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अक्षय कुमार की बढ़ी मुश्किल, त्यौहार के दिनों में आया कोर्ट का समन, वजह चौंका देगी।

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सोचिए कि आपका बच्चा पढ़ाई में होशियार हो, खेल-कूद में ऑलराउंडर हो, अपनी मेहनत के दम पर स्टेट और नेशनल लेवल पर एक नहीं बल्कि दो-दो गोल्ड मेडल लाता हो और एक अभिभावक के तौर पर आप भी उसके सपनों को पंख दे रहे हों, लेकिन अचानक आपको पता चले कि सरकारी कागजों में जो खेल बिल्कुल मुफ्त है, उसके नाम पर आपसे लाखों रुपये वसूल लिए गए हैं और जब आप इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, सवाल करते हैं, तो भ्रष्ट सिस्टम के आका अपनी गलती सुधारने के बजाय आपके बेटे को टारगेट बनाते हैं, उसका नाम वर्ल्ड कप से काट देते हैं, उसके साथ अन्याय करते हैं।

अगर आपके साथ ऐसा अन्याय हो तो एक अभिभावक के तौर पर आप पर क्या बीतेगी?ये सिर्फ एक बच्चे के करियर खराब होने की बात नहीं है, बल्कि हमारी सिस्टम में जड़ जमा कर बैठे भ्रष्टाचार की वास्तविकता है, जहाँ आम नागरिक जब आवाज उठाता है तो उसे न्याय मिलने के बजाय धमकियाँ और मानसिक प्रताड़ना मिलती है। बंद दरवाजे के पीछे चल रहे इस खेल का असली चेहरा कभी सामने आता ही नहीं है।अहमदाबाद के एक पिता दिनेशभाई बहल इस धोखाधड़ी के खिलाफ जंग छेड़ते हैं और अक्षय कुमार को समन मिलता है, आप सही सुन रहे हैं बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार को समन मिलता है। बात ये नहीं है कि उन्हें समन मिला, बात अलग है। क्या है वो बात, उसके बारे में आज बात करेंगे। नमस्कार, आपके साथ मैं सेजल।अहमदाबाद के एक पिता हैं दिनेशभाई बहल। बेटा प्रीत पढ़ाई और खेल-कूद में बहुत होशियार। वो कराटे की ट्रेनिंग लेने का सोचता है।

संपर्क होता है अहमदाबाद के श्रेयस फाउंडेशन से। इस फाउंडेशन में कुडो इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी KIFI भी कनेक्टेड है। प्रीत कराटे सीखने गया, पर वहाँ कराटे की आड़ में कुडो को प्रमोट किया गया, वो कुडो भी सीखा। प्रीत उसमें भी माहिर निकला।अब बीच में एक बात बता दूँ, कुडो एक मार्शल आर्ट्स गेम है। आमतौर पर जब भी मार्शल आर्ट्स का नाम आता है तो हमारे दिमाग में सबसे पहला शब्द आता है कराटे। पर कराटे और कुडो दोनों जापानी खेल ही हैं, फिर भी दोनों के बीच जमीन-आसमान का फर्क है। कराटे सदियों पुरानी पारंपरिक कला है जिसमें अनुशासन, आत्मरक्षा और कंट्रोल्ड पंच और किक पर ध्यान दिया जाता है, जबकि कुडो 1981 में जापान में शुरू हुई एकदम आधुनिक और आक्रामक मिक्स्ड मार्शल आर्ट है। कुडो में पंच और किक के अलावा कोहनी मारना, घुटना मारना, सामने वाले को पटक देना, जमीन पर पकड़ कर रखना, ये सब फुल कॉन्टैक्ट तकनीक है, इसकी छूट होती है और इसी वजह से कराटे में मुंह खुला होता है, जबकि कुडो के खेल में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए कांच वाला एक खास महंगा हेलमेट अनिवार्य होता है।अहमदाबाद का प्रीत इस कुडो के खेल में भी इतना तेजस्वी निकला कि उसने मेहनत की और गवर्नमेंट नेशनल गेम्स और नेशनल ओपन्स दोनों में गोल्ड मेडल जीते। देश की तरफ से वर्ल्ड कप खेलने के लिए आधिकारिक तौर पर क्वालीफाई था। उसे जाने नहीं दिया गया, वो बात अलग है।

