाई होने और शादी ना हो पाने की बात स्वीकार की थी। इस टूटे रिश्ते को लेकर शिल्पा शेट्टी का नाम भी मीडिया चर्चाओं में आया।
उस दौर में अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी के रिश्ते को लेकर भी कई खबरें सामने आई थी। फिल्मी पत्रिकाओं में इन तीनों कलाकारों के नाम को लेकर तरह-तरह की कहानियां छपती रही। लेकिन हर पुरानी अफवाह को साबित तथ्य मान लेना सही नहीं होगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई साल बाद रवीना ने खुद कहा कि लोग आज भी उनकी एक टूटी हुई सगाई को ऐसे याद करते हैं जैसे वह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान हो। उनका कहना था कि जिंदगी में लोग आगे बढ़ जाते हैं, रिश्ते बदल जाते हैं और हर इंसान को अपना नया रास्ता चुनने का अधिकार है। साल 2023 में रवीना ने सार्वजनिक रूप से अक्षय कुमार की प्रशंसा भी की। उन्होंने बताया कि अब दोनों के बीच सामान्य और दोस्ताना संबंध है। यानी जिस रिश्ते के टूटने पर कभी फिल्म इंडस्ट्री में इतना शोर मचा था। कई साल बाद वही दोनों कलाकार अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके थे। लेकिन दोस्तों अक्षय कुमार के साथ रिश्ता ही रवीना के करियर का एकमात्र विवाद नहीं था। 90 के दशक में रवीना और करिश्मा कपूर के बीच अनबन की खबरें भी खूब सुर्खियों में रही। दोनों उस दौर की लोकप्रिय अभिनेत्रियां थी। दोनों की फिल्में चल रही थी और कई बार दोनों को एक जैसे किरदारों या बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए देखा जाता था। फिल्म इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक था। लेकिन फिल्मी पत्रिकाओं ने इस प्रतिस्पर्धा को कई बार निजी दुश्मनी की तरह प्रस्तुत किया। कई खबरों में दावा किया गया कि कुछ फिल्मों की कास्टिंग को लेकर दोनों के बीच तनाव था। हालांकि कौन सी फिल्म किस वजह से किसी अभिनेत्री के हाथ से निकली इसका हर मामले में ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था। कलाकारों के पास अपनी बात सीधे लाखों लोगों तक पहुंचाने का साधन भी नहीं था। इसीलिए किसी पत्रिका में छपी खबर कई दिनों तक चर्चा का विषय बनी रहती थी। रवीना का स्वभाव भी ऐसा था कि वह कई बार आलोचना या सवालों पर खुलकर जवाब देती थी। कुछ लोग इसे उनका आत्मविश्वास मानते थे जबकि कुछ लोग उन्हें बेबाक और तेज स्वभाव वाली अभिनेत्री कहते थे। लेकिन इसी बीच रवीना ने एक ऐसा फैसला लिया जो उनकी जिंदगी के सबसे अलग और महत्वपूर्ण फैसलों में गिना जाता है। साल 1995 में उन्होंने दो बच्चियों पूजा और छाया की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उस समय रवीना अविवाहित थी और उनका फिल्मी करियर अपने महत्वपूर्ण दौर में गुजर रहा था। आमतौर पर उस समय किसी युवा अभिनेत्री के लिए शादी से पहले दो बच्चों की जिम्मेदारी लेना बहुत असामान्य माना जाता था। लोग सवाल पूछने लगे। क्या इससे उनके करियर पर असर पड़ेगा? क्या आगे चलकर कोई उनसे शादी करना चाहेगा? क्या इतनी कम उम्र में वह दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठा पाएंगी? लेकिन रवीना ने इन सवालों के बजाय बच्चियों के भविष्य को महत्व दिया। बाद में उन्होंने बताया कि पूजा और छाया उनके परिवार से जुड़ी बच्चियां थी। उनके पिता के निधन के बाद परिस्थितियां ऐसी बनी कि रवीना ने उन्हें अपने घर लाकर उनकी परवरिश करने का फैसला किया। उन्होंने दोनों को शिक्षा, सुरक्षा और परिवार का प्यार देने की कोशिश की। रवीना ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने उनसे कहा था कि दो बच्चों के साथ शादी करना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन उनका जवाब स्पष्ट था। जो भी उनकी जिंदगी का हिस्सा बनेगा, उसे उनके बच्चों को भी स्वीकार करना होगा। यही वजह है कि रवीना की जिंदगी का यह अध्याय उनके फिल्मी करियर से भी ज्यादा भावनात्मक महत्व रखता है। बाद के वर्षों में जब उनकी बेटियां बड़ी हुई और अपने परिवार बसाने लगी तो रवीना कम उम्र में ही नानी जैसी भूमिका में भी आ गई। जिस अभिनेत्री को दर्शक पर्दे पर ग्लैमरस किरदारों में देखते थे, वह निजी जिंदगी में दो बच्चियों की मां की जिम्मेदारी निभा रही थी। अब वापस उनके फिल्मी करियर पर आते हैं। साल 1995 और 96 के दौरान रवीना ने कई फिल्मों में काम किया। लेकिन हर फिल्म सफल नहीं रही। बॉलीवुड में उस समय हर शुक्रवार किसी कलाकार का भविष्य बदल सकता था। एक बड़ी हिट आपको शीर्ष पर पहुंचा सकती थी और लगातार असफल फिल्में निर्माता निर्देशकों की प्राथमिकताएं बदल सकती थी। रवीना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 1997 में फिल्म जिद्दी आई जिसमें उनके साथ सनी देओल थे। फिल्म की सफलता ने रवीना के करियर को फिर मजबूती दी। इसके बाद 1998 उनके लिए बेहद व्यस्त और सफल वर्षों में शामिल रहा। दूल्हे राजा, बड़े मियां, छोटे मियां, घरवाली बाहर वाली, परदेसी बाबू और आंटी नंबर वन जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग अंदाज में काम किया। गोविंदा के साथ उनकी कॉमेडी टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आई। गोविंदा और रवीना की जोड़ी ने उस दौर में कई मनोरंजक फिल्मों के जरिए अपनी खास पहचान बनाई। रवीना केवल ग्लैमरस किरदारों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कॉमेडी, रोमांस, एक्शन और गंभीर विषयों वाली फिल्मों में भी खुद को आजमाया। लेकिन इस चमक के पीछे एक और संघर्ष चल रहा था। रवीना चाहती थी कि लोग उन्हें केवल खूबसूरत अभिनेत्री के रूप में ना देखें बल्कि उनकी अभिनय क्षमता को भी गंभीरता से लें। और इसी सोच ने उन्हें अपने करियर का एक नया रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया। साल 1999 में फिल्म शू लाई जिसमें मनोज वाजपेई के साथ रवीना का अभिनय सामने आया। इस फिल्म में उनका किरदार पहले की कई ग्लैमरस भूमिकाओं से अलग था।
यहां उन्हें एक ऐसी महिला का किरदार निभाना था जिसकी जिंदगी सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है। इस भूमिका में रवीना ने साबित किया कि वह केवल नाच गाने और रोमांटिक दृश्यों के सहारे दर्शकों को प्रभावित करने वाली अभिनेत्री नहीं है। फिर साल 2001 में आई फिल्म दमन अ विक्टिम ऑफ मैरिटल वायलेंस। यह फिल्म घरेलू हिंसा और वैवाहिक उत्पीड़न जैसे गंभीर विषय पर आधारित थी। रवीना ने इसमें दुर्गा नाम की महिला का किरदार निभाया जिसकी जिंदगी शादी के बाद अत्याचार और संघर्ष से भर जाती है। