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प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौ;त को लेकर जीजा ने खोला खौ;ना! क राज़, मची त;बा!ही!

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सीसीटीवी मैंने देखा जो व्यक्ति मतलब रूम से बाहर निकला उस हिसाब से रूम में कोई नहीं था जब गुरु जी ने बताया हम लोग को जब बैठे हुए थे कि रूम में कोई नहीं था तो वह अकेला था जब वो अकेला था रूम में जब इसने ये सब कर लिया जब वो छत के ऊपर जाके थोड़ा देर बैठा है मुश्किल से 1 मिनट डेढ़ मिनट बैठा है।

उसके बाद में वो नीचे लेट गया है जब आपका शिष्य था तो आपका शिष्य था तो आपको सबसे पहले वहां साथ रहना रहा भले ही आप अंदर नहीं जाते बाहर बैठना तो रहा कि आपने उसको जहां मिला था वहीं छोड़ के आ गए। मेक के आ गए। तो आश्रम में आके फोन लगाया हमने बाजी को। वो बोलते हैं कि आप लोग बैठो।

8:30 बजे के बाद मिलते हैं। थाने में बैठ के पूछताछ की उन लोगों ने कौन है? कैसे हो? तो सब बताया हम लोगों ने। उसके बाद में चलो ठीक है। फिर हम लोग को वो ले गए कहां जो जहां रखे हुए थे उन लोगों ने तो हम लोग उधर पहुंचे। क्या नाम है और आप कौन लगते हो? मेरा नाम है सोनू पटेल। हां। दीपक मेरा साला था। भाई साहब का साला पता मेरा भी साला हुआ। हां।

तो एक्चुअली हम लोग इधर से गए। एक्चुअली हम लोग इधर से गए तो उधर से पहले पहली बात तो फोन आया कैसे से बात हो गई। वो गिर गए हैं तो उनका ऑपरेशन होना कि आप आ जाइए। तो हम लोग उधर पहुंचे तो उधर पहुंचने के बाद तो एक ऑटो वाले से हमने बात करवाई। हम लोग को कुछ नहीं बोला था। उन लोग को समझ में नहीं आ रहा था। तो ऑटो वाले से बात करवाई।

तो उन्होंने ऑटो वाले से हमने बात करवाई तो उन लोग ने बताया हम लोग को कि उनको अस्पताल लेके मत जाना। सीधे आश्रम लेके आ जाओ। तो मना कर दिया उन लोगों ने। तो फिर हम लोग ने ऑटो वाले से पूछे कि भैया हमको अस्पताल जाना है।

आप अस्पताल लेके चलो। तो हम लोग अस्पताल पहुंचे जैसे तो बाहर जो गार्ड बैठे रहते हैं। तो उस गार्ड से हम लोग ने पूछा तो कि मतलब कोई इधर से आया क्या बाबा जी के इधर से आश्रम से? तो उन्होंने बताया कि वो लेके आए थे। उनकी हो गई। तो हम लोग उधर से निकले। फिर आश्रम आए। तो आश्रम में आके फोन लगाया बाबा जी को। वो बोलते हैं कि आप लोग बैठो। 8:30 बजे के बाद मिलते हैं। हम लोग बैठे 8:30 बज गए।

बैठे-बैठे फिर एक काम करें कोई एक व्यक्ति आया उन्होंने फिर बुलाया हम लोग को फिर अंदर बैठाला कहता आधा घंटा बैठो हम लोग आ रहा आधा से एक घंटे डेढ़ घंटे हो गए बैठे-बैठे फिर हम लोग उधर से निकले फिर हम लोग थाने गए थाने में बुलाया गया थाने में बैठ के पूछताछ की उन लोगों ने कौन है कैसे हो तो सब बताया हम लोग ने उसके बाद में चलो ठीक है फिर हम लोग को बोले गए कहां जो जहां रखे हुए थे उन लोगों ने तो हम लोग उधर पहुंचे तो उधर पहुंचने के बाद बैठे रहे हम लोग सब जांच चलती रही उन लोग की पहुंचने के बाद में आश्रम फोन लगाते रहे गुरु जी से बात चलती रही उन लोग से कि बस आधे घंटे से आ रहा है।