सवाल है कि ये खेल चलाता कौन है, ये कुडो फाउंडेशन चलाता कौन है?तो प्रीत जिस संस्था में ट्रेनिंग लेता था, उसका नाम है KIFI एसोसिएशन यानी कुडो इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिया। इस संस्था के चेयरमैन खुद बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार हैं। अध्यक्ष मेहुल वोरा और जनरल सेक्रेटरी विस्पी खरादी हैं और ये संस्था भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।ये संस्था सूचना के अधिकार के जवाबों में लिखित में दावा करती है, RTI में, कि वो कोई पर्सनल ट्रेनिंग सेंटर नहीं चलाते, कोई यूनिफॉर्म या सामान नहीं बेचते और उनकी नेशनल टूर्नामेंट बिल्कुल मुफ्त होती है।पर वास्तविकता ये है कि संस्था के अहमदाबाद के कोच प्रवीण जाधव अभिभावक दिनेशभाई बहल से कभी हेलमेट-बेल्ट के एग्जाम के नाम पर 15,000 तो कभी हेलमेट और एक्सेसरीज के नाम पर 25,000 लेते हैं। और इस तरह चार साल में 2 लाख से ज्यादा की रकम वसूल ली गई।दूसरा, पूरी जो रकम उनसे ली गई, उसमें शायद उन्हें एतराज भी नहीं होता, पर पूरी रकम नकद में ली गई, कैश में ली गई।

अभिभावकों को कभी किसी भी तरह की रसीद नहीं दी गई। ये नकद पैसे कथित तौर पर दो से तीन हिस्सों में बाँटकर मुंबई हेड ऑफिस तक पहुँचाने की पूरी बात है।अक्षय कुमार कई बार गुजरात दौरे में या दूसरी जगहों पर जब इस कुडो इंटरनेशनल फाउंडेशन की बात करते हैं तो कह रहे हैं कि ये ओपन फॉर ऑल है और बिल्कुल फ्री है, तो फिर पैसे किस बात के हैं और अगर पैसे हैं तो उसकी रसीद क्यों नहीं, क्योंकि ये तो एक रजिस्टर्ड संस्था है। ये मैटर अभी कोर्ट में है, कोर्ट ने अक्षय कुमार सहित लोगों को समन दिया है, जवाब कुछ भी नहीं आया है।आपको जानकर हैरानी होगी कि इस संस्था के अंदर किस हद तक भ्रष्टाचार पनप रहा है, इसका सबूत तब मिला जब इसके दो मुख्य स्तंभ यानी जो दोनों भी गोल्ड मेडलिस्ट हैं, विस्पी कासद और विस्पी खरादी, इन दोनों के बीच पावर और पैसे के लेन-देन को लेकर भयंकर झगड़ा हुआ।

ये दोनों लोग बचपन के दोस्त, दोनों गोल्ड मेडलिस्ट, पर सोचिए फाउंडेशन के पैसे के लिए दोनों लड़े और दोनों ने एक-दूसरे को जान से मारने की धमकी दी। इस बवाल के बाद एक फाउंडर को संस्था से निकाल दिया गया।जब प्रीत की मम्मी दीपाबेन बहल ने RTI की, तो संस्था के पिछले सालों का हिसाब मांगा RTI में, तब इस संस्था ने अपनी चोरी छुपाने के लिए ऐसा हास्यास्पद बहाना निकाला कि 26 जुलाई 2020 के दिन हमारी ऑफिस में आग लग गई और कंप्यूटर का पुराना सारा डेटा जलकर खाक हो गया।प्रशासन और नागरिकों के साथ इससे बड़ी धोखाधड़ी और क्या हो सकती है कि करोड़ों रुपये की हेराफेरी इस संस्था में हुई है, ऐसा उस पर आरोप है और उसके पास सबूत नहीं है।

सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था के पास उसके खुद के ही रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं हैं।जब दिनेशभाई ने इस अंधी लूट और RTI के कागजों को देखकर सवाल उठाया कि अगर ये सब कागज पर मुफ्त है तो हमसे लाखों रुपये क्यों लिए, तब सिस्टम का असली क्रूर चेहरा सामने आया। कोच प्रवीण जाधव ने अपनी गलती मानने के बजाय दिनेशभाई को गालियाँ दीं और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।इस विरोध का बदला डबल गोल्ड मेडलिस्ट बच्चे प्रीत से भी लिया गया। आनंद में हुई टूर्नामेंट में प्रीत तीन फाइट जीतने के बावजूद उस कोच ने जानबूझकर उसका नाम गलत कैटेगरी में डाल दिया ताकि उसे डिसक्वालीफाई किया जा सके। हद तो तब हुई जब बिना कोई कारण बताए प्रीत का नाम वर्ल्ड कप की लिस्ट से साफ कर दिया गया। उसे खेलने ही नहीं दिया गया। और जो चेक इंटरनेशनल लेवल तक सेलेक्ट हो गया है, उसका फिर से डिस्ट्रिक्ट से सेलेक्शन शुरू किया।

जो बच्चा देश के लिए मेडल लाने का सपना देखता हो, उसे मानसिक रूप से टॉर्चर करके डिप्रेशन में धकेला गया।अभिभावक ने हिम्मत हारे बिना वकील के जरिए चेयरमैन अक्षय कुमार, कोच प्रवीण जाधव और श्रेयस फाउंडेशन को आधिकारिक लीगल नोटिस भेजा है कोर्ट के द्वारा और ये मामला अदालत में ले गए जहाँ कोर्ट ने खुद अक्षय कुमार और सेक्रेटरी विस्पी खरादी को समन दिया है।सवाल ये है कि जो अक्षय कुमार स्टेज से 700 रुपये की रिश्वत लेने वाले कोच को निकालने की बातें करते हों कि हमारी संस्था के अंदर एक कोच था और ये बात किसी को पता नहीं कि वो 700 की रिश्वत लेते पकड़ा गया तो हमने उसे निकाल दिया क्योंकि ऐसे लोगों के लिए यहाँ जगह नहीं है। अगर उसी चेयरमैन को पता हो जो किसी को पता न हो तो फिर इतना बड़ा घोटाला हुआ उसकी खबर नहीं होगी?

अपने ही घर के पते पर उन्हें स्पीड पोस्ट से भेजी गई कानूनी नोटिसें और कोर्ट के समन भी नहीं पता होंगे, वो क्यों चुप हैं, ये सवाल है।आम नागरिकों की जेब काटकर होनहार खिलाड़ियों का भविष्य बर्बाद करने वाले इन पदाधिकारियों की मिलीभगत से क्या सच में चेयरमैन को खबर नहीं है या फिर सब जानते हुए भी ये सुपरस्टार आँखें मूंदे हुए हैं, ये अभी सवाल है।एक पिता की ये कानूनी लड़ाई हर आम नागरिक की लड़ाई है जो सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने से डरता है।

