प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में के बाद उनके परिवार ने ऐसा आरोप लगाया जो अगर आने वाले समय में सही साबित होता है तो यह काफी हैरानी की बात होगी। परिजनों का आरोप है कि प्रेमानंद महाराज के शिष्यों के बीच कोई विवाद चल रहा है और शिष्यों के बीच हो रही के चलते ही उनके भाई की हुई है। वहीं आश्रम में कुछ महीने पहले भी एक लड़की की परिस्थितियों में हो चुकी है। इसलिए उन्हें भी अपने भाई की पर संदेह हो रहा है।
दीपक की मां का कहना है कि उनका बेटा गलत कदम नहीं उठा सकता। वह किसी ना किसी साजिश का शिकार हुआ है। परिजनों का यह भी कहना है कि आश्रम में जो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, उनकी फुटेज भी उन्हें पूरी तरीके से नहीं दिखाई गई। आश्रम की ओर से किसी भी तरह की कोई मदद नहीं की गई। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच की मांग की है। और एक जन भी नहीं कर सके। मजबूत मजबूत तो दो जन तीन जने चार जन जरूर लगे हुए हैं जब वो वो कर पाए हुए हैं।
जांच की मांग कर जांच की मांग तो हम तो कह रहे हैं कि इनकी की जांच होना चाहिए। पहुंचने के बाद में आश्रम फोन लगाते रहे गुरु जी से बात चलती रही उन लोग से कि बस आधे घंटे से आ रहे हैं। एक घंटे से आ रहे हैं। हम लोग पहुंचे पहुंचतेपहुंचते बहुत पर बहुत परेशान हो गए थे। सुबह से लटकाते हुए वो लोग तो हम लोग एक्चुअली नहीं आ रहे। और शाम को जब हो गया पोस्टमार्टम सुबह हो ही गया था और बाद में ये लोग पहुंचे पीछे से आप ये बताइए जब लोग पहुंचे उधर वो पहुंचे तो इस समय कि इतना लेट क्यों पहुंचे जब आपका शिष्य था और आपका शिष्य था तो आपको सबसे पहले वहां साथ रहना रहा भले ही आप अंदर नहीं जाते बाहर बैठना तो रहा कि आपने उसको जहां मिला था ।
वहीं छोड़ के आ गए मेक के आ गए जब आपको बस सौंप दिया गया रहा तो आपके मन में अब सवाल होगा कि आखिर जबलपुर के एक साधारण किसान परिवार परिवार का यह युवक खेती किसानी छोड़कर वृंदावन कैसे पहुंच गया? कैसे बना रसिक दुलारी शरण? और सबसे बड़ा सवाल मौत से पहले उसके कमरे में आखिर हुआ क्या था? इस पूरी कहानी को समझने के लिए पहले जानते हैं उस दीपक के बारे में जो कुछ साल पहले तक अपने परिवार के साथ एक बिल्कुल सामान्य जिंदगी जी रहा था। दीपक लोधी जबलपुर के बरगी डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले मगदा गांव का रहने वाला था। हालांकि पिछले करीब 10 साल से वह जामतरा परसवाड़ा में अपने ननिहाल में रह रहा था। परिवार खेती किसानी करता है। दीपक भी अपने पिता के साथ खेती में हाथ बटाता था। उसका छोटा भाई भारत पेट्रोलियम में काम करता यानी परिवार की जिंदगी आम मध्यमवर्गीय ग्रामीण परिवार जैसी थी। दीपक ने जबलपुर से ग्रेजुएशन किया था।
परिवार के मुताबिक उसका स्वभाव बेहद मिलनसार और शांत था। लेकिन पढ़ाई और खेती के साथ-साथ उसका झुकाव अध्यात्म की ओर लगातार बढ़ता गया। बताया जाता है कि दीपक मां नर्मदा का बड़ा भक्त था। करीब 2ाई साल पहले उसने जबलपुर के संत दादा गुरु भैया जी सरकार के साथ करीब 6 महीने की पद यात्रा भी की। पद यात्रा से लौटने के बाद जब परिवार ने उसकी शादी की बात शुरू की तो दीपक वृंदावन चला गया। उसने यहां संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और उसका नाम रसिक दुलारी शरण हो गया।