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। जिस अभिनेत्री को कभी केवल ग्लैमरस छवि के लिए पहचाना जाता था, उसने गंभीर अभिनय के दम पर देश का प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार हासिल किया। यह रवीना के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसके बाद अक्स और सत्ता जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। सत्ता में उनका किरदार राजनीति की दुनिया में पहुंचने वाली एक महिला का था। जहांत्वाकांक्षा, सत्ता और रिश्तों के बीच कठिन संघर्ष दिखाई देता है। इन फिल्मों ने रवीना की पहचान को और व्यापक बनाया। अब वह सिर्फ 90 के दशक की लोकप्रिय हीरोइन नहीं बल्कि गंभीर भूमिकाएं निभाने वाली अभिनेत्री के रूप में भी पहचानी जाने लगी थी। लेकिन इसी दौर में उनकी जिंदगी में एक नया रिश्ता प्रवेश करने वाला था और इस बार कहानी का अंत पहले जैसा नहीं होने वाला था। साल 2003 के आसपास रवीना की मुलाकात फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर अनिल थडानी से हुई। अनिल फिल्म वितरण के व्यवसाय से जुड़े हुए थे और इंडस्ट्री में उनकी अपनी पहचान थी। रवीना उस समय अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देख चुकी थी। एक चर्चित रिश्ता टूट चुका था। उन्होंने दो बच्चियों की जिम्मेदारी भी संभाल रखी थी। ऐसे में उनके लिए शादी केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं था। वह चाहती थी कि उनका जीवन साथी उनके पूरे परिवार को स्वीकार करें। अनिल थडानी के साथ उन्हें यही भरोसा मिला। रवीना ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि दोनों ने करीब 2 महीने डेट किया था और बहुत जल्दी शादी का फैसला कर लिया। उनके अनुसार दोनों के पारिवारिक संस्कार और जीवन को देखने का नजरिया काफी मिलता-जुलता था। लेकिन इस शादी के साथ भी एक विवाद जुड़ गया। दरअसल अनिल थडानी की पहले नताशा सिप्पी से शादी हो चुकी थी। नताशा फिल्म निर्माता रोमू सिप्पी की बेटी थी। उनका और अनिल का रिश्ता समाप्त हो चुका था। जब रवीना और अनिल के रिश्ते की खबरें सामने आई तो फिल्मी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। हालांकि किसी शादी के टूटने की पूरी जिम्मेदारी किसी तीसरे व्यक्ति पर डालना उचित नहीं है। जब तक उसके ठोस प्रमाण ना हो। रवीना ने इन चर्चाओं के बावजूद अनिल के साथ अपना भविष्य बनाने का फैसला किया। 22 फरवरी 2004 को दोनों की शादी राजस्थान के उदयपुर में हुई। शादी का आयोजन पिछोला झील के बीच स्थित जग मंदिर पैलेस में किया गया था। शानदार सजावट, पारंपरिक रस्मों और शाही अंदाज के कारण यह शादी उस समय काफी चर्चित रही। रवीना ने अपनी शादी में अपनी मां की शादी से जुड़ी पोशाक पहनकर परिवार की परंपरा को भी महत्व दिया। एक ऐसी अभिनेत्री जिसकी पिछली सगाई टूटने की खबरों ने वर्षों तक सुर्खियां बनाई थी। अब अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर रही थी। लेकिन शादी के बाद भी रवीना का नाम विवादों से पूरी तरह दूर नहीं हुआ। साल 2005 के अंत में एक पार्टी के दौरान रवीना और अनिल की पूर्व पत्नी नताशा सिप्पी के बीच कहासनी की खबरें सामने आई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बात इतनी बढ़ी कि रवीना ने नताशा की ओर शराब का गिलास फेंक दिया। रवीना ने बाद में इस घटना पर बात करते हुए स्वीकार किया कि पार्टी में टकराव हुआ था। उन्होंने अपने पति के प्रति अपमानजनक व्यवहार का विरोध करने की बात कही और अपने फैसले पर पछतावा ना होने की बात भी कही। यह घटना उस समय मनोरंजन जगत में काफी चर्चित रही। लेकिन रवीना की शादीशुदा जिंदगी केवल विवादों तक सीमित नहीं रही। 16 मार्च 2005 को उनके घर बेटी राशा का जन्म हुआ। इसके बाद परिवार में बेटे रणवीरवर्धन का जन्म हुआ। अब रवीना चार बच्चों की मां थी। पूजा और छाया की जिम्मेदारी वह पहले से संभाल रही थी और राशा तथा रणवीर वर्धन के आने से परिवार और बड़ा हो गया। रवीना ने अपने परिवार को समय देने के लिए फिल्मों से दूरी भी बनाई। उनका कहना रहा कि बच्चों के छोटे होने के दौरान वह उनके साथ रहना चाहती थी। जिस अभिनेत्री के पास कभी लगातार फिल्मों के प्रस्ताव आते थे, वह अब सोच समझकर काम चुनने लगी थी। कई लोगों ने इसे उनके करियर का ढलान समझा। लेकिन रवीना के लिए यह निजी प्राथमिकताओं का दौर था। उन्होंने फिल्मी दुनिया से हमेशा के लिए विदाई नहीं ली थी बल्कि वह एक ऐसे मौके का इंतजार कर रही थी जब उन्हें अपनी उम्र और अनुभव के अनुरूप किरदार निभाने को मिले। समय गुजरता गया। नई अभिनेत्रियां इंडस्ट्री में आने लगी। सिनेमा का अंदाज बदलने लगा और दर्शकों की पसंद भी बदलने लगी। 90 के दशक की कई लोकप्रिय अभिनेत्रियों के लिए बड़े पर्दे पर पहले जैसी जगह बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। रवीना के सामने भी यही चुनौती थी। लेकिन उन्होंने एक अलग रास्ता चुना। साल 2017 में वह फिल्म मातृ में नजर आई। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी मां का किरदार निभाया जो अपनी बेटी के साथ हुए अपराध के बाद न्याय की लड़ाई लड़ती है। यह भूमिका उनके पुराने ग्लैमरस किरदारों से बिल्कुल अलग थी। फिल्म के विषय ने सामाजिक मुद्दों पर चर्चा भी पैदा की। इसके बाद साल 2021 में Netflix की सीरीज अरण्यक में रवीना ने एक पुलिस अधिकारी कस्तूरी डोगरा का किरदार निभाया। इस सीरीज में उनका अभिनय दर्शकों और समीक्षकों के बीच सराहा गया। रवीना ने दिखाया कि एक कलाकार की पहचान केवल उसकी जवानी या खूबसूरती तक सीमित नहीं होती। अनुभव और अभिनय की समझ भी किसी कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रख सकती है। फिर साल 2022 में आई फिल्म केजीएफ चैप्टर 2। इस फिल्म में रवीना ने प्रधानमंत्री रमिका सेन का किरदार निभाया। फिल्म की जबरदस्त सफलता ने उन्हें एक नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचाया। जिन युवाओं ने रवीना की 90 के दशक वाली फिल्में सिनेमाघरों में नहीं देखी थी, उन्होंने उन्हें एक शक्तिशाली राजनीति किरदार में देखा।
यह उनके करियर की बड़ी वापसी मानी गई। इसके बाद साल 2023 में रवीना टंडन को भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। एक अभिनेत्री ने 1991 में अपना फिल्मी सफर शुरू किया था। अब देश के महत्वपूर्ण नागरिक सम्मानों में से एक हासिल कर चुकी थी। यह उपलब्धि उनके लंबे करियर, अभिनय और सामाजिक योगदान की पहचान थी। लेकिन दोस्तों, रवीना की जिंदगी में विवादों का सिलसिला यहां भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। जून 2024 में मुंबई में उनके घर के बाहर हुई एक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कुछ लोग रवीना और उनके ड्राइवर पर मारपीट तथा गाड़ी से टक्कर मारने के आरोप लगा रहे थे। मामला इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगी। लेकिन बाद में मुंबई पुलिस ने आसपास की सीसीटीवी फुटेज की जांच की। पुलिस के मुताबिक रवीना की गाड़ी से किसी को टक्कर नहीं लगी थी और उनके नशे में होने का आरोप भी सही नहीं पाया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि गाड़ी पीछे करने के दौरान शुरू हुई बहस ने विवाद का रूप ले लिया था। इस घटना ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया पर किसी घटना का अधूरा वीडियो कितनी तेजी से किसी व्यक्ति की छवि प्रभावित कर सकता है। अब सवाल आता है कि रवीना टंडन ने अपने पूरे करियर में आखिर कितनी फिल्मों में काम किया। उनका फिल्मी सफर 1991 से शुर