खेल के नाम पर चल रही इस सरासर लूट के खिलाफ तंत्र कब जागेगा और प्रीत जैसे सैकड़ों बच्चों को कब न्याय मिलेगा, ये सबसे बड़ा सवाल है।जिन्होंने आवाज उठाई, उन दिनेशभाई का क्या कहना है, सुनिए:”और ये विस्पी खरादी और विस्पी कासद का पहला इंसिडेंट नहीं है। इसके अलावा आपने ही एक इवेंट में विम में मैंने देखा कि एक पेरेंट से कोच ने ब्राइब मांगी थी 700 रुपये की और कुडो फेडरेशन ने नेशनल बॉडी ने उसको सस्पेंड कर दिया था, तो ये सब होते हुए भी इसका मतलब ये सही बात है कि कुडो इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिया में भ्रष्टाचार हो रहा है, पेरेंट्स से कैश पैसे लिए जा रहे हैं, ये पैसा कहाँ जा रहा है, GST पे नहीं किया जा रहा है, इनकम टैक्स नहीं पे किया जा रहा है, फेडरेशन की ऑडिट रिपोर्ट भी जब मैंने मांगी थी तो मुझे तीन पेज की सिर्फ एक्सेल फाइल ऑडिटर की साइन बिना, वो RTI में भेजी गई थी, तो ये बहुत सारे सवाल हैं और बहुत सारा भ्रष्टाचार हो रहा है। अक्षय कुमार जी आप तो कितने इश्यू प्रमोट करते हो और आपके फेडरेशन में ही भ्रष्टाचार हो रहा है, इरेगुलैरिटीज हैं, वो आप कैसे चला रहे हो?”खेल के नाम पर चल रही ये लूट और धोखाधड़ी सिर्फ सिस्टम की काला बाजारी नहीं, बल्कि एक तेजस्वी खिलाड़ी के सपने का खुलेआम कत्ल है। सवाल ये नहीं है कि दिनेशभाई के दो लाख रुपये गए, सवाल ये है कि डबल गोल्ड मेडलिस्ट प्रीत बहल जैसे होनहार खिलाड़ी से उसका देश की तरफ से वर्ल्ड कप खेलने का हक छीन लिया गया।

दूसरा कि ये संस्था नॉन-कमर्शियल है, ऐसा इसके संस्थापक कह रहे हैं, अगर वो नॉन-कमर्शियल है तो वो रसीद क्यों नहीं देती? सरकार की सहायता से पूरी चलती है और वो बिल्कुल फ्री है और सबके लिए है, तो फिर पैसे किस बात के लिए लिए जा रहे हैं?दूसरा कि जो कुडो सिखाया जाता है उसमें सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट, ऐसे अलग-अलग कई सारे साधन लेने होते हैं, जो बेल्ट या जो हेलमेट है, वो जापान में 3000 रुपये में मिलता है, उसका यहाँ ये संस्था 10,000 या 15,000 रुपये वसूल करती है, तो ये क्यों हो रहा है?और ऐसे अनेक अभिभावक हैं।

संस्था के लोग कह रहे हैं कि हमारे पास उस समय 2 लाख बच्चे थे, सोचिए कि अभी कितने बच्चे होंगे और हर एक से आप इस तरह 15,000 रुपये ब्लैक बेल्ट या व्हाइट बेल्ट या येलो बेल्ट या उसके बेल्ट के नाम पर, पर्पल बेल्ट के नाम पर, आप एग्जाम के नाम पर पैसे ऐंठते हो, तो वो कितना रुपया हुआ होगा?खेल मंत्रालय से लेकर अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार जब चेयरमैन पद पर हों, तब आम नागरिक को न्याय के लिए कोर्ट के धक्के खाने पड़ें, ये हमारे देश के खेल जगत की सबसे बड़ी और भद्दी वास्तविकता है। दिनेशभाई अपने बेटे के लिए न्याय मांग रहे हैं, पर बंद दरवाजे के पीछे चल रहे इस खेल के खिलाफ अगर आज आवाज नहीं उठाई गई, तो कल प्रीत जैसा कोई और सितारा डिप्रेशन में धकेल दिया जाएगा। देखना ये रहेगा कि कोर्ट के समन के बाद अक्षय कुमार और संस्था के आका कब अपनी चुप्पी तोड़ते हैं, हमारा तंत्र इस कथित वित्तीय घोटाले पर कब कड़ा कदम उठाता है, ये भी देखना है।

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