पिछले करीब 2 साल से वे राधा केलीकुंज आश्रम में रह रहा था। परिवार के मुताबिक दीक्षा लेने के बाद दीपक से उनकी बातचीत बेहद कम हो गई ही धीरे-धीरे परिवार से उसकी दूरी बढ़ती गई। यानी परिवार की नजर में दीपक घर परिवार के किसी विवाद की वजह से नहीं बल्कि आध्यात्मिक जीवन की तलाश में वृंदावन गया था। लेकिन शनिवार की सुबह जो हुआ उसने दीपक की पूरी कहानी को एक रहस्य में बदल दिया।
शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे गुरु कृपा कुंज आश्रम अचानक अफरातफरी मच गई। दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। गिरने की पोजीशन ऐसी थी जिस पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच की बात कह रही है। क्या रिपोर्ट आई पीएम की? जिस तरह उनका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था। बताया जा रहा है उससे ब्लीडिंग नहीं हुई। तो क्या रिपोर्ट आई है पीएम की? पीएम में हिमोरोजिक शॉक है जिसका तात्पर्य होता है कि ब्लीडिंग ज्यादा हो गई है। तो अभी तक के जो तथ्य प्रकाश में आए हैं जो कॉज ऑफ डेथ है हीरोजिक शॉक है।
तो जो उनका प्राइवेट पार्ट था वो कट गया। उसके बाद वहीं से ब्लीडिंग हुई। वही डेथ का कारण रहा। ब्लीडिंग होने का सबसे बड़ा रीजन तो यही होगा। इसके बारे में बाकी तो एक्सपर्ट बताएंगे, डॉक्टर बताएंगे। गिरने से भी चोटें आई थी। गिरने से भी इनको चोट आई थी। उसके कारण भी ब्लीडिंग हुई है। हां, उनके परिवार जन भी मौजूद थे। उनके भाई थे, उनके बहनोई थे।
उनसे बात हुई तो कभी वो लोग यहां आते थे तो बताते हैं कि मिलने नहीं दिया जाता था। उन्होंने एक एप्लीकेशन भी दी है। तो उसमें क्या कार्यही की जा रही है? के भाई मनीष हैं। इनके द्वारा एक शिकायत दी गई है कि हम लोग यहां इनसे मिलने के लिए पूर्व में आए थे। तो इनसे इनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी। आश्रम के लोगों से संपर्क किया गया था। तो ये आश्रम के लोगों के द्वारा उनका यह कहना है कि हमको मिलने नहीं दिया गया है और वो इसके बारे में एक उन्होंने एक शिकायत दी है। शिकायत में उनका ये मांग है कि इसकी गहराई से जांच किया जाए।
अभी तक की जो हमारी जांच है प्रथम दृष्टि मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। क्यों ये घटना हुई है? किन कारणों से हुई है? इसके बारे में हम लोग सभी जितने भी एंगल हो सकते हैं गहराई से जांच कर रहे हैं। अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दीपक की मौत महज एक हादसा थी, गलत कदम था या फिर इसके पीछे कोई और वजह छिपी है। परिवार ने आश्रम में शिष्यों के बीच कथित गुटबाजी सीसीटीवी फुटेज पूरी तरह नहीं दिखाए जाने और आश्रम की ओर से सहयोग नहीं मिलने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का दावा है कि दीपक ऐसा कदम नहीं उठा सकता था और वह किसी साजिश का शिकार हुआ है। यही वजह है कि परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच की मांग की है। अब पुलिस की जांच में यह साफ होगा कि चौथी मंजिल से गिरने के पीछे आखिर क्या कहानी थी और दीपक की मौत का सच क्या है?