एक घंटे से आ रहा है हम लोग पहुंचे पहुंचतेपहुंचते बहुत पर बहुत परेशान हो गए थे सुबह से लटकाते हुए वो लोग तो हम लोग एक्चुअली नहीं आ रहे ये शाम को जब हो गया सुबह हो ही गया था और बाद में ये लोग पहुंचे पीछे से आप ये बताइए जब लोग वो पहुंचे उधर वो पहुंचे तो इस समय कि इतना लेट क्यों पहुंचे जब आपका शिष्य था और आपका शिष्य था तो आपको सबसे पहले वहां साथ रहना रहा भले आप अंदर नहीं जाते बाहर बैठना तो रहा कि आपने उसको जहां मिला था वहीं छोड़ के आ गए।

मैक के आ गए जब आपको बस सौंप दिया गया रहा तो बताइए उन्होंने कुछ नहीं बोला हम लोग ने उनसे बोले कि पुलिस वाले ने हम लोग का मोबाइल कर लिया था ये कर लिया था अरे मोबाइल कर लिया था।

तो मोह तो रहा बोलने के लिए उनको कि सामने वाले व्यक्ति को बोल दे कि यार तुम चले जाओ उधर कि दो तीन चार व्यक्ति चले जाओगे किधर देखते रहना बताइए मोबाइल हैक था कोई मोबाइल मुंह तो हैक तो नहीं था उनका इस वजह से संदेह लग रहा है आपको कुछ नहीं सीसीटीवी आपने देखा क्या बता रहे थे आप सीसीटीवी मैंने देखा जो व्यक्ति मतलब रूम से बाहर निकला उस हिसाब से रूम में कोई नहीं था जब गुरु जी ने बताया हम लोग जब बैठे हुए थे कि रूम में कोई नहीं था तो वो अकेला था जब वो अकेला था रूम में जब इसने ये सब कर लिया जब वो छत के ऊपर जाके थोड़ा देर बैठा है मुश्किल से 1 मिनट डेढ़ मिनट बैठा है।

उसके बाद में वो नीचे लेट गया है लेटने के बाद मुश्किल से दो मिनट तक लेटा रहा वो पीछे से एक व्यक्ति पहुंचा एकदम से तो उसको आहट लगी तो वो एकदम से उठकर बैठा थोड़ा सा तो एकदम से जब सिड्डी के अंदर आया जैसे वो बाहर जीना में उसने देखा तो एकदम से चढ़ गया चढ़ के जैसे वो दौड़ लगाया तो वो कूद गया नीचे इसकी कुछ वजह तो हो सकती है जब कोई नहीं था वो ऊपर कैसे पहुंचा जब आश्रम में कोई नहीं था तो कोई ना कोई तो आश्रम में था इतने सारे दो 250 व्यक्ति 270 व्यक्ति हैं उसमें उनके गुरु जी बता रहे थे जो कुछ ना कुछ तो दिक्कत होगी उसमें आप एक बात आ रही है कि कटने का तो ये क्या कहानी लग रही है आपको? क्या बताया जा रहा है?

ये ऐसा क्यों बोला जा रहा है आपके साले? कुछ ना कुछ तो साजिश है इसमें। क्या साजिश है? अब मैं तो ऐसे बोल नहीं सकता हूं इसके बारे में। कभी मैंने कुछ देखा नहीं हूं। मेरे को जो दिखाया है सीसीटीवी कैमरे में देखा हूं मैंने कि जो दरवाजा खुल के सीधा बाहर आ रहा है वो। और वो भी वीडियो जो है तो के हम लोग को दिखाई गई है। हम लोग की जो वीडियो दिखना चाहिए कि पूरी जो बाहर निकला और सिड्डी में जीना में चढ़ा और ऊपर जीना से बाहर

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