ललिता पवार ने अपने करियर की शुरुआत बतौर हीरोइन के रोल निभाकर की थी। लेकिन फिल्मी दुनिया में उन्हें नेगेटिव किरदारों के जरिए पहचान मिली।
उन्होंने रामायण में मंथरा का किरदार निभाकर भी खूब वाहवाही लूटी थी। लेकिन एक फिल्म के एक सीन की वजह से वह हीरोइन से विलेन बन गई। ललिता पवार ने साल 1928 में मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र से अपने सिने करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उन्होंने बाल कलाकार का किरदार निभाया था।
इसके बाद उन्होंने 1934 में टॉकी फिल्मों में काम करना शुरू किया और तब वह मशहूर एक्ट्रेस बन चुकी थी और एक साल में तकरीबन 12 फिल्में किया करती थी। ललिता पवार ने अपने एक्टिंग करियर में तकरीबन 700 फिल्मों में काम किया। साल 1928 से लेकर 1997 तक उन्होंने कई ऐसे किरदार निभाए जो अमर हो गए।
साल 1942 में ललिता पवार भगवान दादा के साथ फिल्म जंगे आजादी में काम कर रही थी। फिल्म के एक सीन में भगवान दादा को ललिता पवार को थप्पड़ मारना था। लेकिन वह थप्पड़ उन्हें इतनी जोर से लगा कि ललिता पवार के चेहरे को लकवा मार गया।
इसके बाद वह 3 साल एक्टिंग से दूर रही। इलाज कराया लेकिन उनकी एक आंख की नस फटने की वजह से वो पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई। इसके बाद उन्हें हीरोइन के रोल मिलने बंद हो गए और देखते ही देखते वह विलेन के रोल में आई। खासकर खडूस सास के रोल में ललिता पवार को खूब पसंद किया गया।