बी द ब्लडी झूठी पार्टी आफ्टर इट्स एक तरफ नसीरुद्दीन शाह जिन्होंने छात्रों के सपोर्ट पे बीजेपी पर हमला बोला तो दूसरी तरफ गजेंद्र चौहान जिन्हें उनका बयान बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। अब गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन शाह को यहां तक कह दिया कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। आखिर ऐसा क्या कहा नसीरुद्दीन शाह ने कि महाभारत के युधिष्ठिर पूरी तरह से भड़क गए और इस पूरे विवाद के पीछे की वजह क्या है? आपको पूरी खबर आसान शब्दों में बताते हैं।
दरअसल यह पूरा मामला कोलकाता के एक प्रोटेस्ट आंदोलन से जुड़ा हुआ है। यहां छात्र अपने वीसी के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। रिपोर्ट की मानें तो छात्रों को अखिल भारतीय ग्राहक का पंचायत के सदस्यों के बीच टकराव के बाद संस्था में तनाव बढ़ गया था। इस मुद्दे पर नसीरुद्दीन शाह ने स्टूडेंट की सपोर्ट करते हुए सरकार और बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए। नसीरुद्दीन शाह ने अपने Instagram पर एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में बीजेपी को वो कई सारी चीजें बोलते हुए दिखाई दे रहे हैं और यह वीडियो पूरी तरह से अब वायरल हो चुका है।
आप भी देखिए उन्होंने क्या कुछ कहा है। नमस्कार आदाब। आई एम नसीरुद्दीन शाह। द बीजेपी द ब्लडी झूठी पार्टी आफ्टर इट्स मैनपुलेटिव विक्टरी इन द बंगाल इलेक्शंस नाउ सीम्स ऑल आउट फॉर रिवेंज ऑन एनीवन हु डस नॉट सब्सक्राइब टू देयर बिलीव्स एंड देयर पॉलिसीज द लेटेस्ट विक्टिम्स ऑफ दिस विंडेट आर द स्टूडेंट्स द एस्पायरिंग फिल्म मेकर्स ऑफ द सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविज़ इंस्टट्यूट इन रिटर्न फॉर देयर डिमांड फॉर अकाउंटेबिलिटी फ्रॉम द एडमिनिस्ट्रेशन दे हैव बीन सर्व शो कॉज नोटिसेस पुट अंडर सर्वेस थ्रेट एंड नाउ हैव इवन बीन आस्क्ड टू वेकेट द हॉस्टल्स दिस बीजेपी नॉट कंटेंट विद बैकिंग एंड इनकरेजिंग शेमलेस प्रोपेगेंडा इन इट्स फेवर इज़ नाउ होपिंग
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गजेंद्र ने नसीरुद्दीन शाह को सलाह दी कि वह सरकार को ट्रोल करने की बजाय छात्रों को कोई पॉजिटिव सलाह दें। गजेंद्र चौहान ने यह भी कहा कि नसरुद्दीन शाह एक महान कलाकार हैं। लेकिन जो पॉलिटिकल मुद्दे होते हैं उस पर वह एक तरफ़ा बोलते नजर आते हैं। उनके मुताबिका किसी भी मामले को समझने के लिए दोनों पक्षों को देखना जरूरी होता है। उन्होंने छात्रों के प्रोटेस्ट के अधिकार को स्वीकार किया लेकिन कहा कि बातचीत के बिना आंदोलन के समाधान को निकालना बहुत मुश्किल है। अब इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग नजरिए सामने आते हैं। नसरुद्दीन शाह स्टूडेंट के प्रोटेस्ट में सरकार पर हमला बोल रहे हैं। जबकि गजेंद्र चौहान बातचीत और संस्था और इसके साथ ही प्रशासन के भरोसे की बात कर रहे हैं। फिलहाल इस बहस में एक और चीज देखने को मिलती है और वह है फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन जिसको लेकर अब बातें तेज हो गई हैं। सवाल यह है कि आखिरकार छात्रों की मांगों का समाधान कब निकलता है और यह कंट्रोवर्सी और कितने दिन चलती है?