टाइगर श्रॉफ पर गोली चलाने वाले शूटर एक हफ्ते पहले भी उन्हें मारने पहुंचे थे। लेकिन उस दिन टाइगर फुटबॉल खेलने नहीं पहुंचे थे। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डाटा रिकॉर्ड से यह जानकारी सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक टाइगर जिस फुटबॉल ग्राउंड पर अक्सर संडे शाम खेलने पहुंचते हैं, वहां तीन संदिग्ध लोग 11 अक्टूबर को भी नजर आए थे।
करीब से की एक हफ्ते बाद वही तीन लोग फिर उसी जगह पहुंचे। इस बार टाइगर मैदान में थे और जैसे ही वह अपनी BMW में सवार होकर बाहर निकले उन पर गोलियां बरसा दी गई। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में टाइगर के एक दोस्त ने बताया कि मुंबई के जूहू इलाके के पुष्प बनारसी पार्क के फुटबॉल ग्राउंड में टाइगर आमतौर पर हर रविवार शाम करीब 5:00 से 7:00 बजे तक फुटबॉल खेलते हैं।
बहुत कम ही ऐसा होता है कि वो रविवार का मैच मिस करें। अब पुलिस को शक है कि हमलावरों को टाइगर की इसी रूटीन की जानकारी थी। 11 अक्टूबर को तीन संदिग्ध इसी फुटबॉल ग्राउंड के आसपास नजर आए। सीसीटीवी और कॉल डाटा रिकॉर्ड से पुलिस को पता चला कि वो वहां कुछ वक्त तक मौजूद रहे। पुलिस को शक है कि उस दिन भी उनका मकसद टाइगर को निशाना बनाना हो सकता था। लेकिन उस रविवार टाइगर फुटबॉल खेलने पहुंचे ही [संगीत] नहीं। यानी अगर पुलिस का शख्स सही है तो उस दिन हमलावर इंतजार करते रहे और टाइगर के नहीं आने पर वापस लौट गए। इसके ठीक एक हफ्ते बाद आई 18 अक्टूबर की तारीख।
इस बार तीनों संदिग्ध फिर उसी जगह पहुंचे। सीसीटीवी के मुताबिक वो करीब 4:30 बजे से पार्क के आसपास घूम रहे थे। बार-बार फुटबॉल ग्राउंड के गेट तक जाते, अंदर झांकते और टाइगर के पहुंचने का इंतजार करते दिखे। पुलिस को शक है कि कुछ और लोग भी टाइगर की मूवमेंट पर नजर रख रहे थे और सही वक्त पर शूटर्स को जानकारी दे रहे थे। शाम करीब 7:00 बजे टाइगर मैदान से बाहर निकले। वो अपने BMW में बैठे और गाड़ी जैसे ही गेट से निकली दो हमलावरों ने सामने और बाई तरफ से गोलियां चला दी। तीसरा आरोपी बाइक पर पहले से इंतजार कर रहा था।
फायरिंग के बाद तीनों उसी बाइक से फरार हो गए। पुलिस को शक है कि हमलावरों का इरादा सिर्फ डराने का नहीं था बल्कि टाइगर और उनके ड्राइवर को जान से मारने का था। इसी [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमले में टाइगर के ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलोच घायल हो गए। वो करीब 28 साल से श्रॉफ परिवार के साथ काम कर रहे थे। एफआईआर के मुताबिक गोली उनके बाएं हाथ की कलाई में लगी और बाह में फंस गई। उनके दाहिने हाथ की उंगली में भी फ्रैक्चर हुआ। टाइगर को भी सीने और दाहिने हाथ में चोट लगी। ड्राइवर के घायल होने के बाद टाइगर खुद BMW चलाकर साक्र क्रूस पुलिस स्टेशन पहुंचे। इसके बाद दोनों को नानावती अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद हमलावर मुंबई से भागने लगे। पुलिस के मुताबिक उन्होंने फोन बंद रखे और ट्रांसपोर्ट बदला। लेकिन एक गलती ने पुलिस को सुराग दे दिया।
तीनों ने मुंबई से सूरत जाने के लिए कैब बुक की थी। कैब नहीं पहुंची तो एक आरोपी ने ड्राइवर को फोन किया और अपनी लोकेशन बता दी। पुलिस ने कैब ड्राइवर को ट्रेस किया और सीसीटीवी के जरिए आरोपियों की मूवमेंट सूरत रेलवे स्टेशन तक ट्रैक की। जहां तीनों ट्रेन पकड़ते दिखे। मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद 19 अक्टूबर की सुबह कोटा स्टेशन पर पुणे जयपुर एक्सप्रेस की तलाशी ली गई और तीनों संदिग्धों को जनरल कोर्ट से पकड़ लिया गया। टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में पुलिस ने अब तक छह लोगों को हिरासत में लिया है। मामले में तीन कथित शूटरों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया था। इनकी पहचान रिहान रहीसुद्दीन, फूल सिंह और और रितिक मेहतो के तौर पर हुई है।
तीनों को पुणे जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी वारदात के बाद मुंबई से भागकर नेपाल जाने की कोशिश कर रहे थे। वहीं इस मामले में एक और गिरफ्तारी हरियाणा के सोनीपत से हुई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक समीर नाम के एक शख्स पर आरोप है कि उसने शूटरों का संपर्क अनिल पंडित से कराया था।
अनिल पंडित को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं कोटा की अदालत ने तीनों कथित शूटरों को 48 घंटों की ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई पुलिस को सौंपा है।
पुलिस अब उनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने की साजिश किसने रची? हमले के लिए हथियार कहां से आए और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे?